Home समाचार ‘आत्मनिर्भर भारत’ से देश के दुश्मन हो रहे पस्त: हिमालय की चोटियों...

‘आत्मनिर्भर भारत’ से देश के दुश्मन हो रहे पस्त: हिमालय की चोटियों पर स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर ने दिखाई ताकत, अब भारतीय सेना को मिलेगा तोहफा

698
SHARE

पीएम मोदी के नेतृत्व में एयरफोर्स में आत्मनिर्भर भारत का कमाल, देश को दुनिया के सबसे ताकतवर हेलिकॉप्टर की मिलेगी सौगात। कल झांसी में बड़े कार्यक्रम में पीएम मोदी देश को सौंपेंगे, लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर। मोदी सरकार भारतीय सेनाओं को सशक्त बनाने के लिए हर वो फैसले ले रही है , जो विदेशों पर हथियारों के लिए देश की निर्भरता कम करेंगे। इसी कड़ी में हल्के स्वदेशी अटैक हेलिकॉप्टरों की सौगात भारतीय सेना को मिलने जा रही है। लेह से लेकर लद्दाख और कारगिल से लेकर सियाचिन ग्लेसियर तक, दुशमनों के किसी भी खतरे से निपटने के लिए इन हल्के हेलीकॉप्टरों को बेहद कामयाब बताया जा रहा है।

सेना को लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टरों की ताकत 

हल्का स्वदेशी अटैक हेलिकॉप्टर चीन और पाकिस्तान दोनों के खतरे से निपटने में बेहद असरदार बताया जा रहा है। पीएम मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर भारत के तहत आर्मी, नेवी और एयरफोर्स में स्वदेशीकरण पर जोर दिया जा रहा है। DRDO और HAL देश को एक से बढ़कर एक स्वदेशी हथियारों की सौगात देने में जुटे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी झांसी में सेना को ड्रोन और एडवांस इलेक्टॉनिक वॉरफेयर सूट की भा सौगात देंगे । स्वतंत्रता दिवस के 75 साल पूरे होने पर आजादी का अमृत महोत्सव पर्व मनाया जा रहा है, इसी के साथ भारतीय सेना में आत्मनिर्भर भारत का सपना भी तेजी से पूरा हो रहा है। 

स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर की ताकत भी जान लीजिए

लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर की रेंज-580 किमी 

लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर की सर्विस सीलिंग- 21,300 फीट 

लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर की चढ़ाई की क्षमता- 2,400 फीट प्रति मिनट

इतना ही नहीं LCH के साथ कई और खूबियां भी जुड़ी हैं। 

  • स्वदेशी डिजाइन और एडवांस तकनीक
  • किसी भी मौसम में उड़ान भरने में सक्षम
  • आसमान से दुश्मनों में नजर रखने में मददगार
  • हवा से हवा में हमला करने वाली मिसाइलें ले जाने में सक्षम
  • चार 70 या 68 MA रॉकेट ले जाने में सक्षम
  • फॉरवर्ड इन्फ्रारेड सर्च
  • CCD कैमरा और थर्मल विजन और लेजर रेंज फाइंडर भी
  • नाइट ऑपरेशन करने और दुर्घटना से बचने में भी सक्षम

कारगिर की जंग में पहाड़ों की ऊंची चोटियों पर छिपे दुश्मनों को खत्म करने के लिए इस तरह के हेलिकॉप्टरों की जरूरत पड़ी थी। भारतीय सेना की हर जरूरतों को जी जान से पूरा करने में जुटी मोदी सरकार ने सेना को जल्द से जल्द हल्के लड़ाकू हेलिकॉप्टरों से लैश करने का फैसला किया। साल 2015 में इसका ट्रायल किया गया। इस दौरान इसने 20 हजार से लेकर 25 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरी। पिछले साल चीन के साथ हुए टकराव के बीच इसकी 2 यूनिट लद्दाख में तैनात की गई थीं।

