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शराब घोटाले में सिसोदिया से पूछताछ, पेशी के लिए जाने से पहले टीका लगाने और जुलूस निकालने पर लोग कस रहे हैं तंज

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नई शराब नीति घोटाले की जांच के सिलसिले में सीबीआई दिल्‍ली के उप-मुख्‍यमंत्री मनीष सिसोदिया से पूछताछ कर रही है। दिल्‍ली के उप-राज्‍यपाल विनय कुमार सक्‍सेना ने आबकारी मामले की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी। सीबीआई की प्राथमिकी में सिसोदिया समेत 15 आरोपियों के नाम हैं। ये प्राथमिकी नई आबकारी नीति के लागू करने में नियमों के उल्‍लंघन क लेकर दर्ज की गई थी। सोमवार, 17 अक्तूबर को सिसोदिया सीबीआई मुख्यालय पहुंचे। सीबीआई दफ्तर जाने से उन्होंने अपनी मां से आशीर्वाद लिया, पत्नी ने आरती उतारी और वे राजघाट भी गए। पूछताछ को लेकर आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। पार्टी के तमाम बड़े नेताओं ने सीबीआई दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। इसको लेकर लोग आम आदमी पार्टी और मनीष सिसोदिया पर निशाना साध रहे हैं। उनका कहना है कि सिसोदिया एक आरोपी के रूप में पूछताछ के लिए जा रहे हैं। भ्रष्टाचार छुपाने के लिए अपनी बीवी, मां और बच्चों तक को राजनीति में दलदल में झोंकने पर भी लोग तंज कस रहे हैं। देखिए सोशल मीडिया पर लोग किस तरह से कमेंट कर रहे हैं।

जानिए पूरा Delhi Excise Policy Scam-
दिल्ली के करोड़ों के शराब घोटाले में उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के खिलाफ सीबीआई के हाथ ऐसे पुख्ता सुबूत लगे हैं, जिससे न सिर्फ सिसोदिया का बचना मुश्किल है, बल्कि उसके बेहद करीबी भी जल्द ही एक्सपोज होंगे। सीबीआई ने पता लगाया है कि दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के करीबी सहयोगियों को शराब व्यापारी समीर महेंद्रू ने 5 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। आबकारी नीति 2021-22 को तैयार करने और इसके क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार पर अपनी प्राथमिकी में सीबीआई ने कहा है कि इंडोस्पिरिट्स के एमडी समीर महेंद्रू ने नई दिल्ली के राजेंद्र प्लेस में स्थित यूको बैंक की शाखा में राधा इंडस्ट्रीज के खाते में 1 करोड़ रुपये की रकम भेजी थी। राधा इंडस्ट्रीज का प्रबंधन दिनेश अरोड़ा कर रहे हैं, जो दिल्ली के डिप्टी सीएम सिसोदिया के करीबी सहयोगी हैं। इसके अलावा मुख्य सचिव नरेश कुमार की एलजी को सौंपी गोपनीय रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने कोरोना की आड़ में शराब ठेकेदारों की 144.36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस ही माफ कर दी।

मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए करोड़ों के शराब घोटाले में जल्द होगी ED की एंट्री
दिल्ली की एक्साइज पॉलिसी में गड़बड़ी-घोटाले के आरोप में सीबीआई ने डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया समेत 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इससे साथ ही सीबीआई ने सिसोदिया के घर समेत 31 जगहों पर छापेमारी भी की थी। अब इस पूरे मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री भी होने वाली है, क्योंकि सीबीआई ने एफआईआर की कॉपी और दस्तावेज इस एजेंसी से भी साझा किए हैं, ताकि करोड़ों के घोटाले में मनी लांड्रिंग की संभावनाओं का भी पता लग सके। माना जा रहा है कि जल्द ही ED भी सिसोदिया के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज कर सकती है। सीबीआई पड़ताल में सामने आया है कि अरुण रामचंद्र पिल्लई, विजय नायर के माध्यम से समीर महेंद्रू से आरोपी लोक सेवकों को आगे स्थानांतरित करने के लिए अनुचित धन एकत्र करता था। अर्जुन पांडे नाम के एक व्यक्ति ने विजय नायर की ओर से समीर महेंद्रू से लगभग 2-4 करोड़ रुपये की बड़ी नकद राशि एकत्र की।सिसोदिया के करीबी शराब लाइसेंसधारियों से एकत्रित करते थे अनुचित आर्थिक लाभ
सीबीआई के मुताबिक मनोरंजन और इवेंट मैनेजमेंट कंपनी ‘ओनली मच लाउडर’ के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) विजय नायर, पर्नोड रिकार्ड के पूर्व कर्मचारी मनोज राय, ब्रिंडको स्पिरिट्स के मालिक अमनदीप ढल तथा इंडोस्पिरिट्स के मालिक समीर महेंद्रू सक्रिय रूप से पिछले साल नवंबर में लाई गई आबकारी नीति का निर्धारण और क्रियान्वयन में अनियमितताओं में शामिल थे। एजेंसी ने आरोप लगाया कि गुरुग्राम में बडी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमित अरोड़ा, दिनेश अरोड़ा और अर्जुन पांडे, सिसोदिया के ‘करीबी सहयोगी’ हैं और आरोपी लोक सेवकों के लिए ‘शराब लाइसेंसधारियों से एकत्र किए गए अनुचित आर्थिक लाभ के प्रबंधन और स्थानांतरण करने में सक्रिय रूप से शामिल थे।दिल्ली सरकार ने नई एक्साइज पॉलिसी में 100 प्रतिशत दुकानें निजी हाथों में सौंप दीं
दरअसल, दिल्ली सरकार के शराब घोटाले का खेल पिछले साल ही शुरू हो गया था। सरकार ने 17 नवंबर 2021 को दिल्ली में नई एक्साइज पॉलिसी लागू की। इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए। हर जोन में 27 दुकानें खुलनी थीं। इस तरह कुल मिलाकर 849 दुकानें खोलने की नीति थी। नई नीति लागू होने से पहले तक दिल्ली में शराब की 60% दुकानें सरकारी और 40% प्राइवेट थीं, लेकिन नई नीति लागू होने के बाद 100% दुकानें निजी हाथों को सौंप दी गई। आरोप लगे तो दिल्ली सरकार ने खोखला तर्क गढ़ा कि इससे रेवेन्यू 3,500 करोड़ रुपये बढ़ने की उम्मीद है। अब 1 सितंबर से फिर से पुरानी एक्साइज पॉलिसी लागू कर दी गई है। लाइसेंस शुल्क में छूट/कमी, बिना मंजूरी के एल-1 लाइसेंस के विस्तार में हुईं अनियमितताएं
सीबीआई के अनुसार मध्य दिल्ली में सिसोदिया के आधिकारिक आवास, दिल्ली, गुरुग्राम, चंडीगढ़, मुंबई, हैदराबाद, लखनऊ और बेंगलुरु सहित 31 स्थानों पर तलाशी ली गई, जिससे अब तक आपत्तिजनक दस्तावेज, विभिन्न कागजात, डिजिटल रिकॉर्ड आदि बरामद हुए हैं। प्रवक्ता ने बताया कि यह जांच में यह सामने आया है कि आबकारी नीति में संशोधन, लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ देने, लाइसेंस शुल्क में छूट/कमी, बिना मंजूरी के एल-1 लाइसेंस के विस्तार में अनियमितताएं की गईं। उन्होंने कहा कि यह भी आरोप लगाया गया था कि इन कृत्यों से अवैध लाभ को निजी पक्षों द्वारा संबंधित लोक सेवकों को उनके खातों की पुस्तकों में गलत प्रविष्टियां देकर बदल दिया गया था। प्राथमिकी में डिप्टी सीएम को आरोपी नंबर 1 के रूप में नामित किया गया है।मुख्य सचिव कुमार की गोपनीय रिपोर्ट पर एलजी ने की थी सीबीआई जांच की सिफारिश
दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और अन्य के खिलाफ ये पूरी कार्रवाई मुख्य सचिव नरेश कुमार की उस रिपोर्ट पर हो रही है, जिसमें एक्साइज पॉलिसी में गड़बड़ी होने का आरोप लगाया गया है। ये रिपोर्ट लेफ्टिनेंट गवर्नर वीके सक्‍सेना को सौंपी गई थी। मुख्य सचिव कुमार की रिपोर्ट पर एलजी ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी। इस रिपोर्ट में GNCTD एक्ट 1991, ट्रांजेक्शन ऑफ बिजनेस रूल्स 1993, दिल्ली एक्साइज एक्ट 2009 और दिल्ली एक्साइज रूल्स 2010 के नियमों का उल्लंघन पाया गया था। सीबीआई ने अब 8 आरोपियों के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी किया यानी, ये लोग अब देश छोड़कर नहीं जा सकते।

