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मोदी सरकार की किसान हितैषी योजनाओं से आया नया सवेरा, बड़े काम की हैं ये योजनाएं

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने आठ साल के कार्यकाल में किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं। ये कृषि हितैषी योजनाएं जहां किसानों की वास्तविक शक्ति बन गई है वहीं उनके जीवन में खुशहाली और एक नया सवेरा आया है। किसानों की आय दोगुना करने के लक्ष्य को लेकर चल रहे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कृषि सुधार के मामले में पूर्ववर्ती सरकारों की तुलना में ऐतिहासिक काम किया है। भारत में आबादी का बड़ा हिस्सा कृषि पर निर्भर करता है। देश की जीडीपी (GDP) में कृषि का हिस्सा 18% का है। ऐसे में किसानों के लिए शुरू की गई योजनाओं से जहां देश की अर्थव्यवस्था मजबूत हो रही है वहीं किसानों के घर-परिवार में भी खुशहाली से रौनक आया है।

पीएम किसान सम्मान निधि योजना

पीएम मोदी ने इस योजना की औपचारिक रूप से शुरुआत 24 फरवरी, 2019 को यूपी के गोरखपुर में एक समारोह में की थी। देश भर के सभी खेतिहर किसानों के परिवारों को सहायता प्रदान करके किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई थी, ताकि उनकी कृषि और संबद्ध गतिविधियों के साथ-साथ घरेलू व्यय की आवश्यकताओं को पूरा किया जा सके। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत सरकार प्रत्येक वर्ष करोड़ों किसानों के खाते में 6 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि जमा करती है। इस तरह सरकार द्वारा सालभर में किसानों के खाते में कुल 6 हजार रुपए भेजे जाते हैं। दरअसल, सभी किसान जिनके पास 2 हेक्टेयर से कम खेती योग्य भूमि है वह योजना का लाभ उठा सकते हैं। इसका लाभ देशभर के करोड़ों किसानों को हो रहा है। इस योजना को देश के छोटे और सीमांत किसानो को वित्तीय सहायता पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा आरम्भ की गयी है। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 11.3 करोड़ किसानों के खाते में 1.82 लाख करोड़ रुपये सीधे हस्तांतरित किये जा चुके हैं।

पीएम किसान सम्मान निधि योजना हेल्पलाइन नंबर

पीएम किसान सम्मान निधि योजना हेल्पलाइन नंबर की सुविधा केंद्र सरकार द्वारा जारी कर दी गयी है। इस हेल्पलाइन नंबर की सहायता से देश के किसान फण्ड ट्रांसफर सम्बन्धी पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और अगर किसानो के बैंक अकाउंट में पैसा नहीं आ रहा है तो उसकी भी शिकायत कर सकते हैं। देश के जो छोटे व सीमांत किसान पीएम किसान योजना के तहत पंजीकृत है वह Helpline Number पर संपर्क करके अपने पैसों की पूरी जानकरी प्राप्त कर सकते हैं। पीएम किसान सम्मान निधि सुधार विकल्प के माध्यम से आप आवेदन पत्र में हुए सभी त्रुटियों को आसानी से दूर कर सकते हैं।

