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‘हुमायूं हम आएंगे, बाबरी फिर गिराएंगे’ से हिंदुओं की हुंकार, बंगाल में बाबरी के जिन्न से ममता की मुश्किलें चौतरफा बढ़ीं

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले जिस तरह से ध्रुवीकरण की जमीन तैयार हो रही है, उसने ममता बनर्जी की रातों की नींद उड़ाकर रख दी है। विश्व हिंदू रक्षा परिषद के पोस्टर—“हुमायूं हम आएंगे, बाबरी फिर गिराएंगे” के साथ ही हिंदुओं ने हुंकार भरी है कि पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद को नहीं बनने दिया जाएगा। दरअसल, बाबरी विवाद ने ममता बनर्जी की राजनीति की कमजोर नस पकड़ ली है। विधानसभा चुनाव में मुद्दा बनने से यह सियासी आग उनकी सत्ता को झुलसा सकती है। बंगाल का चुनाव अब सिर्फ सत्ता का संघर्ष नहीं रहा, बल्कि यह पहचान, आस्था और राजनीतिक भविष्य की लड़ाई बन चुका है। लखनऊ में विश्व हिंदू रक्षा परिषद का बाबरी को लेकर नारा सिर्फ एक संगठन का उग्र बयान नहीं, बल्कि यह जागृत हो चुके हिंदुओं के ज्वालामुखी का संकेत है, जो मुर्शिदाबाद से निकलकर पूरे पश्चिम बंगाल राजनीति को झुलसाने की तैयारी में है। बाबरी मस्जिद विवाद का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ चुका है और इसका सबसे बड़ा नकारात्मक असर तृणमूल कांग्रेस पर पर पड़ता दिख रहा है। क्योंकि तुष्टिकरण की राजनीति के भंवर में फंसी ममता बनर्जी से अब बाबरी की जिन्न ना निगला जा रहा है और ना ही उगला जा रहा है।लखनऊ में मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाने पर भारी विरोध
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से विश्व हिंदू रक्षा परिषद ने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा में बन रही एक मस्जिद का विरोध करने के लिए ‘मुर्शिदाबाद चलो’ का नारा दिया। इस मस्जिद की आधारशिला टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने 6 दिसंबर 2024 को रखी थी, जिसे उन्होंने “बाबरी मस्जिद की तर्ज पर” बनाने का दावा किया था। लखनऊ में संगठन के कार्यकर्ताओं ने हाथों में फावड़ा, कुल्हाड़ी और भगवा झंडा लेकर प्रदर्शन किया और “बंटोगे तो कटोगे” आदि नारे लगाए। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे बाबर के नाम पर किसी भी नई संरचना का निर्माण नहीं होने देंगे। 10 फरवरी (मंगलवार) को जब संगठन के कार्यकर्ता लखनऊ से मुर्शिदाबाद के लिए रवाना होने वाले थे, तब उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें रोक दिया। विश्व हिंदू रक्षा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोपाल राय को उनके आवास पर नजरबंद कर दिया। क्योंकि उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार नहीं चाहती कि कानून-व्यवस्था में किसी तरह का खलल पड़े। यह कार्रवाई बताती है कि मामला कितना संवेदनशील हो चुका है।

मुर्शिदाबाद में बाबरी-शैली मस्जिद ने आग में घी डाला
मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद के निर्माण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। यही मस्जिद निर्माण कार्य में 1000 से 1200 धर्मगुरुओं द्वारा कुरान की तिलावत भी की गई। इसके साथ ही इस कथित बाबरी मस्जिद का विरोध भी तेज हो गया है। यह विवाद अब केवल स्थानीय नहीं रहा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन चुका है। जिस तरह हिंदू संगठन सड़क पर उतरने को तैयार हैं, योगी और ओवैसी आदि नेता मैदान में हैं और ममता बनर्जी असहज चुप्पी साधे बैठी हैं। इससे साफ संकेत मिलता है कि यह मुद्दा बंगाल चुनाव में निर्णायक भूमिका निभा सकता है। मुर्शिदाबाद के बेलडांगा इलाके में सस्पेंडेड टीएमसी विधायक हुमायूं कबीर द्वारा बाबरी मस्जिद के नाम से मस्जिद की नींव रखने की घोषणा ने सियासत को विस्फोटक मोड़ दे दिया। कबीर ने कहा कि यह महज धार्मिक पहल नहीं, बल्कि सुनियोजित राजनीतिक प्रयोग है। यह मामला केवल राजनीतिक नहीं रहा, समाज के विभिन्न वर्गों ने इसे अलग-अलग रुख से लिया है। हिन्दू संगठनों ने इसे ‘अवैध’ और ‘संविधान के अनुरूप नहीं’ करार दिया है और बुलंद आवाज़ों में यह मांग उठी है कि सरकार कबीर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करे।हुमायूं के 100 सीटों पर लड़ने के ऐलान से ममता पर संकट
टीएमसी से निलंबित हुमायूं कबीर अब खुद को स्वतंत्र राजनीतिक ताकत बनाने की कोशिश में हैं। नई पार्टी बनाने और 100 से ज्यादा सीटों पर उम्मीदवार उतारने के ऐलान ने ममता बनर्जी के लिए अंदरूनी संकट खड़ा कर दिया है। टीएमसी चाहे औपचारिक रूप से उनसे दूरी बनाए, लेकिन यह विवाद ममता सरकार की प्रशासनिक कमजोरी और राजनीतिक असमंजस को उजागर करता है। इसके अलावा कबीर यदि किसी गठबंधन में चुनाव लड़े तो वह तृणमूल कांग्रेस के ही कोर वोट बैंक में सैंध लगाएगा। अब सवाल यह है कि क्या बंगाल का चुनाव रोज़गार, उद्योग, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे मुद्दों पर होगा या फिर बाबरी मस्जिद जैसे भावनात्मक विषयों पर होगा। ममता सरकार के दौरान यह विवाद खड़ा होना, उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।बाबरी विवाद: भाजपा के लिए अवसर, टीएमसी के लिए संकट
भाजपा इस पूरे घटनाक्रम को ममता सरकार की विफलता के तौर पर पेश कर रही है। पार्टी का दावा है कि बंगाल में तुष्टिकरण की राजनीति ने सामाजिक संतुलन बिगाड़ दिया है। बाबरी विवाद भाजपा को हिंदू मतों के ध्रुवीकरण का अवसर दे रहा है, जबकि टीएमसी का पारंपरिक समीकरण दरकता दिख रहा है। विधानसभा चुनाव में ओवैसी और हुमायूं कबीर जैसे चेहरे मुस्लिम मतदाताओं को अलग दिशा में मोड़ सकते हैं। इससे टीएमसी का मुस्लिम वोट बैंक भी कमजोर हो सकता है। यही वजह है कि यह विवाद ममता बनर्जी के लिए दोहरी मार साबित हो सकता है यानी हिंदू नाराज और मुस्लिम बंटे हुए। यह पूरा घटनाक्रम बताता है कि बंगाल धीरे-धीरे धार्मिक राजनीति की प्रयोगशाला बनता जा रहा है।

राजनीतिक क्षति: ममता बनर्जी के लिए क्या है खतरा?
