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पंजाब चुनाव से पहले ही केजरीवाल ने शुरू कर दिया पलटी मारना, मुफ्त का वादा लेकिन ‘नियम एवं शर्तें’ लागू

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दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल की राजनीतिक बुनियाद ही झूठ और मुफ्त के वादों पर टिकी हुई है। इसके जरिए वे दिल्ली के लोगों को झांसा देने में कामयाब रहे। इसलिए वो झूठ और मुफ्त के वादे को जीत का मूल मंत्र मान चुके हैं। अब वो इसी मंत्र के माध्यम से दूसरे राज्यों में भी पार्टी का विस्तार करना चाहते हैं। पंजाब चुनाव से पहले उन्होंने अपने मुफ्त का पिटारा खोल दिया है। लेकिन लगता है कि उन्होंने पंजाब के बारे में पूरा होमवर्क किए बिना ही अपना दांव चल दिया है। इसलिए चुनाव से पहले ही अपने मुफ्त के वादों से पलटना और नियम व शर्ते लागू करना शुरू कर दिया है।   

दरअसल केजरीवाल ने 29 जून, 2021 को 300 यूनिट फ्री बिजली देने की घोषणा की थी, उसी दिन शाम होते-होते वादों के साथ ‘नियम एवं शर्तें’ भी जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि एसी-एसटी, ओबीसी और बीपीएल परिवारों को 300 यूनिट बिजली मुफ्त दी जाएगी। यानि, सामान्य वर्ग को इस सुविधा का लाभ नहीं मिलेगा। शायद केजरीवाल को ये पता ही नहीं है कि पंजाब में पहले से ही एससी, बीसी और बीपीएल परिवारों को 200 यूनिट फ्री है। वहीं किसानों को पहले ही पंजाब में मुफ्त बिजली मिल रही है और उद्योगों के लिए वहां बिजली का अलग रेट है। इस पर केजरीवाल को सफाई देते नहीं बन रहा।

केजरीवाल ने पंजाब के लोगों को 24 घंटे बिजली सप्लाई का भी वादा किया। अपनी सरकार बनने पर उन्होंने पुराने सारे बकाए बिजली बिल माफ़ करने की भी घोषणा की। लेकिन यहां भी शर्तें लागू कर दीं और कहा कि इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर को नए सिरे से आधुनिक बनाना होगा, इसीलिए इसमें समय लगेगा। अब केजरीवाल कहने को 2027 के विधानसभा चुनाव में (अगर उन्होंने 2022 जीता तो) ये भी कह सकते हैं कि इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास में ही 5 साल लग गए, इसीलिए अब मुफ्त बिजली अगली बार मिलेगी। केजरीवाल को पता होना चाहिए कि पंजाब पहले से ही पॉवर सरप्लस राज्य है।

केजरीवाल दिल्ली और पंजाब को एक ही चश्मे से देख रहे हैं। इसलिए उन्होंने पंजाब फतह करने के लिए दिल्ली का ही फॉर्मूला लागू किया है। लेकिन पंजाब और दिल्ली में काफी फर्क है। पंजाब पूर्ण राज्य है और उसकी काफी आबादी गांवों में रहती है। ऊपर से पंजाब सरकार के ऊपर कर्ज भी अधिक है।पंजाब एक संवेदनशील राज्य है, जिसकी सीमाएं पाकिस्तान से लगती हैं। खालिस्तानियों का सपना है कि उसे शेष भारत से अलग-थलग कर दिया जाए।

अब पंजाब के लोगों को फैसला करना है कि वे केजरीवाल के दावों पर कितना भरोसा करते हैं और उन्हें कितना समर्थन करते हैं। लेकिन उन्हें यह जानने की जरूरत है कि केजरीवाल ने दिल्ली के लोगों से जो वादे किए, उनमें से कितने पूरे हुए। आइए देखते हैं कि केजरीवाल कौन-कौन से वादे पूरा करने में नाकाम रहे…

