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एक और कीर्तिमान: देश में अब तक लगाए गए 200 करोड़ से अधिक टीके, देखिए कोरोना काल में किस तरह संकटमोचक बने प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत में विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान चल रहा है। इस अभियान ने देश ने ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। भारत ने कोरोना टीकाकरण के मामले में कई कीर्तिमानों का पड़ाव पार करते हुए एक नया इतिहास रच दिया है। भारत ने 17 जुलाई को टीकाकरण अभियान में 200 करोड़ के मील के पत्थर को पार कर लिया। देश में तेज रफ्तार से जारी कोरोना टीकाकरण के कारण 18 जुलाई की सुबह 7 बजे तक 200 करोड़ से अधिक कुल 2,00,04,61,095 टीके लगाए जा चुके हैं। 12 से 14 आयु वर्ग के 3,79,98,722 से ज्यादा बच्चों को पहली खुराक दी जा चुकी है। 15 से 18 वर्ष आयु वर्ग के 6,08,48,302 किशोरों को पहली खुराक और 5,01,31,500 किशोरों को दूसरी खुराक भी दी जा चुकी है।

प्रधानमंत्री मोदी ने 16 जनवरी, 2021 को टीकाकरण अभियान शुरू किया था। 16 जनवरी 2021 को टीकाकरण अभियान आरंभ होने के बाद से 100 करोड़ के अंक तक पहुंचने में लगभग 9 महीने लग गए और 200 करोड़ टीकाकरण के चिन्‍ह तक पहुंचने में 9 महीने और लगे, जिसमें सबसे अधिक एक दिन का टीकाकरण रिकॉर्ड 17 सितम्‍बर, 2021 को हासिल किया गया जब एक ही दिन में 2.5 करोड़ टीके लगाए गए।

टीकाकरण अभियान में मील के पत्थर
16 जनवरी, 2021- टीकाकरण अभियान शुरू
01 अप्रैल, 2021 – 10 करोड़ डोज
25 जून, 2021 – 25 करोड़ डोज
06 अगस्त, 2021– 50 करोड़ डोज
13 सितंबर, 2021– 75 करोड़ डोज
21 अक्टूबर, 2021– 100 करोड़ डोज
07 जनवरी, 2022 – 150 करोड़ डोज
17 जुलाई, 2022- 200 करोड़ डोज

टीकाकरण अभियान के एक साल का सफर

16 जनवरी, 2021– स्वास्थ्यकर्मियों के टीकाकरण से अभियान की शुरुआत हुई।
02 फरवरी, 2021– फ्रंटलाइन वर्कर को टीका लगाना शुरू किया गया।
01 मार्च, 2021– 60+ और रोगों से पीड़ित 45-60 वर्ष का टीकाकरण शुरू हुआ।
01 अप्रैल, 2021– 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण शुरू हुआ।
01 मई, 2021– 18 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों का टीकाकरण शुरू हुआ।
02 नवंबर, 2021– कोरोना टीकाकरण कवरेज बढ़ाने के लिए ‘हर घर दस्तक’ अभियान शुरू हुआ।
03 जनवरी, 2022- 15 से 18 वर्ष आयुवर्ग के किशोरों का टीकाकरण शुरू हुआ।
10 जनवरी, 2022 – स्वास्थ्यकर्मियों, फ्रंटलाइन वर्कर, बुजुर्गों को सतर्कता डोज देने की शुरुआत।
15, जुलाई, 2022- सरकारी केंन्द्रों पर मुफ्त बूस्टर डोज की शुरुआत

पीएम मोदी के प्रयासों से आठ माह में भारत को मिल गईं दो-दो वैक्सीन
कोविड महामारी से लड़ने के लिए भारत के प्रयासों की बात करें तो इसकी दस्तक के साथ ही भारत ने जहां सबसे सख्त लॉकडाउन लगाया, वहीं दूसरी ओर अपने स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के साथ ही इस बीमारी से लड़ाई की जोरदार तैयारियां शुरू कर दीं। अप्रैल 20 में वैक्सीन के लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया। बजट में 35000 करोड़ रुपये वैक्सीन के शोध और विकास के लिए रखे गए। पीएम केयर्स फंड बनाकर कोविड के खिलाफ लड़ाई को मजबूत किया गया। मात्र आठ माह में ही न केवल दो-दो वैक्सीन भारत को मिल गईं, बल्कि इनके भंडारण, परिवहन, खरीद, कोल्ड चेन से लगाने तक की पूरी रूपरेखा बनाकर 16 जनवरी 2021 से विश्व का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान शुरू किया गया।