पीएम किसान मानधन योजना

पीएम नरेंद्र मोदी ने 12 सितंबर 2019 को झारखंड के रांची से प्रधान मंत्री किसान मानधन योजना की शुरुआत की। इस स्कीम के तहत किसान के 60 वर्ष के होने के बाद उन्हें 3,000 रुपये मासिक पेंशन का मिलता है। इस योजना के तहत आपको 18 से 40 वर्ष की उम्र के बीच में आवेदन करना पड़ता है। 18 वर्ष की उम्र में आपको हर महीने 55 रुपये का प्रीमियम देना पड़ता है। इस योजना के अंतर्गत देश के छोटे और सीमांत किसानो को बुढ़ापे में जीवन व्यतीत करने के लिए सरकार की तरफ से पेंशन प्रदान की जाएगी। प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना के अंतर्गत देश के किसानों को 60 वर्ष की आयु के बाद बुढ़ापे में अच्छे से जीवन यापन करने के लिए सरकार द्वारा प्रतिमाह 3000 रूपये की पेंशन धनराशि प्रदान की जाएगी। इस योजना के अंतर्गत लाभार्थियों द्वारा 50 % प्रीमियम का अनुदान किया जायेगा और बाकि 50% प्रीमियम का अनुदान सरकार द्वारा किया जायेगा। देश के जो इच्छुक लाभार्थी इस योजना के तहत आवेदन करना चाहते है तो वह ऑनलाइन ऑफिसियल वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं तथा ऑफलाइन जनसेवा केंद्र आदि दोनों तरीके से आवेदन कर सकते हैं।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 13 जनवरी 2016 को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) का अनावरण किया। यह योजना उन किसानों पर प्रीमियम का बोझ कम करने में मदद करेगी जो अपनी खेती के लिए ऋण लेते हैं और खराब मौसम से उनकी रक्षा भी करेगी। किसानों की फसल का बीमा करने के लिए सरकार द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की शुरुआत की गई थी। इस योजना के जरिए किसानों की फसल को बारिश, बाढ़, आंधी, तूफान, भूकंप आदि प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान पर बीमा कवर मिलता है। इस योजना के तहत देश के किसानो की फसलों को सूखा और बाढ़ आने पर होने वाले नुकसान का बीमा केंद्र सरकार द्वारा प्रदान किया जायेगा। PMFBY Yojana में प्राकृतिक आपदाओं के कारण बर्बाद हुई फसलों का बीमा किसानों को उनके सीधा बैंक अकाउंट में पंहुचा दिया जायेगा। इस योजना के अंतर्गत देश के किसानो 2 लाख रूपये तक का फसल बीमा प्रदना किया जायेगा। देश के जो इच्छुक किसान इस योजना के तहत आवेदन करना चाहते हैं तो उन्हें योजना की ऑफिसियल वेबसाइट पर जाना होगा। केंद्र सरकार द्वारा इस योजना के तहत 8800 करोड़ रूपये का खर्च किया जायेगा।

प्रधानमंत्री कुसुम योजना(फ्री सोलर पैनल योजना)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री सोलर पैनल योजना की शुरुआत किसानों के लिए 1 फ़रवरी 2020 को शुरू करने की घोषणा की। इस योजना के माध्यम से पूरे देश में 20 लाख किसान भाइयों तक फ्री सोलर पैनल योजना का लाभ पहुंचाने का लक्ष्य है। भारत सरकार द्वारा इस योजना के ज़रिये देश के किसानों के खेतों की सिंचाई के लिए सोलर पैनल से चलने वाले सिचाई पम्प उपलब्ध कराये जायेंगे। इस योजना के तहत किसानों को खेती करने में आसानी होगी और उनकी आय में भी वृद्धि होगी। इन सोलर पैनल की सहायता से किसान खेत में लगे सोलर प्लांट से उत्पन्न बिजली को विभिन्न बिजली कंपनियों को बेच कर अतिरिक्त आय के रूप में रु 6000 तक पा सकेंगे। Free Solar Penal Scheme को कुसुम योजना के नाम से भी जाना जाता है। किसान सोलर सिंचाई पंप स्थापित करके पेट्रोलियम ईंधन की लागत को समाप्त कर सकते हैं। इस योजना के तहत सरकार ने आने वाले 10 साल की अवधि के लिए 48000 करोड़ रूपये का बजट आवंटित किया है। देश के जो किसान सिंचाई पम्पों को डीज़ल या पेट्रोल की मदद से चलाते हैं अब उन पंपों को इस योजना के तहत सौर ऊर्जा से चलाया जायेगा। इस योजना के पहले चरण में देश के 1 .75 लाख पंप जो डीजल और पेट्रोल से चलते हैं उन्हें सोलर पैनल की सहायता से चलाने का लक्ष्य ऱखा गया है।

ऑपरेशन ग्रीन योजना

किसानों के हित में ऑपरेशन ग्रीन का शुभारंभ उत्तर प्रदेश में 1 जुलाई 2001 को किया गया। कोरोना के बाद अर्थव्यवस्था में सुस्ती और खाने पीने से लेकर सभी चीजों के दाम बढ़ने के कारण दिन भर मेहनत करके खेती करने वाले किसानों को उनके फल, सब्जी की सही कीमत नहीं मिल पा रही है। सरकार ने किसानों को आर्थिक मंदी से बचाने के लिए ऑपरेशन ग्रीन शुरू किया। शुरू में ऑपरेशन ग्रीन में टमाटर (Tomato), प्याज (Onion) एवं आलू (Potato) को रखा गया था। अब इसमें 18 फल और सब्जी को जोड़ दिया गया है। फलों में केला, कीवी, अमरुद, आम, संतरा, पपीता, लीची, अनार, कटहल एवं अनानास को शामिल किया गया। इस योजना का लाभ बृहद पैमाने पर किसानों को दिया जा रहा है जिसमें 22 नए कृषि उत्पादों को शामिल करने का ऐलान किया गया है। मॉनसून या फिर प्राकृतिक आपदा की वजह से जिन किसानों की फसल खराब हो गई है या उन्हें किसी तरह की क्षति पहुंची है तो उन्हें इस योजना के तहत सहायता दी जाएगी। इस योजना का सबसे बड़ा लाभ किसानों को यह प्राप्त होगा कि उन्हें अपनी कोई भी फसल कम कीमत पर बेचना नहीं पड़ेगा। देश में आलू, टमाटर और प्याज के उत्पादन को बढ़ाने के लिए और किसानों की आय में दुगनी बढ़ोतरी करने के लिए सरकार ने इस योजना को साल 2022 तक के दिशा निर्देशों पर लागू कर दिया है।

