Home विपक्ष विशेष पत्रकार पर हमला : चुप क्यों हैं ‘प्रेस की आजादी’ के पैरोकार?

पत्रकार पर हमला : चुप क्यों हैं ‘प्रेस की आजादी’ के पैरोकार?

'सिलेक्टिव' पत्रकारिता के खेल पर सवाल उठाती रिपोर्ट

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सवाल... तो आप घोटाला करोगे और जवाब भी नहीं दोगे?… जवाब… अपने बाप से पूछो… दे देंगे एक मुक्का तो समझ आएगा… मोदी से सुपारी ली है तुमने…तुम्हारे चैनल ने। …ये प्रतिक्रिया रिपब्लिक टीवी के एक पत्रकार के सवाल के जवाब पर राजद के ‘जन्मजात’ अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की है।…

चारा घोटाला में सजायाफ्ता लालू प्रसाद लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को हेकड़ी दिखा रहे हैं… सरेआम गाली गलौच कर रहे हैं… लेकिन पत्रकार बिरादरी में कोई प्रतिक्रिया नहीं है। फर्जीवाड़ा के आरोपों से घिरे NDTV के प्रमोटरों के घर छापे के बाद प्रेस की आजादी का झंडा बुलंद करने वाले भी चुप हैं। … घोटाले और माफिया गैंग्सटर शहाबुद्दीन से कनेक्शन के सवालों से घिरने पर लाल-पीले हुए लालू प्रसाद की इस हरकत पर ‘लाल ब्रिगेड’ भी कुछ नहीं बोल रहा। वे झंडाबरदार भी चुप हैं जो ‘प्रेस की आजादी’ के नाम पर थोड़े ही दिनों पहले प्रेस क्लब में इकट्ठा हुए थे। जाहिर है सवाल उठ रहे हैं कि प्रेस की आजादी सिलेक्टिव क्यों है? अभिव्यक्ति की आजादी किसी खास के लिए है और किसी विशेष के लिए इसके कोई मायने नहीं रखते? आइए देखते हैं कि लालू प्रसाद ने पत्रकारों के साथ किस तरह की हरकत की है।

जिस निर्भीकता से घोटालों और गैंग्सटर से कनेक्शन पर एक पत्रकार सवाल पूछ रहा है वो काबिले तारीफ है। ये सराहनीय इसलिए भी है कि सामने ‘गुंडाराज’ और ‘जंगलराज’ का पर्याय रहे लालू प्रसाद जैसे कद्दावर नेता सामने थे। निश्चित तौर पर पत्रकारिता पेशे के सम्मान के लिहाज से उस पत्रकार की प्रतिक्रिया भी बेहतरीन रही। लालू प्रसाद यादव भड़कते रहे और वे Cool & Calm बने रहे… सवाल पूछते रहे। साफ है कि एक पत्रकार ने पत्रकारिता के मर्यादा को ऊंचा मुकाम दिया है।

लालू प्रसाद यादव ने इस पूरे प्रकरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लिया… मीडिया हाउस पर साजिश करने का आरोप लगाया… यह भी बताया कि किस तरह से उन्हें शहाबुद्दीन से कनेक्शन का कोई डर नहीं है। शायद वे शहाबुद्दीन से संपर्क होना वे अपनी शान भी समझते हैं। एक छोटे से घर से निकलकर कैसे वे और उनकी फैमिली अरबों की संपत्ति का मालिक बन गए इसका भी जवाब नहीं दिया। इसके साथ ही उनके चेहरे पर कानून की कार्रवाई का भी कोई खौफ नहीं दिख रहा है।

बहरहाल लालू प्रसाद यादव की इस हेकड़ी पर ‘प्रेस की आजादी’ के पैरोकार तो नहीं बोले लेकिन रिपब्लिक चैनल के संपादक अर्णब गोस्वामी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने पत्रकारों के हमले की निंदा की है और सिलेक्टिव मीडिया के साथ लालू प्रसाद यादव को भी आड़े हाथों लिया हैं।देखिए वीडियो-