आइए सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं कि कोरोना की काली छाया पड़ने के बाद वैक्सीन बनाने, बहु-विविधता वाले देश में सुदूर गांवों तक पहुंचाने और वैक्सीनेशन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाने की दिशा में भारत ने कैसे बढ़ाए कदम…

विश्व कल्याण के एकमेव लक्ष्य के साथ आगे बढ़ते चले गए

5 मई, 2020
वैक्सीन टास्क फ़ोर्स की बैठक। भारत में ही वैक्सीन निर्माण का फैसला। वैक्सीन निर्माण की सारी बाधाओं को हटाने का रास्ता साफ। कच्चे माल और जरूरी नियमों के पालन के लिए दूसरे राष्ट्रों और वैश्विक संस्थाओं से बातचीत का दौर शुरू।

17 मई, 2020
अप्रूवल या अन्य किसी भी तरह की बाधाएं वैक्सीन के रिसर्च और उत्पादन में रोड़ा ना डाल सकें। उसके लिए पूरा सिस्टम दुरुस्त किया गया। वैक्सीन उत्पादक और रिसर्च करने वाली कम्पनियों की सारी परेशानियों को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सब कुछ सीधा अपनी ही देखरेख में ले लिया।

13 जून, 2020
पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट और एस्ट्राजेनेका के बीच अपने उत्पाद का निर्माण करने के लिए एक करार हुआ। विशेष रूप से भारत और गावी देशों के लिए सालाना एक अरब वैक्सीन का। ताकि सभी भारतीयों तक वैक्सीन यथाशीघ्र पहुंचाई जा सके।

ये भी निर्णय किया गया कि उत्पादन से लेकर प्रत्येक भारतीय के टीकाकरण तक की निगरानी के लिए technology का प्रयोग किया जाए। CoWIN एप्प की उत्पत्ति इसी के चलते हुई । जनवरी से मार्च तक 30 करोड़ वैक्सीन डोज़ के उत्पाद और वितरण का खाका तैयार किया गया और वैक्सीन को नाम मिला कोविशील्ड। दूसरी ओर आईसीएमआर और भारत बायोटेक ने भी कौवैक्सीन के निर्माण की तैयारियों को अंतिम रूप दिया।

12 अगस्त, 2020
प्रधानमंत्री मोदी ने नेशनल एक्सपर्ट ग्रुप ऑन वैक्सीन एडमिनिस्ट्रेशन फॉर COVID-19 (NEGVAC) का गठन किया। वैक्सीन को देश के हर नागरिक तक पहुंचाने के लिए डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, सप्लाई चेन के लिए पूरा विचार विमर्श हुआ और भविष्य की रूपरेखा तैयार की गयी।

15 अक्टूबर, 2020
थोक में वैक्सीन की खरीद, सप्लाई चेन और उसके उपकरण की खरीद और उपयोग का पूरा प्लान तैयार हो चुका था। इसके साथ ही केंद्र सरकार किस तरह से वैक्सीन बनाने वाली कम्पनियों को सहयोग आगे बढ़ाएगी,  उसकी भी आगे की रूपरेखा निर्धारित हुई।

17 अक्टूबर, 2020
कोल्ड स्टोरेज चेन, वितरण नेटवर्क और प्रणाली, मोनिटरिंग कार्यप्रणाली एडवांस असेसमेंट और अन्य उपकरणों की जरुरत के हिसाब से खरीद और उपयोग के लिए विचार विमर्श हुआ। 20 नवम्बर को  देश की जनसंख्या में किसको, कब वैक्सीन लगाई जाएगी। technology प्लेटफार्म और कोल्ड स्टोरेज के सही उपयोग की प्रणाली की समीक्षा हुई।

