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मोदी सरकार के आठ साल : अनुच्छेद 370 की समाप्ति से जम्मू-कश्मीर की बदली तस्वीर, एक देश, एक विधान, एक निशान का सपना हुआ साकार

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आठ साल के शासनकाल में ऐसे कई कार्य हुए हैं, जो न सिर्फ अप्रत्याशित और अविश्वसनीय है, बल्कि अकल्पनीय भी है। 05 अगस्त, 2019 से पहले अनुच्छेद 370 को समाप्त करना एक कठिन और असंभव काम माना जा रहा था। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के साहसिक और ऐतिहासिक फैसलों ने संविधान के अनुच्छेद 370 और 35-ए को हमेशा के लिए दफन कर दिया। इसके साथ ही एक देश, एक विधान, एक प्रधान और एक निशान का 66 साल पुराना सपना साकार हो गया। प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता और विजनरी सोच का ही कमाल है कि जम्मू-कश्मीर अब सचमुच ही ‘स्वर्ग’ बनने के रास्ते पर चल पड़ा है। प्रधानमंत्री मोदी ने पंचायत दिवस यानि 24 अप्रैल को जम्मू में एक रैली को सम्बोधित करते हुए बदलते हालात और केंद्र की ओर से राज्य के विकास के लिए किए गये कार्यों की चर्चा की।

पीएम मोदी की प्राथमिकता में रहा जम्मू-कश्मीर
केंद्र की सत्ता में आने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर पर ध्यान केंद्रित किया और वहां का हालात सामान्य बनाने का प्रयास शुरू कर दिया था। लोकसभा चुनाव के छह महीने बाद ही 28 दिसंबर,2014 को विधानसभा के चुनाव हुआ, जिसमें पीडीपी (28 सीटें) सबसे बड़ी पार्टी और बीजेपी (25) दूसरी बड़ी पार्टी बनकर सामने आयी। लेकिन किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं होने के कारण सरकार नहीं बन पायी। आखिरकार राज्यपाल शासन लगाना पड़ा। इस बीच गठबंधन की बातचीत चलती रही और एक मार्च,2015 को मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व में पीडीपी-बीजेपी की सरकार बनी। 7 जनवरी,2016 को बीमारी की वजह से सईद का निधन हो गया। इसके बाद सईद की बेटी महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व में 4 अप्रैल,2016 को सरकार बनी, लेकिन अंतर्विरोधों और आतंकियों के प्रति महबूबा की सहानुभूति के कारण जून 2018 में बीजेपी ने महबूबा सरकार से समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई।

राज्य के राजनीतिक दलों के साथ मिलकर विकास का प्रयास
प्रधानमंत्री मोदी जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों के साथ मिलकर जम्मू-कश्मीर का विकास करने का प्रयास किया। दिसंबर 2014 से जून 2018 तक प्रधानमंत्री मोदी ने स्थानीय राजनीतिक दलों को साथ लेकर पूरी ईमानदारी के साथ हालात ठीक करने की कोशिशें कीं। लेकिन उन्हें इसमें निराशा हाथ लगी। मुफ्ती मोहम्मद सईद और उसके बाद महबूबा मुफ्ती सरकार के समय भी केंद्र ने भरसक राज्य के मुख्यमंत्री को खुले हाथ काम करने की छूट दे रखी थी। यहां तक कि प्रधानमंत्री मोदी ने राज्य के विकास के लिए 80 हज़ार करोड़ रुपए का पैकेज दिया। मार्च 2016 में प्रधानमंत्री जब श्रीनगर आए थे, तो उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर के लिए हमारी तिजोरी खुली है। राज्य की बेरोज़गारी दूर करना भी हमारी प्राथमिकता है। इसके अलावा हमारा फ़ोकस गुड गवर्नेंस पर रहेगा। लेकिन प्रधानमंत्री मोदी कानून व्यवस्था के हालात पर कोई ढील देने के पक्ष में नहीं थे। उसका साफ मानना रहा कि राज्य के विकास के लिए वहां शांति वापसी पहली शर्त है।