क्यों भड़के हुए हैं लालू प्रसाद?
दरअसल जाति-जमात की राजनीति करने वाले लालू प्रसाद ने बीते कई वर्षों में बिहार को तो पिछड़ेपन की मिसाल बना दिया है। लेकिन अपने परिवार के लिए अकूत संपत्ति इकट्ठा कर ली है। लालू प्रसाद की सात बेटियों और दो बेटों के नाम हजारों करोड़ की संपत्ति है। सबसे खास ये है कि उनमें से ज्यादातर बेनामी है। अब जब लालू प्रसाद की बेनामी संपत्ति के बारे में रोज नये खुलासे सामने आ रहे हैं तो वे पत्रकारों के सवालों से भाग रहे हैं। मीडिया द्वारा किये जा रहे कवरेज को भी रोकने की कोशिश कर रहे हैं।

शहाबुद्दीन कनेक्शन का किया था खुलासा
बीते दिनों लालू प्रसाद और सजायाफ्ता शहाबुद्दीन का कनेक्शन जाहिर हो गया है। माफिया और राजनेताओं के गठजोड़ का खुलासा रिपब्लिक टीवी ने किया था। रिपब्लिक टीवी की उस रिपोर्ट से साफ हुआ था कि अधिकारियों के तबादले से लेकर उन्हें निर्देश देने तक का निर्देश देते थे शहाबुद्दीन। इस घटना के सामने आने के बाद लालू प्रसाद यादव की काफी किरकिरी हुई थी, लेकिन तभी से उन्होंने रिपब्लिक टीवी को निशाने पर रखा है।

तुम्हारा टाइम खत्म हो चुका है लालू-अर्णब
राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव द्वारा रिपब्लिक टीवी के पत्रकार को डांटने और मुक्का मारने की धमकी देने का वीडियो सामने आने के बाद से रिपब्लिक टीवी उनपर हमलावर हो गया है। चैनल के संपादक अर्णब गोस्वामी ने लालू प्रसाद को चेतावनी देते हुए कह दिया कि, लालू तुम्हारा टाइम अब खत्म हो चुका है, हम तुम्हें छोड़ेंगे नहीं।

लालू प्रसाद के खिलाफ शिकायत दर्ज
आपको बता दें कि बुधवार 14 जून को दिल्ली पहुंचे आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव से जब रिपब्लिक टीवी के पत्रकारों ने बेनामी संपत्ति को लेकर सवाल पूछा तो लालू अपना आपा खो बैठे। लालू ने एक पत्रकार को मुक्का मारने की धमकी दे दी। जबकि दूसरे पत्रकार को लालू ने कहा कि अपने बाप से जाकर सवाल पूछो। इस घटना के बाद रिपब्लिक टीवी के रिपोर्टर ने दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने में आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी है।

कालेधन को सफेेद करने के आरोपों से घिरे लालू
लालू प्रसाद और उनके परिवार ने बिहार में 15 वर्षों तक एकछत्र राज किया। लालू प्रसाद का कार्यकाल बिहार में लूट-खसोट का कार्यकाल कहा जाता है। हाईकोर्ट ने खराब कानून-व्यवस्था का हवाला देकर जंगलराज भी कहा था। चारा घोटाला से तो सभी वाकिफ हैं… उनके कार्यकाल में अपरहण उद्योग भी चरम पर था। इन सबसे कमाई हुई दौलत का अब रोज खुलासा हो रहा है। लालू प्रसाद के दोनों बेटे तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव अभी बिहार में मंत्री हैं और बेटी मीसा भारती राज्यसभा में सांसद हैं। लेकिन केंद्र के बेनामी संपत्ति से संबंधित नये कानून के तहत लालू एंड फैमिला का कच्चा चिट्ठा खुलता जा रहा है। आलम यह है कि लालू के परिवार को उपहारों के नाम पर लाखों-करोड़ों की संपत्ति मिलने का सिलसिला थम नहीं रहा है। दरअसल ये खेल है कालाधन को सफेद करने का।

राबड़ी को नौकर ने मुफ्त में दे दी लाखों की जमीन !
बिहार बीजेपी के नेता और राज्य के पूर्व डिप्टी सीएम सुशील मोदी ने आरोप लगाए हैं कि राबड़ी के एक नौकर ने जनवरी, 2014 में उन्हें पटना के सगुना मोड़ में 1,088 वर्ग फीट की एक जमीन मुफ्त में दी, जिसकी कीमत तब करीब 31 लाख रुपये थी। चौंकाने वाली बात ये है कि ललन चौधरी नाम के राबड़ी के उस नौकर ने मार्च, 2009 में वो जमीन मकान के साथ सिर्फ 3.90 लाख रुपये में खरीदी थी। 5 साल में ही उसकी कीमत जब 10 गुना बढ़ गई, तो उसने राबड़ी देवी को इसीलिए दे दिया क्योंकि उन्होंने ललन को समय-समय पर आर्थिक और बाकी तरहों से मदद की थी। सवाल यही उठ रहा है कि आखिर राबड़ी ने ऐसी कौन सी मदद की थी कि उसने लाखों की जमीन यूं हीं दे दी ?

