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कालेधन पर मोदी सरकार का करारा प्रहार, एक लाख फर्जी कंपनियों के निदेशकों पर गिरेगी गाज

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कालेधन पर केंद्र सरकार लगातार प्रहार कर रही है। अब उनके बुरे दिन शुरू हो गए हैं जो फर्जी कंपनियों के डायरेक्टर बने बैठे थे। मोदी सरकार ने निर्णय किया है कि फर्जी कंपनियों से जुड़े करीब 1.06 लाख डायरेक्टर्स को अयोग्य करार दिया जाएगा।

अयोग्य ठहराए जाएंगे 1 लाख निदेशक
लगभग 2 लाख मुखौटा कंपनियों के बैंक खाते जब्त करने के बाद कंपनी मामलों के मंत्रालय ने 1,06,578 निदेशकों की पहचान की है। इन फर्जी कंपनियों से जुड़े करीब 1.06 लाख डायरेक्टर्स को अयोग्य करार दिया जाएगा।

 shell companies crackdown: government to disqualify over 1 lakh directors

कंपनी खातों पर रोक लगाने के आदेश
बैंकों को इन कंपनियों के बैंक अकाउंट्स पर भी रोक लगाने का आदेश दिया गया है। एक आधिकारिक विज्ञप्ति में बताया गया है कि मंत्रालय ने 1.06,578 डायरेक्टर्स की पहचान की है। इनको कंपनी ऐक्ट 2013 के सेक्शन 164 (2) के तहत अयोग्य ठहराया जा सकेगा।

5 साल तक नहीं बन पाएंगे डायरेक्टर
सेक्शन 164 के तहत किसी कंपनी का कोई डायरेक्टर जो लगातार तीन वित्तीय वर्ष तक कंपनी का फाइनैंशिल स्टेटमेंट्स या वार्षिक रिटर्न नहीं भरता है तो उसे किसी कंपनी में या फर्म में अगले 5 साल तक नियुक्त नहीं किया जा सकता है।

फर्जी कंपनियां और मोदी के लिए चित्र परिणाम

मुखौटा कंपनियों की हो चुकी है पहचान
कंपनी मंत्रालय के मुताबिक आईसीएआई, आईसीएसआई और अन्य संस्थाओं के कुछ सदस्य इन मुखौटा कंपनियों में शामिल हैं, उनकी पहचान की जा चुकी है। सरकार ने इन संस्थाओं से उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए कहा है। केंद्र सरकार इन संस्थाओं की कार्रवाई पर भी नजर रख रही है।

मनी लॉन्ड्रिंग की भी होगी जांच
इन कंपनियों द्वारा मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियां भी जांच के दायरे में है। मंत्रालय ने इसके अलावा ऐसे प्रोफेशनल्स, सीए, कंपनी सचिव और कॉस्ट अकाउंट्स की भी पहचान की है, जो इन फर्जी कंपनियों से जुड़े हुए थे।

26 सीए पर हो रही कार्रवाई 
फर्जी कंपनी और धोखाधड़ी के मामले में आरोपी जिन 26 सीए की पहचान की गई है उनमें से कुछ के खिलाफ कार्रवाई शुरू की जा चुकी है। आईसीएसआई के अनुसार करीब 30-40 कंपनी सचिवों की पहचान की गई है जिन्होंने थोखाधड़ी की है। हालांकि ये कंपनी सचिव किसी मुखौटा कंपनी में शामिल नहीं हैं

पकड़ी गईं दो लाख से अधिक फर्जी कंपनियां 
हाल में कंपनी मामलों के मंत्रालय ने ऐसी कंपनियों को नोटिस जारी किए थे जिनके बारे में माना जाता है कि वे गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के रूप में काम कर रही हैं लेकिन उन्होंने रिजर्व बैंक में पंजीकरण नहीं करा रखा है। गौरतलब है कि डिफॉल्टर कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई से पहले कंपनी रजिस्ट्रार के पास 13 लाख से अधिक कंपनियां पंजीकृत थीं। लेकिन 2,10,000 कंपनियों का पंजीकरण रद्द होने के बाद करीब 11 लाख कंपनियां बची हैं।

बढ़ेगा भरोसा, कारोबार में होगी सुगमता
केंद्र सरकार का मानना है कि जब तक इन मुखौटा कंपनियों का नेटवर्क नहीं टूटता, काले धन के खिलाफ लड़ाई अधूरी रहेगी। मुखौटा कंपनियों के जरिये काले धन को सफेद करने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया से व्यवस्था में भरोसा बढ़ेगा और एक माहौल बनेगा जिससे भारत में कारोबार की सुगमता की राह आसान होगी।

दरअसल इन मुखौटा कंपनियों की आड़ में काले धन को सफेद करने की गतिविधियां भी जांच के दायरे में है। इन निदेशकों का विवरण तैयार किया जा रहा है। इसमें उनकी पृष्ठïभूमि, अतीत और मुखौटा कंपनियों के कामकाज में उनकी भूमिका शामिल होगी। यह विवरण प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर तैयार किया जा रहा है। डिफॉल्टर कंपनियों की धरपकड़ में गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय, कंपनी रजिस्ट्रार, वित्तीय सेवा विभाग, बैंकों की एसोसिएशन और अन्य विभाग शामिल हैं।

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