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कोरोना काल में भी विदेशी निवेशकों ने जताया भरोसा, 2020-21 के पहले आठ माह में एफडीआई 22 प्रतिशत बढ़ा

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विदेशी निवेशकों ने कोरोना काल में भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताया है। वित्त वर्ष 2020-21 के पहले 8 महीने यानी अप्रैल से नवंबर के बीच भारत में 58.37 अरब डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया। यह वर्ष 2019-20 की इसी अवधि की तुलना में 22 प्रतिशत ज्यादा है। उस समय 47.67 अरब डॉलर का एफडीआई आया था। यह राशि किसी भी एक वित्त वर्ष के पहले 8 महीने में देश में आए एफडीआई से ज्यादा है। अप्रैल से नवंबर, 2020 के दौरान 43.85अरब अमेरिकी डॉलर का एफडीआई इक्विटी आया। यह भी पहले 8 महीनों में सबसे अधिक निवेश है। यह वर्ष 2019-20 की इसी अवधि की तुलना में 37 प्रतिशत है। सरकार द्वारा एफडीआई नीति में सुधार, निवेश प्रक्रिया सरल और व्यापार में सुगमता करने जैसे उठाए गए कदमों का ही परिणाम है कि देश में एफडीआई प्रवाह बढ़ गया है।

वर्ष 2020 के दौरान उभरते बाजारों के बीच देश को मिला सबसे ज्यादा एफआईआई निवेश
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत बनी हुई है। भारतीय शेयर बाजारों में 2020 के दौरान विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) से 23 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश मिला जो कि उभरते बाजारों में सबसे ज्यादा है। साल 2020 में जनवरी से दिसंबर तक एफआईआई ने भारतीय इक्विटी बाजार में कुल 1.6 लाख करोड़ रुपए का शुद्ध निवेश किया। यह लगातार दूसरा साल है जबकि उभरते बाजारों के बीच भारतीय शेयर बाजारों में सबसे ज्यादा एफआईआई निवेश हुआ। 2019 की तुलना में यह 63 हजार करोड़ रुपए ज्यादा है। उस साल में कुल निवेश 1.01 लाख करोड़ रुपए का निवेश किया गया था। जानकारों के अनुसार आने वाले वर्षों में मजबूत आर्थिक सुधार और आय में वृद्धि की उम्मीद ने भारत में एफआईआई को आकर्षित किया है।

दिसंबर, 2020 में एफपीआई ने किया 68,558 करोड़ का रिकॉर्ड निवेश
विदेशी निवेशकों ने कोरोना महामारी के दौरान दिसंबर में भारत में 68,558 करोड़ रुपये निवेश किया। डिपॉजिटरी आंकड़ों के अनुसार,  विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने दिसंबर में शेयरों में रिकार्ड 62,016 करोड़ रुपये, जबकि बांड में 6,542 करोड़ रुपये निवेश किए। नवंबर में एफपीआई का कुल शुद्ध निवेश 62,951 करोड़ रुपये था। भारत कोरोना काल में भी आर्थिक मोर्चे पर कई सुधारों के साथ अन्य उभरते बाजारों की तुलना में निवेश का बड़ा हिस्सा आकर्षित करने में सफल रहा है।

आइए एक नजर डालते हैं देश की अर्थव्यवस्था एक बार फिर से किस प्रकार पटरी पर लौटने लगी है…

सेंसेक्स पहली बार 50 हजार के पार
21 जनवरी को शेयर बाजार ने अपने पिछले सारे रिकार्ड तोड़ दिए। सेंसेक्स के 50 हजार का स्तर पार करते ही भारतीय शेयर बाजार ने इतिहास रच दिया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के सेंसेक्स ने पहली बार 50 हजार का आंकड़ा पार किया। शेयर बाजार के खुलने के साथ ही सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 270 अंक के साथ 50070 अंक पर पहुंच गया। नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के साथ ही सेंसेक्स ने जून 2014 में पहली बार 25 हजार के स्तर को छुआ था। मोदी राज में पिछले 6 साल में 25 हजार से 50 हजार तक के सफर तय कर सेंसेक्स दो गुना हो गया है। पूर्ववर्ती यूपीए सरकार के दौरान अप्रैल 2014 में सेंसेक्स करीब 22 हजार के आस-पास रहता था।

