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कोरोना संकट का भारत की अर्थव्यवस्था पर ज्यादा असर नहीं, तेज गति से करेगा विकास

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पूरा विश्व कोरोना महामारी से जूझ रहा है। कोरोना संकट से अब तक पूरे विश्व में लगभग एक लाख 92 हजार लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 27 लाख से ज्यादा लोग इस बीमारी से संक्रमित हो चुके हैं। अगर भारत की बात करें तो कोरोना से संक्रमित होने वालों का आंकड़ा 24 हजार पार कर चुका है जबकि 775 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। एक्सपर्ट का मानना है कि कोरोना महामारी के कारण विश्व की अर्थव्यवस्था सबसे बुरे दौर से गुजर रही है और आने वाले समय में करोड़ों लोगों की नौकरियां जा सकती है।

भारत में भी पिछले 31 दिनों से लॉकडाउन जारी है और आर्थिक गतिविधियां लगभग थम चुकी है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि कोरोना संकट के बाद खासतौर से भारत की स्थिति क्या रहने वाली है। क्या भारत विकास की रफ्तार को गति दे पाएगा या फिर मुश्किल दौर से गुजरेगा। हालांकि कई एक्सपर्ट बता रहे हैं कि कोरोना से पूरे विश्व में आर्थिक संकट है लेकिन  भारत को इससे जल्द उबरने की ज्यादा उम्मीदें हैं। आइए, कुछ प्वाइंट्स के जरिए समझते हैं कैसे?

कोरोना संकट का होगा कम प्रभाव

भारत में कोरोना से निपटने के लिए पिछले कुछ समय से उपयुक्त प्रयास किए जा रहे हैं। इस कारण भारत में कोरोना का आर्थिक असर अमेरिका और यूरोप की तुलना में कम है। इसके अलावा भारत की अर्थव्यवस्था कमोबेश आत्मनिर्भर है और वैश्विक व्यापार पर भारत की निर्भरता भी कम है। इसी कारण लॉकडाउन के बाद भारतीय अर्थव्यवस्था में दुनिया की अन्य अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में पटरी पर लौटने की संभावना अधिक बताई जा रही है। 

देश में पर्याप्त खाद्यान्न भंडार

देश का वर्तमान खाद्यान्न भंडार करीब डेढ़ वर्ष तक लोगों की खाद्यान्न संबंधी जरूरतें पूरी करने में सक्षम है। इस महीने तक देश के सरकारी भंडारों में करीब 10 करोड़ टन खाद्यान्न का भंडार होगा। देश में चल रही विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं और राशन कार्ड रखने वाले लोगों को साल में करीब छह करोड़ टन अनाज वितरित किया जाता है। केंद्र सरकार का मानना है कि लॉकडाउन के मौजूदा दौर में राज्यों द्वारा करीब तीन करोड़ टन खाद्यान्न की मांग तुरंत की जा सकती है। इससे सभी राज्य छह महीने तक खाद्यान्न की जरूरतें सरलता से पूरी कर सकते हैं। इस साल खाद्यान्न का रिकॉर्ड उत्पादन हुआ है और कृषि विशेषज्ञों ने आगामी मानसून की अच्छी संभावनाएं भी जताई हैं।

कच्चे तेल की कीमतों में भारी कमी

पेट्रोलियम उत्पादों के दाम घटने से भारतीय ग्राहकों को फायदा मिलने की संभावना बन गई है। केंद्र सरकार इस मौके का फायदा अपना राजस्व बढ़ाने के रूप में कर रही है। पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क में वृद्धि करने से राजस्व संग्रह के मोर्चे पर चुनौती झेल रही सरकार को लाभ होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमत में भारी कमी से ढांचागत विकास के लिए फंड जुटाने में मदद मिलेगी तथा राजकोषीय घाटे में कमी आएगी।  