28 नवम्बर, 2020
प्रधानमंत्री मोदी भारत में बनने वाली वैक्सीन के तीनों प्लांट पर हैदराबाद, अहमदाबाद और पुणे पहुंचे और हर तैयारी का खुद निरीक्षण किया और जायजा लिया। इससे रात दिन मेहनत कर रहे हमारे वैज्ञानिको में एक नए उत्साह का संचार हुआ।

7 दिसंबर, 2020
कोविशील्ड के अप्रूवल के लिए एप्लीकेशन डाली गयी। इसके बाद दिसंबर में ही वैक्सीन और उससे सम्बंधित सप्लाई चेन और अन्य उपकरणों को विस्तार से ड्राई रन किया गया। इस तरह ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका के साथ मिलकर सीरम इंस्टीट्यूट ने दुनिया की सबसे सस्ती कोरोना वैक्सीन कोविडशील्ड बनाई। भारत में पहली बार कोवैक्सीन नाम से स्वदेशी वैक्सीन विकसित की गई। आज विश्व के सभी देश इस वैक्सीन को मान्यता दे चुके हैं। इसे भारत की ICMR और भारत बायोटेक ने मिलकर तैयार किया।

16 जनवरी, 2021
भारत में विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान की शुरुआत हुई। यह मुफ्त टीकाकरण अभियान है। भारत ने विश्व में सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के लिए स्वदेश में ही CO-win सॉफ्टवेयर विकसित किया, जिसे विश्व में सभी देशों की मांग पर Open Source कर दिया गया है।

10 अप्रैल, 2021
भारत ने 85 दिनों में ही 10 करोड़ टीकाकरण का लक्ष्य पूरा कर लिया जो विश्व में सबसे तेज गति का टीकाकरण रहा, इससे पहले चीन को 89 दिन और अमेरिका को 102 दिनों का समय लगा। टीकाकरण के लिए उपयोग में आने वाले सिरिंज का सबसे बड़ा विश्व में उत्पादक भारत है।

17 सितंबर, 2021
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के मौके पर देश में कोरोना टीकाकरण के सारे कीर्तिमान टूट गए हैं।  इस दिन रिकॉर्ड 2.50 करोड़ से अधिक टीके लगाए गए। भारत की इस उपलब्धि ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया,  जिसने एक दिन में करीब 2.47 करोड़ टीके लगाए थे।

21 अक्टूबर, 2021
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन, दूरदृष्टि और अटल इरादों के साथ आज देश ने 100 करोड़ वैक्सीनेशन का आंकड़ा पार कर लिया। एक सदी में आई सबसे बड़ी महामारी का मुकाबला करने के लिए अब देशवासियों के पास 100 करोड़ डोज का मजबूत सुरक्षा कवच था। देशवासियों को तीसरी लहर के कहर से इसी वैक्सीनेशन ने बचाया।

22 नवंबर, 2021
केन्द्रीय मंत्री जितेन्द्र सिंह के मुताबिक भारत ने 22 नवंबर तक 95 देशों को कोविड-19 की करीब 7.07 करोड़ खुराकों की आपूर्ति कर दी थी। इनमें से भारत सरकार ने 47 देशों को 1.27 करोड़ खुराकें दीं। बाकी की 5.8 करोड़ खुराकों की आपूर्ति सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने अपने व्यावसायिक और कोवैक्स वादों के तहत की। नवंबर के बाद तीन और नए देशों को वैक्सीन की आपूर्ति की गई है।3 जनवरी, 2022
कोरोना के बाद ओमिक्रोन संक्रमण का कहर भी कई देशों में तेजी से फैला। इसके बढ़ते खतरे के बीच भारत सरकार ने 15 से 18 वर्ष आयु के युवाओं को संक्रमण से बचाने के लिए तीन जनवरी से विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया। किशोर और युवाओं को वैक्सीनेशन से अभिभावकों में विश्वास जागा। इसके बाद स्कूल-कालेजों में पहले की तरह ऑफलाइन पढ़ाई सुनिश्चित हुई।