अनुच्छेद 370 की बाधाएं खत्म,विकास का मार्ग प्रशस्त
जम्मू कश्मीर और उसके लोग देश के अन्य हिस्सों की ही तरह आगे बढ़ने के हकदार हैं। प्रधानमंत्री मोदी का शुरू से मानना रहा कि इस राज्य के लिए अनुच्छेद 370 का रहना उसकी प्रगति में बाधक है। इसके कारण केंद्र से भरपूर मदद के बावजूद राज्य पर उसका कोई अधिकार नहीं रह पाता था। साल 2019 में जब नरेन्द्र मोदी की सरकार दोबारा बनी, इस पर उसने प्राथमिकता और मजबूती के साथ काम करना शुरू किया। 05 अगस्त, 2019 को वह दिन आया, जिसकी कल्पना किसी ने नहीं की थी। मोदी सरकार ने जम्मू-कश्मीर पर एकसाथ चार बड़े फैसले लेकर सभी अनुमानों को ध्वस्त कर सबको हैरान कर दिया।

फैसला नंबर 1- जम्मू-कश्मीर राज्य से संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाना

फैसला नंबर 2- राज्य का विभाजन कर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के रूप में दो केंद्र शासित क्षेत्र बनाना

फैसला नंबर 3- जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित क्षेत्र के लिए विधायिका का प्रावधान करना

फैसला नंबर 4- लद्दाख को बिना विधायिका वाला केंद्र शासित क्षेत्र बनाना

जम्मू-कश्मीर को मिला केंद्रीय कानून और योजनाओं का लाभ
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 को हटाने के ऐतिहासिक फैसले से संसद द्वारा पारित सैकड़ों कानून जम्मू कश्मीर में दूसरे राज्यों की तरह ही लागू करना आसान हो गया। इन केंद्रीय कानून और योजनाओं से केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर को लाभ दिखने लगे हैं। अब वहां शिक्षा का मौलिक अधिकार सहित पिछले वर्ष तक 48 केंद्रीय कानूनों और 167 राज्य कानूनों के तहत अधिसूचित कर योजनाएं लागू होने लगीं। जम्मू कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत मिले दर्जे के सिवा 35-ए भी राज्य में किसी भी बाहरी व्यक्ति के सम्पत्ति खरीदने पर रोक लगाता रहा है। अब इसकी समाप्ति के बाद कोई भी भारतीय नागरिक राज्य में मुख्यतः खेती योग्य जमीन को छोड़कर अन्य तरह की जमीन खरीद सकते हैं।

राज्य परिसीमन आयोग की रिपोर्ट से बदलेगी सियासी तस्वीर  
राज्य परिसीमन आयोग ने 5 मई, 2022 को अपनी रिपोर्ट मोदी सरकार को सौंप दी, जिसमें अब 83 की जगह विधानसभा क्षेत्रों की संख्या 90 करने की सिफारिश की गयी है। इनके अतिरिक्त 24 सीटें हमेशा की तरह गुलाम कश्मीर के लिए खाली रखी जायेंगी। रिपोर्ट के लागू किये जाने के बाद इस केंद्र शासित प्रदेश के राजनीतिक नक्शे में अब सात नए विधानसभा क्षेत्र दिखेंगे। कई पुराने क्षेत्रों के स्वरूप बदले नजर आएंगे। जम्मू वाले हिस्से में सीटें बढ़ी हैं। मुस्लिम प्रभाव वाले विधानसभा क्षेत्रों की संख्या घटने, कश्मीर घाटी में सिख, शिया, गुज्जर-बक्करवाल और पहाड़ी मतदाताओं का मजबूत होना जैसे बिंदु गिनाये जा रहे हैं। अभी तक ये समुदाय अपनी संख्या के बावजूद हार-जीत का निर्णायक नहीं बन पाते थे। स्वाभाविक है कि पहले से मौजूद केंद्र शासित प्रदेश के सियासी दिग्गजों को अपने वोट बैंक फिर से बनाने होंगे। ये स्थितियां बीजेपी के अनुकूल होंगी।