 भारत की बनी बेहतर छवि 

कोरोना संकट में भारत की छवि पूरे विश्व में बेहतर हुई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने हरसंभव कोशिश की है कि अलग-अलग देशों को मदद मिले। हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन दवा के जरिए भारत ने हर एक जरुरतमंद देश की मदद की। अमेरिका, ब्राजील, इसराइल, स्पेन, ग्रेट ब्रिटेन, खाड़ी देश, मलेशिया समेत पड़ोसी देशों जैसे नेपाल, श्रीलंका, मालदीव, श्रीलंका, भूटान को मदद पहुंचाई गई। विश्व के देशों ने भारत की इस पहल की तारीफ की। भारत में कोरोना संकट को देखते हुए हाइड्रोक्सी क्लोरोक्वीन पर बैन लगा दिया था लेकिन मानवता को देखते हुए भारत ने विश्व के देशों मदद पहुंचाई। इसके अलावा नरेंद्र मोदी की पहल पर कोविड-19 और जी-7 देशों की अलग से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक आयोजित पर विचार विमर्श किया गया।

 अमेरिका-चीन के रिश्ते में खटास

व्यापारिक हितो को लेकर अमेरिका और चीन पहले ही एक दूसरे से खिलाफ हैं और दोनों के बीच बिजनेस वार चल रहा था। अब कोरोना के बाद दोनों देशों के बीच दूरियां और बढ़ती दिख रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कह चुके हैं कि कोरोना चीनी वायरस है और इससे अमेरिका को काफी नुकसान हुआ है। कोरोना को लेकर ट्रंप चीन और विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका पर सवाल उठा चुके हैं। वे एक पत्रकार के सवाल के जवाब मे कह चुके हैं कि अगर कोरोना के लिए चीन जिम्मेदार है तो उसे इसके नतीजे भुगतने होंगे।

कंपनियों के भारत शिफ्ट होने की खबर 

मीडिया में ऐसी लगातार खबरें आ रही हैं कि कोरोना के बाद चीन की स्थिति खराब हुई है और अमेरिका, जापान समेत कई देशों की करीब 300 कंपनियां अपना कारोबार चीन से भारत शिफ्ट करना चाहती हैं। इससे निश्चित तौर से भारत को फायदा होगा और मेक इन इंडिया को बल मिलेगा। अगर चीन में काम कर रही कंपनियां भारत आती हैं तो निवेश बढ़ेगा और यहां लोगों को रोजगार मिलने की ज्यादा संभावना बढ़ेगी। 

दवा के क्षेत्र में भारत की कंपनियों को फायदा 

अमेरिका को हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा निर्यात करने के बाद भारत की दवा कंपनियों के लिए एक बडी संभाावना खुल गई है। अमेरिका को दवा देने पर भारत में काफी हो हल्ला मचाया गया है। इस तरह की खबरें फैलाई गई कि भारत अमेरिका के आगे झूक गया लेकिन हकीकत ये है कि प्रधानमंत्री मोदी ने इसके बदले उन्होंने अमेरिकी दवा नियामक US FDA को भारतीय दवा कंपनियों के लिए अपना बाजार खोलने के लिए मजबूर कर दिया। जब यह खबर आई कि US FDA ने एक दिन के अंदर ही भारत की पांच दवा कंपनियों के लिए अपना बाजार खोल दिया।   

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार काफी तत्परता के साथ कोरोना संकट से निपट रही है। हाल ही में आईएएनएस-सी वोटर के ताजा कोविड-19 ट्रैकर सर्वे के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने 25 मार्च को जब लॉकडाउन का ऐलान किया था, तब देश के 76.8 प्रतिशत लोगों को मोदी सरकार पर भरोसा था। लेकिन 21 अप्रैल को ये भरोसा बढ़कर 93.5 प्रतिशत पर पहुंच गया है।

कोरोना महामारी से जंग में कोई नहीं है पीएम मोदी जैसा महायोद्धा
प्रधानमंत्री मोदी ने जिस प्रकार से वैश्विक कोरोना संकट के दौरान भारत की 130 करोड़ जनता की रक्षा के लिए कदम उठाए हैं, जिस प्रकार पूरी दुनिया के प्रति मदद के हाथ बढ़ाए हैं, उसने उन्हें दुनिया का सबसे लोकप्रिय और शीर्ष नेता बना दिया है। अमेरिकी रिसर्च एजेंसी मॉर्निग कंसल्ट द्वारा जनवरी से 14 अप्रैल के बीच कराए गए तमाम सर्वे में सामने आया है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 68 अंकों के साथ वर्ल्ड लीडर्स को पछाड़ते हुए पहले पायदान पर पहुंच गए हैं। एजेंसी के मुताबिक जनवरी में प्रधानमंत्री मोदी की रेटिंग 62 थी, जो कोरोना काल में उनके फैसलों और सक्रियता की वजह से चार अंक बढ़कर 68 हो गई है।