7 जनवरी, 2022
इस दिन भारत ने कोरोना टीकाकरण के मामले में मील का पत्थर हासिल किया। देश में 150 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन का आंकड़ा पार हुआ। इसके साथ ही देश में 62 करोड़ से ज्यादा लोगों को पूर्ण टीकाकरण भी हो गया। इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि आज देश ने एक और महत्वपूर्ण पड़ाव को पार किया है। साल के पहले महीने के पहले हफ्ते में भारत 150 करोड़ वैक्सीन डोज लगाने का ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। दुनिया के अधिकतर देशों के लिए ये आश्चर्य से कम नहीं। भारत के लिए ये नई इच्छा शक्ति का प्रतीक है, जो असंभव को संभव करने के लिए कुछ भी कर गुजरने का हौसला रखती है।

16 मार्च, 2022
पीएम मोदी की लगातार निगरानी और समीक्षा से कोरोना वैक्सीनेशन अभियान जेट स्पीड से चला। देश में 16 मार्च से 15 साल से छोटे बच्चों का कोरोना वैक्सीनेशन भी शुरू हो गया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने तब ट्वीट इसकी जानकारी दी थी कि 16 मार्च से 12, 13 और 14 साल के बच्चों को भी कोरोना की वैक्सीन लगाई जाएगी। इस आयुवर्ग के बच्चों की अनुमानित संख्या 7.5 करोड़ के आसपास है।

15 जुलाई, 2022
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में 13 जुलाई को केंन्द्रीय कैबिनेट ने फैसला किया कि 15 जुलाई, 2022 से अगले 75 दिनों तक सरकारी टीकाकरण केंद्रों पर 18 वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों को मुफ्त एहतियाती खुराक (प्रीकॉशन डोज) दिया जाएगा। इस तरह से सरकारी केंन्द्रों पर मुफ्त बूस्टर डोज की शुरुआत हो गई।

17 जुलाई, 2022
भारत ने ‘200 करोड़’ कोविड-19 टीकाकरण की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की।

कोरोना संकट की घड़ी में प्रधानमंत्री मोदी संकटमोचक बन कर सामने आए हैं। आइए एक नजर डालते है मोदी सरकार की कुछ पहलों पर…

पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन योजना: बेसहारा हुए बच्चों को सौगात
प्रधानमंत्री मोदी ने 30 मई को कोरोना काल में अनाथ हुए बच्चों के लिए पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन योजना की शुरुआत की। इस योजना के तहत अनाथ बच्चों के बैंक खातों में पीएम केयर्स फंड से छात्रवृत्ति दी जाती है। पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन योजना के जरिए कोरोना काल में बेसहारा हुए बच्चों की कॉपी-किताबों और यूनिफॉर्म्स के खर्चों को भी उठाया जाएगा। अगर किसी को प्रॉफेशनल कोर्स के लिए, हायर एजुकेशन के लिए एजुकेशन लोन चाहिए होगा, तो पीएम केयर्स उसमें भी मदद करेगा। रोजमर्रा की दूसरी जरूरतों के लिए अन्य योजनाओं के माध्यम से उनके लिए 4 हजार रुपए हर महीने की व्यवस्था भी की गई है। उन्हें 18 से 23 साल की उम्र तक स्टाइपेंड मिलेगा और 23 साल हो जाने पर 10 लाख रुपये अलग से मिलेंगे। इसके साथ ही 5 लाख तक के इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड भी मिलेगा।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 26 मार्च, 2020 को लॉकडाउन के प्रभाव से 80 करोड़ गरीबों को बचाने के लिए प्रधानमंत्री गरीब कल्याण पैकेज की घोषणा की। पीएम गरीब कल्याण धन योजना के तहत किसानों, मनरेगा, गरीब विधवा, गरीब पेंशनधारी और दिव्यांगों, और जनधन अकाउंट धारी महिलाओं, उज्ज्वला योजना की लाभार्थी महिलाएं, स्वयं सेवा समूहों की महिलाओं और संगठित क्षेत्र के कर्मचारियों, कंस्ट्रक्शन से जुड़े मजदूरों को मदद दी जा रही है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना में हर गरीब को 5 किलो का अतिरिक्त गेहूं और चावल, यानी कुल 10 किलो का गेहूं या चावल मिल रहा हैं। साथ ही उन्हें 1 किलो दाल भी मिल रही है, जिसमें क्षेत्र के मुताबिक लोगों के पसंद की दाल दी जाती है।

