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मोदी सरकार और जनता के लिए अच्छी खबर, खुदरा और थोक महंगाई दर में गिरावट, अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर संकेत

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कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से इस समय पूरा विश्व मंदी और महंगाई से जूझ रहा है। अमेरिका जैसे सबसे विकसित अर्थव्यवस्था वाले देश भी महंगाई को रोक पाने में नाकाम साबित हो रहे हैं। ऐसे में भारत ने महंगाई पर लगाम लगाकर आर्थिक मोर्चे पर बड़ी सफलता हासिल की है। मोदी सरकार की आर्थिक नीतियों, अर्थव्यवस्था में आई तेजी और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में आई कमी से महंगाई दर में खासी गिरावट देखने को मिली है। इससे मोदी सरकार और देश की जनता को बड़ी राहत मिली है।

खाद्य उत्पादों के दाम में कमी, खुदरा महंगाई दर में गिरावट

दरअसल सितंबर की तुलना में अक्टूबर में महंगाई दर में गिरावट दर्ज की गई है। सितंबर में महंगाई दर 7.11 प्रतिशत थी। वहीं, अक्टूबर में महंगाई दर गिरकर 6.11 प्रतिशत तक पहुंच गई। खाद्य उत्पादों के दाम कम होने से अक्टूबर महीने में खुदरा महंगाई घटकर 6.77 प्रतिशत पर आ गई। सितंबर महीने में खुदरा महंगाई 7.41 प्रतिशत थी। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के मुताबिक यह गिरावट तीन माह बाद देखने को मिली है।

खुदरा के साथ थोक महंगाई दर में भी गिरावट

खुदरा महंगाई दर में गिरावट के साथ थोक महंगाई दर में भी गिरावट दर्ज की गई है। सोमवार (14 नवंबर, 2022) को ही थोक महंगाई के आंकड़े भी जारी किए गए। 19 माह में थोक महंगाई दर में गिरावट दर्ज की गई है। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर माह में थोक मूल्य सूचकांक आधारित महंगाई दर घटकर 8.39 प्रतिशत पर आ गई है। सितंबर में यह 10.7 प्रतिशत पर थी। सितंबर में थोक महंगाई दोहरे अंक में थी, लेकिन अक्टूबर में गिरकर एक अंक में आ गई। 

थोक महंगाई दर में 2.31 प्रतिशत की गिरावट

थोक महंगाई दर में 2.31 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। मुख्य रूप से मशीनरी और उपकरण, टेक्सटाइल, बेसिक मेटल और मिनिरल ऑयल और अन्य वस्तुओं की कीमतों में आई गिरावट की वजह से अक्टूबर के महीने में थोक महंगाई दर घटी है। मैन्यूफैक्चर्ड प्रोडक्ट की महंगाई दर घटकर 4.42 प्रतिशत पर आ गई है। सितंबर के महीने में ये 6.34 प्रतिशत पर रही थी। फ्यूल एंड पावर सेगमेंट में महंगाई दर कम हुई है और ये 32.61 प्रतिशत से घटकर 23.17 प्रतिशत पर आ गई है। सितंबर में सब्जियों की महंगाई दर 39.66 प्रतिशत पर थी। अक्टूबर के महीने में ये घटकर 17.61 प्रतिशत पर आ गई। 

मुद्रास्फीति में गिरावट की वजह अनुकूल आधार प्रभाव

मुद्रास्फीति में गिरावट की वजह अनुकूल आधार प्रभाव को माना जा रहा है।उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा महंगाई इस साल जनवरी से ही छह प्रतिशत की संतोषजनक सीमा से ऊपर बनी हुई है। मोदी सरकार ने केंद्रीय बैंक को खुदरा महंगाई दो प्रतिशत कम के साथ चार प्रतिशत के दायरे में रखने की जिम्मेदारी दी हुई है। आरबीआई मौद्रिक नीति के बारे में निर्णय करते समय मुख्य रूप से खुदरा महंगाई पर ही गौर करता है। 

आम आदमी को राहत,अर्थव्यवस्था के लिए अच्छे संकेत

आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि खुदरा महंगाई दर कम होने का सीधा असर आम जनता पर पड़ता है। इससे तेल, दाल और डेली की जरूरत की चीजें सस्ती होने लगती हैं। जो आम जनता के जेब पर पड़ रहे बोझ को कम करती है। यह किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत माना जाता है। महंगाई से मिली राहत के लिए मोदी सरकार की नीतियों की तारीफ की जा रही है। महंगाई के मुद्दे पर केंद्र की मोदी सरकार की घेराबंदी में जुटीे विपक्षी दलों को गहरा झटका लगा है। 

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