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जिहादी और नफरती सोचः लुलु मॉल में नमाज पढ़ने वालों का मदरसा कनेक्शन सामने आया, नमाज पढ़ा, वीडियो बनाई, कोई खरीदारी नहीं की

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राजस्थान के उदयपुर में मुस्लिम हमलावरों द्वारा नुपुर शर्मा के समर्थक कन्हैयालाल की हत्या के बाद केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने कहा था कि इस तरह की घटना मदरसों में पढ़ाए जा रहे नफरत के पाठ का नतीजा है। उन्होंने यहां तक कहा था कि देवबंद में कट्टरता का पाठ पढ़ाया जा रहा है। अब अगर मदरसों में नफरत का पाठ पढ़ाया जा रहा है तो यह सब पढ़कर मुस्लिम युवक उग्रवाद और आतंकवाद के रास्ते पर ही तो जाएगा। पाकिस्तान के विद्वान जावेद अहमद गामदी ने भी लिखा है कि आज जो आतंकवाद दिखाई दे रहा है, वह मदरसों में पढ़ाई जा रही धार्मिक सोच का नतीजा है। देश में नुपुर शर्मा के समर्थकों पर एक के बाद एक हमले होते जाना मदरसों की शिक्षा पर फिर से सवाल उठाते हैं। इन घटनाओं के देखते हुए ही सभ्य समाज के लोग मदरसों पर पाबंदी लगाने की मांग करने लगे हैं। कुछ समय पहले इलाहाबाद हाईकोर्ट में महिला वकील सहर नकवी की ओर से एक जनहित याचिका दायर की गई थी। इस याचिका में मदरसों पर पाबंदी लगाने की मांग की गई। याचिका में कहा गया कि इन मदरसों में कट्टरता का पाठ पढ़ाकर बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

मदरसों में जब मासूम बचपन को इस्लाम के नाम पर धार्मिक भेदभाव की, तालिबानी कट्टरता की शिक्षा दी जाती है, तो यह उनके दिलो दिमाग में छा जाती है। यही शिक्षा आगे चलकर उन्हें कट्टरता एवं चरमपंथ की ओर ले जाते हैं। यह जिहादी मानसिकता ही है कि मुस्लिम युवक नमाज पढ़ने के लिए लखनऊ के लुलु मॉल पहुंच जाते हैं तो हरिद्वार में चिन्मय डिग्री कालेज के पास लगने वाले साप्ताहिक बाजार में सार्वजनिक स्थल पर नमाज अदा करने पहुंच जाते हैं। लखनऊ के लुलु मॉल नमाज अदा करने पहुंचे मुस्लिम युवकों का अब मदरसा कनेक्शन सामने आया है। जानकारी के मुताबिक दो अलग-अलग गुट में बंटकर मुस्लिम युवक लुलु मॉल में नमाज पढ़ने आये थे। इन लोगों ने वहां कोई खरीदारी नहीं, नमाज पढ़ी, वीडियो बनाई और चले गए। इससे इनकी मानसिकता को समझा जा सकता है। अभी तक की जांच में पता चला है कि नमाज पढ़ने का वीडियो बनाने के लिए ही ये लोग यहां आए थे। इससे नफरती सोच का खुलासा होता है।

लुलु मॉल में नमाज पढ़ने आए मुस्लिम युवकों में से गिरफ्तार किए चारों आरोपी क्या करते हैं? आइए जानते हैंः

मदरसा संचालक है लोकमान

लुलु मॉल में बिना अनुमति के नमाज पढ़ने के आरोप में लखनऊ पुलिस के हत्थे चढ़े मोहम्मद लोकमान (लुकमान) मदरसा संचालक है। 25 साल का मोहम्मद लोकमान मूल रूप से सीतापुर जिले के लहरपुर थाना क्षेत्र के मंगोलपुर गांव का रहने वाला है। इसके पिता का नाम मंसूर अली है और ये (लोकमान) फिलहाल इंदिरानगर के खुर्रमनगर क्षेत्र के अबरार नगर में रहता है।

मदरसे में पढ़ाई करता है मोहम्मद रेहान

लुलु मॉल में नमाज पढ़ने वाले मामले में जिन चार अभियुक्तों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, उसमें मोहम्मद रेहान भी है। पुलिस के मुताबिक, लखनऊ के इंदिरानगर निवासी मोहम्मद रिजवान का पुत्र रेहान मदरसे में पढ़ाई करता है। वो मूल रूप से खुर्रमनगर थाने के सी-130 अबरार नगर में रहता था।

लखनऊ में रहकर क्या करता था आतिफ?

एक अन्य आरोपी का नाम आतिफ खान है। आतिफ फिलहाल खुर्रमनगर क्षेत्र के अबरार पुर में रहकर मदरसे की दीनी शिक्षा प्राप्त कर रहा था। आतिफ खान मूल रूप से लखीमपुरखीरी जिले के मोहमदी थानाक्षेत्र के मोहल्ला मोहमदी का रहने वाला है। आतिफ के पिता का नाम मोहम्मद मतीन खान है। 20 वर्षीय आतिफ लम्बे समय से लखनऊ में रह रहा था।

नोमान और लोकमान में क्या है रिश्ता?