पंचायत दिवस पर 20 हजार करोड़ रुपये की सौगात
अनुच्छेद-370 खत्म होने के बाद पहली बार प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर 24 अप्रैल, 2022 को जम्मू-कश्मीर पहुंचे। प्रधानमंत्री मोदी ने सांबा जिले की पल्ली पंचायत से देश की ग्राम सभाओं को ऑनलाइन संबोधित किया। इस दौरान उन्होंंने 20,000 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों का शिलान्यास और उद्घाटन किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन प्रयासों से बहुत बड़ी संख्या में जम्मू-कश्मीर के नौजवानों को रोजगार मिलेगा। मोदी सरकार में लोकतंत्र जम्मू-कश्मीर की जड़ों तक पहुंचा है। जम्मू-कश्मीर की यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री अमृत सरोवर नामक एक नई पहल भी शुरू की। प्रधानमंत्री ने 3,100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनी बनिहाल-काजीगुंड रोड टनल का उद्घाटन किया। 8.45 किलोमीटर लंबी सुरंग बनिहाल और काजीगुंड के बीच सड़क की दूरी को 16 किमी कम कर देगी और यात्रा के समय को लगभग डेढ़ घंटे कम करेगी।

1200 से अधिक परियोजनाएं पूरी, औद्योगिक विकास को बढ़ावा
प्रधानमंत्री मोदी ने जब से जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए वहां से अनुच्छेद 370 हटाने का फैसला किया है, उसके बाद 1200 से अधिक परियोजनाएं पूरी की गई हैं। इनमें से 5 परियोजनाएं तो ऐसी हैं जो पिछले 20 साल से लटकी पड़ी थीं। प्रधानमंत्री मोदी ने 15 ऐसी परियोजनाओं को गति देकर उन्हें पूरा कराया है जो 15 सालों से लटकी पड़ी थी। 165 परियोजनाएं जो 10 सालों से लटकी थी, उसे भी मोदी सरकार ने पूरा किया है। इसी क्रम में मोदी सरकार ने गुरुवार 7 जनवरी, 2021 को औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के लिए 28,400 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन योजना को मंजूरी दी। मोदी सरकार ने औद्योगिक विकास के लिए केंद्र क्षेत्र की योजना के रूप में जम्मू-कश्मीर के लिए नई औद्योगिक विकास योजना (जेएंडकेआईडीएस, 2021) तैयार की। योजना का उद्देश्य केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में ब्लॉक स्तर तक औद्योगिक विकास को ले जाना है। इसके तहत नए निवेश आकर्षित करने के साथ ही कौशल विकास और रोजगार सृजन करना है, जिससे क्षेत्र का सामाजिक-आर्थिक विकास हो सके। संयंत्र और मशीनरी में 50 करोड़ रुपये तक निवेश करने वाली छोटी इकाइयों को 7.5 करोड़ रुपये तक पूंजी प्रोत्साहन मिलेगा।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 14 दलों की ऐतिहासिक बैठक
24 जून, 2021 को दिल्ली में एक राष्ट्रीय ध्वज के तहत प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में एक ऐतिहासिक बैठक हुई, जिसमें जम्मू-कश्मीर के 14 नेताओं ने हिस्सा लिया। 5 अगस्त, 2019 से पहले जम्मू-कश्मीर के नेता दो ध्वज-सिद्धांत के तहत मिलते थे। प्रधानमंत्री आवास में करीब साढ़े तीन घंटे तक चली बैठक में केंद्र शासित प्रदेश में लोकतंत्र की मजबूती और विकास का संकल्प लिया गया। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने जम्मू-कश्मीर के नेताओं से कहा कि वो ‘दिल की दूरी’ और ‘दिल्ली की दूरी’ को खत्म करना चाहते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने सारी राजनीतिक पार्टियों को भरोसा दिलाया कि डिलिमिटेशन पूरा होते ही चुनाव प्रक्रिया शुरू होगी, जिसमें सभी दलों की हिस्सेदारी होगी। उन्होंने बताया कि युवाओं को जम्मू-कश्मीर को राजनीतिक नेतृत्व देना है और यह सुनिश्चित करना है कि उनकी आकांक्षाएं पूरी हों। प्रधानमंत्री मोदी के बुलावे पर जम्मू-कश्मीर के राजनीतिक दलों का दिल्ली में बातचीत की टेबल पर चले आना कोई सामान्य घटना नहीं थी। यह सब प्रधानमंत्री मोदी के सशक्त नेतृत्व और सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास के लोकतांत्रिक मंत्र के कारण संभव हआ है। 