देश का विदेशी मुद्रा भंडार रिकॉर्ड ऊंचाई पर
मोदी सरकार की नीतियों के कारण विदेशी मुद्रा भंडार ने एक बार फिर रिकॉर्ड बनाया है। देश का विदेशी मुद्रा भंडार आठ जनवरी को खत्म हफ्ते में 758 मिलियन डॉलर बढ़कर 586.082 अरब डॉलर हो गया है। यह अबतक का सबसे ऊंचा स्तर है। रिजर्व बैंक के ताजा आंकड़ों के अनुसार इस दौरान विदेशी मुद्रा भंडार का महत्वपूर्ण हिस्सा यानी विदेशी मुद्रा एसेट्स 150 मिलियन डॉलर बढ़कर 541.791 अरब डॉलर पर पहुंच गया। इस सप्ताह में स्वर्ण भंडार में 568 मिलियन डॉलर की बढ़ोतरी हुई और यह 37.594 अरब डॉलर मूल्य का हो गया। विदेशी मुद्रा भंडार ने 5 जून, 2020 को खत्म हुए हफ्ते में पहली बार 500 अरब डॉलर के स्तर को पार किया था। इसके पहले यह आठ सितंबर 2017 को पहली बार 400 अरब डॉलर का आंकड़ा पार किया था। जबकि यूपीए शासन काल के दौरान 2014 में विदेशी मुद्रा भंडार 311 अरब डॉलर के करीब था।

अगले साल चीन को पीछे छोड़ देगा भारत- आईएमएफ
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने ‘विश्व आर्थिक परिदृश्य’ पर जारी अपनी ताजा रिपोर्ट में कहा है कि भारत अगले साल चीन को पीछे छोड़ देगा। आईएमएफ ने कहा कि कोरोना के कारण चालू वित्त वर्ष में भारत की अर्थव्यवस्था में गिरावट का अंदेशा है, लेकिन अगले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था लंबी छलांग लगाने में सक्षम होगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने कहा है कि 2021 में भारतीय अर्थव्यवस्था में 8.8 प्रतिशत की जोरदार बढ़त दर्ज हो सकती है और यह चीन को पीछे छोड़ते हुए सबसे तेजी से बढ़ने वाली उभरती अर्थव्यवस्था का दर्जा फिर से हासिल कर लेगी। चीन के 2021 में 8.2 प्रतिशत वृद्धि दर हासिल करने का अनुमान है।

सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा भारत- आईएमएफ
दुनिया भर में कोरोना संकट के बीच भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने इसके पहले हाल ही में भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी बात कही। आईएमएफ ने कहा कि भारत में अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर सबसे तेज रहेगी। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की ओर से जारी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी के चलते 2020 का साल वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए काफी खराब रहने वाला है, लेकिन इसके बाद भी भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था बना रहेगा। आइएमएफ के मुताबिक, इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था में 1930 के महामंदी के बाद की सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिलेगी।

आईएमएफ को भरोसा, वैश्विक अर्थव्यवस्था की अगुवाई करेगा भारत
अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने कहा कि भारत की अगुवाई में दक्षिण एशिया वैश्विक वृद्धि का केंद्र बनने की दिशा में बढ़ रहा है और 2040 तक वृद्धि में इसका अकेले एक-तिहाई योगदान हो सकता है। आईएमएफ के हालिया शोध दस्तावेज में कहा गया कि बुनियादी ढांचे में सुधार और युवा कार्यबल का सफलतापूर्वक लाभ उठाकर यह 2040 तक वैश्विक वृद्धि में एक तिहाई योगदान दे सकता है। आईएमएफ की एशिया एवं प्रशांत विभाग की उप निदेशक एनी मेरी गुलडे वोल्फ ने कहा कि हम दक्षिण एशिया को वैश्विक वृद्धि केंद्र के रूप में आगे बढ़ता हुए देख रहे हैं।

