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कांग्रेस और विपक्ष का बढ़ता जिन्ना प्रेम

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कांग्रेस के साथ-साथ दूसरी विपक्षी पार्टियों का जिन्ना प्रेम भी लगातार बढ़ता जा रहा है। एनसीपी नेता माजिद मेमन ने कहा है कि देश की आजादी में जिन्ना का बड़ा योगदान है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन्ना के मुसलमान होने के चलते बीजेपी उनका विरोध कर रही है। माजिद कांग्रेस नेता शत्रुघ्न सिन्हा के उस बयान पर बोल रहे थे जिसमें उन्होंने कहा था कि नेहरू, गांधी और सुभाष बोस की तरह जिन्ना भी कांग्रेस परिवार के हैं। दरअसल, विपक्षी पार्टियों का यह जिन्ना प्रेम केवल चुनावी फायदे के लिए है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और महासचिव प्रियंका गांधी के लिए यह मुफीद है क्योंकि उनका एकमात्र लक्ष्य हर कीमत पर मुसलमानों का वोट हासिल करना है। सच्चाई यह है कि लोकसभा चुनाव में अपनी हार तय देख ये पार्टियां देश की एकता और अखंडता के साथ खेल रही हैं, वोटर्स को धार्मिक आधार पर बांटकर अपनी चुनावी रोटी सेंकने की कोशिश कर रही हैं। सच्चाई यह भी है कि देश के बंटवारे और मुसलमानों की धार्मिक गोलबंदी के पक्षधर रहे जिन्ना को कांग्रेस परिवार का हिस्सा बताकर विपक्ष खुद ही अपनी विश्वसनीयता खो रहा है। उसे यह नहीं पता कि देश का मतदाता अब काफी बदल चुका है और जिन्ना प्रेम का यह चुनावी दिखावा खुद उनके लिए ही मुसीबत बन सकता है।

जिन्ना नहीं, मुसलमान वोट हैं निशाने पर

  • पूरे देश में मोदी लहर के चलते विपक्षी पार्टियों को अपनी हार निश्चित होने का अंदाजा लग गया है।
  • तमाम सर्वे के नतीजों बता रहे हैं कि महागठबंधन में शामिल पार्टियों के लिए 2014 में जीती सीटों के आंकड़े तक पहुंचना असंभव है।
  • देश के कई इलाकों में मुसलमान वोटर्स के भी मोदी के पक्ष में वोट करने की खबरें हैं। विपक्षी पार्टियां इससे चिंतित हैं।
  • यह पहला चुनाव है जिसमें जाति-धर्म से ज्यादा विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा की चर्चा है, विपक्ष इसे धार्मिक रंग देने की कोशिश कर रहा है।

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