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीति पर यह विवाद गंभीर प्रभाव डाल रहा है। टीएमसी की तरफ से इसकी शुरुआत को पार्टी की आधिकारिक नीति नहीं बताते हुए दूरी बनाई गई है। इससे यह संकेत मिलता है कि पार्टी को इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट रूप से जनता तक पहुंचाने में कठिनाई हो रही है। हुमायूं कबीर के सार्वजनिक आरोपों और टिप्पणिओं ने टीएमसी नेतृत्व को अंदरूनी विवाद में उलझाया है। इसके अलावा, ओवैसी जैसे राष्ट्रीय नेताओं के बंगाल आने की खबरें राजनीतिक समीकरणों को और जटिल बना रही हैं। इससे यह उदाहरण स्थापित हो रहा है कि चुनावों में धार्मिक और सांप्रदायिक मुद्दों को उघाड़ने से स्थिति अस्थिर हो सकती है। राजनीतिक समीकरणों का निचोड़ यह है कि बाबरी मस्जिद विवाद वोट बैंक राजनीति का एक नया मोड़ है। हिंदू मतदाताओं के बीच स्पष्टता की उम्मीदें पैदा होती दिख रही हैं। दरअसल, अब तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से कोई स्पष्ट और मजबूत बयान नहीं आया है। यह चुप्पी बताती है कि वह दो पाटों के बीच फंसी हुई हैं—एक तरफ मुस्लिम वोट बैंक, दूसरी तरफ नाराज हिंदू मतदाता। यही असमंजस उनके लिए सबसे बड़ा राजनीतिक खतरा बनता जा रहा है।कयामत के दिन तक भी बाबरी ढांचा नहीं बनेगा- सीएम योगी
उधर उत्तर प्रदेश से बाबरी मस्जिद विवाद का जिन्न एक बार फिर फूट पड़ा है। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से बाबरी मस्जिद विवाद यहां गरमा गया है। मामले में यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी मैदान में उतर गए हैं। सीएम योगी ने मुद्दे पर बड़ा हमला बोलते हुए कहा है कि बाबरी ढांचे का पुनर्निर्माण कभी भी नहीं होगा, कयामत तक बाबरी ढांचा नहीं बनेगा। बाराबंकी के श्री राम जानकी मंदिर में आयोजित दशम श्री हनुमान विराट महायज्ञ में सीएम योगी ने कहा कि यह सरकार जो बोलती है, करके दिखाती है। यह जितना करती है, उतना ही बोलती है। हमने कहा था रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे। सीएम योगी ने सवालिया लहजे में जनसमूह से पूछा कि क्या आज कोई संदेह है? हम आज फिर इस बात को कह रहे हैं कि कयामत के दिन तक भी बाबरी ढांचा नहीं बनेगा। उन्होंने कहा कि कयामत का दिन तो कभी आना नहीं है, इसलिए बाबरी ढांचे का पुनर्निर्माण भी कभी होना नहीं है। सीएम योगी कहा कि कयामत के दिन के आने का जो लोग सपना देख रहे हैं, ऐसे ही सड़ गल जाएंगे। कयामत का वह दिन कभी आने वाला नहीं है। जिन्हें सपना देखना है, देखते रहें। हम अपनी विरासत को सम्मान देते हुए, भारत की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने का कार्य करते रहेंगे।मुस्लिम वोटों के लिए औवेसी और हुमायूं कबीर के मिलने की अटकलें
सीएम योगी ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि कानून तोड़ने वालों के लिए प्रदेश में कोई जगह नहीं है। अगर कायदे में रहोगे तो फायदे में रहोगे। कयामत के दिन के लिए मत जियो। हिंदुस्तान में कायदे से रहना सीखो। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि अगर कोई भी यहां कानून तोड़ने की कोशिश करेगा तो उसके लिए कानून के तहत ही कार्रवाई होगी। ऐसे लोगों का रास्ता जहन्नुम की तरफ ही जाता है। कानून तोड़कर अगर कोई जन्नत जाने का सपना देख रहा है तो उसका सपना कभी पूरा नहीं होने वाला है। हैदाराबाद वाले भड़काऊ भाईजान ओवैसी भी मुर्शिदाबाद जाने की सोच रहे हैं। यहां पर औवेसी और हुमायूं कबीर मिलकर पश्चिम बंगाल में मुस्लिम वोटों का ध्रुवीकरण करने की रुपरेखा बना सकते हैं। अयोध्या में दफ्न हो चुकी बाबरी को मुर्शिदाबाद में जिंदा कर हुमायूं कबीर ने एक ऐसे विवाद को जन्म दे दिया है जिसके नासूर बनने की पूरी आशंका है। लखनऊ के पोस्टर इसकी तस्दीक कर रहे हैं कि भविष्य में यह बड़ा मुद्दा बनने वाला है।

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