मोदी सरकार के भारतीय सेना की ताकत बढ़ाने के साहसिक फैसले 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश की सैन्य ताकत को बढ़ाने के लिए लगातार बड़े और साहसिक फैसले कर रहे हैं। वहीं भारतीय वैज्ञानिक भी सेना को मजबूत करने के लिए एक के बाद एक नई इबारतें लिख रहे हैं। चीन के साथ सीमा पर चल रहे टकराव के बीच भारत ने अपनी मिसाइल टेक्नोलॉजी की क्षमता का जबरदस्त प्रदर्शन किया है। बुधवार (27 अक्टूबर, 2021) को ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप से अग्नि-5 मिसाइल का सफल परीक्षण कर बड़ी कामयाबी हासिल की। न्यूक्लियर वॉरहेड ले जाने में सक्षम यह मिसाइल 5 हजार किलोमीटर दूरी तक लक्ष्य साधने की क्षमता रखती है।

इस मिसाइल की रेंज में चीन और पाकिस्तान के सभी शहर सहित पूरा एशिया आएगा। इसलिए चीन भी इससे घबराता है। इस मिसाइल के सेना में शामिल होने के बाद भारत दुनिया के उन एलीट देशों में शामिल हो जाएगा, जिनके पास न्यूक्लियर हथियारों से लैस इंटर कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। डीआरडीओ के रिसर्च सेंटर इमारत, एडवांस्ड सिस्टम लैबोरेटरी और डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैबोरेटरी ने मिलकर इसे तैयार किया है। इस मिसाइल के अब तक 8 परीक्षण हो चुके हैं और सभी सफल रहे हैं। अब स्ट्रेटेजिक फोर्स कमांड में इसके शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है।

 अग्नि-5 की ताकत से घबराते हैं दुश्मन

  • भारत के पास मौजूद लंबी दूरी की मिसाइलों में से एक है।
  • अग्नि- 5 बैलिस्टिक मिसाइल की रेंज 5 हजार किमी है।
  • यह मिसाइल एक साथ कई हथियार ले जाने में सक्षम है।
  • मिसाइल एक साथ कई टारगेट पर निशाना लगा सकती है।
  • मिसाइल डेढ़ टन तक न्यूक्लियर हथियार ले जा सकती है।
  • मिसाइल की स्पीड आवाज की स्पीड से 24 गुना ज्यादा है।
  • देश में कहीं भी आसानी से ट्रांसपोर्ट किया जा सकता है।
  • देश में कहीं भी इस मिसाइल की तैनाती की जा सकती है।
  • यह मिसाइल अपने निशाने पर सटीकता से हमला करती है।

मोदी सरकार का चीन को संदेश

अग्नि-5 के परीक्षण को लेकर चीन दुनिया भर में हाय-तौबा मचा रहा है। यहां तक कि संयुक्‍त राष्‍ट्र सुरक्षा परिषद में शिकायत कर चुका है। उसने यह भी कहा है कि इस मिसाइल की टेस्टिंग पर रोक लगाने की जरूरत है। ऐसा नहीं हुआ तो हथियारों की होड़ तेज होगी। लेकिन मोदी सरकार ने चीन की चाल को नाकाम कर दिया। अग्नि-5 का सफल टेस्‍ट सीधे-सीधे चीन को संदेश है कि भारत उसके धौंस में आने वाला नहीं है। चीन सिर्फ और सिर्फ ताकत की भाषा समझता है। इसलिए मोदी सरकार ने उसी की भाषा में जवाब देना शुरू कर दिया है। आज पूरी दुनिया की नजरें भारत पर हैं कि वह चीन को कैसे जवाब देता है। अग्नि-5 का सफल परीक्षण उसे माकूल जवाब है।

आइए देखते हैं, मोदी सरकार किस तरह तीनों सेनाओं को मजबूत बना रही है, ताकि कोई दुश्मन देश भारत से टकराने का दुस्साहस नहीं करें… 