कोरोना संकटकाल में पीएम मोदी की सक्रियता अभूतपूर्व
पीएम मोदी की रेटिंग में सुधार की वजह कोरोना वायरस से निपटने को लेकर उनकी तैयारी है। उन्होंने 25 मार्च को देश में लॉकडाउन की घोषणा की थी जिसे 14 अप्रैल को 19 दिनों के लिए बढ़ा दिया गया। वहीं, उन्होंने वैश्विक नेताओं को महामारी से निपटने में एकजुट करने की भी कोशिश की। सार्क देशों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये बैठक हो या फिर जी-20 देशों की बैठक कराने के लिए की जाने वाली पहल। इन सभी वजहों ने ही मोदी की लोकप्रियता में इजाफा किया है। इसके अतिरिक्त उन्होंने जरूरी दवाइयों के निर्यात से प्रतिबंध हटाते हुए मदद की पहल की है जिसे दुनियाभर के देशों ने स्वीकारा भी है।

लिस्ट में दस राष्ट्राध्यक्षों की रैंकिंग
अमेरिकी डाटा रिसर्च कंपनी मॉर्निंग कंसल्ट ने अपने सर्वे में दुनिया के सभी प्रमुख लोकतांत्रिक देशों के राष्ट्राध्यक्षों की लोकप्रियता को आंका है। इसमें ये पता लगाने की कोशिश की गई है कि किस देश के राष्ट्राध्यक्ष ने कोविड-19 से लड़ने के लिए किस तरह के फैसले लिए और कदम उठाए हैं। रिसर्च में 10 देशों के राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री के नाम हैं। इसमें भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मैक्सिको के राष्ट्रपति एंद्रेस मैनुएल लोपेज ओब्राडोर, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल, ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सोनारो, अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे शामिल हैं। रिसर्च में पीएम मोदी पहले नंबर पर हैं। दूसरे नंबर पर मैक्सिको के राष्ट्रपति हैं और तीसरे नंबर पर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन हैं। इस लिस्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आठवें स्थान पर हैं।

देखिए किस राष्ट्राध्यक्ष को कितनी अप्रूवल रैंकिंग?

देश का नाम राष्ट्राध्यक्ष वर्ल्ड रैंकिंग
भारत पीएम मोदी +68
मैक्सिको लोपेज ओब्रोडोर  +36
ब्रिटेन बोरिस जॉनसन  +35
ऑस्ट्रेलिया स्कॉट मॉरिसन  +26
कनाडा जस्टिन ट्रूडो  +21
जर्मनी एंजेला मर्केल  +16
ब्राजील जेयर बोल्सोनारो  +8
अमेरिका डॉनल्ड ट्रंप  -3
फ्रांस इमैनुएल मैक्रों  -21
जापान शिंजो आबे  -33

ट्रंप, मैक्रों और आबे की रैंकिंग माइनस में
रिसर्च डेटा में अप्रूवल रैकिंग में ट्रंप, मैक्रों और आबे की रैंकिंग माइनस में हैं। गौरतलब है कि पीएम मोदी ने समय रहते ही देश में लॉकडाउन का एलान किया और जब जरूरत पड़ी तो राज्यों के सीएम और विपक्ष के नेताओं के चर्चा की और लॉकडाउन बढ़ाने का भी फैसला किया। भारत के इस फैसले की तारीफ विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी की। प्रधानमंत्री मोदी ने कोरोना संकट के दौरान काम रहे स्वास्थकर्मियों, पुलिसकर्मियों और दूसरे लोगों को उन्होंने ‘कोरोना वॉरियर्स’ की संज्ञा दी ताकि उनका मनोबल ऊंचा रहे। सिर्फ देश में ही नहीं पीएम मोदी ने भारत के मित्र देशों की मदद की। अमेरिका और दूसरे देशों को कोरोना से लड़ने के लिए हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा भेजी। इसके लिए ट्रंप और ब्राजील के राष्ट्रपति ने पीएम मोदी की तारीफ भी की।

