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जानिए अर्नब की गिरफ्तारी की इनसाइड स्टोरी, कैसे महाराष्ट्र के गृहमंत्री ने 40 पुलिसवालों की टीम बनाकर अरेस्ट कराया

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रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी से बदला लेने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख कई महीनों से प्लानिंग बना रहे थे और पुख्ता प्लानिंग के तहत ही दो दिन पहले अर्नब को अरेस्ट किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अर्नब को फंसाने और गिरफ्तार करने की मुहिम की अगुवाई खुद राज्य के गृहमंत्री और एनसीपी नेता अनिल देशमुख ने की। अनिल देशमुख की अगुवाई वाले महाराष्ट्र के गृह विभाग ने अर्णब की गिरफ्तारी के लिए कोंकण रेंज के आईजी संजय मोहिते के अगुवाई में 40 सदस्यों की उच्च स्तरीय टीम का गठन किया था।

बताया जा रहा है कि जब से अर्नब गोस्वामी ने महाराष्ट्र की ठाकरे सरकार और उसके सहयोगियों कांग्रेस व एनसीपी नेताओं की पोल खोलना शुरू किया, तभी से वे सरकार की आंखों में खटकने लगे थे। पिछले कई महीनों से महाराष्ट्र पुलिस और तमाम अन्य विभाग रिपब्लिक टीवी के मालिकों, प्रमोटरों और कर्मचारियों पर पैनी नजर रखे हुए थे। इसी दौरान पुलिस को इंटीरियर डिजाइनर अन्वय नाइक और उनकी मां कुमुद को कथित तौर पर आत्महत्या के लिए उकसाने के दो साल पुराने मामला के बारे में पता चला। बताया जा रहा है कि इसके बाद गृह विभाग के निर्देश पर रायगढ़ पुलिस ने बंद हो चुके इस केस को दोबारा खोले जाने की इजाजत मांगी। और फिर शुरू हुई ‘ऑपरेशन अर्णब’ की तैयारी।

राज्य सरकार में गृह मंत्री अनिल देशमुख के निर्देश पर मुंबई और रायगढ़ से कुल 40 पुलिसकर्मियों को इकट्ठा किया गया। खबरों के अनुसार अर्णब को गिरफ्तार करने की योजना को आईजी मोहिते ने तैयार किया और हाई प्रोफाइल एनकाउंटर स्पेशलिस्ट सचिन वाजे को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गई। टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार महाराष्ट्र कैबिनेट के एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया, ‘अर्णब काफी शक्तिशाली पत्रकार हैं। ऐसे में मोहिते की अगुवाई वाली टीम के लिए इस प्लान को अमलीजामा पहना पाना काफी चुनौतीपूर्ण था। हमने काफी सावधानी से काम किया। उकसावे के तमाम प्रयासों के बावजूद टीम के हर एक सदस्यों ने संयम बरता।’

उन्होंने बताया, ‘केस की शुरुआती जांच के बाद ही यह कन्फर्म हो गया कि आत्महत्या के लिए उकसाने में अर्णब शामिल हैं। यह एक सीक्रेट मिशन था। हमारे लोगों ने अर्णब की बिल्डिंग के कई चक्कर लगाए। हमें डर था कि अगर कहीं यह बात लीक हो गई तो अर्णब गिरफ्तारी से बचने के लिए शहर छोड़ सकते हैं।’ इस ऑपरेशन की अच्छे से तैयारी की गई थी। हर छोटी बात का ध्यान रखा गया। यह पहले से तय था कि दरवाजा कौन खटखटाएगा, अर्णब और उनकी फैमिली से बात कौन करेगा, विरोध होने पर कैसा एक्शन लिया जाएगा। अर्णब ने प्रतिरोध भी किया। वाजे ने उन्हें जांच में सहयोग नहीं करने के कानूनी पहलू से भी अवगत कराया। सबकुछ आराम से निपट गया।

दूसरी तरफ राज्य के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने फडणवीस सरकार पर इस केस को रफा-दफा करने की कोशिश का इल्जाम लगाया। उन्होंने कहा, ‘जब मैंने विधवा और उनकी बेटी की व्यथा सुनी तो मुझे काफी झटका लगा। मुझे विश्वास ही नहीं हुआ कि ऐसा महाराष्ट्र में हो सकता है। हम नाइक परिवार को न्याय दिलाएंगे।’ उन्होंने कहा कि बीजेपी ने कोई सबूत ना होने के बावजूद सुशांत केस का राजनीतिकरण किया। लेकिन यहां तो स्पष्ट तौर पर सूइसाइड नोट है।

रिपब्लिक टीवी पर आरोप है कि आर्टिकेक्ट फर्म कॉन्कॉर्ड डिजाइन प्राइवेट लिमिटेड के एमडी अन्वय नाइक का 83 लाख रुपया बकाया था। नाइक ने रिपब्लिक टीवी का स्टूडियो तैयार किया था। दो अन्य कंपनियां- आईकास्टएक्स/स्काइमीडिया और स्मार्टवर्क्स भी अपना-अपना बकाया चुकाने में नाकाम रहीं। पुलिस के मुताबिक, तीनों कंपनियों पर कुल 5.40 करोड़ रुपये का बकाया था। कहा जा रहा है कि रिपब्लिक टीवी की तरफ से भुगतान नहीं होने की वजह से नाइक और बाद में उनकी मां ने कथित रूप से खुदकुशी कर ली थी।