शराब घोटाले में चीफ सेक्रेटरी नरेश कुमार की विस्तृत जांच में मिलीं ये सात ‘खामियां’

1. मनीष सिसोदिया के निर्देश पर एक्साइज विभाग ने एयरपोर्ट जोन के एल-1 बिडर को 30 करोड़ रुपये रिफंड करने का निर्णय लिया। बिडर एयरपोर्ट अथॉरिटीज से जरूरी एनओसी नहीं ले पाया था। ऐसे में उसके द्वारा जमा कराया गया सिक्योरिटी डिपॉजिट सरकारी खाते में जमा हो जाना चाहिए था, लेकिन बिडर को वह पैसा लौटा दिया गया।
2. सक्षम अथॉरिटीज से मंजूरी लिए बिना एक्साइज विभाग ने 8 नवंबर 2021 को एक आदेश जारी करके विदेशी शराब के रेट कैलकुलेशन का फॉर्मूला बदल दिया और बियर के प्रत्येक केस पर लगने वाली 50 रुपए की इंपोर्ट पास फीस को हटाकर लाइसेंसधारकों को अनुचित लाभ पहुंचाया, जिससे सरकार को रेवेन्यू का भारी नुकसान हुआ।
3. टेंडर दस्‍तावेजों के प्रावधानों को हल्का करके L7Z (रिटेल) लाइसेंसियों को वित्‍तीय फायदा पहुंचाया गया, जबकि लाइसेंस फी, ब्‍याज और पेनाल्‍टी न चुकाने पर ऐक्‍शन होना चाहिए था।
4. सरकार ने दिल्ली के अन्य व्यवसायियों के हितों को दरकिनार करते हुए केवल शराब कारोबारियों को फायदा पहुंचाने के लिए कोविड काल में हुए नुकसान की भरपाई के नाम पर उनकी 144.36 करोड़ रुपये की लाइसेंस फीस माफ कर दी, जबकि टेंडर दस्तावेजों में ऐसे किसी आधार पर शराब विक्रेताओं को लाइसेंस फीस में इस तरह की छूट या मुआवजा देने का कहीं कोई प्रावधान नहीं था।5. सरकार ने बिना किसी ठोस आधार के और किसी के साथ चर्चा किए बिना नई पॉलिसी के तहत हर वॉर्ड में शराब की कम से कम दो दुकानें खोलने की शर्त टेंडर में रख दी। बाद में एक्साइज विभाग ने सक्षम अथॉरिटीज से मंजूरी लिए बिना नॉन कन्फर्मिंग वॉर्डों के बजाय कन्फर्मिंग वॉर्डों में लाइसेंसधारकों को अतिरिक्त दुकानें खोलने की इजाजत दे दी।
6. सोशल मीडिया, बैनरों और होर्डिंग्‍स के जरिए शराब को बढ़ावा दे रहे लाइसेंसियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। यह दिल्‍ली एक्‍साइज नियमों, 2010 के नियम 26 और 27 का उल्‍लंघन है।
7. लाइसेंस फीस में बढ़ोतरी किए बिना लाइसेंसधारकों को लाभ पहुंचाने के लिए उनका ऑपरेशनल पीरियड पहले 1 अप्रैल 2022 से बढ़ाकर 31 मई 2022 तक किया गया और फिर इसे 1 जून 2022 से बढ़ाकर 31 जुलाई 2022 तक कर दिया गया। इसके लिए सक्षम अथॉरिटी यानी कैबिनेट और एलजी से भी कोई मंजूरी नहीं ली गई। बाद में आनन फानन में 14 जुलाई को कैबिनेट की बैठक बुलाकर ऐसे कई गैरकानूनी फैसलों को कानूनी जामा पहनाने का काम किया गया। शराब की बिक्री में बढ़ोतरी होने के बावजूद रेवेन्यू में बढ़ोतरी होने के बजाय 37.51 पर्सेंट कम रेवेन्यू मिला।कैसे फंसे सिसोदिया… कोरोना के बहाने शराब ठेकेदारों के 144.36 करोड़ रुपये माफ कराए
जनमानस की यह जानने में दिलचस्पी जरूर होगी कि आखिर शातिर खिलाड़ी मनीष सिसोदिया इस सारे खेल में कैसे घिर गए। दरअसल, मुख्य सचिव की रिपोर्ट बताती है कि एक्साइज डिपार्टमेंट के प्रभारी होने के नाते मनीष सिसोदिया ने जानबूझकर ऐसे फैसले लिए। इसके आधार पर एलजी ने पाया कि आबकारी नीति को लागू करने में किस प्रकार की वित्तीय गड़बड़ियां हुईं। सिसोदिया पर एक्साइज पॉलिसी के नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है. मुख्य सचिव की रिपोर्ट में कहा गया था कि सिसोदिया ने कथित तौर पर टेंडर दिए जाने के बाद भी शराब लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ पहुंचाया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। इसी रिपोर्ट में बताया गया कि शराब कारोबारियों को लाभ पहुंचाने के लिए सिसोदिया के आदेश पर एक्साइज पॉलिसी के जरिए कोरोना के बहाने शराब ठेकेदारों के 144.36 करोड़ रुपये माफ किए गए।शराब कारोबारियों को करोड़ों का फायदा देने के लिए नियमों को बौना साबित किया