पंचायतों के माध्यम से लोकतंत्र मजबूत करने की कोशिश
दिसंबर 2020 में जम्मू-कश्मीर में संपन्न हुए जिला विकास परिषद के चुनाव परिणाम ने केंद्र की मोदी सरकार को एक सकारात्मक उम्मीद दी। कभी चुनावी बहिष्कार के दिन देख चुके जम्मू-कश्मीर में जिला विकास परिषद के चुनाव में लोगों की भागीदारी देखने से एक ओर जहां केंद्र सरकार उत्साहित थी, वहीं दूसरी ओर सरकार को 370 के अंत के बाद हुए चुनाव के परिणाम से राज्य का जीवन पटरी पर लौटता दिखने लगा। ये सारे चुनाव उस पृष्ठभूमि पर हुए हैं, जिसमें 370 के अंत के बाद घाटी में उमड़ी अनिश्चितता और तमाम राजनीतिक बयान देखे गए थे। अब इन सब के बीच राजनीतिक गतिविधियों की बहाली एक सकारात्मक कदम जैसी थी। इस चुनाव में जहां पीपुल्स अलायंस फॉर गुपकार डिक्लरेशन (PAGD) को 110 सीटों पर जीत मिली है, वहीं भाजपा 74 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी। इस चुनाव ने केंद्र सरकार के मन में विधानसभा चुनाव को लेकर एक उम्मीद जगा दी है। माना जा रहा है कि आने वाले वक्त में असेंबली इलेक्शन कराने को लेकर भी फैसले हो सकते हैं। ये बताता है कि जम्मू-कश्मीर की आवाम सिर्फ जमीनी स्तर पर लोकतंत्र और विकास को लेकर अपना जनादेश देना चाहती।

149 साल पुरानी ‘दरबार मूव’ की प्रथा खत्म
मोदी राज में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाने के बाद एक और ऐतिहासिक फैसला लिया गया। जम्मू-कश्मीर सरकार ने 149 साल पुरानी ‘दरबार मूव’ की प्रथा को खत्म कर दिया। साथ ही कर्मचारियों को दिए जाने वाले आवास आवंटन को भी रद्द कर दिया। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 20 जून, 2021 को कहा था कि प्रशासन ने ई-ऑफिस का काम पूरा कर लिया है, इसलिए सरकारी ऑफिसों के साल में दो बार होने वाले ‘दरबार मूव’ की प्रथा को जारी रखने की कोई जरूरत नहीं है। इस फैसले से राजकोष को हर साल 200 करोड़ रुपये की बचत होगी। उन्होंने कहा था, “अब जम्मू और श्रीनगर के दोनों सचिवालय 12 महीने सामान्य रूप से काम कर सकते हैं। इससे सरकार को प्रति वर्ष 200 करोड़ रुपए की बचत होगी, जिसका उपयोग वंचित वर्गों के कल्याण के लिए किया जाएगा।”