ऑपरेशन ग्रीन के अंतर्गत मिलेगा 50% का अनुदान

ऑपरेशन ग्रीन के तहत अब सरकार किसानों को सब्जी, फल के परिवहन और भंडारण के लिए 50 प्रतिशन की सब्सिडी देगी। किसान अब अपनी फसल, फल, सब्जी को एक जगह से दूसरे जगह बेचने के लिए अगर लेकर जाते हैं तो किसान अब अपनी फसल को कम खर्चे में दूसरी जगह बेचने ले जा सकते हैं, जिससे उन्हें अधिक मुनाफा होगा। इसके साथ ही जिन फसलों का भंडारण करना है उन्हें शीतगृह भण्डारण में फसल रखने के लिए 50 प्रतिशत का भी अनुदान दिया जायेगा। शीतगृह भण्डारण बनाने के लिए 50 % का खर्चा सरकार उठाएगी।

पीएम मत्स्य सम्पदा योजना

सितंबर 2020 को पीएम मत्स्य संपदा योजना की शुरुआत की गई थी। इसे मछली पालन के क्षेत्र में अब तक की चलाई जाने वाली योजनाओं में सबसे बड़ी योजनाओं में गिना जाता है। इसके तहत किसानों को मछलीपालन के लिए ऋण और निशुल्क प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। भारत में किसानों के बीच मछली पालन का व्यवसाय बेहद तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। सरकार भी किसानों को इस क्षेत्र की तरफ रुख करने के लिए लगातार प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर पीएम मत्स्य संपदा योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत मछली पालन का व्यवसाय शुरू करने के लिए सब्सिडी प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत अनुसूचित जाति और महिलाओं को मछली पालन का व्यवसाय शुरू करने के लिए 60 प्रतिशत अनुदान दिया जाता है वहीं अन्य सभी को 40 प्रतिशत तक की सब्सिडी प्रदान की जाती है। इस योजना के अंतर्गत देश के सभी मत्स्य पालक और किसान आवेदन कर सकते हैं। पीएम मत्स्य संपदा योजना के तहत मछली पालक क्रेडिट कार्ड बनवा कर इससे 1.60 लाख का लोन बिना गारंटी के ले सकते हैं। इसके अलावा इस क्रेडिट कार्ड से अधिकतम 3 लाख रुपए तक ऋण लिया जा सकता है। किसान क्रेडिट कार्ड पर लोन लेने पर अन्य ऋणों के मुकाबले कम ब्याज देना होता है। मछली पालन को हमेशा फायदे का व्यवसाय माना जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इस योजना के तहत कम लागत में किसान अधिक मुनाफा कमा सकता है। जितने बड़े हेक्टेयर में आप इस व्यवसाय की शुरुआत करेंगे मुनाफा उतना ही ज्यादा होगा।

e-NAM – राष्ट्रीय कृषि बाजार योजना

इस योजना की शुरुआत मोदी सरकार ने 14 अप्रैल, 2016 को की थी। इसके तहत रजिस्टर्ड होकर किसान अपनी उपज अच्छी कीमत पर कहीं भी बेच सकते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने किसानों की आय बढ़ाने उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए इस योजना की शुरुआत की। ई-नाम एक इलेक्ट्रॉनिक कृषि पोर्टल है जो पूरे भारत में मौजूद एग्री प्रोडक्ट मार्केटिंग कमेटी को एक नेटवर्क में जोड़ने का काम करती है। इसका मकसद एग्रीकल्चर प्रोडक्ट के लिए राष्ट्रीय स्तर पर एक बाजार उपलब्ध करवाना है। इससे फायदे को देखते हुए किसान तेजी से इसके साथ जुड़ रहे हैं। किसानों की आय दोगुनी करने में ये योजना लाभकारी सिद्ध हो रही है। किसान अब ई-नाम (eNAM) प्लेटफॉर्म पर अपनी उपज बाजार के प्रतिस्पर्धी मूल्य पर बेच सकते हैं, जो उनके लिए अधिक फायदेमंद साबित हो रहा है। किसान ई-नाम साइट पर अपनी उपज को पंजीकृत करने और बेचने के लिए स्वतंत्र हैं। 18 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों की कुल 1000 मंडियां ई-नाम प्लेटफॉर्म से जुड़ गई हैं, जिससे एक करोड़ 72 लाख से अधिक किसान लाभान्वित हुए हैं।

राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना

28 जुलाई, 2014 को स्वदेशी गायों के संरक्षण और नस्लों के विकास को वैज्ञानिक विधि से प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राष्ट्रव्यापी राष्ट्रीय गोकुल मिशन की शुरुआत की गई। भारतीय किसानों के पास खेती के अलावा आमदनी का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत पशुपालन है। इसे बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की पशुपालन और डेयरी विभाग की तरफ से कई सारी योजनाएं चलाई जा रही हैं। केंद्र सरकार ने साल 2014 में 2025 करोड़ रुपये के बजट के साथ राष्ट्रीय गोकुल मिशन योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य था कि स्वदेशी गोजातीय नस्लों का विकास और संरक्षण किया जा सके और किसानों की आमदनी में इजाफा किया जा सके। किसान पशुपालन में अधिक से अधिक देशी नस्लों को तरजीह दें। इसके लिए सरकार की तरफ से परियोजनाओं के अलावा पुरस्कार दिए जाने का भी प्रावधान है। पशुपालन और डेयरी विभाग द्वारा हर साल पहले, दूसरे और तीसरे स्थान के लिए गोपाल रत्न और कामधेनु पुरस्कार दिया जाता है। जहां गोपाल रत्न पुरस्कार स्वदेशी नस्लों के गोजातीय पशुओं के पालन में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए किसानों को दिया जाता है तो कामधेनु पुरस्कार गोशालाओं और सर्वोत्तम प्रबंधित ब्रीडर्स सोसायटी को दिया जाता है। इस मिशन के तहत 2017-18 से वर्ष 2021 तक 22 गोपाल रत्न और 21 कामधेनु पुरस्कार दिए जा चुके हैं।

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना

प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना को अगस्त 2017 में शुरू किया गया था। इस योजना के तहत कृषि आधारित कामों को बढ़ावा दिया जाता है। इस योजना का मकसद है कि बड़े पैमाने पर किसानों को इसका लाभ पहुंचाया जाए। सरकार ने इस योजना के तहत 4,600 करोड़ रुपये आवंटित कर इसकी अवधि को मार्च 2026 तक के लिए बढ़ा दिया है। प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत सरकार खेती में हुए अनाज को सही तरीके से दुकानों तक पहुंचाने के प्रबंधन और आधुनिक बुनियादी ढांचे (Infrastructure for Farming) के निर्माण में मदद करती है। इस योजना के द्वारा सरकार किसानों को अपने पैदावार को सही तरीके से बेचने का प्रबंधन देती है। इस योजना की मदद से भारत में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास को तेजी मिली है। इससे किसानों को अपनी पैदावार बेचने का सही मौका और दाम मिलेगा। इससे किसानों को रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। सरकार प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना के तहत एक ऐसा डायरेक्ट रिटेल आउटलेट यानी फसल फार्म गेट (Faisal Farm Gate) बनाना चाहती है, जिससे किसानों के खेत से अनाज जल्द से जल्द दुकानों तक पहुंच जाए। इससे फसल का सही मूल्य किसानों को मिलता है साथ ही इससे कृषि सेक्टर में होने वाली फसल की बर्बादी को कम करना है। इससे जहां खाने की चीजों की प्रोसेसिंग की स्पीड बढ़ जाती है वहीं खाने की चीजों के निर्यात को बढ़ाने में मदद मिलती है।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

1 जुलाई, 2015 को “हर खेत कोई पानी” के आदर्श के साथ शुरू की गई, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (PMKSY) को सुनिश्चित सिंचाई के साथ खेती के क्षेत्र का विस्तार करने, पानी की बर्बादी कम करने और पानी में सुधार करने के लिए लागू किया जा रहा है। अब इस योजना को बढ़ाकर वर्ष 2026 तक के लिए कर दिया गया है। इस पर कुल लागत 93,068 करोड़ रूपये आने का अनुमान है। इससे करीब 22 लाख किसानों को फायदा होगा जिसमें 2.5 लाख अनुसूचित जाति और 2 लाख अनुसूचित जनजाति वर्ग के किसान शामिल हैं। इस पर कुल लागत 93,068 करोड़ रूपये आने का अनुमान है जिसमें राज्यों के लिये 37,454 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता शामिल है। योजना के तहत 30.23 लाख हेक्टेयर कमान क्षेत्र विकास सहित 60 जारी परियोजनाओं को पूरा करने पर ध्यान देने के अलावा अतिरिक्त परियोजनाओं को भी शुरू किया जा सकता है। इसमें जनजातीय इलाकों और सूखे का सामना करने वाले इलाकों की परियोजनाओं को शामिल करने के मानदंडों में ढील दी गई है। हर खेत को पानी खंड के तहत सतही जल स्रोतों के माध्यम से जल स्रोतों के पुनर्जीवन के तहत 4.5 लाख हेक्टेयर सिंचाई तथा उपयुक्त ब्लॉक में भूजल सिंचाई के तहत 1.5 लाख हेक्टेयर की सिंचाई हो सकेगी।

