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संवैधानिक नियमों को ताक पर रख विपक्षी सरकारों को गिराती रही है कांग्रेस

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कर्नाटक की विधानसभा ने मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी से विश्वास छीन  कांग्रेस-जेडीएस की राजनीतिक चालों का अंत कर दिया, जिससे संविधान की धज्जियां उड़ायी जा रही थीं। सत्ता के शांतिपूर्ण और नैतिकतापूर्ण परिवर्तन के लिए ही संविधान के तमाम नियमों को ‘हम भारत के लोग’ ने बनाया है, लेकिन कांग्रेस ने आजादी के बाद से ही ‘हम भारत के लोग’ की नैतिकता और संवैधानिक नियमों को दरकिनार करने के साथ सबसे अधिक बार राज्यों की विपक्षी सरकारों को हटाकर कांग्रेस का शासन स्थापित करने का काम किया है।

राज्य सरकारों को गिराने का अनैतिक कर्म

कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी की सरकार गिरने पर विपक्ष भाजपा पर आरोप लगा रहा है कि सत्ता के लिए भाजपा ने अपने आपको कितना नीचे गिरा दिया है कि उसे संविधान के नियमों और नैतिकता का कोई भान नहीं बचा है, लेकिन खान मार्केट  गैंग और विपक्षी दल यह भूल जाते हैं कि पूर्व में केन्द्र की कांग्रेस सरकार ने किस तरह के अनैतिक और असंवैधानिक कर्म किए हैं। आइए देखिए-

  • अक्टूबर 1996 में विधानसभा चुनावों के बाद सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी भाजपा को सरकार बनाने का निमंत्रण न देकर उत्तरप्रदेश के राज्यपाल रोमेश भंडारी ने 18 अक्टूबर को राष्ट्रपति शासन लगाकर भाजपा को सत्ता से हटा दिया था।
  • 19 अक्टूबर 1997 को कल्याण सिंह द्वारा बहुमत सिद्ध कर दिये जाने के बावजूद राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश केन्द्र में कांग्रेस सरकार के इशारे पर की गई। कल्याण सिंह को बहुमत साबित करने के लिए मात्र 36 घंटे का समय दिया गया।
  • झारखंड में फरवरी 2005 के चुनावों के बाद राज्यपाल सैयद सिब्ते रजी का शिबू सोरेन को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित करने का निर्णय राजनीति से प्रेरित था, क्योंकि राजग सबसे बड़े चुनाव पूर्व गठबंधन के रूप में उभरा था। राज्यपाल ने कांग्रेस के इशारे पर जनादेश की अवहेलना करके भाजपा को सरकार बनाने से रोक दिया था।

सरकार गिराने में कांग्रेस का रिकार्ड
देश की आजादी के बाद से अब तक केन्द्र सरकार ने राज्यों में 124 बार राष्ट्रपति शासन लगाया है, इसमें से 88 बार केन्द्र की कांग्रेस सरकार ने राज्यों पर राष्ट्रपति शासन थोपा है। इंदिरा गांधी अकेली ऐसी प्रधानमंत्री है जिन्होंने राज्यों में कांग्रेस की सरकारों की स्थापना के लिए 50 बार राष्ट्रपति शासन लगाया। इंदिरा गांधी को यह देश उनके आपातकाल के लिए भी याद करता है जिसके दौरान जनता के सभी मूलभूत अधिकार छीन लिए गये थे।

आज कर्नाटक मे जो भी हुआ है वह संविधान के नियमों और सत्ता की नैतिकता के तहत हुआ है। केन्द्र सरकार यदि चाहती तो कांग्रेस की तरह संविधान की धज्जियां उड़ाते हुए कर्नाटक में राष्ट्रपति शासन लागू करके अपनी सत्ता बना सकती थी, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। भाजपा ने जनादेश के सम्मान के लिए कांग्रेस-जेडीएस की सरकार को सत्ता से हटाया है।

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