सेना और पुलिस ने मिलकर आतंकियों को जहन्नुम की राह दिखाई
केंद्र शासित प्रदेश बनने के बाद जम्मू-कश्मीर नवनिर्माण के दौर से गुजर रहा है। प्रदेश में बदलाव के साथ नई-नई परियोजनाओं पर काम शुरू हो रहा है। वहीं मोदी सरकार द्वारा किए गए उपायों और सुरक्षा बलों की चौकसी की वजह से सीमा पार से घुसपैठ में कमी आई है। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में बताया कि 2018 से 2021 तक यानि चार सालों में घुसपैठ के सिर्फ 366 मामले सामने आए। 2018 में LOC पर घुसपैठ की 143 घटनाएं हुई थीं। 2019 में 138 मामले और 2020 में सीमा में घुसने की कोशिश करने के 51 मामले सामने आए। वहीं 2021 में घुसपैठ की घटनाएं कम होकर 34 रह गई हैं। घुसपैठ पर लगाम लगाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सीमा, नियंत्रण रेखा पर बहु-स्तरीय तैनाती, सीमा पर फेंसिंग, बेहतर खुफिया और परिचालन समन्वय, सुरक्षा बलों को उच्च तकनीक के हथियारों से लैस करने समेत घुसपैठिए के खिलाफ कार्रवाई शामिल है। इसके अलावा केंद्र सरकार समय-समय पर LOC पर सुरक्षा हालात की समीक्षा करती है।

पत्थरबाजी की घटनाओं में 90 प्रतिशत की कमी
अनुच्छेद-370 और 35ए हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में स्पष्ट तौर पर बदलाव देखने को मिल रहा है। जिला विकास परिषद (डीडीसी) के चुनाव ने साबित कर दिया कि जहां केंद्र शासित प्रदेश में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत हुई हैं, वहीं आतंकियों और पत्थरबाजों की कमर टूटी है। इसी बीच जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने दावा किया कि पत्थरबाजी की घटनाओं में 90 प्रतिशत की गिरवाट दर्ज की गई है। अलगाववादी नेताओं पर कड़ाई से पत्थरबाजों के दिल में भी डर बैठ गया है। जिसके चलते पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आई है। लोग अब भीड़ के रूप में इनकाउंटर साइट पर जाने से पहले सौ बार सोचते हैं। यहीं वजह है कि इस तरह की घटनाओं में घायल या चोटिल होने वाले सुरक्षाबलों के जवानों और नागरिकों की संख्या में भी भारी कमी आई है।

मददगारों पर चोट, यासीन मलिक को उम्र कैद की सजा

  • कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक को टेरर फंडिंग मामले में दिल्ली की विशेष अदालत ने उम्र कैद की सजा सुनाई।
  • यासीन मलिक पर 2017 में कश्मीर में आतंकवाद और अलगाववादी गतिविधियों को अंजाम देने जैसे तमाम गंभीर आरोप थे।
  • सितंबर 2019 में मसूद अजहर, हाफिज़ सईद, जाकि-उर-रहमान लखवी और दाऊद इब्राहिम को आतंकवादी घोषित किया गया।
  • एनआईए अलगाववादी नेताओं को गिरफ्तार कर टेरर फंडिंग रोकने और इसके नेटवर्क को ध्वस्त करने में लगी है।
  • मोदी सरकार ने घाटी के 18 हुर्रियत नेताओं और 160 राजनीतिज्ञों को दी गई सुरक्षा वापस ली।
  • मोदी सरकार ने कश्मीर के अलगाववादी नेताओं के काले कारनामों को जनता के सामने लाने की रणनीति अपनायी।

जम्मू-कश्मीर में 11,324 पदों पर हुईं भर्तियां
मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर में जहां विभिन्न विकास परियोजनाओं के माध्यम से रोजगार के नए अवसर पैदा कर रही है, वहीं खाली पदों को भरने के लिए तेजी से कदम उठा रही है। लोकसभा में गृह राज्य मंत्री ने जम्मू-कश्मीर के विभिन्न विभागों में खाली पदों का आंकड़ा पेश किया। आंकड़ों के मुताबिक जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद से विभिन्न विभागों में 26,330 खाली पदों की पहचान की गई थी। इनमें से 11,324 पदों के लिए चयन प्रक्रिया पूरी हो गई है। इनमें राजपत्रित, अराजपत्रित और चतुर्थ श्रेणी के पद शामिल है। फिलहाल यहां 15,006 पद खाली हैं। इन पदों पर जल्द भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की पूरी संभावना है। केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में युवाओं को रोजगार के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है।

