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अयोध्या में भव्य मंदिर और श्री राम पर कांग्रेस में इतना कंफ्यूज क्यों है भाई: मोदी राज में अयोध्या में राम मंदिर निर्माण से हिली कांग्रेस

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कांग्रेस का देश में लगातार पतन हो रहा है, पार्टी देश के हर राज्य में हाशिए पर जा रही है, कांग्रेस नताओं की पार्टी में कोई सुनवाई नहीं है, सो वक्त पार्टी के फैसलों पर प्रायश्चित कर उसे किताब की शक्ल में बाजार में उतारने का है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद ने भी एक किताब लिख डाली है, नाम है सनराइज ओवर अयोध्या: नेशनहूड इन ऑवर टाइम्स (Sunrise Over Ayodhya: Nationhood in Our Times)।

अयोध्या पर कांग्रेस की गलतियों के- झूठे पश्चाताप की किताब 

सलमान खुर्शीद की इस नई किताब के पन्ने अयोध्या पर पार्टी के स्टैंड पर झूठे पश्चाताप से रंगे हैं, अगर इसे अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर के निर्माण के ऐतिहासिक कार्य में पीछे छूट गई पार्टी का विलाप कहें तो ज्यादा उचित होगा।  

अयोध्या में राम मंदिर पर-कांग्रेस का हर दांव पड़ा उल्टा

अयोध्या में राम मंदिर के मुद्दे पर कांग्रेस का हर दांव उल्टा पड़ गया, लेकिन कांग्रेस ने जिद नहीं छोड़ी, भगवान श्रीराम के अस्तित्व पर ही सवाल उठाते रहे, कांग्रेस ने नेता बयान देकर करोड़ों राम भक्तों का अपमान करते रहे।  बिना ये समझे की प्रभु श्री राम देश के करोड़ों लोगों के दिलों में बसे हैं , देश के कण-कण में समाए हैं श्री राम। अब जब यूपी में चुनाव करीब हैं तो कांग्रेस नेता फिर से राम-नाम का जाप कर रहे हैं। लेकिन श्री राम को लेकर कांग्रेस नेताओं का मन भले ही ना बदला हो लेकिन सुर बदले हुए हैं। देखिए कैसे खुर्शीद अपनी किताब में अयोध्या को लेकर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं।  

किताब में अयोध्या पर-खुर्शीद के घड़ियाली आंसू

सलमान खुर्शीद ने अपनी किताब को अयोध्या जजमेंट पर रेफरेंस बुक बताया है , लेकिन उस पर राजनीति की चासनी चढ़ाना नहीं भूले। अपनी किताब में अयोध्या पर अदालत के फैसले के बारे में उन्होंने अपनी राय रखते हुए लिखा है। ‘मैंने माना कि ये एक अच्छा फैसला है, एक बहुत अच्छा जजमेंट है और आज के हालात जो हमारे देश में है, उनमें मरहम लगाने का एक रास्ता है। उन पर मरहम लगे और ऐसी बात फिर ना हो, इसका एक प्रयास है’

खुर्शीद का ख्याल-मंदिर सब तबके का होना चाहिए

किताब में सलमान खुर्शीद आगे लिखते हैं, ‘मंदिर बनेगा, अच्छा मंदिर होगा, लेकिन वो मंदिर सिर्फ एक पक्ष का नहीं होना चाहिए, वो मंदिर सबका होना चाहिए. मस्जिद सबकी होना चाहिए। जजमेंट और मंदिर-मस्जिद हमारे हैं और हम सब साथ-साथ चलें।’ सलमान खुर्शीद बड़े वकील हैं , ये इस बात को जानते हैं कि अदालतों का काम किसी समाज के घावों पर मरहम लगाना नहीं है, वो तथ्यों को जांच कर, सबूतों, गवाहों और दलीलों की रोशनी में फैसले देती है। अयोध्या में भी राम मंदिर के पक्ष में फैसला लंबी कानूनी लड़ाई के बाद सामने आया। लेकिन देश जानता है कि श्री राम के भव्य मंदिर के लिए हुए इस ऐतिहासिक प्रयास के दौरान कांग्रेस विरोध में खड़ी थी। 

