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मोदी सरकार ने 20 लाख 97 हजार करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज से हर वर्ग, हर सेक्टर का रखा ख्याल

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कोरोना संकट से निपटने के लिए 20 लाख करोड़ रुपये के आर्थिक पैकेज का ऐलान किया था। प्रधानमंत्री मोदी ने आत्मनिर्भरता का मंत्र देते हुए लोकल उत्पादों के अधिक से अधिक इस्तेमाल का भी आह्वान किया था। पिछले पांच दिनों में वित्त मंत्री ने मोदी सरकार के आर्थिक पैकेज का पूरा डिटेल देशवासियों के सामने रखा है। यह राहत पैकेज 20 लाख करोड़ रुपये का नहीं, बल्कि इससे भी 97 हजार करोड़ रुपये अधिक यानी कुल 20 लाख 97 हजार 53 करोड़ रुपये का है।

रविवार को पांचवे दिन अपनी पांचवी प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री ने राहत पैकेज का पांचवां ब्लू प्रिंट भी बता दिया। इस आखिरी प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री ने 8 घोषणाएं कीं। ये मनरेगा, स्वास्थ्य, कारोबार, कंपनी एक्ट, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज और राज्य सरकारों को लेकर थीं। उन्होंने बताया कि स्ट्रैटजिक सेक्टर को छोड़कर बाकी पब्लिक सेक्टर अब प्राइवेट सेक्टर के लिए खोल दिए जाएंगे। इसके साथ ही अगर कोरोना की वजह से किसी कंपनी को नुकसान हुआ है तो उस पर एक साल तक दिवालिया की कार्रवाई नहीं होगी।

40 हजार करोड़ रुपए मनरेगा पर खर्च होंगे
मोदी सरकार मनरेगा पर 40 हजार करोड़ रुपए और खर्च करेगी और यह एक्स्ट्रा फंड होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले प्रवासी मजदूर जब अपने घर लौटेंगे तो उनके पास काम की कमी नहीं रहेगी। मानसून के सीजन में भी मनरेगा के तहत काम दिया जाएगा। पानी सहेजने वाले कामों में मजदूरों को रोजगार मिलेगा। सरकार मनरेगा का फंड तत्काल रिलीज करेगी।

नए अस्पताल बनेंगे, ब्लॉक स्तर पर लैब्स बढ़ेंगी
वित्त मंत्री ने बताया कि पब्लिक हेल्थ लैब्स न सिर्फ जिला स्तर पर, बल्कि ब्लॉक स्तर पर भी बनाई जाएंगी। गांवों, कस्बाई और शहरी इलाकों में संक्रामक बीमारियों का इलाज करने वाले अस्पताल बनेंगे। लैब और निगरानी का नेटवर्क मजबूत किया जाएगा। इस कार्य में आईसीएमआर भी मदद करेगा। सरकार नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन लॉन्च होगा।

प्रधानमंत्री ई-विद्या प्रोग्राम शुरू होगा।
पढ़ाई के लिए एक क्लास, एक चैनल और एक देश, एक डिजिटल प्लेफॉर्म शुरू किया जाएगा। इसके जरिए डिजिटल पढ़ाई पर जोर दिया जाएगा। पहली से 12वीं तक हर क्लास के लिए एक चैनल तय होगा। यानी वन क्लास, वन चैनल होगा। क्यूआर कोड के जरिए ई-किताबें पढ़ सकेंगे। इस तरह वन नेशन, वन डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा। इससे स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाले बच्चों को फायदा होगा लिए। बच्चों, टीचर्स, माता-पिता और परिवारों के मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने के लिए मनोदर्पण कार्यक्रम शुरू होगा। 30 मई तक टॉप-100 यूनिवर्सिटी में ऑनलाइन कोर्सेस की शुरुआत होगी। उन्होंने बताया कि दिसंबर 2020 तक नेशनल फाउंडेशन लिटरेसी एंड न्यूमरेसी मिशन को लॉन्च किया जाएगा। इसके तहत कोशिश रहेगी कि 2025 तक हर बच्चे को शिक्षा मिले।

इससे पहले आर्थिक पैकेज में हुए क्या-क्या ऐलान
इससे पहले चार किस्तों में मोदी सरकार ने करीब 11 लाख करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा की है। में छोटे व्यवसायों, रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं, किसानों और गरीब प्रवासियों के साथ-साथ गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC), सूक्ष्म वित्त संस्थानों (MFI) और बिजली वितरकों के लिये राहत दी गयी हैं। चौथी किस्त में शनिवार को, सरकार ने रक्षा विनिर्माण में विदेशी निवेश सीमा को बढ़ाने की घोषणा की। इसके अलावा वाणिज्यिक कोयला खनन, खनिज ब्लॉकों की नीलामी, बिजली वितरण में सुधार, अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी क्षेत्र के लिये खोलने, विमानन क्षेत्र में सुधार आदि की घोषणा की गई।

सरकार ने 56 दिनों में 20.97 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज दिए
मोदी सरकार ने आत्मनिर्भर अभियान के ताहत दिए जा रहे इस आर्थिक पैकेज में प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संबोधन से पहले बताई गईं 1 लाख 92 हजार 800 करोड़ रुपये की घोषणाओं को भी शामिल कर लिया है। 22 मार्च से टैक्स में दी गई छूट की वजह से हुए रेवेन्यू के 7800 करोड़ रुपए के नुकसान को भी इसमें शामिल किया है। आरबीआई ने अब तक जो अलग-अलग घोषणाएं की हैं, उसके 8 लाख करोड़ रुपए भी इसी पैकेज का हिस्सा हैं।

मोदी सरकार द्वारा अब तक पहुंचाई गई मदद
16 मई तक पीएम किसान निधि के तहत 8.19 करोड़ किसानों तक मदद पहुंचाई गई है। हर किसान को 2,000 रुपये मिलते हैं।
NSAP के तहत पहली किश्‍त 1,405 करोड़ रुपये की, दूसरी 1,402 करोड़ रुपये की दी गई है। 3,000 करोड़ रुपये का टारगेट लगभग पूरा।
पीएम गरीब कल्‍याण योजना के तहत 20 करोड़ महिलाओं के जन-धन खातों में पैसे डाले गए। कुल 10,025 करोड़ रुपये खातों में भेजे गए।
कंस्‍ट्रक्‍शन वर्कर्स को 3,950 करोड़ रुपये दिए गए हैं। 2.2 करोड़ वर्कर्स को मदद पहुंची है।
उज्‍ज्‍वला योजना के तहत 6.81 करोड़ सिलिंडर्स मुफ्त दिए गए हैं।
श्रमिकों के लिए रेल यात्रा का 85 फीसद खर्च केंद्र ने उठाया। भोजन भी केंद्र ने दिया।
EPFO योजना के 12 लाख लाभार्थी हैं। EPF से 3,660 करोड़ रुपये निकाले गए हैं।

 

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