  • एक्साइज डिपार्टमेंट ने एयरपोर्ट जोन में L1 लाइसेंसधारी को 30 करोड़ रुपये वापस कर दिए, क्योंकि उसे एयरपोर्ट अथॉरिटी की ओर से दुकान खोलने की अनुमति नहीं मिली थी। नियमानुसार ये रकम जब्त की जानी चाहिए थी।
  • विदेशों से आने वाली बीयर पर 50 रुपये प्रति केस के हिसाब से रकम ली जाती थी। इस फैसले को बिना किसी मंजूरी के वापस ले लिया गया। इससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा।
  • सिसोदिया ने कैबिनेट तक को अंधेरे में रखा। शराब कारोबारियों को लाइसेंस फीस में 144.36 करोड़ रुपये की छूट दे दी गई। इसके लिए कोरोना का बहाना बनाया गया। इस छूट के लिए कैबिनेट को लूप में नहीं रखा गया, बल्कि मंत्री स्तर पर ही फैसला ले लिया गया।
  • इतना ही नहीं, आरोप ये भी हैं कि L7Z और L1 लाइसेंसधारियों का लाइसेंस पहले 1 अप्रैल से 31 मई और फिर 1 जून से 31 जुलाई तक बढ़ा दिया गया और इसके लिए एलजी की मंजूरी भी नहीं ली गई।

