संयुक्त अरब अमीरात (यूएई-UAE) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान 19 जनवरी 2026 को भारत की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे। यह पिछले दस वर्षों में उनकी पांचवीं और राष्ट्रपति बनने के बाद तीसरी भारत यात्रा रही। खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद एयरपोर्ट पर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद के बीच हुई बातचीत में भारत-यूएई व्यापक रणनीतिक साझेदारी के हर पहलू पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं ने माना कि पिछले एक दशक में दोनों देशों के रिश्ते पहले से कहीं ज्यादा मजबूत और भरोसेमंद बने हैं। दोनों नेताओं ने हाल के वर्षों में यूएई के युवा नेतृत्व की भारत यात्राओं का जिक्र करते हुए कहा कि इससे द्विपक्षीय रिश्तों में पीढ़ीगत निरंतरता साफ दिखती है। अबू धाबी और दुबई के क्राउन प्रिंस की यात्राओं को उन्होंने भविष्य के लिए मजबूत नींव बताया।

व्यापार और निवेश को लेकर भी बड़ी बातें सामने आईं। 2022 में हुए सीईपीए समझौते के बाद द्विपक्षीय व्यापार में तेज बढ़ोतरी हुई है और वित्त वर्ष 2024-25 में यह 100 अरब डॉलर तक पहुंच गया। दोनों देशों ने 2032 तक इसे दोगुना कर 200 अरब डॉलर करने का लक्ष्य तय किया। एमएसएमई यानी छोटे और मध्यम उद्योगों को जोड़ने पर भी खास जोर दिया गया। भारत मार्ट, वर्चुअल ट्रेड कॉरिडोर और भारत-अफ्रीका सेतु जैसी पहलों को तेजी से लागू करने पर सहमति बनी, ताकि भारतीय और यूएई के छोटे कारोबारियों को नए बाजार मिल सकें।

निवेश के मोर्चे पर गुजरात के धोलेरा स्पेशल इन्वेस्टमेंट रीजन में यूएई की संभावित भागीदारी पर चर्चा हुई। इसमें एयरपोर्ट, पोर्ट, स्मार्ट टाउनशिप, रेलवे और एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं। प्रधानमंत्री ने यूएई के सॉवरेन वेल्थ फंड्स को 2026 में लॉन्च होने वाले नए इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में निवेश का न्योता भी दिया।

खाद्य सुरक्षा को लेकर दोनों देशों ने अपनी साझेदारी को और मजबूत करने का भरोसा जताया। टिकाऊ कृषि, नवाचार और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप के जरिए लंबे समय तक सुरक्षित सप्लाई चेन बनाने पर सहमति बनी। अंतरिक्ष क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने का फैसला हुआ। भारत और यूएई मिलकर एक इंटीग्रेटेड स्पेस इकोसिस्टम विकसित करेंगे, जिससे संयुक्त मिशन, स्टार्टअप्स और रोजगार के नए मौके पैदा होंगे।

तकनीक के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सुपरकंप्यूटिंग और डेटा सेंटर्स पर सहयोग को आगे बढ़ाया जाएगा। यूएई ने फरवरी 2026 में भारत में होने वाले एआई इम्पैक्ट समिट को समर्थन देने की बात भी कही। ऊर्जा साझेदारी को लेकर भी अहम फैसले हुए। एडीएनओसी गैस और एचपीसीएल के बीच एलएनजी सप्लाई का 10 साल का समझौता हुआ। इसके साथ ही उन्नत परमाणु ऊर्जा और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स पर मिलकर काम करने की संभावनाओं पर सहमति बनी।

डिजिटल और वित्तीय क्षेत्र में नेशनल पेमेंट प्लेटफॉर्म को जोड़ने पर काम होगा, ताकि दोनों देशों के बीच तेज और सस्ते क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट संभव हो सकें। सांस्कृतिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए अबू धाबी में ‘हाउस ऑफ इंडिया’ स्थापित करने का फैसला लिया गया। वहीं, लोथल स्थित नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स के लिए यूएई द्वारा कलाकृतियां देने का भी स्वागत किया गया।

शिक्षा के क्षेत्र में आईआईटी दिल्ली और आईआईएम अहमदाबाद के ऑफशोर कैंपस की सफलता को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी। छात्रों के आदान-प्रदान और डिजिलॉकर को यूएई प्लेटफॉर्म से जोड़ने पर भी जोर दिया गया। सुरक्षा और रक्षा सहयोग को रणनीतिक साझेदारी का मजबूत स्तंभ बताया गया। दोनों देशों ने आतंकवाद के हर रूप की कड़ी निंदा की और FATF के तहत सहयोग जारी रखने पर सहमति जताई।

वैश्विक मंचों पर भी दोनों देशों ने एक-दूसरे का समर्थन दोहराया। यूएई ने 2026 में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता को समर्थन दिया, जबकि भारत ने 2026 संयुक्त राष्ट्र जल सम्मेलन के लिए यूएई को समर्थन देने की बात कही। यात्रा के अंत में राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को शानदार स्वागत और मेहमाननवाजी के लिए धन्यवाद दिया। यह यात्रा भारत-यूएई रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने वाली साबित हुई।
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