अतिरिक्त खाद्यान्न 5 किलोग्राम प्रति व्यक्ति प्रति माह के आधार पर दिया जाता है, जो उनके नियमित मासिक राशन वाले अनाज के अलावा उन्हें प्राप्त होता है। पहले 2020-21 के दौरान पीएम-जीकेएवाई योजना की घोषणा केवल तीन महीने अप्रैल, मई और जून 2020 (पहले चरण) के लिए की गई थी। बाद में, गरीबों और जरूरतमंद लाभार्थियों की खाद्य-सुरक्षा को देखते हुए सरकार ने इसे जुलाई से नवंबर 2020 (दूसरे चरण) तक पांच महीने की अवधि के लिए और बढ़ा दिया था। कोरोना संकट के 2021-22 में जारी रहने के कारण अप्रैल 2021 में सरकार ने फिर से मई और जून 2021 (तीसरे चरण) और फिर जुलाई से नवंबर 2021 (चौथे चरण) तक पांच महीने के लिए बढ़ा दिया। इसके बाद, नवंबर 2021 में कोरोना की स्थिति को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने मुफ्त अनाज का वितरण दिसंबर 2021 से मार्च 2022 (पांचवें चरण) तक जारी रखने का फैसला किया। प्रधानमंत्री मोदी ने PMGKAY को एक बार फिर अप्रैल 2022 से बढ़ाकर सितंबर 2022 तक कर दिया है। अब देश के इन 80 करोड़ लाभार्थियों को सितंबर,2022 तक मुफ्त अनाज मिलेगा।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना ने देश को अत्यधिक गरीबी से बचाया- IMF
अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कोरोना महामारी के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चलाई गई प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएम-जीकेएवाई) की तारीफ करते हुए कहा कि इससे देश में गरीबी रोकने में मदद मिली है। इस योजना से कोरोना महामारी के समय में भी समाज के कमजोर वर्गों को लगातार बुनियादी सुविधाएं मिल रही हैं। आईएमएफ ने अपनी नई रिपोर्ट में पाया कि 2019 में भारत में अत्यधिक गरीबी का स्तर 1 प्रतिशत से कम था जो वर्ष 2020 के दौरान भी उसी स्तर पर बना रहा। ‘महामारी, गरीबी और असमानता : भारत के सबूत’ पर जारी शोध के रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के कारण कोरोना काल में भी भारत में अत्यधिक गरीबी के स्तर में कोई वृद्धि नहीं हुई। रिपोर्ट के अनुसार महामारी से पहले वर्ष 2019 में अत्यधिक गरीबी का स्तर 0.8 प्रतिशत था और इस खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम का प्रभाव यह हुआ कि यह महामारी वर्ष 2020 में भी उसी स्तर पर बना रहा। आईएमएफ की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अत्यधिक गरीबी का स्तर लगातार दो साल तक निम्न स्तर पर बना रहना, इसमें भी एक साल तो महामारी का था, साबित करता है कि देश में तेजी से गरीबी उन्मूलन हो रहा है। यह योजना देश में अत्यधिक गरीबी के स्तर में बढ़ोतरी रोकने में अहम रही है। इसने कोरोना काल के दौरान गरीबों की आय पर लगे झटके को सहन करने में बड़ी मदद की है।

कोरोना काल में PLI स्कीम से इकोनॉमी को बूस्टर डोज
कोरोना संकट काल में प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर शुरू की गई PLI scheme यानी उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना के तहत अगले पांच सालों में लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपए के प्रोत्साहन की पेशकश करके प्रमुख क्षेत्रों में मैनुफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है। पीएलआई स्कीम के लिए फिलहाल 14 क्षेत्रों का चुनाव किया गया है। इनमें ऑटोमोबाइल, लैपटॉप, मोबाइल फोन और दूरसंचार उपकरण, ड्रोन निर्माण व्हाइट गुड्स इंडस्ट्री, रासायनिक सेल, टेक्सटाइल, फूड प्रोडक्शन सहित आईटी हार्डवेयर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। आगे इसमें और क्षेत्रों को शामिल किए जाने की संभावना है। इस योजना के तहत अगले 5 साल में 6 लाख से ज्‍यादा नौकरियां पैदा होंगी।