नौकर से पहले यूपीए के मंत्रियों ने भी मुफ्त में दी थी जमीन 
लालू यादव पर आरोप है कि यूपीए- 1 के दौरान उन्होंने मनमोहन सरकार में मंत्री बनवाने के एवज में जमीन का सौदा किया था। लालू से जिन लोगों से जमीन लेकर मंत्री बनवाने का आरोप है वो हैं रघुनाथ झा और कांति सिंह। ये दोनों मनमोहन सरकार में मंत्री रह चुके हैं। दोनों नेताओं ने माना भी है कि उन्होंने लालू यादव के परिवार को जमीनें दी हैं। लेकिन वो ये कहने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं कि वो सब मंत्री के लिए रिश्वत के तौर पर दिया गया था। उनका कहना है कि उन्होंने लालू को गिफ्ट में जमीन दी है। ये मामला इसीलिए और भी गंभीर हो जाता है कि केंद्र में मंत्री बनाने का अघिकार संविधान ने प्रधानमंत्री को दिया है, लेकिन मनमोहन सरकार ने कुर्सी बचाने के लिए लालू जैसे भ्रष्ट नेताओं के सामने भी सरेंडर कर रखा था। कुल मिलाकर लालू ने ऐसा तरीका निकाल था जिससे कालाधन भी सफेद हो रहा था और अपनी पसंद की जमीन के मालिक भी बन रहे थे।

लालू की बेटी का जमीन घोटाला नंबर- 1 ?
दस्तावेजों के अनुसार मीसा भारती और उनके पति शैलेश कुमार ने दिल्ली के इंदिरा गांधी एयरपोर्ट के पास बिजवासन इलाके में एक फार्म हाउस सिर्फ 1.41 करोड़ रुपये में खरीद लिया। ये वो इलाका जहां कई प्रभावशाली लोगों की प्रॉपर्टी है। जमीन की इस डील की प्रक्रिया बहुत ही संदेहास्पद है। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के रेकॉर्ड के अनुसार, मीसा और शैलेश कम से कम चार प्राइवेड लिमिटेड कंपनियों के डायरेक्टर हैं। दोनों ने दिसंबर, 2002 में मिशैल पैकर्स एंड प्रिंटर्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी बनाई और इसका रजिस्ट्रेशन लालू के सरकारी बंगले 25, तुगलक रोड, नई दिल्ली पर कराया गया। कंपनी की बैलेंस शीट के अनुसार इसकी व्यापारिक गतिविधियां 2006 में बंद हो गईं और फिर उसका प्लांट और उसके मशीनें भी बेच दी गईं। लेकिन फिर भी 2008-09 में इसी कंपनी ने बिजवासन के 26, पालम फार्म्स में एक फॉर्महाउस खरीदा। इसके लिए फंड कंपनी के 1,20,000 शेयर्स बेच कर जुटाए गए। खटकने वाली बात ये है कि 10 रुपये प्रति शेयर कीमत वाले इन शेयरों को वीके जैन और एसके जैन नाम के दो कारोबारियों ने 90 रुपये प्रति शेयर के हिसाब से खरीद लिया। यहां ये बताना आवश्यक है कि इसी साल मार्च में कालेधन के खिलाफ हुई कार्रवाई में दोनों जैन भाइयों की भी गिरफ्तारियां हुई थीं।

लालू की बेटी का जमीन घोटाला नंबर- 2 
लालू के बेटी और दामाद का दिखावे की एक और कंपनी के माध्यम से दिल्ली में एक और संपत्ति खरीदने का भी मामला है। आरोपों के अनुसार KHK होल्डिंग्स नाम की इस कंपनी का उपयोग सैनिक फार्म्स में 2.8 एकड़ का फार्म हाउस खरीदने के लिए किया गया। यह कंपनी असल में विवेक नागपाल नाम के एक व्यक्ति की थी। लेकिन, 2014 में विवेक ने कंपनी के 10,000 शेयर सिर्फ एक लाख रुपये में मीसा और शैलेश को ट्रांसफर कर दिए। नापगाल ने KHK होल्डिंग्स के माध्यम से ही सैनिक फार्म्स की संपत्ति खरीदी थी। माना जा रहा है कि इस प्रॉपर्टी की कीमत भी 50 करोड़ रुपये से अधिक होगी।

