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देश का विकास और विरासत का संरक्षण साथ-साथ हो रहे हैं- प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को महाराष्ट्र के पुणे में संत तुकाराम शिला मंदिर के लोकार्पण किया। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मुझे इस बात पर गर्व है कि हम दुनिया की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक हैं। इस बात का श्रेय अगर किसी हो जाता है तो वह हिंदुस्तान की संत परंपरा है। संतों की कृपा से हर काम बड़े ही सरल और सुगम हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि ऋषि-मुनियों की वजह से आज भारत शाश्वत है, क्योंकि यह संतों की धरती है। हर युग में हमारे देश में समाज को अच्छी दिशा देने के लिए कोई न कोई महान व्यक्ति अवतरित होता रहा है। ऐसी महान विभूतियों ने ही हमारी शाश्वतता को सुरक्षित रखकर भारत को गतिशील बनाए रखा है।

संत तुकाराम जी कि दया, करुणा और सेवा का बोध उनके ‘अभंगों’ में मौजूद
संत तुकाराम जी के विषय में बोलते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दया, करुणा और सेवा का वह बोध आज भी हमारे पास उनके ‘अभंगों’ के रूप में मौजूद है। इन अभंगों ने हमारी पीढ़ियों को प्रेरणा दी है। जो भंग नहीं होता है जो समय समय के साथ शाश्वत और प्रासंगिक रहता है, वहीं अभंग है। पीएम मोदी ने कहा कि छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन में भी तुकाराम जी जैसे संतों ने बड़ी भूमिका निभाई थी। आज देश जब अपने सांस्कृतिक मूल्यों के आधार पर आगे बढ़ रहा है, तो संत तुकाराम जी के ‘अभंग’ हमें ऊर्जा दे रहे हैं, मार्ग दिखा रहे हैं।

संतों की कृपा से अपने-आप ही होती है ईश्वर की अनुभूति
प्रधानमंत्री मोदी ने देहू में कहा कि हमारे शास्त्रों में बताया गया है कि मनुष्य जन्म में सबसे दुर्लभ संतों का सत्संग होता है। यदि संतों की कृपा हो गई तो ईश्वर की अनुभूति अपने आप हो जाती है। उन्होंने कहा कि देहू की इस पवित्र तीर्थ भूमि पर आकर मुझे इसी प्रकार की अनुभूति हो रही है। देहू का शिला मंदिर में केवल भक्ति की शक्ति का एक केंद्र नहीं है, बल्कि भारत के सांस्कृतिक भविष्य को भी यह प्रशस्त करता है। इस पवित्र स्थान के पुनर्निर्माण के लिए मैं मंदिर न्यास और तमाम भक्तों का शुक्रगुजार हूं।

सरकार की हर योजना का लाभ बिना किसी भेदभाव के मिल रहा है सबको
पीएम मोदी ने कहा कि संत तुकाराम जी कहते थे- उंच नीच काही नेणे भगवंत॥ अर्थात्, समाज में ऊंच नीच का भेदभाव, मानव-मानव के बीच फर्क करना, ये बहुत बड़ा पाप है। वही आज देश का मंत्र है- सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास। उनका ये उपदेश जितना जरूरी भगवद्भक्ति के लिए है, उतना ही महत्वपूर्ण राष्ट्रभक्ति के लिए भी है। पीएम मोदी ने कहा कि सरकार की हर योजना का लाभ, हर किसी को बिना भेदभाव मिल रहा है। वारकरी आंदोलन की भावनाओं को सशक्त करते हुए देश महिला सशक्तिकरण के लिए भी निरंतर प्रयास कर रहा है।

वीर सावरकर जेल में हथकड़ियों को बजाते हुए तुकाराम जी के अभंग गाते थे
पीएम मोदी ने कहा कि संत अपने आपमें एक ऐसी ऊर्जा की तरह होते हैं, जो भिन्न-भिन्न स्थितियों-परिस्थितियों में समाज को गति देने के लिए सामने आते हैं। छत्रपति शिवाजी महाराज जैसे राष्ट्रनायक के जीवन में भी तुकाराम जी जैसे संतों ने बड़ी अहम भूमिका निभाई थी। आज़ादी की लड़ाई में वीर सावरकर जी को जब सजा हुई, तब जेल में वो हथकड़ियों को चिपली जैसा बजाते हुए तुकाराम जी के अभंग गाते थे। अलग-अलग कालखंड, अलग-अलग विभूतियाँ, लेकिन सबके लिए संत तुकाराम जी की वाणी और ऊर्जा उतनी ही प्रेरणादायक रही है।

श्रीराम से जुड़े स्थलों का रामायण सर्किट के रूप में हो रहा है विकास
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि हमारी राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए आज ये हमारा दायित्व है कि हम अपनी प्राचीन पहचान और परम्पराओं को चैतन्य रखें। इसीलिए, आज जब आधुनिक टेक्नोलॉजी और इनफ्रास्ट्रक्चर  भारत के विकास का पर्याय बन रहे हैं, तो हम ये सुनिश्चित कर रहे हैं कि विकास और विरासत दोनों एक साथ आगे बढ़ें। आज पंढरपुर पालकी मार्ग का आधुनिकीकरण हो रहा है तो चारधाम यात्रा के लिए भी नए हाइवे बन रहे हैं। अयोध्या में भव्य राममंदिर भी बन रहा है, काशी विश्वनाथ धाम परिसर भी अपने स्वरूप में उपस्थित है। महर्षि वाल्मीकि ने रामायण में भगवान राम से जुड़े जिन स्थलों का जिक्र किया है, रामायण सर्किट के रूप में उनका भी विकास किया जा रहा है। इन आठ वर्षों में बाबा साहब अंबेडकर के पंच तीर्थों का विकास भी हुआ है। पूरे देश में प्रसाद योजना के तहत तीर्थ स्थानों और पर्यटन स्थलों का विकास किया जा रहा है।

 

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