एक अन्य आरोपी मोहम्मद नोमान है। 20 वर्षीय नोमान भी मदरसे में पढ़ाई करता था और लंबे समय से लखनऊ के इंदिरानगर के खुर्रमनगर क्षेत्र के अबरार नगर में रह रहा था। मोहम्मद नोमान मूल रूप से सीतापुर जिले के लहरपुर थाना क्षेत्र के मंगोलपुर गांव का रहने वाला है। इस तरह पकड़े गए सभी आरोपी लखनऊ के एक ही क्षेत्र में रहते थे। पुलिस के मुताबिक, नोमान और लोकमान दोनों भाई है। वहीं रेहान, नोमान और आतिफ तीनों ही अलग-अलग मदरसों में पढ़ाई करते थे और तीनों की उम्र 19 से 20 साल के बीच है।

नमाज पढ़ने में साजिश की हो रही जांच

सुशान्त गोल्फ सिटी के थाना प्रभारी ने बताया कि वीडियो में 7-8 लोग नमाज पढ़ते हुए दिखाई पड़ रहे थे जिसमें से 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इन चारों ने लुलु मॉल में नमाज पढ़ी थी इस बात को स्वीकार कर लिया है। पकड़े चार लड़कों में से तीन लड़के मदरसों में पढ़ाई कर रहे थे कोई हाफिज, कोई मौलवी तो कोई आलिम की पढ़ाई कर रहा था। उन्होंने बताया कि नमाज साजिश के तहत पढ़ी गई या कोई अन्य वजह थी इसको लेकर कई बिंदुओं पर पूछताछ जारी है।

केवल नमाज पढ़ने आए थे, कोई खरीदारी नहीं की

लुलु मॉल के सीसीटीवी और अन्य सोर्स से मिली जानकारी के मुताबिक, लड़के दो गुट में बंटकर मॉल के अंदर आए थे इन लोगों ने सबसे पहले ग्राउंड फ्लोर पर नमाज अदा करने की कोशिश की। लेकिन यहां मौजूद सिक्योरिटी गार्ड ने उनको नमाज अदा करने से मना कर दिया। बताया जा रहा है जिसके बाद ये लोग दूसरी मंजिल के कोने में खाली जगह पर नमाज अदा करने लगे और नमाज अदा करने का वीडियो बना लिया। इसके बाद ये लोग फिर दो गुट में बंट गए और वापस पैदल ही मॉल से बाहर चले गए। वहीं इन युवकों ने मॉल से किसी भी तरह की कोई खरीदारी नहीं की थी।

कौन करता है मदरसों में फंडिंग

सऊदी अरब एवं इस्लामिक देशों और इससे जुड़े संस्थानों द्वारा मदरसों की फंडिंग होती रही है जिसकी जांच की मांग समय-समय पर होती रही है। वहीं अन्य लोगों का मानना है कि इन मदरसों की फंडिंग जकात और दान में मिले पैसों से की जाती है। हर मुस्लिम व्यक्ति अपनी आय का कुछ प्रतिशत हिस्सा जकात या दान करता है और इन पैसों का हिस्सा मदरसों को भी दिया जाता है। दुनिया में कई मदरसों में आतंकवादी संगठन द्वारा भी फंडिंग की जाती है।

मदरसों में दी जाने वाली उपाधियां

मदरसों में शिक्षा पूरी करने के बाद उपाधि देने की प्रणाली है। उदाहरण के तौर पर “आलिम” को इस्लाम का जानकार माना जाता है। हाफिज की उपाधि उसको दी जाती है जिसे पूरी कुरान अच्छे से याद होती है, मुफ़्ती उस व्यक्ति को बोला जाता है जो कि शरीआ कानून का विशेषज्ञ होता है। इसी प्रकार हदीस लेखन में विद्वान व्यक्ति को मुहादित कहा जाता है। 

शिया मुस्लिम बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिज़वी ने मदरसों में दी जानेवाली शिक्षा पर उठाए सवाल

शिया मुस्लिम बोर्ड के चेयरमेन वसीम रिज़वी ने भी मदरसों में दी जानेवाली शिक्षा पर सवाल उठाए थे। उन्होंने कहा था कि यहां से शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों में से अभी तक कोई भी छात्र इंजीनियर या डॉक्टर नहीं बना है। यहां से पास होने वाले मौलवी बन जाते हैं या फिर मेहनत मजदूरी करते हैं। उनका कहना है मदरसों की शिक्षा में आधुनिकता आनी चाहिए। यहां तक कि इन्होंने प्रधानमंत्री को चिठ्ठी लिखकर बताया कि ऐसे मदरसों पर कार्यवाही की जाय जो आतंकवाद और कट्टरता फ़ैलाने का काम कर रहे हैं। गांव में बच्चे की नींव मजबूत करने के लिए नई तकनीकी की शिक्षा देनी चाहिए।

कुछ मदरसों में देश विरोधी तालीमः रिज़वान अहमद

इस्लामी विद्वान रिज़वान अहमद का कहना है कि कुछ मदरसों में देश विरोधी तालीम दी जाती है, जो कि हमारे देश के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। देश की सरकार को इस मामले पर जांच करनी चाहिए एवं सभी मदरसों पर नजर रखनी चाहिए जिससे यहां पढ़ रहे बच्चों को अच्छी शिक्षा दी जा सके।

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