फिर चमका पर्यटन, 20 वर्षों का टूटा रिकॉर्ड 
जम्मू-कश्मीर में आतंकी और पत्थरबाजी की घटनाओं में कमी आने से इसका पर्यटन पर भी असर पड़ा है। काफी संख्या में पर्यटक जम्मू-कश्मीर आ रहे हैं। अप्रैल 2022 में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि कश्मीर पर्यटन क्षेत्र में एक “सुनहरा दौर” देख रहा है क्योंकि पिछले कुछ महीनों में 80 लाख पर्यटकों ने प्रदेश का दौरा किया है, जिसने पिछले 20 वर्षों के सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। उन्होंने कहा कि यह पहली बार है कि सरकार स्थानीय लोगों के साथ मिलकर डल झील की सफाई कर रही है। उन्होंने यह जानकारी भी दी कि केंद्र सरकार ने 2022-2023 के बजट में डल और नगीन झीलों के संरक्षण के लिए 273 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, जिसमें से 136 करोड़ रुपये अकेले डल झील के संरक्षण के लिए उपयोग किए जाएंगे। गौरतलब है कि जम्‍मू-कश्‍मीर और लद्दाख में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मोदी सरकार ने मेगा प्‍लान तैयार किया। उन जगहों की पहचान की जा रही है, जो टॉप के टूरिज्‍म डेस्टिनेशन बन सकते हैं। मोदी सरकार राज्य के टूरिस्ट गाइड को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण दे रही है। हिमालय की 137 पर्वत चोटियां विदेशी पर्यटकों के लिए खोली गई हैं, जिनमें 15 चोटियां जम्मू-कश्मीर की हैं। 

स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर लाल चौक पर फहरा तिरंगा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासनकाल में देश बदल रहा है। यह बदलाव देश के हर कोने में और हर स्तर पर दिखाई दे रहा है। कश्मीर से आई एक तस्वीर ने इस बदलाव की फिर पुष्टि की। 5 अगस्त, 2019 से  पहले जो काम कठिन और असंभव लग रहा था, उसे मोदी सरकार ने इतना आसान और मुमकिन बना दिया है, जिसे देख और सुनकर हर कोई हैरान है। श्रीनगर के जिस लाल चौक पर कभी तिरंगा फहराना मुश्किल था, 26 जनवरी, 2022 को गणतंत्र दिवस पर तिरंगा फहराया गया। लाल चौक पर स्थित घंटाघर तिरंगे के रंग से जगमगाया। जम्मू कश्मीर में स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त,2021) के लिए भी खास तैयारियां की गई। श्रीनगर का घंटाघर चौक तिरंगे से रोशन किया गया और घंटाघर में नई घड़ियां भी लगा दी गई। रात में घंटाघर की शोभा देखते ही बन रही थी। श्रीनगर नगर निगम ने चौक की साफ़-सफाई की। 

