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स्वर्णिम इतिहास: अटल सरकार ने ‘ऑपरेशन शक्ति’ से पोखरण में पांच परमाणु बमों का सफल परीक्षण कर दुनिया को दिखाई थी भारत की ताकत, जानिए क्या थे गोपनीय मिशन के कोड वर्ड्स

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बीजेपी की मोदी सरकार अब ऐसे कदम उठा रही है, जिनके पूरे होने के बारे में कभी कल्पना करना भी मुश्किल था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘राष्ट्र प्रथम’ के संकल्प के चलते ही बीजेपी सरकार जम्मू कश्मीर से आर्टिकल 370 और ट्रिपल तलाक जैसे देश के सबसे बड़े मुद्दों को हल कर दिया है। अयोध्या में सदियों के संघर्ष के बाद भव्य-दिव्य राम मंदिर बना रही है। बीजेपी की ही सरकार ने 24 साल पहले भी ठीक आज के ही दिन (11 मई को) ऐसा साहसिक कदम उठाया था, जिसकी दुनियाभर में किसी ने कल्पना तक नहीं की थी। इस अति गोपनीय ऑपरेशन के दौरान दिल्ली के ऑफिस से बातचीत कोड वर्ड्स में होती थी, ताकि इसकी भनक न लग पाए। इसी के तहत तब परमाणु बम के दस्ते को ताजमहल कहा गया, तो व्हाइट हाउस और कुंभकरण भी प्रोजेक्ट में शामिल कुछ कोड वर्ड्स थे। डॉ. कलाम को कर्नल पृथ्वीराज कहा गया। वे कभी ग्रुप में टेस्ट साइट पर नहीं जाते थे। अकेले जाते ताकि कोई शक न कर सके। 10 मई की रात को योजना को अंतिम रूप देते हुए ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन शक्ति’ नाम दिया गया।

परमाणु परीक्षण करते ही अमेरिका सहित कई देशों ने भारत पर लगाए थे आर्थिक प्रतिबंध
अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने 11 और 13 मई को एक ऐसा कारनामा कर दिखाया कि पूरा विश्व ही भौंचक्का रह गया।  राजस्थान की पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में खेतोलाई गांव के पास कुल पांच परमाणु परीक्षण किए गए। यह सब इतना गोपनीय तरीके से हुआ कि पूरी दुनिया के परमाणु संयंत्रों और सैन्य गतिविधियों पर सैटेलाइट से निगरानी करने वाला अमेरिका को भी कुछ पता नहीं चला। परमाणु परीक्षण के लिए राजस्थान के पोखरण चुना गया, क्योंकि यह रेतीले रेगिस्तान में जैसलमेर से 110 किमी दूर जैसलमेर-जोधपुर मार्ग पर आबादी क्षेत्र से काफी दूर था। 11 मई 1998 को पोखरण में भारत ने परमाणु परीक्षण किया तो दुनिया दंग रह गई। तब इजरायल को छोड़कर दुनिया के सारे देश भारत के खिलाफ उठ खड़े हुए। अमेरिका सहित कई देशों ने तो भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे।

जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान का दिया अटलजी ने दिया नारा
परीक्षण के बाद वाजपेयी और एपीजे अब्दुल कलाम ने टेस्ट के सफल होने की घोषणा की थी। कलाम ने एक इंटरव्यू में बताया कि उस समय भारत पर अंतरराष्ट्रीय दबाव काफी ज्यादा था, लेकिन तत्कालीन पीएम वाजपेयी ने तय किया था कि वह आगे बढ़कर परीक्षण करेंगे। इसके साथ ही भारत एक परमाणु ताकत बना। वाजपेयी ने नारा दिया था- जय जवान, जय किसान और जय विज्ञान। इसी वजह से इस दिन को हर साल नेशनल टेक्नोलॉजी डे के तौर पर मनाया जाता है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की अगुआई में यह मिशन कुछ इस तरह से अंजाम दिया गया कि अमेरिका समेत पूरी दुनिया को इसकी भनक तक नहीं लगी। दरअसल, अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA भारत पर नजर रखे हुए थी और उसने पोखरण पर निगरानी रखने के लिए 4 सैटेलाइट लगाए थे। भारत ने CIA और उसके सैटेलाइटों को चकमा देते हुए परमाणु परीक्षण कर दिया।