ईपीएफओ में योगदान देने वाली कंपनियां बढ़ीं
ईपीएफओ में योगदान बढ़ने का मतलब होता है कि कंपनियां नए लोगों को नौकरी पर रख रही हैं, यानि कंपनियां वृद्धि करती है, तभी लोगों को रोजगार देती है। आंकड़ों के मुताबिक जुलाई के महीने में ईपीएफओ में योगदान देने वाली कंपनियों की संख्या में इजाफा हुआ है, जो इस बात का संकेत है कि कंपनयों की स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है। नियमों के मुताबिक 20 से अधिक कर्मचारी वाली कंपनियों को मूल वेतन का 12 फीसदी योगदान कर्मचारी के ईपीएफओ खाते में आशंदान के तौर पर करना पड़ता है। ईपीएफओ के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में व्यक्तिगत अंशधारकों की संख्या 3.8 करोड़ रह गई थी, जो अब अगस्त में बढ़कर 4.6 करोड़ पर पहुंच गई है।

मोबाइल कंपनियों ने निवेश और रोजगार के अवसर बढ़े
कोरोना काल में मोदी सरकार की पॉलिसी ने मोबाइल कंपनियों के लिए भारत में अवसरों के दरवाजे खोल दिए हैं। यही वजह है कि मेक इन इंडिया अभियान में शामिल होने के लिए नामी मोबाइल कंपनियों में निवेश करने और रोजगार देने की होड़ लग गई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक दूरसंचार मंत्रालय को 22 मोबाइल कंपनियों ने आवेदन दिया है। इसके तहत तीन लाख प्रत्यक्ष और नौ लाख अप्रत्यक्ष रोजगार मिलेंगे। एप्पल के लिए फोन बनाने वाली ताइवान की व्रिस्टॉन ने बेंगलुरु स्थित कंपनी के नारासापुरा प्लांट में नए आईफोन का उत्पादन शुरू कर दिया है। इस प्लांट में कंपनी ने करीब 2,900 करोड़ रुपये का निवेश किया है। उसकी इस नए प्लांट में करीब 10 हजार कर्मचारियों को रखने की योजना है। इसी तरह अन्य कंपनयों ने भी नौकरियां देने की योजना बनाई है जिसके तहत साल के अंत तक कम से कम 50 हजार लोगों को नौकरियां मिलेंगी।

2021-22 में 9.5 प्रतिशत रह सकती है विकास दर-फिच
रेटिंग एजेंसी फिच ने कहा है कि वित्त वर्ष 2021-22 में भारत की विकास दर 9.5 प्रतिशत रह सकती है। फिच रेटिंग्स ने हालांकि कोरोना संकट के कारण चालू वित्त वर्ष 2020-21 में भारतीय अर्थव्यवस्था के पांच प्रतिशत सिकुड़ने का अनुमान जताया है। लेकिन फिच ने कहा कि कोरोना संकट के बाद देश की जीडीपी वृद्धि दर के वापस पटरी पर लौटने की उम्मीद है। इसके अगले साल 9.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि करने की उम्मीद है।