कोरोना संकट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की सक्रियता और उनके फैसलों की वजह से देश ही नहीं पूरी दुनिया उनकी मुरीद बन गई है। आइए, देखते हैं पूरे विश्व में किस प्रकार की जा रही है पीएम मोदी के योगदान की प्रशंसा- 

बिल गेट्स ने की कोरोना महामारी से जंग में प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों की प्रशंसा
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिस प्रकार भारत में कोरोना महामारी से जंग की अगुवाई कर रहे हैं, जिस प्रकार करोड़ों देशवासियों की इस जानलेवा वायरस से रक्षा कर रहे हैं, उसकी पूरी दुनिया में तारीफ हो रही है। तमाम अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने इसके लिए प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की है। अब दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति और माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के संस्थापक बिल गेट्स ने भी प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर कोरोना महामारी के खिलाफ भारत के प्रयासों के लिए उनकी तारीफ की है। उन्होंने अपने पत्र में पीएम मोदी के नेतृत्व और कोरोना महामारी को लेकर केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की सराहना की है।

बिल गेट्स ने अपने पत्र में कहा, ‘मैं कोरोना महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए आपके नेतृत्व के साथ-साथ आपकी और आपकी सरकार के सक्रिय कदमों की सराहना करता हूं। देश में हॉटस्पॉट चिह्नित करने और लोगों को आइसोलेशन में रखने के लिए लॉकडाउन, क्वारंटाइन के साथ-साथ इस महामारी से लड़ने के लिए जरूरी हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाना सराहनीय है। आपने रिसर्च और डेवलेपमेंट के साथ-साथ डिजिटल इनोवेशन पर भी काफी जोर दिया है।‘

बिल गेट्स ने की आरोग्य सेतु एप की तारीफ
बिल गेट्स ने आरोग्य सेतु ऐप की भी तारीफ की है। उन्होंने अपनी चिट्ठी में कहा, ‘मुझे खुशी है कि आपकी सरकार इस महामारी से लड़ाई में अपनी डिजिटल क्षमता का पूरा इस्तेमाल कर रही है। आपकी सरकार ने आरोग्य सेतु ऐप लॉन्च किया है, जो कि कोरोना वायरस ट्रैकिंग, संपर्क का पता लगाने के साथ-साथ और लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ने का काम करता है।’

कोरोना से लड़ाई में विश्व नेता बना भारत!, संयुक्त राष्ट्र ने की प्रशंसा
वैश्विक महामारी कोरोना से लड़ाई के दौरान दुनिया के देशों की समय पर मदद करने और अपने देश को संभालने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का आज पूरा विश्व कायल है। मोदी के समर्थ नेतृत्व के कारण ही आज भारत इस संकट की घड़ी में वैश्विक नेता के रूप में उभरा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस संकट के दौर में न केवल सबसे समर्थ देश अमेरिका समेत बल्कि के कई अन्य देशों की मदद की है। तभी तो आज संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भारत की जमकर प्रशंसा की है। उन्होंने तो दुनिया के दूसरे देशों को भी भारत से सीख लेने की बात कही है। गुटेरेस का यह बयान ऐसे समय आया है जब हाल ही में भारत ने अमेरिका समेत कई देशों को कोरोनावायरस संक्रमण से निजात दिलाने वाली दवा हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्विन की आपूर्ति की थी।

पूरा विश्व वैश्विक महामारी कोरोनावायरस के प्रकोप से कराह रहा है। कोरोना से मरने वालों की संख्या में रोज बढ़ोतरी हो रही है। इस महामारी से दुनियाभर में 22 लाख से अधिक लोग संक्रमित हैं। वहीं इससे होने वाली मौतों की संख्या 150,000 का आंकड़ा पार कर गई है। लेकिन इस वायरस के खिलाफ जारी जंग में भारत ने न सिर्फ अपने यहां लॉकडाउन, सोशल डिस्टेंसिंग के जरिए स्थितियों को कंट्रोल में रखा है, साथ ही वो लगातार कोरोना से बुरी तरह प्रभावित देशों की मदद भी कर रहा है। भारत के इसी जज्बा को देखकर यूएन के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने उसे सलाम किया है। इसके साथ ही दुनिया के देशों को भी भारत से सीखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि मुश्किल समय में कैसा व्यवहार करना चाहिए और दूसरों की मदद की भावना से काम करना चाहिए वह भारत से सीखने की जरूरत है।