अति गोपनीय मिशन ‘ऑपरेशन शक्ति’ के लिए डॉ. कलाम बने कर्नल पृथ्वीराज
• ऑपरेशन के दौरान दिल्ली के ऑफिस की बातचीत कोड वर्ड्स में होती थी। परमाणु बम के दस्ते को ताजमहल कहा गया, तो व्हाइट हाउस और कुंभकरण भी प्रोजेक्ट में शामिल कुछ कोड वर्ड्स थे।
• वैज्ञानिकों ने इस मिशन को पूरा करने के लिए रेगिस्तान में बड़े कुएं खोदे। उनमें परमाणु बम रखे गए। कुओं पर बालू के पहाड़ बनाए गए जिन पर मोटे-मोटे तार निकले हुए थे। 20 वैज्ञानिकों का समूह पूरे घटनाक्रम पर नजर रखे हुए था।
• प्रोजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिक आपस में कोड लैंग्वेज में बात करते थे। सब वैज्ञानिकों ने एक-दूसरे के लिए कोड नेम रखे थे। यह इतने प्रचलित हो गए थे कि कई वैज्ञानिक तो एक-दूसरे के वास्तविक नाम तक भूल गए थे।
• सेना की वर्दी में वैज्ञानिकों की ड्यूटी लगाई गई थी, ताकि विदेशी खुफिया एजेंसियों को लगे कि सेना के जवान ही ड्यूटी पर हैं। मिसाइलमैन अब्दुल कलाम भी सेना की वर्दी में थे। बाद में आई तस्वीरों से यह सामने आया।
• 11 मई को तड़के करीब 3 बजे परमाणु बमों को सेना के 4 ट्रकों के जरिए ट्रांसफर किया गया। इससे पहले इसे मुंबई से भारतीय वायु सेना के प्लेन से जैसलमेर बेस लाया गया था।
• पोखरण रेंज में 5 परमाणु बम के परीक्षणों से भारत पहला ऐसा परमाणु शक्ति संपन्न देश बन गया, जिसने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए थे।
• रिपोर्ट्स के मुताबिक डॉ. कलाम को कर्नल पृथ्वीराज कहा गया। वे कभी ग्रुप में टेस्ट साइट पर नहीं जाते थे। अकेले जाते ताकि कोई शक न कर सके। 10 मई की रात को योजना को अंतिम रूप देते हुए ऑपरेशन को ‘ऑपरेशन शक्ति’ नाम दिया गया।

11 मई की कुछ प्रमुख घटनाएं जो देश-दुनिया में हैं चर्चित

• 2000 में पापुलेशन वॉच के मुताबिक भारत की जनसंख्या एक अरब पार पहुंची थी।
• 1998 में यूरोप की एकल मुद्रा यूरो का पहला सिक्का बनाया गया था।
• 1995 में  न्यूयार्क में 170 से अधिक देशों ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर किए थे।
• 1988 में आज के ही दिन फ्रांस ने परमाणु परीक्षण किया था।
• 1965 में बांग्लादेश 11 मई को आए चक्रवाती तूफान में 17 हजार लोगों की मौत हो गई थी।
• 1951 में राष्ट्रपति राजेन्द्र प्रसाद ने नवनिर्मित सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन किया था।
• 1784 में अंग्रेजों और मैसूर के शासक टीपू सुल्तान के बीच संधि आज के ही दिन हुई थी।
• 1833 में अमेरिका से क्यूबेक जा रहे जहाज लेडी ऑफ द लेक के हिमखंड से टकराकर अटलांटिक महासागर में डूबने से 215 लोगों की मौत हो गई थी।

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