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NCERT किताबों में किस प्रकार लेफ्टिस्टों ने उगला जहर, Gems Of Books का देखिए दिलचस्प खुलासा

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जब से स्वतंत्रता मिली है तब से इतिहास, राजनीति, समाजशास्त्र और साहित्य के माध्यम से देश के लोगों की सनातनी और मौलिक सोच को बदलने की प्रवृत्ति हावी रही है। स्वतंत्रता के बाद सत्ता पर काबिज सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस ने शिक्षण संस्थानों में वामपंथियों को घुसाकर इसे बल दिया है। वामपंथी विचार के पोषक तथाकथित बुद्धिवादियों ने एनसीईआरटी की किताबों के माध्यम से देशवासियों के मन में सनातन सोच के खिलाफ भ्रांतियां फैलाई है और धर्मनिरपेक्षता के नाम पर एक खास धर्म का प्रचार किया है। एनसीईआरटी ने अपनी किताबों में किस प्रकार का जहर उगला है उसका खुलासा जेम्स ऑफ बुक्स नाम का एक ट्विटर हैंडल ने किया है। देखिए किस प्रकार शिक्षा के नाम पर एनसीईआरटी बच्चों से लेकर किशोर तक के दिमाग में हिंदुओं के खिलाफ जहर भर रहा है।

एनसीईआरटी ने छठी कक्षा के लिए प्रकाशित हिंदी की किताब में भारत के आराध्य श्री राम के खिलाफ किस प्रकार का घृणा फैला रहा है।

12वी कक्षा के लिए प्रकाशित राजनीति शास्त्र की किताब में एनसीईआरटी ने मुस्लिम धर्म को हिंदू से बेहतर बताया है।

 

दुनिया जानती है कि भारत में अधिकांश हिंदू परिवार अंडों से परहेज करते हैं, फिर भी एनसीईआरटी अपने टेक्स्टबुक में उसे प्रोमोट करता है।

एनसीईआरटी योजनावद्ध तरीके से हमारी भाषा को खत्म कर रहा है।

उर्दू की अलग टेक्स्टबुक होने के बावजूद एनसीईआरटी हिंदी टेक्स्टबुक में उर्दू जवान की कहानी पढाता है।

एनसीईआरटी की अधिकांश किताबें धार्मिक एजेंडा से भरी पड़ी हैं।

एनसीईआरटी हमेशा से हिंदुओं के प्रति कृपण और मुसलमानों के प्रति उदार रवैया दिखाया है

एनसीईआरटी कभी भी उदाहरण के रूप में प्राचीण भारत के हिंदू गौरव का उल्लेख नहीं करता।

एनसीईआरटी ने कभी भी उर्दू के अपने टेक्स्टबुक में हिंदुओं के नाम का जिक्र नहीं करता।

एनसीईआरटी ने बच्चों की किताबों में हिंदू राजाओं को धर्मभीरू और मुस्लिम राजाओं को विज्ञान समर्थक बताया है।

एनसीईआरटी अपनी किताबों में शुरू से ही मुस्लिम राजाओं को नेक और हिंदू राजाओं को क्रूर बताता रहा है।

इतिहास और साहित्य ही नहीं कक्षा तीन और चार के गणित की किताबों के माध्यम से भी एनसीईआरटी ने कुतुबमिनार और ताजमहल जैसे इस्लामिक जगहों को प्रमोट करता रहा है।

एनसीईआरटी ने कक्षा चार के गणित की किताब में मुर्शीद कुली खान के मकबरे की चर्चा की है लेकिन बच्चे को यह नहीं बताया कि कुली खान का जन्म असल में सूर्य नारायण मिश्र के रूप में हुआ था।

एनसीईआरटी ने अपनी किताबों में कई बार हिंदुओं को पिछड़ा बताया है लेकिन एक बार भी सच्चर कमेटी की रिपोर्ट का जिक्र नहीं किया है कि असल में मुस्लिम समाज पिछड़ा है।

एनसीआरटी ने हमेशा ही ताजमहल और फतेहपुर सिकरी के विवादित होने के बावजूद इस्लामिक स्थापत्य के प्रति दिवानगी दिखाई है।

उर्दूवुड ने हमेशा नैरेटिव सेट किया है और एनसीईआरटी ने उसे ज्यों का त्यों अपनाया है।

एनसीईआरटी की शिक्षा भेदभावपूर्ण है, कक्षा एक के बच्चे के सामने में मौलाना साहब को शिक्षित और कक्षा दो के बच्चे के सामने पंडितजी को हसोड़ बताया जाता है।

गाय के प्रति हमारे देश की भावना जगजाहिर है फिर भी एनसीईआरटी अपनी पुस्तक में गाय के साथ मरियल शब्द जोड़ती रही है।

कक्षा एक के बच्चों के बारे में द्विअर्थी कविता लिखकर उनके दिमाग में हीन भावना भर रहा है एनसीईआरटी।

एनसीईआरटी साल 2005 से दूसरी कक्षा के बच्चों को पढ़ाता आ रहा है कि पटाखे जलाने से शोर होने के कारण दिवाली बुरा पर्व है, लेकिन ईद पर निरीह जानवर का हलाल करना उसके लिए अच्छा है।

एनसीईआरटी मुस्लिम वर्ग को तुष्ट करने के लिए कक्षा एक के बच्चे के दिमाग में करुणा की जगह क्रूरता भर रहा है।

पगड़ी भारत का आदर और मान का प्रतीक है लेकिन एनसीईआरटी उसके बारे में बच्चे की भावना को दुषित करता है।

एनसीईआरटी हमेशा से राजपूतों को अपमानित करना अपनी शान समझता है।

एनसीईआरटी कक्षा एक के बच्चे को किसी वृद्धा को बुढ़िया कहना इसलिए सिखाता है क्योंकि इस्लाम में किसी महिला के प्रति मां का भाव रखना हराम है।

एनसीईआरटी बच्चों में सामाजिक विभेद पैदा करता है, हिंदू लड़की का मुस्लिम लड़के के प्रति स्नेह दिखाने से कभी गुरेज नहीं करता लेकिर मुस्लिम लड़की का हिंदू लड़के के प्रति प्यार को हमेशा छिपाता है।

जबकि अंबेडकर ने स्पष्ट कहा है कि गैर मुस्लिम महिलाएं मुस्लिम पुरुष के पास कभी सुरक्षित नहीं रह सकती है।

एनसीईआरटी के हिंदी का उर्दूकरण करने का एजेंडा और द्विअर्थी कविता प्रकाशित करना मार्क्सवाद के संस्थापक कार्ल मार्क्स के विचार से प्रेरित है।

उर्दूवुड के एजेंडे के तहत संस्कृत की जड़ को खत्म कर हिंदी को उर्दू में बदलने पर तुला है एनसीईआरटी। 

गेंद और बल्ला जैसी हिंदी कविता के माध्यम से दोयम स्तरीय हिंदी परोस रहा है एनसीईआरटी।

अपने पब्लिकेशन टीम के मुखिया एम शिराज अनवर के नेतृत्व में आम की टोकरी जैसी द्विअर्थी कविता प्रकाशित कर एनसीईआरटी ने तो अपनी सारी हदें पार कर दी है।

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