अनुच्छेद-370 व 35ए खत्म होने से ये आए 15 महत्वपूर्ण बदलाव
1. अब जम्मू-कश्मीर में देश के अन्य राज्यों के लोग भी जमीन ले सकते हैं। जम्मू-कश्मीर में स्थानीय लोगों की दोहरी नागरिकता समाप्त हो गई है।
2. कश्मीर का अब अलग झंडा नहीं है। मतलब वहां भी अब तिरंगा शान से लहराता है। जम्मू-कश्मीर में अब तिरंगे का अपमान या उसे जलाना या नुकसान पहुंचाना संगीन अपराध है।
3. अनुच्छेद-370 के साथ ही जम्मू-कश्मीर का अलग संविधान भी इतिहास बन गया है। अब वहां भी भारत का संविधान लागू है।
4. बेहतर शासकीय प्रबंधन के लिए जम्मू-कश्मीर को दो भागों में बांटा गया है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अब अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेश बन गए हैं।
5. महिलाओं पर पर्सनल कानून बेअसर हो गया। इस संशोधन से सबसे बड़ी राहत जम्मू-कश्मीर की महिलाओं को ही मिली है। इसको जम्मू-कश्मीर की महिलाओ की आजादी के तौर भी देखा जा सकता है।
6. अनुच्छेद-370 की पहचान इसके सबसे विवादित खंड 2 व 3 से थी, जो भेदभाव से भरी थी। इन दोनों खंडों के समाप्त होने से प्रभावी रूप से अनुच्छेद 370 से आजादी मिल गई है।
7. जम्मू-कश्मीर में विधानसभा होगी, लेकिन लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी। मतलब जम्मू-कश्मीर में राज्य सरकार बनेगी, लेकिन लद्दाख की कोई स्थानीय सरकार नहीं होगी।  
8. जम्मू-कश्मीर की लड़कियों को अब दूसरे राज्य के लोगों से भी शादी करने की स्वतंत्रता है। दूसरे राज्य के पुरुष से शादी करने पर उनकी नागरिकता खत्म नहीं होगी।
9. जम्मू-कश्मीर सरकार का कार्यकाल अब छह साल का नहीं, बल्कि भारत के अन्य राज्यों की तरह पांच वर्ष का ही होगा।
10. भारत का कोई भी नागरिक अब जम्मू-कश्मीर में नौकरी भी कर सकता है। अब तक जम्मू-कश्मीर में केवल स्थानीय लोगों को ही नौकरी का अधिकार था।
11. अन्य राज्यों से जम्मू-कश्मीर जाकर रहने वाले लोगों को भी वहां मतदान करने का अधिकार मिल सकेगा। साथ ही अन्य राज्यों के लोग भी अब वहां से चुनाव लड़ सकेंगे।
12. जम्मू-कश्मीर व लद्दाख के लोग भी अब शिक्षा के अधिकार, सूचना के अधिकार जैसे भारत के हर कानून का लाभ उठा रहे हैं।
13. केंद्र सरकार की कैग जैसी संस्था अब जम्मू-कश्मीर में भी भ्रष्टाचार पर नियंत्रण के लिए ऑडिट कर सकेगी। इससे वहां भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी।
14. अब जम्मू-कश्मीर व लद्दाख में भी सुप्रीम कोर्ट का हर फैसला लागू होगा। पहले विशेष दर्जे के कारण जनहित में दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले वहां लागू नहीं होते थे।
15. अब तक यहां की कानून-व्यवस्था मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी थी। अब दिल्ली की तरह जम्मू-कश्मीर व लद्दाख की कानून-व्यवस्था भी सीधे केंद्र के हाथ में होगी। गृहमंत्री, उपराज्यपाल के जरिये इसे संभालेंगे।

लद्दाख के साथ भेदभाव हुआ खत्म     
जम्मू कश्मीर राज्य पुनर्गठन से लद्दाख भी अलग केंद्रशासित प्रदेश बना। इससे वहां के लोगों की भेदभाव वाली शिकायतें दूर होने लगीं। इस नए केंद्र शासित प्रदेश के लिए अलग से योजनाएं बनने से उनकी सीधा लाभ लोगों तक पहुंचने लगा। हाल के वर्षों में घाटी और जम्मू के साथ लद्दाख की समस्याओं को भी समझने का काम हुआ है। दो राज्यों, जम्मू कश्मीर और लद्दाख को फिलहाल केंद्रशासित की श्रेणी में ही रखा गया है। केंद्र सरकार की ओर से गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में भरोसा दिया है कि समय आने पर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देकर उसकी विधानसभा भी बहाल कर दी जायेगी।

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