परंपरागत कृषि विकास योजना

आधुनिक खेती की तकनीकों के साथ जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिये ही साल 2015-2016 में परंपरागत कृषि विकास योजना की शुरुआत की गई। इस योजना का उद्देश्य जैविक उत्पादों के प्रमाणीकरण और विपणन को प्रोत्साहन करना है। खेती में रसायनों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण मिट्टी अपनी उपजाऊ शक्ति (Soil Health) खोती जा रही है। इससे साल दर साल फसलों का उत्पादन तो कम हो ही रहा है साथ ही इसका सबसे बड़ा खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। किसानों को इस समस्या के चंगुल से बाहर निकालने के लिये केंद्र सरकार ने परंपरागत कृषि विकास योजना की शुरुआत की, जिसके तहत किसानों को जैविक खेती (Organic Farming) करने के लिये प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस योजना के जरिये किसानों को आर्थिक अनुदान देने का भी प्रावधान है, ताकि जैविक खेती करके मिट्टी की सेहत और फसल का बेहतर उत्पादन हासिल हो सके। परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत पात्रता रखने वाले किसानों को केंद्र सरकार कुल 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता राशि प्रदान करती है। यह अनुदान किसानों को बेहतर उपज और मार्केटिंग के लिए दिया जाता है। इसमें किसानों को तीन साल तक अलग-अलग चरणों में अनुदान राशि का भुगतान उनके खातों में किया जाता है। परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए पहाड़ी, कबीलाई और वर्षा सिंचित क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाती है। इसमें किसानों को जैव उर्वरक (Organic Fertilizer) , जैव-कीटनाशक (Organic Pesticides), जैविक खाद, वर्मी-कंपोस्ट (Vermi-Compost ), वानस्पतिक अर्क का प्रयोग करके खेती की जाती है, ताकि खर्च को कम करके उपज और आमदनी को बढ़ाया जा सके। इन उत्पादों का इस्तेमाल करने पर मिट्टी ज्यादा उपजाऊ बनती है और फसल की उपज भी हाथों-हाथ बाजार में बिक जाता है।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना

कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों को बढ़ावा देने हेतु प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा 29 मई 2017 को राष्ट्रीय कृषि विकास योजना का शुभारंभ किया गया। इस योजना के माध्यम से कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में विकास लाने के लिए अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाती है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत सरकार ऐसे युवाओं और किसानों को 25 लाख रुपये दे रही है जो खुद का बिजनेस शुरू करना चाहते हैं। इन लोगों को सरकार ने एग्रीप्रेन्योर (Agripreneur) की संज्ञा दी है। यानी ऐसे लोग जो खेती-किसानी के क्षेत्र में उद्यमिता करें, खुद के बिजनेस आइडिया पर काम करें उन्हें सरकार की ओर से तय शर्तों को पूरा करने पर 25 लाख रुपये मिलेंगे। आर्थिक मदद मिलने के बाद युवा और किसान और पहले एग्रीकल्चर स्टार्टअप, फिर यूनिकॉर्न तक का प्रेरक और सफल सफर तय कर सकते हैं। युवाओं के पास अगर खेती-किसानी से जुड़े कुछ इनोवेटिव विचार हैं, तो RKVY स्कीम के तहत सरकार आपकी मदद करेगी। भारत की जैविक और प्राकृतिक खेती की पद्धति विदेश में भी अपनाई जा रही है। ऐसे में सरकार ने संभावनाओं को भांपते हुए कृषि स्टार्टअप्स को प्रशिक्षण और आर्थिक मदद देने का फैसला लिया है। इसके साथ ही कृषि क्षेत्र में किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत बने इसके लिए किसानों को आधुनिक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है एवं इसमें केंद्र और राज्य सरकार आर्थिक मदद कर रहे हैं। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत केंद्र सरकार खेती में तकनीक के प्रयोग को बढ़ावा दे रही है।

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