देखिए कोरोना संकट में मदद के लिए किन-किन देशों ने कहा प्रधानमंत्री मोदी का शुक्रिया

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत कोरोना संकट काल में कई देशों के लिए संकटमोचक बन कर सामने आया है। प्रधानमंत्री मोदी ने पहले सार्क और फिर जी-20 देशों के जरिए दिखाया कि कोरोना के कहर से कैसे मिलकर निपटा जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने दूसरे देशों के राष्ट्राध्यक्षों और नेताओं से संवाद किया और जरूरतमंद देशों की मदद के लिए हाथ बढ़ाया। अमेरिका, इजरायल और ब्राजील के अलावा भारत ने स्पेन, श्रीलंका, नेपाल, मालदीव समेत कई देशों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा समेत दूसरी सहायता देने का फैसला किया। इससे वैश्विक धारणा बनाने में मदद मिली है कि भारत याचक नहीं, अब दाता बन चुका है। भारत उन्हें हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, पेरासिटामोल और अन्य जरूरी वस्तुएं उपलब्ध करा रहा है। इस कोरोना काल में मदद पाने वाले देशों की सूची लंबी होती जा रही है और मदद के लिए वे भारत का शुक्रिया अदा कर रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने की भारत की तारीफ
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘कोविड-19’ के खिलाफ लड़ाई में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की आपूर्ति करने के फैसले के लिए अपना आभार व्यक्त किया। हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा से बैन हटाने पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ने प्रधानमंत्री मोदी को महान बताया और कहा कि वो भारत का शुक्रिया अदा करते हैं। फॉक्स न्यूज से बात करते हुए उन्होंने कहा कि वो भारतीय पीएम मोदी की तारीफ करते हैं। निर्यात पर ढील देने के बाद अमेरिका को अब यह दवा मिल सकेगी। उन्होंने कहा कि मैं सराहना करूंगा कि भारत हमारे द्वारा ऑर्डर की गईं टैबलेट्स की खेप को जारी करेगा। अमेरिका के राष्ट्रपति के ट्वीट का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच साझेदारी इससे पहले कभी भी इतनी अधिक मजबूत नहीं रही है। भारत मानवता की मदद के लिए अपनी ओर से हरसंभव अथक कोशिश करेगा।

अफगानिस्तान ने अदा किया शुक्रिया
अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने मदद के लिए प्रधानमंत्री मोदी का शुक्रिया अदा किया है। राष्ट्रपति गनी ने कहा, ‘प्रिय मित्र नरेन्द्र मोदी, हमें 5 लाख हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन टेबलेट, एक लाख पैरासीटामोल टैबलेट और 75,000 मीट्रिक गेंहू भेजने के लिए धन्यवाद। गेंहू की पहली खेप जल्द ही अफगान के लोगों के लिए पहुंच जाएगी।’

अफगानिस्तान के राष्ट्रपति को जवाब देते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने ट्वीट संदेश में कहा, “भारत और अफगानिस्तान के बीच एक विशेष प्रकार की दोस्ती है, जो ऐतिहासिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक संबंधों पर आधारित है। लंबे समय से, हमने आतंकवाद के संकट के खिलाफ संयुक्त रूप से लड़ाई लड़ी है। हम इसी तरह एकजुटता और साझा संकल्प के साथ कोविड-19 का मुकाबला करेंगे।”

मॉरीशस के पीएम ने जताया प्रधानमंत्री मोदी का आभार
कोरोना संकट के बीच भारत से मिली मदद के लिए मॉरिशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जगन्नाथ ने प्रधानमंत्री मोदी का आभार जताया। प्रधानमंत्री जगन्नाथ ने अपने ट्वीट संदेश में कहा कि मैं एयर इंडिया की एक विशेष उड़ान से कल बुधवार, 15 अप्रैल को मॉरिशस पहुंची भारत सरकार की चिकित्सा मदद के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का बहुत आभारी हूं। यह भारत और मॉरिशस के बीच के धनिष्ठ संबंध को दर्शाता है।

