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मैसूर सिटी कॉर्पोरेशन के चुनाव में बीजेपी की ऐतिहासिक जीत, पहली बार मेयर पद पर बीजेपी का कब्जा, सुनंदा पलनेत्रा बनीं मेयर

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी लगातार ऐसी सफलताएं अर्जित कर रही है, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। आज बीजेपी के पक्ष में ऐसा माहौल बन गया है कि सभी विरोधी समीकरण ध्वस्त होते नजर आ रहे हैं। कर्नाटक में मैसूर शहर के मेयर पद के लिए हुए चुनाव में ऐसा ही देखने को मिला, जब कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन की जीत सुनिश्चित नजर आ रही थी और समीकरण बीजेपी के पक्ष में नहीं था। फिर भी बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की और पहली बार मेयर का पद हासिल किया। 

बीजेपी की इस जीत के साथ शहर की नई मेयर बीजेपी की सुनंदा पलनेत्रा बन गई हैं। 65 सदस्यीय एमसीसी में बीजेपी उम्मीदवार सुनंदा पलनेत्रा को 26 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार शांताकुमारी को 22 वोट मिले। मैसूर सिटी कॉर्पोरेशन (एमसीसी) में बीजेपी 23 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है। जबकि कांग्रेस के पास 19 पार्षद और जेडीएस के पास 17 पार्षद हैं। बहुजन समाज पार्टी से एक और पांच निर्दलीय पार्षद हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, आखिरी मिनट तक ऐसी अटकलें थीं कि जेडी (एस) और कांग्रेस एमसीसी में अपना गठबंधन जारी रखेंगे और बीजेपी को जीतना मुश्किल होगा। कांग्रेस ने छह महीने के लिए मेयर पद की मांग की थी, जबकि शेष दो साल के लिए जेडी (एस) को यह पद दिया जाना था। लेकिन दोनों के बीच सहमति नहीं बन पाई और गठबंधन टूट गया।

इसी बीच कांग्रेस और जेडीएस के बीच मेयर पद को लेकर हुई खींचतान ने बीजेपी को अवसर का लाभ उठाने का मौका दे दिया। बीजेपी नेताओं ने भी इसमें देरी नहीं की और जेडी (एस) नेता और पूर्व मंत्री एसआर महेश से चुनाव में अपने लिए समर्थन मांग लिया। इससे सियासी माहौल बीजेपी के पाले में चला गया और पिछली बार मेयर बनने से चूंकी सुनंदा पलनेत्रा ने इस बार मेयर का पद हासिल कर लिया।

गौरतलब है कि जब से एमसीसी अस्तित्व में आया है, तब से कोई भी बीजेपी सदस्य मेयर नहीं बना था। पहली बार बीजेपी इस पद को हासिल करने में कामयाब रही। इससे पहले जेडी (एस) की रुक्मिणी मेड गौड़ा शहर की मेयर थीं। उन्हें कर्नाटक हाई कोर्ट ने झूठा संपत्ति हलफनामा पेश करने पर अयोग्य घोषित कर दिया था, जिससे मेयर पद खाली हो गया था।

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