दिल्ली में लालू फैमिली की कई और संदिग्ध संपत्ति
लालू और उनके परिवार पर भ्रष्टाचार से प्रॉपर्टी बनाने का ये कोई पहला मामला नहीं है। लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार पर दिल्ली में अवैध तरीके से 115 करोड़ की संपत्ति अर्जित करने के आरोप पहले भी लग चुके हैं। इसके अनुसार लालू का परिवार डिलाइट मार्केटिंग, ए़ के इंफोसिस्टम की तर्ज पर ए़ बी एक्सपोर्ट्स कंपनी के भी मालिक हैं। इस कंपनी के सभी शेयरधारक और निदेशक पद पर लालू के परिवार के लोगों का कब्जा है। इतना ही नहीं दिल्ली के सबसे पॉश इलाके में जमीन खरीदने के लिए मुंबई के पांच बड़े ज्वेलर्स, सोने के व्यापारियों ने ए़ बी एक्सपोर्ट्स कंपनी को वर्ष 2007-2008 में एक-एक करोड़ के यानि पांच करोड़ रुपये बिना ब्याज के कर्ज दिए। इसी पांच करोड़ रुपये से उसी वर्ष नई दिल्ली के डी-1088, न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी में 800 वर्ग मीटर जमीन मकान सहित पांच करोड़ रुपये में खरीदा गया। आज इस जमीन की कीमत 55 करोड़ से ज्यादा है और इस जमीन पर लालू परिवार का चार मंजिला मकान बनकर लगभग तैयार है, जिसकी वर्तमान कीमत लगभग 60 करोड़ रुपये है।

गलत तरीके से पेट्रोल पंप हथिया लिया
लालू एंड फैमिली पर गलत तरीके से पेट्रोल पंप हथियाने का आरोप भी लग चुका है। इसके अनुसार बिहार के स्वास्थ्य मंत्री और लालू के बड़े बेटे तेजप्रताप ने पटना के न्यू बाइपास पर बेऊर के पास गलत कागजों के आधार पर अधिकारियों की मिलीभगत से 2011 में भारत पेट्रोलियम का एक पेट्रोल पंप अपने नाम आवंटित करा लिया था। जिस समय तेजप्रताप ने पेट्रोल पंप के लिए आवेदन किया और इंटरव्यू दिया, उस समय नेशनल हाईवे-30 पर न्यू बाइपास की 43 डिसमिल जमीन उनके पास नहीं थी। सुशील मोदी ने आरोप लगाया कि पटना के बिहटा में बीयर फैक्ट्री लगाने वाले अमित कत्याल ने 9 जनवरी, 2012 को एके इंफोसिस्टम कंपनी के निदेशक के नाते लालू के छोटे बेटे और नीतीश सरकार में उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को पेट्रोल पंप लगाने के लिए 136 डिसमिल जमीन लीज पर दी थी। यानि पेट्रोल पंप के लिए आवेदन तेजप्रताप ने किया था, लेकिन पेट्रोल पंप की जमीन की लीज तेजस्वी के नाम थी। फिर भी तेजप्रताप को पेट्रोल पंप कैसे आवंटित किया गया ?

एफिडेविट में भी नहीं दी पेट्रोल पंप की जानकारी
सबसे बड़ी बात है कि किसी भी पेट्रोल पंप लेने की प्रक्रिया से पहले एक शपथपत्र देना पड़ता है, जिसमें यह लिखा जाता है कि आवेदक किसी भी निजी और सरकारी पद पर आसीन नहीं होगा। किसी भी तरह के सरकारी पद का लाभ नहीं लेगा। लेकिन फिर भी तेजप्रताप नीतीश सरकार में मंत्री बने हुए हैं, वेतन लेते हैं, सरकारी गाड़ी,और बाकी सुविधाओं का उपयोग करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने जो अपनी संपत्ति का ब्योरा उपलब्ध कराया है, उसमें भी इस पेट्रोल पंप का जिक्र नहीं है।

