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सरकार का खनन माफिया से गठजोड़: ब्रज की 84 कोस परिक्रमा मार्ग में खनन के खिलाफ सीएम से लेकर प्रियंका गांधी तक मिले साधु-संत, 551 दिन में सुनवाई नहीं हुई तो साधु ने खुद को आग लगाई

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राजस्थान की ब्रज 84 कोस परिक्रमा मार्ग में आदिबद्री और कनकाचल पर्वतों में हो रहे अवैध खनन की जानकारी के बावजूद गहलोत सरकार 551 दिन तक सोती रही। अवैध खनन को रुकवाने के लिए यूपी के चुनाव के दौरान साधु-संत कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी से मिले थे। गहलोत-प्रियंका से गुहार लगाने के सिर्फ कोरे आश्वासन ही मिले, लेकिन अवैध खनन नहीं रुका। न ही कनकाचल और आदि बद्री क्षेत्र को वन क्षेत्र में शामिल करने का मार्ग प्रशस्त हुआ। आखिरकार 551 दिन से धरना दे रहे साधु-संतों के सब्र का बांध टूट गया। इधर, अफवाह रोकने के लिए जिले की 5 तहसीलों डीग, नगर, कामां, पहाड़ी और सीकरी में इंटरनेट दूसरे दिन भी बंद रहा।

आस्था से खिलवाड़ से नाराज साधु आग लगाकर राधे-राधे कहते दौड़े, 80% झुलसे
राजस्थान के भरतपुर जिले की डीग, कामां तहसील का इलाका 84 कोस परिक्रमा मार्ग में पड़ता है। साधु-संतों का कहना है कि यह धार्मिक आस्था से जुड़ी जगह है, यहां हिंदू धर्म के लोग परिक्रमा करते हैं, इसलिए यहां सभी तरह के खनन बंद होने चाहिए। इसी मांग को लेकर वे धरना दे रहे थे। डीग के पसोपा में पुलिस-प्रशासन 31 घंटे से मोबाइल टावर पर चढ़े बाबा नारायण दास को नीचे उतरने के लिए मना रहे थे, तभी पशुपति नाथ मंदिर के महंत विजयदास बाबा (60) ने विरोध-स्वरूप खुद को आग लगा ली। वे राधे-राधे कहते हुए दौड़ने लगे। पुलिस ने जब तक आग बुझाई, तब तक बाबा 80% झुलस गए और उन्हें इलाज के लिए जयपुर रेफर कर दिया गया।

पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों और खननकर्ताओं में मजबूत गठजोड़ से नहीं हुई कार्रवाई

अवैध खनन रोकने के लिए आत्महदाह करने वाले ब्रज के संत विजयदास महाराज का अब दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज चल रहा है। उनकी हालत नाजुक है। जयपुर के सवाई मान सिंह अस्पताल से ग्रीन कॉरिडोर बनाकर उन्हें एंबुलेंस से सड़क मार्ग से दिल्ली भेजा गया है। वैसे देखा जाए तो सही मायने में अवैध खनन की यह पूरी आग खान विभाग की लगाई हुई है। खननकर्ताओ और अफसरों का गठजोड़ इतना प्रभावी है कि खनन रुकवाने के लिए साधु संत 551 दिन से आंदोलनरत हैं। पहले कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी और बाद में खुद सीएम अशोक गहलोत से भी मिले। लेकिन यहां न खनन रुका न इसे वन क्षेत्र घोषित किया गया।

बाबा के आत्मदाह के बाद राजस्थान के खनन मंत्री प्रमोद जैन भाया बैकफुट पर आए
बाबा के आत्मदाह के बाद राजस्थान के खनन मंत्री प्रमोद जैन भाया बैकफुट पर आ गए। मंत्री ने कहा कि संत जिन खानों को बंद करने की मांग कर रहे हैं, वे लीगल हैं। फिर भी उनकी लीज शिफ्ट करने पर विचार किया जाएगा। बाबा के आत्मदाह से दबाव में आए पर्यटन मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने 15 दिन में कनकांचल व आदिबद्री को वनक्षेत्र घोषित करने व दो महीने में इन क्षेत्रों में सभी लीज को शिफ्ट करने का आश्वासन देना पड़ा। इसके बाद पसोपा में मान मंदिर सेवा संस्थान बरसाना के कार्यकारी अध्यक्ष राधाकांत शास्त्री ने धरना खत्म करने का ऐलान किया।

राजस्थान सरकार के डेढ़ दशक पहले की रोक के बावजूद धड़ल्ले से चल रहा खनन
साधु-संतों का दावा है कि कनकांचल और आदि बद्री पर्वत धार्मिक आस्था का प्रतीक हैं। आदि में भगवान बद्री के दर्शन होते हैं, जबकि कनकांचल पर्वत में कई पौराणिक अवशेष हैं। इनकी श्रद्धालु परिक्रमा करते हैं। इस जगह पर चारों धाम हैं। राजस्थान सरकार ने 27 जनवरी 2005 को आदेश निकाला था कि ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग के दोनों तरफ 500 मीटर में खनन नहीं किया जाएगा। यह मार्ग भरतपुर जिले के डीग, कामां तहसीलों में पड़ता है। गहलोत सरकार का दावा था कि धार्मिक स्थलों और पहाड़ों में खनन नहीं हो रहा है। हालांकि सच यह है कि परिक्रमा मार्ग पर खनन चलता रहा। साधु-संतों का दावा है कि 500 मीटर के अंदर भी माइनिंग हो रही है और पवित्र मानी जाने वाली पहाड़ियों को नुकसान हो रहा है।

 

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