  • केजरीवाल ने दावा किया कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों को अपने तरीके से टीकाकरण की अनुमति दे, तो हम तीन महीने के अंदर पूरी दिल्ली को हम वैक्सीन लगा सकते हैं। जब केंद्र सरकार ने 19 अप्रैल, 2021 को राज्यों को सीधे कंपनियों से टीका खरीदने की छूट तो दी, तो केजरीवाल ने दवा कंपनियों फाइजर, मॉडर्ना पर ही वैक्सीन नहीं बेचने का आरोप लगाया। आखिरकार दिल्ली को 18+ आयु वर्ग के लिए टीकाकरण अभियान को रोकने के लिए मजबूर होना पड़ा।
  • अक्टूबर 2019 में अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली की 540 किमी लंबी 9 सड़कों को रि-डिजाइन करने और यूरोपीय शहरों की तर्ज पर विकसित करने का ऐलान किया। अभी तक सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। दिल्ली की सड़कों पर जाम और प्रदूषण की समस्या ज्यों की त्यों बनी हुई है।
  • सितंबर 2020 में केजरीवाल ने कहा था कि विकसित देशों की तरह दिल्ली में पानी की सप्लाई करेंगे। घरों में 24 घंटे साफ सुथरा पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे। लेकिन राजधानी दिल्ली के अधिकांश हिस्सों को कई दिनों तक लगातार जलापूर्ति नहीं होने की समस्या का सामना करना पड़ता है। आज भी लोग पानी के लिए जल बोर्ड के टैंकरों पर निर्भर है।
  • कोरोना संकट काल में केजरीवाल ने 4 मई को दिल्ली के सभी 72 लाख राशन कार्डधारियों को मई-जून का राशन फ्री दिए जाने की घोषणा की थी। लेकिन एक हफ्ते के अंदर ही 10 मई, 2021 को दिल्ली सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया कि मई का राशन मुफ्त नहीं, बल्कि सामान्य दरों पर ही मिलेगा।
  • केजरीवाल सरकार ने राजधानी में प्रदूषण पर लगाम और सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था मजबूत करने का वादा किया था। आलम यह है कि इस दिशा में कोई खास योजनाएं नहीं दिखी। ऑड-इवेन फॉर्मूला का प्रयोग भी नाकाम रहा। 
  • आम आदमी पार्टी ने दिल्ली में 11 हजार नई बसें चलाने का वादा किया था। इसके साथ ही पांच नई बस डिपो का प्रस्‍ताव भी रखा था, लेकिन अभी इस मामले में क्या हुआ अब तक पता नहीं चल रहा।
  • उच्‍च शिक्षा गारंटी स्‍कूल के तहत केजरीवाल ने 20 नये डिग्री कॉलेज खोलने का वादा किया था। दूसरी बार सत्ता में आ गए लेकिन वादा अभी तक पूरा नहीं हुआ है।
  • अरविंद केजरीवाल ने चुनाव के दौरान पूरी दिल्ली में वाई-फाई लगाने का वादा किया था, लेकिन  ये वादा भी पूरा नहीं हुआ।
  • ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ का पूरा आंदोलन ही लोकपाल के गठन पर केंद्रित था। दिल्ली में अब तक लोकपाल का गठन नहीं हो सका है। इसके लिए भी केजरीवाल सरकार केंद्र पर आरोप मढ़ती है। 
  • केजरीवाल ने वादा किया था कि दिल्ली में 15 लाख सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, लेकिन अब तक कितने सीसीटीवी कैमरे लगे इसका आंकड़ा खुद केजरीवाल भी नहीं दे सकते हैं। 
  • यमुना नदी को साफ़ करने का दावा करने वाली AAP की सरकार के दौरान प्रदूषण और बढ़ ही रहा है। आए दिन यमुना नदी में तैरते सफ़ेद जहरीले झाग की तस्वीरें वायरल होती हैं।

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