राफेल विमान आने से बढ़ी भारतीय वायुसेना की ताकत

राफेल विमान आने से भारतीय वायुसेना की ताकत में काफी इजाफा हुआ है। भारत में अब तक 29 राफेल आ चुके हैं, जिन्हें भारतीय वायुसेना के बेड़े में शामिल किया जा चुका है। राफेल विमानों को उत्तरी और पूर्वी सीमा पर बड़ी तादाद में तैनात किए गए हैं। राफेल को तिब्बत के स्वायत्त क्षेत्र में दुश्मन के वायु रक्षा तंत्र को हराने और लक्ष्य पर हमला करने में सक्षम पहला y विमान माना जाता है। भारतीय वायु सेना ने 28 जुलाई, 2020 को पूर्वी वायु कमान (ईएसी) में वायु सेना स्टेशन हासीमारा में औपचारिक रूप से राफेल विमान को नंबर 101 स्क्वाड्रन में शामिल किया था। 101 स्क्वाड्रन वायुसेना की दूसरी स्क्वाड्रन है, जिसमें राफेल की तैनाती की गई है। सितंबर 2016 में भारत और फ्रांस के बीच 36 राफेल की डील हुई थी। भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में हुए विवाद के बाद से भारत में तेजी से राफेल की तैनाती की गई है। ये राफेल देश की सीमा पर वायुसेना को मजबूती देने के लिए काफी अहम माने जा रहे हैं।

रूस से 33 फाइटर जेट खरीदने का ऐलान

मोदी सरकार ने जुलाई 2020 में भारतीय वायु सेना की मारक क्षमता को बढ़ाने के लिए रूस से 33 फाइटर जेट खरीदने का ऐलान किया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इसके तहत 12 सुखोई-30 विमान और 21 मिग-29 विमान खरीदे जाएंगे। इसके अलावा 59 मौजूदा मिग -29 विमानों को अपग्रेड भी किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इसमें कुल 18,148 करोड़ रुपये की लागत आएगी। दोनों देशों के बीच होने वाली इस बड़ी और महत्वपूर्ण डील का फैसला डिफेंस एक्जिविशन काउंसिल ने लिया।

आईएनएस करंज नौसेना के बेड़े में शामिल

स्कॉर्पिीन क्लास की पनडुब्बी आईएनएस करंज को नौसेना के बेड़े में शामिल किया गया। यह पनडुब्बी मेक इन इंडिया मिशन के तहत मझगांव डॉक लिमिटेड ने बनाई है। यह पनडुब्बी कम आवाज से दुश्मन के जहाज को चकमा देने में माहिर है। यह रडार की पकड़ में नहीं आती, समंदर से जमीन पर और पानी के अंदर से सतह पर हमला करने में सक्षम है। 67.5 मीटर लंबी, 12.3 मीटर ऊंची और 1565 टन वजन वाली इस पनडुब्बी में ऑक्सीजन भी बनाया जा सकता है। यह बड़ी आसानी से दुश्मन के घर में घुस कर उसे तबाह कर सकती है। यह किसी भी मौसम में कार्य करने में सक्षम है। इसे समुद्र में भारत का ब्रह्मास्त्र माना जा रहा है। नौसेना प्रमुख एडमिरल करमबीर सिंह के अनुसार मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के तहत वर्तमान में 42 शिप और सबमरीन बन रहे हैं, उनमें से 40 नेवी के शिपयार्ड में बन रहे हैं।

पनडुब्बी बढ़ाएगी नौसेना की ताकत
मेक इन इंडिया के तहत नौसेना के लिए भारत में ही करीब 45 हजार करोड़ रुपये की लागत से छह पी-75 (आई) पनडुब्बियां बनाई जाएंगी। पनडुब्बियों के निर्माण की दिशा में स्वदेशी डिजाइन और निर्माण की क्षमता विकसित करने के लिए नौसेना ने संभावित रणनीतिक भागीदारों को छांटने के लिए कॉन्ट्रैक्ट जारी कर दिया। रणनीतिक भागीदारों को मूल उपकरण विनिर्माताओं के साथ मिलकर देश में इन पनडुब्बियों के निर्माण का संयंत्र लगाने को कहा गया है। इस कदम का मकसद देश को पनडुब्बियों के डिजाइन और उत्पादन का वैश्विक केंद्र बनाना है।

