भारत और फ्रांस के रिश्तों में एक ऐतिहासिक पन्ना जुड़ गया है। 17 फरवरी को मुंबई की धरती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने न केवल अपनी पुरानी दोस्ती को याद किया, बल्कि भविष्य के एक ऐसे रोडमैप की नींव रखी जो दुनिया की स्थिरता के लिए गेम-चेंजर साबित होने वाला है। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ कर दिया कि अब यह रिश्ता सिर्फ रक्षा सौदों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ‘स्पेशल ग्लोबल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप’ बन चुका है।

संबोधन की शुरुआत में प्रधानमंत्री मोदी काफी भावुक नजर आए। उन्होंने पिछले साल की अपनी मार्सेय यात्रा को याद करते हुए बताया कि कैसे वह शहर भारत की आजादी और वीरता का गवाह रहा है। उन्होंने कहा कि मार्सेय वही जगह है जहां प्रथम विश्व युद्ध में भारतीय सैनिकों ने कदम रखे थे और यही वह तट है जहां वीर सावरकर ने अंग्रेजों की कैद से भागने के लिए समुद्र में छलांग लगाई थी। उन्होंने कहा कि आज राष्ट्रपति मैक्रों का स्वागत ‘गेटवे ऑफ इंडिया’ यानी मुंबई में करना एक सुखद संयोग है।

इस मुलाकात की सबसे बड़ी उपलब्धि डिफेंस सेक्टर में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की उड़ान रही। प्रधानमंत्री मोदी ने घोषणा की कि भारत में अब एक ऐसी हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन का उद्घाटन हुआ है, जो दुनिया का इकलौता ऐसा हेलीकॉप्टर बनाएगी जो माउंट एवरेस्ट की चोटियों तक उड़ान भर सके। खास बात यह है कि ये हेलीकॉप्टर न केवल भारत की जरूरतों को पूरा करेंगे, बल्कि यहीं से पूरी दुनिया को एक्सपोर्ट भी किए जाएंगे।

आर्थिक मोर्चे पर दोनों देशों ने व्यापार की राह में आने वाले कांटों को साफ कर दिया है। प्रधानमंत्री ने बताया कि यूरोपीय संघ के साथ हुए ऐतिहासिक फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के बाद अब भारत और फ्रांस के बीच निवेश को बढ़ावा देने के लिए ‘डबल टैक्सेशन’ को खत्म करने पर सहमति बनी है। इससे दोनों देशों की कंपनियों और नागरिकों को दोहरे टैक्स की मार नहीं झेलनी पड़ेगी, जिससे व्यापार और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे।

प्रधानमंत्री ने साल 2026 को इनोवेशन के नाम कर दिया है। उन्होंने ‘इंडिया-फ्रांस ईयर ऑफ इनोवेशन’ लॉन्च करते हुए कहा कि इनोवेशन अकेले बंद कमरों में नहीं, बल्कि मिल-जुलकर काम करने से आता है। अब दोनों देश डिफेंस, क्लीन एनर्जी, स्पेस और एआई जैसे क्षेत्रों में अपने स्टार्टअप्स और रिसर्चर्स को जोड़ेंगे। इसके लिए हेल्थ और डिजिटल साइंस में ‘इंडो-फ्रेंच सेंटर’ भी स्थापित किए जा रहे हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि आज जब दुनिया अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है, तब भारत और फ्रांस की भागीदारी स्थिरता की एक बड़ी ताकत है। चाहे यूक्रेन का युद्ध हो, पश्चिम एशिया का संकट हो या इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ता तनाव, दोनों देश शांति और कूटनीति के पक्ष में खड़े हैं। उन्होंने आतंकवाद को जड़ से मिटाने की अपनी साझा प्रतिबद्धता को भी दोहराया।

प्रधानमंत्री ने एलान किया कि फ्रांस के लोगों को भारतीय संस्कृति के करीब लाने के लिए वहां जल्द ही ‘स्वामी विवेकानंद कल्चरल सेंटर’ खोला जाएगा। साथ ही, लोथल के नेशनल मैरीटाइम हेरिटेज कॉम्प्लेक्स में भी फ्रांस तकनीकी सहयोग करेगा, जो हमारी प्राचीन समुद्री विरासत को संजोने में मदद करेगा।

अपने संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने राष्ट्रपति मैक्रों की प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि भारत-फ्रांस की यह साझेदारी अब सीमाओं से परे है। यह गहरे समुद्र से लेकर ऊंचे पहाड़ों तक हर चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। यह एक ऐसी पार्टनरशिप है जो केवल दो देशों का नहीं, बल्कि पूरी मानवता का भविष्य संवारने का दम रखती है।