ब्लूमबर्ग की कोविड रैंकिंग में भारत की बड़ी छलांग
ब्लूमबर्ग की कोविड रेसीलियंस रैंकिंग (Covid Resilience Ranking) में इंडिया ने बड़ी छलांग लगाई है। इस रैंकिंग से इस बात का पता चलता है कि देश में सामाजिक और आर्थिक परेशानी के बीच कोरोना वायरस संक्रमण को प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जा रहा है। इस लीग टेबल में विश्व की 53 अर्थव्यवस्थाओं का आकलन कोरोना कंटेनमेंट जोन, इकोनॉमी और अन्य पहलुओं के आधार पर किया गया। ब्लूमबर्ग की इस रैंकिंग में भारत 26वें पायदान पर है। भारत ने सारे इंडीकेटर में बेहतर प्रदर्शन किया है। यह दर्शाता है कि देश में सामाजिक और आर्थिक परेशानियों के बीच भी कोरोना वायरस संक्रमण को बेहद प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया गया है।

इतना ही नहीं प्रधानमंत्री मोदी कोरोना संकट काल में भी पूरी दुनिया के लिए संकटमोचक बने हुए हैं। आइए डालते हैं एक नजर-

6 पड़ोसियों सहित 100 से अधिक देशों को वैक्सीन सप्लाई
प्रधानमंत्री मोदी देश ही नहीं दुनिया भर के लिए संकटमोचक बन कर सामने आए हैं। भारत ने भूटान, मालदीव, बांग्लादेश, नेपाल, म्यांमार और सेशेल्स को अनुदान सहायता के तहत 20 जनवरी, 2021 से कोरोना वैक्सीन की आपूर्ति शुरू की थी। इसके बाद 100 से अधिक देशों को कोरोना वैक्सीन की 6 करोड़ से अधिक की डोज भेजी गई। कोरोना काल में भारत ने पहले भी कई देशों को बड़ी संख्या में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, रेमडेसिविर और पेरासिटामोल गोलियों के साथ-साथ डायग्नोस्टिक किट, वेंटिलेटर, मास्क, दस्ताने और अन्य चिकित्सा आपूर्ति की।

55 से अधिक देशों में की गई दवा की आपूर्ति
कोरोना को मात देने में सक्षम समझी जाने वाली दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन (एचसीक्यू) की आपूर्ति को लेकर भारत दुनिया का सबसे अग्रणी देश बन गया। 55 से अधिक देशों में इस दवा की आपूर्ति की गई। अमेरिका, ब्रिटेन जैसे शक्तिशाली देश भारत से इस दवा को खरीद रहे हैं, लेकिन गुआना, डोमिनिक रिपब्लिक, बुर्कीनो फासो जैसे गरीब देश भी हैं, जिन्हें अनुदान के तौर पर इन दवाओं की आपूर्ति की गई। भारत डोमिनिकन रिपब्लिक, जांबिया, युगांडा, बुर्कीना फासो, मेडागास्कर, नाइजर, मिस्र, माली कॉन्गो, अर्मेनिया, कजाखिस्तान, जमैका, इक्वाडोर, यूक्रेन, सीरिया, चाड, फ्रांस, जिंबाब्वे, जॉर्डन, केन्या, नाइजीरिया, नीदरलैंड्स, पेरू और ओमान को दवाएं भेज रहा है। साथ ही, फिलिपींस, रूस, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, स्लोवानिया, उज्बेकिस्तान, कोलंबिया, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), उरुग्वे, बहामास, अल्जीरिया और यूनाइटेड किंगडम (यूके) को भी मलेरिया रोधी गोलियां भेजा जा चुकी हैं।