देश में बनेगा अपाचे जैसा हेलिकॉप्टर
पीएम मोदी की महत्वाकांक्षी ‘मेक इन इंडिया’ योजना के तहत भारत में अपाचे जैसा हेलिकॉप्टर के विनिर्माण का रास्ता खुला है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) ने भारतीय सेना के लिए युद्धक हेलिकॉप्टर बनाने के मेगा प्रॉजेक्ट पर काम शुरू कर दिया है। एचएएल के मुताबिक 10 से 12 टन के ये हेलिकॉप्टर दुनिया के कुछ बेहतरीन हेलिकॉप्टर्स जैसे बोइंग के अपाचे की तरह आधुनिक और शक्तिशाली होंगे। एचएएल के प्रमुख आर माधवन ने कहा है कि जमीनी स्तर पर काम शुरू किया जा चुका है और 2027 तक इन्हें तैयार किया जाएगा। इस मेगा प्रॉजेक्ट का लक्ष्य आने वाले समय में सेना के तीनों अंगों के लिए 4 लाख करोड़ रुपये के सैन्य हेलिकॉप्टर्स के आयात को रोकना है। माधवन ने कहा कि डिजाइन, प्रोटोटाइप के उत्पादन पर 9,600 करोड़ रुपये खर्च होंगे। 

सेना के जवान अब पहनेंगे स्‍वदेशी बुलेट प्रूफ जैकेट
केंद्र सरकार ने सेना की जरूरतों को देखते हुए 1.86 लाख स्वदेशी बुलेट प्रूफ जैकेट खरीदने के लिए अनुबंध किया। सेना के लिए कारगर बुलेट प्रूफ जैकेटों की जरूरत को युद्ध क्षेत्र के लिए सफलतापूर्वक आवश्यक परीक्षण करने के बाद पूरा किया गया है। ‘भारत में बनाओ, भारत में बना खरीदो’ के रूप में इस मामले को रखा गया है। स्वदेशी बुलेट प्रूफ जैकेटें अत्याधुनिक हैं, जिनमें रक्षा का अतिरिक्त स्तर और कवरेज क्षेत्र है। श्रम-दक्षता की दृष्टि से डिजाइन की गई बुलेट प्रूफ जैकेटों में मॉड्यूलर कलपुर्जे हैं, जो लम्बी दूरी की गश्त से लेकर अधिक जोखिम वाले स्थानों में कार्य कर रहे सैनिकों को संरक्षण और लचीलापन प्रदान करते हैं। नई जैकेटें सैनिकों को युद्ध में पूरी सुरक्षा प्रदान करेंगी।

मेक इन इंडिया के तहत क्लाश्निकोव राइफल
मेक इन इंडिया के तहत अब दुनिया के सबसे घातक हथियारों में से एक क्लाश्निकोव राइफल एके 103 भारत में बनाए जाएंगे। असास्ट राइफॉल्स एके 47 दुनिया की सबसे कामयाब राइफल है। भारत और रूसी हथियार निर्माता कंपनी क्लाश्निकोव मिलकर एके 47 का उन्नत संस्करण एके 103 राइफल बनाएंगे। सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे भारत में बनाया जाएगा। इसे भारत से निर्यात भी किया जा सकता है।

इसके अलावा भारत हथियारों और रक्षा उपकरणों का निर्यात भी कर रहा है। डालते हैं एक नजर-

भारत शीर्ष 25 रक्षा उत्पादों के निर्यातक देशों की लिस्ट में शामिल

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘लोकल फॉर ग्लोबल’ का मंत्र अब अपना असर दिखा रहा है। भारत अपने रक्षा उपकरणों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता की तरफ अग्रसर होने के साथ ही बड़े निर्यातक के रूप में उभर रहा है। स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट 2020 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार (21 अक्टूबर, 2021) को बताया कि भारत अब रक्षा उत्पादों के निर्यात करने वाले शीर्ष 25 देशों की सूची में शामिल हो गया है। भारत रक्षा निर्यात में वैश्विक लीडर बने इसके लिए रक्षा मंत्रालय लगातार प्रयास कर रहा है।