FIR का फेर: मनीष के करीबियों को पांच करोड़ शराब कारोबारी समीर महेंद्रू ने दिए

  • सीबीआई की एफआईआर में 15 आरोपियों में सिसोदिया पहले नंबर पर यानी मुख्य आरोपी हैं। एजेंसी के मुताबिक, अब तक की जांच में सामने आया है कि शराब कारोबारी समीर महेंद्रू एक्साइज पॉलिसी बनाने और उसे लागू करने में हुई कथित अनियमितताओं में शामिल थे।
  • सीबीआई के मुताबिक सिसोदिया के करीबी सहयोगियों को शराब व्यापारी समीर महेंद्रू ने 5 करोड़ रुपये का भुगतान किया था।
  • यही नहीं प्राथमिकी में सिसोदिया के तीन और करीबियों- अमित अरोड़ा (बडी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर), दिनेश अरोड़ा और अर्जुन पांडे का नाम भी शामिल है।
  • आरोप है कि इन्होंने आरोपी सरकारी अफसरों की मदद से शराब लाइसेंसधारियों से पैसा इकट्ठा किया और उसे दूसरी जगह डायवर्ट किया।
  • सीबीआई ने आरोपियों पर आपराधिक साजिश रचने और भ्रष्टाचार से जुड़ी धाराओं में केस दर्ज किया है। इनमें तीन पूर्व सरकारी अफसर एजी कृष्णा (पूर्व एक्साइज कमिश्नर), आनंद तिवारी (पूर्व डिप्टी एक्साइज कमिश्नर) और पंकज भटनागर (पूर्व असिस्टेंट एक्साइज कमिश्नर) का नाम भी शामिल है।
  • सीबीआई की एफआईआर में कुल 15 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जिसमें मनीष सिसोदिया, तीन पूर्व सरकारी अफसर, 9 कारोबारी और दो कंपनियों के नाम शामिल हैं।

Time Line : डिप्टी सीएम पर FIR के बाद आबकारी आयुक्त समेत दो अफसर निलंबित

  1. एलजी की सिफारिश के बाद सीबीआई ने प्रारंभिक जांच की और 17 अगस्त को इस मामले में एफआईआर दर्ज की।
  2. सीबीआई ने दिल्ली, मुंबई और हैदराबाद सहित विभिन्न स्थानों पर तलाशी लेने के बाद 13 व्यक्तियों, दो कंपनियों और ‘अन्य अज्ञात लोकसेवकों तथा निजी व्यक्तियों’ के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है।
  3. सीबीआई ने शुक्रवार (19 अगस्त) को सिसोदिया के घर समेत 31 जगहों पर छापेमारी की थी। इस छापेमारी में कई ऐसे दस्तावेज मिले, जिससे सिसोदिया घिरते नजर आ रहे हैं।
  4. सीबीआई ने 21 अगस्त को तीन आरोपियों को पूछताछ के लिए बुलाया था। इनसे वित्तीय लेनदेन से जुड़ी जानकारी ली गई। आरोपियों के बयान दर्ज किए गए हैं।
  5. अधिकारियों के मुताबिक तीनों आरोपियों से लगभग 12 घंटे तक पूछताछ की गई थी। कुछ आरोपियों को फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया है।

6. सीबीआई की छापेमारी के दौरान जब्त किए गए दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के एग्जामिनेशन के बाद दूसरे आरोपियों को भी समन जारी किया जाएगा।

7.दिल्ली शराब लाइसेंस घोटाले की जांच के दायरे में एक दर्जन से अधिक स्टैंडअप कॉमेडियन, हैदराबाद से जुड़े शराब के थोक और खुदरा व्यापारियों का एक ग्रुप और मुंबई के समान पते वाली कॉरपोरेट संस्थाएं सीबीआई के रडार पर हैं।

8. कुछ सेवारत और पूर्व अधिकारी, सोशल मीडिया पर अति सक्रिय रहने वाले लोग, घुड़दौड़, सट्टेबाजी और ऑनलाइन गेमिंग की गतिविधियों में लगे व्यक्ति और कंपनियां भी जांच के दायरे में हैं।

9. अभी 22 अगस्त को गृह मंत्रालय बड़ी कार्रवाई करते हुए शराब घोटाले के आरोप में तत्कालीन आबकारी आयुक्त अरवा गोपी कृष्णा और डिप्टी कमिश्नर आनंद तिवारी को निलंबित कर दिया है।

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