मॉल और मिट्टी घोटाला का भी आरोप
लालू यादव पर पटना में सबसे बड़ा मॉल बनवाने के लिए परिवार के नाम पर 200 करोड़ की जमीन भी भ्रष्ट तरीके से हड़पने का आरोप लग चुका है। आरोपों के अनुसार पटना में सगुना मोड़ के पास बन रहे सबसे बड़े मॉल का मालिकाना हक लालू के परिवार के पास है। ये जमीन लालू ने रेलमंत्री रहते हुए रांची और पुरी में एक व्यवसायी को रेलवे के दो होटल लीज पर देने के एवज में गैर-कानूनी तरीके से हथियाई है। जिस कंपनी के नाम जमीन का मालिकाना हक है उसके डायरेक्टर लालू के बेटे और बेटियां हैं। लालू यादव और उनके परिवार पर पटना में 80 लाख रुपये के मिट्टी घोटाले का भी आरोप लगा है। इसके अनुसार लालू के दबाव में पटना के चिड़िया घर को लालू की उसी प्रॉपर्टी से निकली मिट्टी जबरन बेची गई, जिसपर मॉल बन रहा है। लेकिन सारे दस्तावेज होने के बावजूद नीतीश सरकार में एक्शन लेने की हिम्मत नहीं है। यानि पहले जमीन घोटाला किया और फिर घोटाले वाली जमीन से निकली मिट्टी से भी घोटाला कर लिया।

कई जमीन घोटाले को दबा गए लालू
लालू प्रसाद यादव जब रेल मंत्री थे तब उनपर लोगों से जमीन के बदले नौकरी देने का आरोप लगा था। ग्रुप सी और डी की कई नौकरियां रेवड़ियों की तरह बांटी गई थी, लेकिन तत्कालीन यूपीए सरकार ने आंखें मूंद रखीं थी। लालू एंड परिवार पर इसके साथ ही कई जमीन गलत कागजात के आधार पर खरीदने का आरोप है। करोड़ों रुपये की इन जमीनों की खरीद की जांच करवाने से बिहार सरकार मुंह चुरा रही है।

औरंगाबाद में भी लालू के बेटे के नाम पर जमीन
लालू यादव के बड़े बेटे और अब बिहार के स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव पर शेयर की जानकारी छिपाने का आरोप है। 2010 में लारा डिस्ट्रीब्यूटर्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से 45 डेसि‍मल जमीन, 53.34 लाख रुपये में खरीदी और इस जमीन पर एक मोटरसाइकिल कंपनी का शोरूम भी शुरू किया गया। इस शोरूम को शुरू करने के लिए 2.29 करोड़ रुपये कर्ज लिए गए, तब तेजप्रताप इस कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर थे। हालांकि 2015 में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद तेजप्रताप यादव ने इस कंपनी के प्रबंध निदेशक के पद से इस्तीफा दे दिया, लेकिन चुनाव आयोग को दिए गए ब्योरे में तेजप्रताप यादव ने न अपने शेयर की जानकारी दी और न कर्ज का कोई उल्लेख किया।

मवेशियों का 950 करोड़ का चारा खा गए लालू
90 के दशक में जब लालू प्रसाद बिहार के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने बिहार की जनता के खून पसीने की कमाई लूट ली। 950 करोड़ चारा घोटाला के नाम से मशहूर इस स्कैम का डायरेक्ट कनेक्शन लालू प्रसाद से निकला और अदालत ने उन्हें सजा भी सुनाई है। सजायाफ्ता लालू प्रसाद चुनाव तो नहीं लड़ सकते, लेकिन बिहार की नीतीश सरकार के फैसले में उन्हीं की मनमानी चलती है और नीतीश तो अब रबर स्टांप की भूमिका में नजर आने लगे हैं।

देश में अगर भ्रष्ट नेताओं का जिक्र हो तो लालू यादव का नाम जुबान पर सबसे पहले आ जाता है। चारा घोटाले के एक केस में लालू को सजा मिली हुई है। कानूनी पेचीदगियों का लाभ उठाकर वो अभी जमानत पर घूम रहे हैं। अभी चारा घोटाले से जुड़े कई और मामलों की सुनवाई होनी है। लेकिन भी फिर भी उनके घोटालों के खुलासे का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। अगर बाकी मामलों में भी उन्हें सजा मिल जाए तो उन्हें के लिए पूरी उम्र जेल से निकलना मुश्किल हो जाएगा। लेकिन अब लालू के भ्रष्टाचार की  विरासत उनके बच्चों ने भी संभाल लिया है। बड़ा सवाल है कि भारत की कानूनी प्रक्रिया में इनके करतूतों की उचित सजा मिल पाएगी ?

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