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भारत-इजरायल दोस्ती की निशानी बनी पीएम मोदी और नेतन्याहू की तस्वीर, संजो कर रखेगा इजरायल

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हमेशा नया इतिहास रचने में विश्वास करते हैं। जुलाई 2017 में भी भारत की विदेश नीति में एक क्रांतिकारी पहल करते हुए इजरायल की यात्रा करने वाले वे भारत के पहले प्रधानमंत्री बने। इस लिहाज से प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल यात्रा ऐतिहासिक थी। इस यात्रा के दौरान भारत-इजरायल संबंध के एक नए दौर की शुरुआत हुई। अपनी यात्रा के अंतिम दिन प्रधानमंत्री मोदी ने इजरायल के तत्कालीन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ दोस्ती के कई यादगार पल व्यतीत किए। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ बेंजामिन नेतन्याहू की एक तस्वीर क्लिक की गई थी, जो यादगार बन गई। भारत में इजराइल के राजदूत नाओर गिलोन ने कहा कि इस तस्वीर को इजरायल प्रतीक के रूप में रखेगा कि संबंध कैसे निभाए जाते हैं।

एएनआई से बात करते हुए इजरायली राजदूत गिलोन ने बताया कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ प्रधानमंत्री मोदी की यह खास तस्वीर ओल्गा समुद्र तट पर क्लिक की गई थी। दोनों प्रधानमंत्रियों ने जो दोस्ती विकसित की वह अन्य प्रधानमंत्रियों के साथ भी जारी रही। राजदूत गिलोन ने भी माना कि हमारे संबंधों में बड़ा बदलाव प्रधानमंत्री मोदी की इजरायल की पहली ऐतिहासिक यात्रा और उसके बाद नेतन्याहू की भारत यात्रा के बाद आया है।

इजरायली राजदूत गिलोन ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की इजराइल यात्रा और कुछ महीने बाद 2017 में इजरायल के तत्कालीन प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की भारत यात्रा दोनों देशों के बीच संबंधों के लिए एक गेम चेंजर था। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी 4-6 जुलाई, 2017 तक पूर्व पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के निमंत्रण पर इजरायल के दौरे पर थे। इस दौरान इजरायली समाचार पत्रों ने प्रधानमंत्री मोदी से जुड़ी हर खबर को प्रमुखता दी थी। इन समाचार पत्रों पर नजर डालने से यह अहसास हुआ कि इजरायल के लोग, दिल से, भारत का बहुत सालों से इंतजार कर रहे थे।

गिलोन ने कहा कि आतंकवाद से इजरायल और भारत दोनों पीड़ित रहे हैं। इस समस्या से निजात पाने में दोनों देश एक साथ काफी अच्छा सहयोग कर रहे हैं। दोनों देशों के खुफिया विभाग एक दूसरे की मदद कर रहे हैं। दोनों ही देश दुनिया से आतंकवाद को खत्म करने की आवश्यकता के बारे में गंभीरता से सोचते हैं। दोनों देश सामने आने वाली समस्या को खत्म करने में एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं। उन्होंने समझाया कि कैसे आतंक एक बीमारी है और यह एक जटिल समस्या है क्योंकि आतंकवादी का विचार देशों के नागरिकों के सामान्य जीवन को बाधित करना है। 

भारत ने 1992 में इजरायल के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए और तब से यह संबंध बहु-आयामी साझेदारी में विकसित हुआ। गिलोन ने कहा कि संबंध उम्मीद से थोड़ा धीमा शुरू हुआ, लेकिन 1992 में बड़े बदलाव ने दोनों देशों के बीच पूर्ण राजनयिक संबंध स्थापित किए। दोनों देशों ने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में उन्नत किया और उसके बाद सहयोग के लिए कई रास्ते खुल गए। दोनों देशों के बीच जमी हुई बर्फ को प्रधानमंत्री मोदी ने ऐसा पिघलाया कि अब दोनों देशों के बीच प्रमुख सैन्य और रणनीतिक साझेदारी हो चुकी है।

 

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