अयोध्या में राम मंदिर पर -कांग्रेस का पुराना कंफ्यूजन

दरअसल सलमान खुर्शीद अपनी किताब में अयोध्या में श्री राम मंदिर को लेकर ज्ञान नहीं दे रहे हैं, वे इस मसले पर कांग्रेस के कंफ्यूजन का बखान कर रहे हैं। साफ है कि कांग्रेस को अयोध्या पर लिए गए अपने स्टैंड पर आज भी अफसोस है, लेकिन भविष्य में इस मुद्दे पर कांग्रेस का क्या स्टैंड होगा, ये भी साफ नहीं है। कांग्रेस के सामने बड़ी चुनौती ये है कि आखिर पार्टी इस मुद्दे पर किस तरह हिंदू जनमानस के गुस्से का सामना करेगी। 

खाली बैठे कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में किताब लिखने का कंपटीशन चल रहा है। लेकिन जैसे कांग्रेस के नेताओं की किताबें धड़ाधड़ बाजार में आ रही हैं, राम मंदिर के मुद्दे पर कांग्रेस का कनफ्यूजन और साफ होता जा रहा है।

चिदंबरम ने उठाए-अयोध्या पर अदालत के फैसले पर सवाल

खुर्शीद की किताब के विमोचन पर पहुंचे पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम अयोध्या के मसले पर उल्टी गंगा बहाते नजर आए, वे राम मंदिर पर अदालत के फैसले पर ही सवाल उठाते नजर आए, उन्होंने कहा कि इस फैसले का कानूनी आधार बहुत संकीर्ण है। बहुत पतली सी रेखा है लेकिन समय बीतने के साथ ही, दोनों पक्षों ने इसे स्वीकार किया। दोनों पक्षों ने स्वीकार किया, इसलिए यह सही फैसला है। ऐसा नहीं है कि यह सही फैसला था, इसलिए दोनों पक्षों ने स्वीकार किया।

चिदंबरम यहीं नहीं रूके उन्होंने कहा कि फैसले के बाद चीजें उसी तरह हुईं जिसका अनुमान था। इसके बाद (बाबरी विध्वंस के) आरोपियों को छोड़ दिया गया। नो वन किल्ड जेसिका की तरह नो बडी डिमोलिश्ड बाबरी मस्जिद।

राम मंदिर निर्माण शुरू होने के बाद भी-असमंजस में कांग्रेस 

कांग्रेस में नेताओं की पूरी जमात है, जो अयोध्या और श्री राम पर पार्टी के स्टैंड को लेकर असमंजस में है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर इनके बयानों की खूब धुनाई भी होती रही है । 

कमलनाथ का मंदिर निर्माण के लिए-चांदी की शिलाएं भेजने का दावा 

चंद महीनों पहले ही मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस के नेता कमलनाथ ने अपने घर पर हनुमान चालीसा का पाठ करवाया और कहा कि मध्य प्रदेश कांग्रेस की तरफ़ से चांदी की 11 शीलाएं राम मंदिर के निर्माण के लिए भेजी जा रहीं हैं। 

साफ है कि अयोध्या में राम मंदिर को लेकर कांग्रेस पार्टी अब भी असमंजस में है। इसे लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता भी अलग-अलग सुर में बात करते नजर आते हैं। कांग्रेस पार्टी ना तो मंदिर आंदोलन में और ना ही राम मंदिर के निर्माण में कोई साफ स्टैंड ले सकी है। राम भक्तों की भवानाओं को अनदेखा कर पार्टी अपने ही जाल में फंसती चली गई ।इस मुद्दे पर पार्टी की विचारधारा में इसी कमी की वजह से कांग्रेस को खामियाजा भुगतना पड़ा और उसे ना तो माया मिला और ना राम। 

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