भारतीय ही नहीं विदेशियों को भी सुरक्षित निकाला
भारत ने कोरोना काल में राहत और बचाव अभियान के मामले में सबसे अधिक उड़ानें भरी हैं। चीन, ईरान, इटली और जापान जैसे देशों से हजारों भारतीयों को निकाल कर देश वापस लाया गया। कोरोना प्रभावित इलाकों से भारत ने सिर्फ अपने नागरिकों को ही नहीं 10 से भी ज्यादा देशों के नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला। इनमें मालदीव, म्यामांर, बांग्लादेश, चीन, अमेरिका, मैडागास्कर, नेपाल, दक्षिण अफ्रीका और श्रीलंका जैसे देश शामिल हैं।

सार्क देशों के प्रमुखों के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने की चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी ने 15 मार्च, 2020 को सार्क देशों के नेताओं के साथ कोरोना वायरस पर रोकथाम संबंधी चर्चा की। उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए सार्क देशों के नेताओं के साथ क्षेत्र में कोविड-19 से मुकाबले के लिए साझा रणनीति बनाने के लिए बातचीत की। सहयोग की भावना के साथ प्रधानमंत्री मोदी ने सभी देशों के स्वैच्छिक योगदान के आधार पर कोविड-19 इमरजेंसी फंड बनाने का प्रस्ताव रखा। साथ ही भारत ने फंड के लिए शुरू में 10 मिलियन अमेरिकी डॉलर भी दिए। प्रधानमंत्री ने पड़ोसी देशों के आपातकालीन प्रतिक्रिया दलों के लिए ऑनलाइन प्रशिक्षण कैप्सूलों की व्यवस्था करने और संभावित वायरस वाहकों और उनके संपर्क में आए लोगों का पता लगाने में मदद करने के लिए भारत के एकीकृत रोग निगरानी पोर्टल के सॉफ्टवेयर को साझा करने की भी पेशकश की। उन्होंने सुझाव रखा कि सार्क आपदा प्रबंधन केंद्र जैसे मौजूदा तंत्र का इस्तेमाल सबसे अच्छे तरीके से पूल के लिए हो सकता है।

पीटरसन ने भारत और प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की
अफ्रीकी देशों में कोरोना के नए वेरिएंट ओमिक्रोन के सामने आने के बाद कई देशों में यहां आने-जाने वाली फ्लाइट्स पर रोक लगा दी। ऐसे में भारत ने आगे आकर अफ्रीकी देशों की मदद की। इसी को लेकर अफ्रीकी मूल के पीटरसन ने भारत और प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की। इससे पहले केविन पीटरसन ने फरवरी, 2021 में अफ्रीका को वैक्सीन भेजने पर भारत की तारीफ करते हुए लिखा था कि भारत की उदारता और दयालुता लगातार बढ़ती जा रही है। प्‍यारा देश। विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत अफ्रीकी देशों में मेड इन इंडिया वैक्सीन, जरूरी दवाइयां, टेस्ट किट, पीपीई किट्स और वेंटिलेटर सहित दूसरे मेडिकल सामान सप्लाई करने को तैयार है। भारत ने अभी तक अफ्रीका में 41 देशों को 2.5 करोड़ से ज्यादा वैक्सीन की सप्लाई की है। जिसमें करीब 16 देशों को 1 करोड़ डोज मदद के रूप में और 33 देशों को कोवैक्स के जरिए 1.6 करोड़ डोज शामिल है।

वैक्सीन भेजने पर बारबाडोस की पीएम ने की पीएम मोदी की तारीफ
बारबाडोस की प्रधानमंत्री मिया मोटली ने कोरोना वैक्सीन के लिए प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की। मिया मोटली ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने वैक्सीन मैत्री के तहत कोविशिल्ड का पहला डोज भेजकर उदारता का वास्तविक प्रदर्शन किया है। आपके कारण बारबाडोस में 40 हजार और अन्य जगहों पर हजारों लोगों का टीकाकरण संभव हो पाया है। धन्यवाद के साथ हम आपके बेहतर स्वास्थ्य की कामना करते हैं।

डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा- आपकी वजह से 60 देशों में टीकाकरण
कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में भारत की भूमिका को लेकर विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के प्रमुख टेड्रोस अदनोम गेब्रेयसस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तारीफ की। गेब्रेयसस ने प्रधानमंत्री मोदी को वैक्सीन इक्विटी को सपोर्ट करने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि COVAX के प्रति आपकी प्रतिबद्धता और कोरोना वैक्सीन की खुराक को साझा करने से 60 से अधिक देशों को अपने स्वास्थ्य कर्मचारियों और अन्य प्राथमिकता समूह का टीकाकरण शुरू करने में मदद मिल रही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मुझे उम्मीद है कि बाकी देश भी आपके इस उदाहरण को फॉलो करेंगे।

यूएन ने भारत को बताया ग्लोबल लीडर
कोरोना संकट काल में दुनिया भर को वैक्सीन उपलब्ध कराने में अग्रणी भूमिका निभाने पर संयुक्त राष्ट्र ने भी भारत की जमकर तारीफ की। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि कोरोना संकटकाल में भारत एक ग्लोबल लीडर के तौर पर सामने आया है। भारतीय नेतृत्व के मानवीय दृष्टिकोण और वैक्सीन की सहायता पर आभार जताते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतेरस ने कहा कि कोरोना की जंग में भारत ने ग्लोबल लीडर की भूमिका निभाई है।

ब्राजील के राष्ट्रपति ने की प्रभु हनुमान से की पीएम मोदी की तुलना 
ब्राजील के राष्‍ट्रपति जायर एम बोल्‍सोनारो ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तुलना भगवान हनुमान से की करते हुए हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन दवा को संजीवनी बूटी बताया। उन्होंने कहा कि भारत की ओर से दी गई इस हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा से लोगों के प्राण बचेंगे और इस संकट की घड़ी में भारत और ब्राजील मिलकर कामयाब होंगे। प्रधानमंत्री मोदी को भेजे पत्र में राष्‍ट्रपति बोल्‍सोनारो ने लिखा कि जिस तरह हनुमान जी ने हिमालय से पवित्र दवा (संजीवनी बूटी) लाकर भगवान श्रीराम के भाई लक्ष्मण की जान बचाई थी, उसी तरह भारत और ब्राजील एक साथ मिलकर इस वैश्विक संकट का सामना कर लोगों के प्राण को बचा सकते हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी की पीएम मोदी की तारीफ
हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा से बैन हटाने पर अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ने प्रधानमंत्री मोदी को महान बताया और कहा कि वो भारत का शुक्रिया अदा करते हैं। फॉक्स न्यूज से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वो भारतीय पीएम मोदी की तारीफ करते हैं। निर्यात पर ढील देने के बाद अमेरिका को अब यह दवा मिल सकेगी।

नेपाल ने दवाएं भेजने के लिए कहा शुक्रिया
भारत ने कोरोना से मुकाबले के लिए अप्रैल में नेपाल को मदद के तौर पर 23 टन आवश्यक दवाएं दी। दवा की यह खेप भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्र ने नेपाल के स्वास्थ्य मंत्री भानुभक्त धाकल को सौंपी। इसमें कोरोना के खिलाफ अहम मानी जा रही हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन के अलावा पैरासिटामॉल व अन्य दवाएं शामिल हैं। संकट के समय भारत सरकार की इस मदद पर नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया। कोरोना संक्रमण से निपटने को लेकर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच इस महीने टेलीफोन पर बात हुई थी। इससे पहले कोरोना के खिलाफ मिलकर प्रयास करने की पीएम मोदी की अपील पर 15 मार्च को सार्क देशों की बैठक में भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी।

मॉरीशस के पीएम ने जताया प्रधानमंत्री मोदी का आभार
कोरोना संकट के बीच भारत से मिली मदद के लिए मॉरिशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताया। प्रधानमंत्री जगन्नाथ ने अपने ट्वीट संदेश में कहा कि मैं एयर इंडिया की एक विशेष उड़ान से कल बुधवार15 अप्रैल को मॉरिशस पहुंची भारत सरकार की चिकित्सा मदद के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बहुत आभारी हूं। यह भारत और मॉरिशस के बीच के धनिष्ठ संबंध को दर्शाता है।

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