अवन्य नायक की असलियत भी जानिए

अवन्य नायक की कंपनी 2013 में 8.21 करोड़ लॉस में थी। वर्ष 2014 में 4.74 करोड़ लॉस में थी और 2016 में 4.45 करोड़ लॉस में थी। कंपनी पर कुल कर्ज 19.57 करोड़ था, ओवरड्राफ्ट 10.37 करोड़ रुपये, ट्रेड रिसिवेबल 6.63 करोड़ का था, जबकि ट्रेड पेयबल्स 7.51 करोड़ रुपये का था। अन्वय नायक को अर्नब गोस्वामी से 8 करोड़ रुपये का पेमेंट मिल चुका था, सिर्फ 83 लाख रुपये बकाया था। जबकि अन्वय को फिरोज शेख से 4 करोड़ और नीतीश शारदा से 55 लाख रुपये लेने थे। अन्वय नायक की कंपनी में अन्वय और उनकी मां कुमुद डायरेक्टर थी। क्योंकि अन्वय नायक का पत्नी से तलाक का केस चल रहा था और अन्यव नायक को दुख ये था कि उनकी बेटी भी उनकी पत्नी के रास्ते पर चल रही थी यानी बेहद खुली जिंदगी जीती थी उनके कहने में नहीं थी। फिर एक दिन अन्वय नायक और उनकी मां कुमुद नायक मरे हुए पाए गए। एक डेथ नोट परिवार ने कुछ महीने के बाद मीडिया को दिखाया, लेकिन उस पर सिर्फ अन्वय नायक का सिग्नेचर था उसकी मां का नहीं।

वायरल हो चुके उसी सुसाइड नोट में अन्वय नायक ने अर्नब गोस्वामी, फिरोज शेख और नीतीश शारदा तीनों का नाम लिखा है। लेकिन पुलिस अर्नब पर कार्रवाई कर रही है, लेकन नीतीश शारदा और फिरोज शेख के बारे में कुछ नहीं कह रही है। सवाल है कि इन दोनों के पीछे मुंबई पुलिस या महाराष्ट्र सरकार क्यों नहीं पड़ी? अर्नब गोस्वामी ने सिर्फ 10 परसेंट पेमेंट बाकी रखा था और यह बकाया कॉन्ट्रैक्ट के अनुसार था। अरनव गोस्वामी के पास उनका सिर्फ 83 लाख रुपये बकाया था, जबकि फिरोज शेख के पास उनका 4 करोड़ रुपए बकाया था। ऐसे में यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या करेगा तो सरकार को ज्यादा बकाया वाले पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए थी।

अन्वय की सुसाइड नोट में फिरोज शेख का नाम लिखे होने के बावजूद भी मीडिया, शिवसेना की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी तमाम सेकुलरपत्रकार सिर्फ अर्नब गोस्वामी का नाम हाईलाइट कर रहे हैं, जबकि फिरोज शेख और नीतीश शारदा का नाम दबा दिया जा रहा है। सबसे आश्चर्य इस बात का है कि अन्वय ने अपने बकाया पेमेंट लेने के लिए कभी कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं की। न ही वो कभी पुलिस के पास शिकायत लेकर गए और न ही आर्बिट्रेटर के पास गए।आर्थिक तंगी में यदि कोई व्यक्ति आत्महत्या करता है तब आप ऐसे हजारों केस का पैटर्न देखिए, वह व्यक्ति अपने पत्नी और बच्चों के साथ आत्महत्या करता है, अपनी मां के साथ नहीं। लेकिन अन्यव नायक ने अपनी पत्नी और बेटी को इस दुनिया की मुश्किलों से लड़ने के लिए अकेला छोड़ दिया और अपनी मां के साथ आत्महत्या कर ली। यह भी समझ के परे हैं।

दो साल पहले जब अन्वय के परिजनों ने शिकायत की थी उस वक्त महाराष्ट्र में शिवसेना का ही गृह मंत्री था। तब मुंबई पुलिस ने जांच की और जांच के बाद अदालत में क्लोजर रिपोर्ट फाइल की कि अन्वय नायक और उनकी मां के आत्महत्या का मामला मानसिक अवसाद और अन्वय नायक का परिवार का बिखरना है। इसका अर्णब गोस्वामी से कोई लेना देना नहीं है और अदालत ने बकायदा कोर्ट का स्टैंप लगाकर मामले को क्लोज कर दिया और इस मामले में मुंबई पुलिस की तेजतर्रार सीआईडी ब्रांच ने जांच की थी। इस पूरे विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि अर्नब गोस्वामी को बदला लेने की नीयत से जानबूझ कर एक बंद हुए केस को दोबार खोलकर फंसाया गया है।

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