स्टैंडर्ड ऐंड पूअर्स ने जताया भारत पर भरोसा
रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड ऐंड पूअर्स ने (S&P) ने भारत की सॉवरिन रेटिंग को BBB माइनस पर बरकरार रखा है। S&P ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर विश्वास जताते हुए आउटलुक को स्थिर रखा है। स्टैंडर्ड ऐंड पूअर्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि फिलहाल ग्रोथ रेट पर दबाव है, लेकिन अगले साल 2021 से इसमें सुधार दिखने को मिलेगा। फिच ने कहा है कि वित्त वर्ष 2021-22 के लिए विकास दर का 8.5 प्रतिशत रह सकती है।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक वेतन वृद्धि भारत में होगी
प्रधानमंत्री मोदी की आर्थिक नीतियों से देश की इकोनॉमी और कारोबारी माहौल लगातार बेहतर हो रहा है। यही वजह है कि जहां कंपनियां मुनाफा कमा रही हैं, वहीं कर्मचारियों की सैलरी भी निरंतर बढ़ रही है। प्रमुख वैश्विक एडवाइजरी, ब्रोकिंग और सोल्यूशंस कंपनी विलिस टॉवर्स वॉटसन की ताजा तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2020 में कर्मचारियों के वेतन में रिकॉर्ड 10 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी होगी। रिपोर्ट में ये भी बताया गया है कि ये वेतन वृद्धि पूरे एशिया-पैसिफिक में सबसे अधिक होगी। विलिस टॉवर्स वॉटसन ने अपनी यह रिपोर्ट विभन्न औद्योगिक क्षेत्रों और कंपनियों की प्रगति का अध्ययन और सर्वे करने के बाद तैयार की है। रिपोर्ट के मुताबिक इंडोनेशिया में वेतन वृद्धि 8 प्रतिशत, चीन में 6.5 प्रतिशत, फिलीपींस में 6 प्रतिशत और हांगकांग व सिंगापुर में 4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। जाहिर है कि मोदी सरकार की सफल आर्थिक नीतियों की वजह से ही इस वर्ष भारत में औसत वेतन वृद्धि 9 प्रतिशत से अधिक रही।

NPA के मामलों में सरकार को मिली बड़ी कामयाबी
रिजर्व बैंक आफ इंडिया की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक बैंकों का ग्रॉस एनपीए घटकर 9.1 फीसदी पर आ गया है। यह एक साल पहले 11.2 फीसदी पर था। रिपोर्ट के अनुसार बैंकों के फंसे कर्ज के बारे में जल्द पता चलने और उसका जल्द समाधान होने से एनपीए को नियंत्रित करने में मदद मिली है। रिपोर्ट में कहा गया है कि शुरूआती कठिनाइयों के बाद इन्सॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड (IBC) बैंकिंग सिस्टम का पूरा माहौल बदलने वाला कदम साबित हो रहा है। पुराने फंसे कर्ज की रिकवरी में सुधार आ रहा है और इसके परिणामस्वरूप, संभावित निवेश चक्र में जो स्थिरता बनी हुई थी, उसमें सुगमता आने लगी है।

बेहतर हुआ कारोबारी माहौल
पीएम मोदी ने सत्ता संभालते ही विभिन्न क्षेत्रों में विकास की गति तेज की और देश में बेहतर कारोबारी माहौल बनाने की दिशा में भी काम करना शुरू किया। इसी प्रयास के अंतर्गत ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ नीति देश में कारोबार को गति देने के लिए एक बड़ी पहल है। इसके तहत बड़े, छोटे, मझोले और सूक्ष्म सुधारों सहित कुल 7,000 उपाय (सुधार) किए गए हैं। सबसे खास यह है कि केंद्र और राज्य सहकारी संघवाद की संकल्पना को साकार रूप दिया गया है।

पारदर्शी नीतियां, परिवर्तनकारी परिणाम
कोयला ब्लॉक और दूरसंचार स्पेक्ट्रम की सफल नीलामी प्रक्रिया अपनाई गई। इस प्रक्रिया से कोयला खदानों (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 2015 के तहत 82 कोयला ब्लॉकों के पारदर्शी आवंटन के तहत 3.94 लाख करोड़ रुपये से अधिक की आय हुई।

जीएसटी ने बदली दुनिया की सोच
जीएसटी, बैंक्रप्सी कोड, ऑनलाइन ईएसआइसी और ईपीएफओ पंजीकरण जैसे कदमों कारोबारी माहौल को और भी बेहतर किया है। खास तौर पर ‘वन नेशन, वन टैक्स’ यानि GST ने सभी आशंकाओं को खारिज कर दिया है। व्यापारियों और उपभोक्ताओं को दर्जनों करों के मकड़जाल से मुक्त कर एक कर के दायरे में लाया गया।

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