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कांग्रेस ने जनता के पैसे पर डाला डाका, PMNRF से राजीव गांधी फाउंडेशन को दान देकर गरीबों और जरूरतमंदों से किया धोखा

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आम तौर पर कहा जाता है कि चोर को सारी दुनिया चोर नजर आती है। ये बात कांग्रेस पर पूरी तरह से लागू होती है, क्योंकि मोदी सरकार द्वारा किए जाने वाले हर काम में उसे घोटाले नजर आते हैं। कांग्रेस ने पीएम केयर्स फंड के पैसे के इस्तेमाल को लेकर बार-बार सवाल किया। उसे आशंका थी कि जिस तरह कांग्रेस की नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) का गलत इस्तेमाल किया, उसी तरह मोदी सरकार भी पीएम केयर्स फंड का इस्तेमाल कर रही है। लेकिन यूपीए सरकार के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से राजीव गांधी फाउंडेशन को दिए गए दान के खुलासे ने कांग्रेस के चेहरे से नकाब हटा दिया है।

 BJP अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर लगाया बड़ा आरोप

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने शुक्रवार को आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नेशनल रिलीफ फंड (पीएमएनआरएफ) से राजीव गांधी फाउंडेशन को पैसा दान किया गया। यह पैसा उस समय दान किया गया, जब सोनिया गांधी पीएमएनआरएफ के बोर्ड में भी थीं और आरजीएफ की अध्यक्ष भी थीं। बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा, ‘संकट में लोगों की मदद करने के लिए बना पीएमएनआरएफ, यूपीए के कार्यकाल में राजीव गांधी फाउंडेशन को पैसे दान कर रहा था। पीएमएनआरएफ बोर्ड में कौन बैठा? सोनिया गांधी। राजीव गांधी फाउंडेशन की अध्यक्षता कौन करता है? सोनिया गांधी। यह पूरी तरह से निंदनीय है।’

RGF को दान की गई जनता की मेहनत की कमाई  

जेपी नड्डा ने कहा, ‘भारत के लोगों ने जरूरतमंदों की मदद करने के लिए अपनी मेहनत की कमाई को पीएमएनआरएफ को दान कर दिया। इस सार्वजनिक धन को परिवार चलाने की बुनियाद में इस्तेमाल करना न केवल एक संगीन धोखाधड़ी है, बल्कि भारत के लोगों के लिए एक बड़ा धोखा भी है।’

कांग्रेस पार्टी को माफी मांगनी चाहिए – नड्डा

जेपी नड्डा ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए। लिखा कि धन के लिए एक परिवार की भूख ने देश को बहुत नुकसान पहुंचाया है। इसके लिए कांग्रेस पार्टी को माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन को एक परिवार की तरफ से चलाए जा रहे फाउंडेशन में डालना एक गंभीर धोखेबाजी है।

बीजेपी के आरोप का आधार क्या?
बीजेपी अध्यक्ष नड्डा ने 2005-2006 और 2007-2008 में राजीव गांधी फाउंडेशन को दान देने वालों की लिस्ट शेयर की हैं, इनमें प्रधानमंत्री नेशनल रिलीफ फंड का भी नाम है।

राजीव गांधी फाउंडेशन क्या है?
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए 21 जून 1991 को सोनिया गांधी ने इसकी शुरुआत की थी। फाउंडेशन 2010 से एजुकेशन को बढ़ावा देने पर ज्यादा फोकस कर रही है। इसका कामकाज डोनेशन से मिलने वाली रकम से चलता है। सोनिया इसकी चेयरपर्सन हैं। पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और पी. चिदंबरम ट्रस्टी हैं।

कांग्रेस ने चीन से भी ली रिश्वत 

इससे पहले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया था कि राजीव गांधी फाउंडेशन को चीन ने पैसे दिए। उन्होंने पूछा था कि कांग्रेस ये बताए की ये प्रेम कैसे बढ़ गया। इनके कार्यकाल में चीन हमारी जमीन पर कब्जा कर लिया। कांग्रेस स्पष्ट करे कि इस डोनेशन के लिए क्या सरकार से मंजूरी ली गई थी? गलवान घाटी में चीनी सैनिकों के साथ झड़प के बीच इस खुलासा से सनसनी फैल गई है कि राजीव गांधी फाउंडेशन को दान के नाम पर चीन से काफी ज्यादा वित्तीय मदद मिली थी। कांग्रेस और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के बीच एमओयू के बाद अब यह खबर भी सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगी।

टाइम्स नाउ न्यूज चैनल के अनुसार यह वित्तीय मदद 300000 अमेरिकी डॉलर (उस समय के हिसाब से करीब 15 करोड़ रुपए) के करीब है।

टाइम्स नाउ के अनुसार भारत स्थित चीनी दूतावास राजीव गांधी फाउंडेशन को फंडिंग करता रहा है। खबर के अनुसार चीन की सरकार वर्ष 2005, 2006, 2007 और 2008 में राजीव गांधी फाउंडेशन में डोनेशन करती है और इसके बाद वर्ष 2010 में एक अध्ययन जारी कर बताया जाता है कि भारत और चीन के बीच व्यापार समझौतों को बढ़ावे की जरूरत है।
राजीव गांधी फाउंडेशन की वार्षिक रिपोर्ट 2005-06 में भी कहा गया है कि राजीव गांधी फाउंडेशन को पीपुल रिपब्लिक ऑफ चाइना के दूतावास से फंडिंग हुई है।

चीनी दूतावास के अनुसार, भारत में तत्कालीन चीनी राजदूत सुन युक्सी ने 10 लाख रुपए दान दिए थे। इस फंडिंग का नतीजा ये रहा कि राजीव गांधी फाउंडेशन ने भारत और चीन के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बारे में कई स्टडी की और इसे जरूरी बताया।

कांग्रेस के थिंक-टैंक ने की FTA की पैरवी, व्यापार घाटा 33 गुणा बढ़ा
कांग्रेस के आलोचक अब RGF के लिए दान और एफटीए के संबंधों की बात कहते हुए उसे घेर रहे हैं। इसके आलोचकों का कहना है कि कांग्रेस पार्टी के थिंक-टैंक ने चीन के साथ एफटीए की पैरवी की, जिसके बाद 2003-04 और 2013-14 के बीच व्यापार घाटा 33 गुणा बढ़ गया। इसके अलावा 2008 में कांग्रेस और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) का RGF के साथ संबंध बताते हुए कांग्रेस पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस के विरोधी मांग कर रहे हैं कि यह समय है कि कांग्रेस पार्टी सीसीपी के साथ हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन पर सफाई पेश करे। चीन से साथ सीमा विवाद के समय कांग्रेस के नरम रवैये को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि कहीं इसका कारण यहीं तो नहीं है।

राहुल गांधी की कांग्रेस पार्टी का चीनी कन्युनिस्ट पार्टी के साथ एमओयू, डोकलाम विवाद के समय राहुल का चोरी-छिपे चीनी दूतावास के अधिकारियों से मिलना, चीनी झड़प के दौरान सरकार-सेना पर सवाल उठाना, सरकार की जगह पार्टी से परिवार के लोगों का चीन जाना, कैलास मानसरोवर की यात्रा के दौरान चीनी अधिकारियों से गुपचुप मुलाकात करना यह सब कांग्रेस पार्टी के साथ गांधी परिवार को संदेह के घेरे में खड़ा करता है।

सोशल मीडिया पर भी लोग इसके बारे में जानना चाहते हैं।

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