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भारतीय कपड़े की विदेशों में बढ़ी मांग, मोदी काल में निर्यात 99 प्रतिशत बढ़ा

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के विजन को साकार करने के लिए हर सेक्टर में मेड इन इंडिया प्रोडक्ट को बढ़ावा देने के लिए हर किस्म का प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसी प्रोत्साहन का नतीजा है कि आज हर क्षेत्र में भारत आत्मनिर्भर तो बन ही रहा है निर्यात में भी अपनी बादशाहत कायम कर रहा है। मोदी राज में कपड़ा क्षेत्र को मिले प्रोत्साहन की वजह से देश में उत्कृष्ट कपड़ा का उत्पादन किया जा रहा है विदेशों में भी इसकी मांग बढ़ी है। अप्रैल-जून 2013-14 में जहां भारत से 8638 करोड़ रुपये के कपड़े का निर्यात किया गया था वहीं अप्रैल-जून 2022-23 में 17204 करोड़ रुपये का निर्यात किया गया। इस तरह मोदी काल में कपड़ों के निर्यात में 99 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई।

वर्ष 2021-22 में 44.4 अरब डॉलर का हुआ निर्यात

भारत का कपड़ा और परिधान निर्यात वित्त वर्ष 2021-22 में 44.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया था जो अब तक किसी भी वित्त वर्ष में सबसे अधिक है। सरकार ने बताया कि निर्यात की सूची में हस्तशिल्प भी शामिल है तथा वित्त वर्ष 2021-22 में किया गया निर्यात 2020-21 और 2019-20 की तुलना में क्रमशः 41 प्रतिशत और 26 प्रतिशत अधिक है।

भारत का टैक्सटाइल एक्सपोर्ट में छठा स्थान

भारत ने वित्तवर्ष 2021-22 में अब तक का सबसे बड़ा टैक्सटाइल एक्सपोर्ट कर एक नया रिकॉर्ड बनाया है। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत का टैक्सटाइल एक्सपोर्ट में छठा स्थान है। यहां पर बाजी चीन ने मारी हुई थी, लेकिन भारत ने वैश्विक बाजार को देखते हुए अपनी रणनीति में बदलाव किया और उसका नतीजा हमारे सामने है। टैक्सटाइल निर्यात 44.4 अरब अमरीकी डॉलर का हुआ है, जिसमें हैंडीक्राफ्ट (हस्तशिल्प) उत्पादों की संख्या अच्छी-खासी है।

अमेरिका को सबसे अधिक किया गया कपड़ा निर्यात

कपड़ा मंत्रालय के अनुसार, भारत से अमेरिका को सबसे अधिक 27 प्रतिशत का कपड़ा और परिधान निर्यात किया गया। इसके बाद 18 प्रतिशत यूरोपीय संघ को किया गया है। वहीं, बांग्लादेश को 12 प्रतिशत और संयुक्त अरब अमीरात को 6 प्रतिशत निर्यात किया गया है।

सूती वस्त्रों के निर्यात में 54 प्रतिशत वृद्धि

उत्पाद कैटेगिरी के संदर्भ में सूती वस्त्रों का निर्यात 17.2 अरब डॉलर का था। इसकी कुल निर्यात में 39 प्रतिशत हिस्सेदारी रही है। वित्त वर्ष 2020-21 के मुकाबले इस वित्त-वर्ष में सूती वस्त्रों के निर्यात में 54 प्रतिशत और 2019-20 की तुलना में 67 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

तैयार कपड़ों के निर्यात की 36 प्रतिशत हिस्सेदारी

तैयार कपड़ों की बात करें तो इसके निर्यात की 36 प्रतिशत की हिस्सेदारी रही है। तैयार कपड़ों का निर्यात 16 अरब डॉलर का रहा, जो वित्त वर्ष 2020-21 की तुलना में 2021-22 के दौरान 31 प्रतिशत और 2019-20 की तुलना में 3 प्रतिशत अधिक है।

हैंडीक्रॉफ्ट का कुल निर्यात 6.3 अरब डॉलर

पीएम मोदी ने लोगों से आह्वान किया था कि वोकल पर लोकल। अब हैंडीक्रॉफ्ट निर्यात में वृद्धि से इसका असर साफ देखा जा सकता है। कपड़ा मंत्रालय के अनुसार मानव निर्मित कपड़ा और परिधान का कुल निर्यात 6.3 अरब डॉलर के साथ 14 प्रतिशत तथा हस्तशिल्प (handicrafts) की 2.1 अरब डॉलर के साथ 5 प्रतिशत हिस्सेदारी रही है।

कई देश चीन की बजाय भारत से खरीदना चाहते कपड़ा

निर्यात में जबसे भारत ने अपने आत्मनिर्भर कार्यक्रम का शंखनाद किया है, तब से भारत 4 गुणा अधिक गति से आगे बढऩे लगा है। भारत सरकार ने अपने कपड़ा उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जिससे लॉकडाऊन से परेशान चीन जहां वापस पटरी पर आने की जुगत लड़ा रहा है, तो वहीं भारत इस ट्रैक पर सरपट भाग रहा है। चैक गणराज्य, मिस्र, ग्रीस, जॉर्डन, मैक्सिको, स्पेन, तुर्की, पनामा और दक्षिण अफ्रीका समेत कई देशों की कंपनियों ने चीन से सामान खरीदने की जगह कपड़ा आयात के लिए भारतीय कंपनियों से बातचीत शुरू भी कर दी है।