ब्राजील के राष्ट्रपति ने कहा प्रभु हनुमान की तरह पहुंचाई संजीवनी बूटी
ब्राजील के राष्‍ट्रपति जायर एम बोल्‍सोनारो ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तुलना भगवान हनुमान से की करते हुए हाइड्रोक्‍सीक्‍लोरोक्‍वीन दवा को संजीवनी बूटी बताया। उन्होंने कहा कि भारत की ओर से दी गई इस हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा से लोगों के प्राण बचेंगे और इस संकट की घड़ी में भारत और ब्राजील मिलकर कामयाब होंगे। प्रधानमंत्री मोदी को भेजे पत्र में राष्‍ट्रपति बोल्‍सोनारो ने लिखा है कि जिस तरह हनुमान जी ने हिमालय से पवित्र दवा (संजीवनी बूटी) लाकर भगवान श्रीराम के भाई लक्ष्मण की जान बचाई थी, उसी तरह भारत और ब्राजील एक साथ मिलकर इस वैश्विक संकट का सामना कर लोगों के प्राण को बचा सकते हैं।

ब्राजील के राष्‍ट्रपति ने प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में उन्‍हें हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा के लिए धन्‍यवाद दिया।

प्रधानमंत्री ने अपने जवाब में कहा “भारत और ब्राजील के बीच साझेदारी मौजूदा चुनौतीपूर्ण समय में पहले से कहीं अधिक मजबूत है। भारत इस महामारी के खिलाफ मानवता की लड़ाई में योगदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

इजरायल के पीएम ने जताया भारत का आभार
कोरोना वायरस महामारी को खत्म करने के लिए फिलहाल सबसे अहम दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन है। भारत ने इस दवा की खेप इजरायल को भिजवाई है। दवा मिलने के बाद इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री मोदी का शुक्रिया अदा किया। इसके जवाब प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमें साथ मिलकर इस महामारी से लड़ना होगा। भारत अपने मित्रों के लिए जो संभव है, वह करने को तैयार है। इजरायल के लोगों के अच्छे स्वास्थ्य की कामना करता हूं।

कजाकिस्तान के राष्ट्रपति तोकायेव ने कहा धन्यवाद
भारत की ओर से चिकित्सीय आपूर्ति मिलने पर कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्त तोकायेव ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि भारत सरकार खासकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का व्यक्तिगत रूप से धन्यवाद। मित्रता और एकजुटता का यह उच्च स्तर तब भी दिखाया गया जब भारत ने दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था।

सेसेल्स ने जताया आभार
सेसेल्स के लिए स्पेशल इंडियन एयरफोर्स के विमान से दवा भेजी गई है। इन दवाइयों में पैरासीटामॉल, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्विन का नाम सबसे ऊपर आ रहा है। सेसेल्स ने मदद के लिए भारत का आभार जताया है। राष्ट्रपति डैनी फॉरे ने संकट की इस घड़ी में सेशेल्स को दिए गए समर्थन के लिए प्रधानमंत्री मोदी, उनकी सरकार और भारत के लोगों का दिल से आभार व्यक्त किया।

मालदीव के राष्ट्रपति के प्रधानमंत्री मोदी से बात कर की तारीफ
कोरोना संकट पर मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ टेलीफोन पर बातचीत में मदद के लिए भारत का शुक्रिया अदा किया। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर खुशी जताई कि मालदीव में पहले तैनात किए गए भारतीय चिकित्सा दल और फि‍र बाद में भारत द्वारा उपहार में दी गई आवश्यक दवाओं ने द्वीप में संक्रमण के फैलाव को नियंत्रित करने में उल्‍लेखनीय योगदान दिया है। मालदीव के राष्ट्रपति ने सार्क देशों की मदद के लिए COVID-19 फंड बनाने पर प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा दोहराई। इसके साथ ही राष्ट्रपति ने चीन के वुहान से मालदीव के निवासियों की सुरक्षित निकासी और जरूरी सामानों की आपूर्ति के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद दिया।

नेपाल के पीएम ने प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद कहा
संकट के समय भारत सरकार की इस मदद पर नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को धन्यवाद दिया है। उन्होंने इसे भारत की उदारता भरी मदद कहा है। कोरोना संक्रमण से निपटने को लेकर दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच इस महीने टेलीफोन पर बात हुई थी। इससे पहले कोरोना के खिलाफ मिलकर प्रयास करने की पीएम मोदी की अपील पर 15 मार्च को सार्क देशों की बैठक में भी दोनों नेताओं के बीच बातचीत हुई थी।

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