18 देशों को बुलेटप्रूफ जैकेट निर्यात कर रहा भारत
भारत 18 देशों को बुलेटप्रूफ जैकेट निर्यात कर रहा है। 15 कंपनियों को बुलेटप्रूफ जैकेट बनाने के लिए लाइसेंस दिया गया है। घरेलू और निर्यात जरूरतों की पूर्ति के लिए देश में हर साल 10 लाख बुलेटप्रूफ जैकेट उत्पादन करने की क्षमता है। रक्षा क्षेत्र में ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने का ही नतीजा है कि आज दुनिया भर में भारत में बनी बुलेटप्रूफ जैकेट की मांग है। भारत की मानक संस्था ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (बीआईएस) के मुताबिक, बुलेटप्रूफ जैकेट खरीददारों में कई यूरोपीय देश भी शामिल हैं। अमेरिका, ब्रिटेन और जर्मनी के बाद भारत चौथा देश है, जो राष्ट्रीय मानकों पर ही अंतरराष्ट्रीय स्तर की बुलेटप्रूफ जैकेट बनाता है। भारत में बनी बुलेटप्रूफ जैकेट की खूबी है कि ये 360 डिग्री सुरक्षा के लिए जानी जाती है। 2018 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और नीति आयोग के निर्देश के बाद बीआईएस ने बुलेटप्रूफ जैकेट के लिए मानक तैयार किया था। मानक दिसंबर 2018 में प्रकाशित हुआ। अब सभी इसका पालन कर रहे हैं। मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत अब बुलेटप्रूफ जैकेट उत्पादन के लिए वैश्विक सुविधाएं और डिजाइनें हैं।

अर्मेनिया को बेचेगा 280 करोड़ रुपये का हथियार
अब तक हथियारों का आयात करने वाला भारत अब हथियारों का निर्यात कर रहा है। भारत ने रूस और पौलेंड की पछाड़ते हुए अर्मेनिया के साथ रक्षा सौदा किया। इस करार में भारत रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा विकसित और भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा निर्मित 40 मिलियन डॉलर (करीब 280 करोड़ रुपये) का हथियार अर्मेनिया को बेचेगा। इसमें ‘स्वाती वेपन लोकेटिंग रडार’ सिस्टम शामिल है। इन हथियारों का निर्माण ‘मेक इन इंडिया’ के तहत किया गया है। स्वाति वेपन लोकेटिंग रडार 50 किमी के रेंज में दुश्मन के हथ‍ियारों जैसे मोर्टार, शेल और रॉकेट तेज, स्वचालित और सटीक तरीके से पता लगा लेता है।

लाइटवेट एंटी-सबमरीन टॉरपीडो म्यांमार को किया गया निर्यात
लाइटवेट एंटी-सबमरीन शायना टॉरपीडो की पहली बैच को म्यांमार भेजा गया। एडवांस्ड लाइट टॉरपीडो (TAL) शायना भारत की पहली घरेलू रूप से निर्मित लाइटवेट एंटी-सबमरीन टॉरपीडो है। इसे DRDO के नौसेना विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशाला द्वारा विकसित किया गया है और इस टॉरपीडो का निर्माण भारत डायनेमिक्स लिमिटेड ने किया है। भारतीय हथियार उद्योग के लिए यह एक बड़ी उपलब्धि है। टीएएल शायना टॉरपीडो के पहले बैच को 37.9 मिलियन डॉलर के निर्यात सौदे के हिस्से के रूप में म्यांमार भेजा गया, जिस पर 2017 में हस्ताक्षर किए गए थे। इस आपूर्ति के साथ भारत और म्यांमार के बीच बढ़ते संबंधों में और मजबूती आने की उम्मीद है।

मिसाइलों का निर्यात
इसके साथ ही भारत अब दक्षिण पूर्व एशिया और खाड़ी के देशों को मिसाइलों का निर्यात करने जा रहा है। ब्रह्मोस एरोस्पेस के एचआर कोमोडर एसके अय्यर ने कहा कि कई दक्षिण पूर्व एशियाई देश हमारी मिसाइलों को खरीदने के लिए तत्पर हैं। इसके साथ ही हमारी मिसाइलों में खाड़ी के देश भी रुचि दिखा रहे हैं।

Leave a Reply