भारत कपड़ा क्षेत्र में चीन को मात देने के लिए तैयार

चीन के कुछ शहरों से लॉकडाऊन हटाने के बाद भी कई अन्य शहर हैं जहां पर कोरोना महामारी के चलते अब जनजीवन सामान्य नहीं हुआ है, जिसके चलते भारत के कपड़ा उद्योग के निर्यात में तेज बढ़ोतरी हुई है। चीन में जितना नुकसान कोरोना महामारी से हुआ, उससे कहीं ज्यादा नुक्सान शी जिनपिंग की गलत नीतियों के कारण हुआ है, जिसका नतीजा चीन भुगत रहा है। इससे चीन के अधिकतर ग्राहकों ने उसका विकल्प ढूंढ लिया और उन्होंने अपने देश में कपड़े की खपत के लिए भारत से संपर्क किया।

विदेशी नामी ब्रांडों ने भारत को दिए आर्डर

कई विदेशी कंपनियों ने भारतीय कंपनियों को बड़े-बड़े ऑर्डर देने शुरू किए थे, जिसकी वजह से भारत ने रिकॉर्ड निर्यात किया, स्पैनिश कपड़ा कंपनी सोतोरेवेस एस.एल. ने एक लाख पीस टाई और डाई के साथ प्रिंटेड शर्ट्स के ऑर्डर भारतीय कंपनी को दिए। दक्षिण अफ्रीकी कंपनी लिजार्ड पी.टी.वाई. जिसके 180 स्टोर हैं, ने महिलाओं के पहनने वाले कपड़ों की बड़ी खेप का ऑर्डर दिया। वहीं ग्रीस की कपड़ा कंपनी ने पुरुषों के परिधान का बड़ा ऑर्डर दिया। ये सारे खरीदार पहले चीन से सामान खरीदते थे लेकिन वहां कोविड महामारी के चलते उन्होंने भारत का रुख किया।

चीन में काम कर रही विदेशी कंपनियां भारत आना चाहती हैं

चीन में विदेशी कपड़ा उद्योग से जुड़ी जितनी भी कंपनियां हैं, वे भारत आने का मन बना चुकी हैं और इससे भारत का दक्षिणी राज्य तमिलनाडु कपड़ा उद्योग का केन्द्र बनकर उभरा है। यह सही समय है, जब भारत अपने कपड़ा उद्योग से अपनी सांस्कृतिक पोशाक को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए काम करे, क्योंकि भारत के लिए यह एक सुनहरा मौका है जब वह ऐसा कर सकता है। इसके साथ ही भारत को विदेशी खरीदारों को सर्वोच्च स्तर का सामान बेचना चाहिए, जिससे चीन के हालात ठीक होने पर भी जो ग्राहक भारत से सामान खरीद रहे हैं, वे बाद में भी अपने सप्लायरों को न बदलें।

कपड़ा क्षेत्र को और अधिक कुशल बनाने पर जोर

परिधान निर्यात संवर्धन परिषद (एईपीसी) ने अभी कुछ समय पहले भारतीय परिधान उद्योग के बीच सर्कुलरिटी को बढ़ावा देने’ पर एक गहन विचार-विमर्श सत्र आयोजित किया। इस पहल के लिए एईपीसी ने फैशन फॉर गुड्स, नीदरलैंड्स के साथ भागीदारी की है। एईपीसी ने विश्व स्तर पर कपड़ा निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने के लिए स्थिरता और सर्कुलेरेटी पर एक अभियान शुरू किया है जिससे कपड़ा क्षेत्र को और अधिक कुशल बनाया जा सके।

भारत ने फैशन फॉर गुड्स, नीदरलैंड्स से साझेदारी की

फैशन फॉर गुड, नीदरलैंड्स के सहयोग से आयोजित इस गहन विचार-विमर्श सत्र में ब्रांड पार्टनर्स (पीवीएच, एडीडास, एलएस एंड कंपनी, टेस्को, टारगेट, प्रिमार्क), सप्लाई चेन पार्टनर्स: अरविंद, बिरला सैल्‍यूलोज एंड वैलस्‍पन इंडिया) प्री-कंज्यूमर पायलट हितधारकों: 20 निर्माता, टेक्नोलॉजी इनोवेटर्स: रिवर्स रिसोर्सेज, मटोहा, पिकविसा आदि सहित परिधान मूल्य श्रृंखला में लगे सभी हितधारकों को शामिल किया गया।

वैश्विक परिधान बाजार 2022 में 605.4 बिलियन डॉलर का हो गया

वैश्विक परिधान बाजार का आकार 2021 में 551.36 बिलियन डॉलर से बढ़कर 2022 में 605.4 बिलियन डॉलर हो गया। इसके 2026 में 843.13 बिलियन डॉलर तक बढ़ने की उम्मीद है, जो 8.6 प्रतिशत की वृद्धि और सरकारी प्रोत्साहनों, पीएलआई और पीएम-मित्रा के माध्यम से मंत्रालय के सहयोग को दर्शाता है। एईपीसी के अध्यक्ष ने कहा कि भारत कम से कम आयात निर्भरता और कच्चे माल की विविध उपलब्धता की अपनी प्रमुख ताकत के साथ प्रमुख अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों और खुदरा विक्रेताओं के लिए एक पसंदीदा विनिर्माण केंद्र बन गया है।

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