प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 7-8 फरवरी 2026 की मलेशिया यात्रा ने दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी दोस्ती को एक नई दिशा दी है। मलेशिया के पीएम अनवर इब्राहिम के न्योते पर हुई प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा ने साफ कर दिया कि दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत का यह साथी अब और भी करीब आ गया है।

पुत्राजाया में हुई इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात में केवल औपचारिक बातें नहीं हुईं, बल्कि भविष्य का एक रोडमैप तैयार किया गया। दोनों नेताओं ने ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (CSP) पर मुहर लगाते हुए रक्षा, तकनीक और व्यापार जैसे अहम मोर्चों पर हाथ मिलाया है।

इस यात्रा की सबसे बड़ी बात रही तकनीक के क्षेत्र में सहयोग। अब भारत और मलेशिया मिलकर सेमीकंडक्टर की दुनिया में अपनी धाक जमाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके लिए दोनों देशों के बड़े संस्थानों के बीच करार हुआ है। इतना ही नहीं, अब मलेशिया जाने वाले भारतीय पर्यटकों और छात्रों के लिए लेनदेन आसान हो जाएगा। भारत के यूपीआई और मलेशिया के ‘पेनेट’ के बीच हुए समझौते से अब वहां मोबाइल से पेमेंट करना मुमकिन होगा। यह डिजिटल इंडिया की बढ़ती धमक का एक और सबूत है।

आर्थिक मोर्चे पर एक बड़ा फैसला लोकल करेंसी को लेकर हुआ है। अब भारत और मलेशिया के व्यापारी डॉलर के बजाय भारतीय रुपया और मलेशियाई रिंगिट में व्यापार कर सकेंगे। इससे न केवल कारोबार में आसानी होगी, बल्कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूती मिलेगी।

प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम ने भरोसा दिलाया है कि मलेशिया भारत को पाम ऑयल की सप्लाई जारी रखेगा। वहीं, पीएम मोदी ने मलेशियाई कंपनियों को भारत के बुनियादी ढांचे और हरित ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए आमंत्रित किया है।

सुरक्षा के मोर्चे पर दोनों देशों ने आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति दोहराई है। प्रधानमंत्री मोदी और पीएम इब्राहिम ने साफ कहा कि सीमा पार आतंकवाद बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 2026 में ही मलेशिया में एक बड़ा आतंकवाद-विरोधी सैन्य अभ्यास भी आयोजित किया जाएगा।

समुद्री सुरक्षा को लेकर भी दोनों देशों के बीच तालमेल बढ़ा है। आईएनएस सह्याद्री और आईएनएस संधायक जैसी भारतीय नौसेना की जहाजों की मलेशिया यात्रा ने यह साफ कर दिया है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र की शांति के लिए दोनों देश साथ खड़े हैं।

मलेशिया में रहने वाले भारतीय समुदाय को ध्यान में रखते हुए यूनिवर्सिटी मलाया में ‘तिरुवल्लुवर चेयर’ की स्थापना की गई है। साथ ही, मलेशियाई छात्रों के लिए विशेष छात्रवृत्ति का भी ऐलान हुआ। सेहत के क्षेत्र में अब मलेशिया के सरकारी अस्पतालों में भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का लाभ मिल सकेगा।

कूटनीति के लिहाज से यह यात्रा बेहद सफल रही। मलेशिया ने भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता का स्वागत किया है, वहीं भारत ने मलेशिया के ब्रिक्स का सदस्य बनने की इच्छा का समर्थन किया। दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की वकालत करते हुए भारत की स्थायी सदस्यता पर जोर दिया। भारत और मलेशिया ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही पीएम मोदी ने शानदार मेहमाननवाजी के लिए मलेशिया सरकार और जनता का शुक्रिया अदा किया और पीएम अनवर को भारत आने का न्योता दिया।









