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कोरोना काल में प्रधानमंत्री मोदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, तीन महीनों में 101 कार्यक्रमों में लिया हिस्सा

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कोरोना काल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपनी व्यस्तता के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। कोरोना के इस कठिन समय में प्रधानमंत्री मोदी खुद को देश और जनता की सेवा में झोंक दिया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक कोविड-19 महामारी के दौरान अपनी सार्वजनिक व्यस्तताओं को बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस साल सितंबर और नवंबर के बीच 101 कार्यक्रमों में भाग लिया, यानि लगभग रोजना एक या उससे अधिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया। अगर इसकी तुलना पिछले वर्ष के दौरान इसी समय से की जाए तो पिछले वर्ष प्रधानमंत्री की 78 घरेलू व्यस्तताएं थीं। जबकी इस वर्ष उनकी व्यस्तता में 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

पिछले तीन महीनों में टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हुए समाज के सभी वर्गों, ग्रामीण भारत से लेकर निवेशकों और युवाओं से लेकर बड़ी-बड़ी कंपनियों के सीईओ के साथ चर्चाओं में हिस्सा लिया है। बताया गया है कि प्रधानमंत्री ने इस वर्ष सितंबर और नवंबर के बीच किसी परियोजना के शुभारंभ से जुड़े 26 कार्यक्रमों में भाग लिया।

सरकार ने समाज के वंचित वर्गों की मदद करने पर ध्यान केंद्रित करने के साथ, गरीबों के कल्याण को अपनी बातचीत में मुख्य विषय बताया, सूत्रों ने कहा कि मोदी ने सड़क विक्रेताओं के साथ बातचीत की और लाभार्थियों को ‘पीएम आवास योजना’, गरीबों के लिए एक आवास योजना। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई इन चर्चाओं के दौरान सरकार को मुख्य फोकस समाज के वंचित वर्गों की मदद करने और गरीबों के कल्याण पर रहा। इस दौरान प्रधानमंत्री ने जहां रेहड़ी-पटरी वालों से बातचीत की, वहीं गरीबों के लिए चलाई जा रही पीएम आवास योजना के लाभार्थियों से भी बातचती की।

इस दौरान प्रधानमंत्री ने एजुकेशन सेक्टर को भी अपनी प्राथमिकताओं में रखा। उन्होंने शिक्षा से जुड़े आठ कार्यक्रमों में हिस्सा लिया और इनमें हाल में सरकार द्वारा मंजूर की गई नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री ने इंटरनेशनल इन्वेस्टर्स से जुड़े चार कार्यक्रमों में भी हिस्सा लिया। जबकि सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ कोरोना महामारी पर दो बार वर्चुअल मीटिंग में भी हिस्सा लिया।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रधानमंत्री ने 10 अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों में भाग लिया, जिसमें जी-20, आसियान-भारत शिखर सम्मेलन, ब्रिक्स और इटली, लक्समबर्ग, श्रीलंका और डेनमार्क के साथ वर्चुअल शिखर सम्मेलन शामिल हैं।

कई दिन ऐसे भी थे जब प्रधानमंत्री मोदी ने दो अलग-अलग विषयों से जुड़े कार्यक्रम में हिस्सा लिया। जैसे जिस दिन उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को संबोधित किया, उसी दिन उन्होंने बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के ‘वार्षिक ग्रैंड चैलेंज’ कार्यक्रम में भी भाग लिया। इसी तरह, जिस दिन उन्होंने उत्तर प्रदेश के ‘स्वनिधि’ योजना के लाभार्थियों से बात की, उसी दिन उन्होंने सीबीआई द्वारा आयोजित ‘नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन’ में भी हिस्सा लिया। इसी प्रकार जिस दिन उन्होंने आसियान-भारत शिखर सम्मेलन में बात की, उसी दिन उन्होंने विवेकानंद की प्रतिमा के उद्घाटन के मौके पर जेएनयू के छात्रों को भी संबोधित किया।

सूत्रों के मुताबिक सार्वजनिक कार्यक्रमों के अलावा प्रधानमंत्री मोदी की आंतरिक बैठकों में भी काफी वृद्धि हुई है। क्योंकि उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं और सुधारों में तेजी लाने के लिए क्षेत्रीय समीक्षा बैठकों की आवृति को बढ़ा दिया। एक अधिकारी ने कहा कि चूंकि अधिकांश बैठकें वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित की जाती हैं, इसलिए इससे समय की बचत होती है और इसके कारण अधिक उत्पादकता आई है।

इतना ही नहीं इस अवधि के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यपालों, एनडीएमए अधिकारियों के साथ बड़े पैमाने पर बातचीत की और अन्य मुद्दों के बीच विभिन्न चक्रवातों के लिए राहत कार्यों की समीक्षा की। प्रधानमंत्री ने भारत की वैक्सीन रणनीति पर वरिष्ठ अधिकारियों और वैज्ञानिकों के साथ भी कई बैठकें की हैं।

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