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चीन के सेंट्रल बैंक ने घटाई HDFC में अपनी हिस्सेदारी, मोदी सरकार की सख्ती का दिखा असर

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चीन ने पाकिस्तान से सबक नहीं लिया और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को हल्के में लेने की गलती कर दी। उसने प्रधानमंत्री मोदी और भारत को परेशान करने के लिए सीमा पर गुस्ताखी करने की कोशिश की, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी के सख्त तेवर, सैनिक तैयारी और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति ने उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया। अब चीन को जहां सीमा पर पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा है, वहीं आर्थिक मोर्चे पर भी झटका लगने लगा है। मोदी सरकार की सख्ती का असर आर्थिक मोर्चे पर भी दिखाई देने लगा है। चीन के सेंट्रल बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने भारत के निजी सेक्टर की सबसे बड़ी हाउसिंग फाइनेंस कंपनी HDFC में अपनी हिस्सेदारी घटी दी है।

कोरोना वायरस लॉकडाउन के बीच चीन के सेंट्रल बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना की ओर से HDFC में हिस्सेदारी खरीद को लेकर आई खबर से हड़कंप मच गया था। उस समय सरकार ने एफडीआई नियमों को भी सख्त कर दिया था। उन्हीं सख्त कदमों के चलते बैंक को हिस्सेदारी घटाने पर मजबूर होना पड़ा है। अप्रैल में पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने एचडीएफसी में 1.01 प्रतिशत की हिस्सेदारी 3,300 करोड़ रुपये के निवेश के साथ खरीदी थी। ऐसे में कई लोग इस बात पर चिंता जता रहे थे कि FDI रूट के जरिए ओपन मार्केट से स्टेक खरीदना अधिग्रहण के लिहाज से बेहद संवेदनशील है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, एचडीएफसी की ओर से स्टॉक मार्केट एक्सचेंजों को दी गई जानकारी में बताया गया है कि चीन के सैंट्रल बैंक ने HDFC अपनी कम से कम कुछ हिस्सेदारी बेची है। एक्सचेंज को दी गई जानकरी में बताया गया है कि जून के अंत तक चीनी सेंट्रल बैंक ने 1 प्रतिशत हिस्सेदारी कम कर दी है। PBOC ने ओपन मार्केट में अपने शेयर बेच दिए है।

हिंदू बिजनेस लाइन अखबार ने बाजार सूत्रों का हवाला देते हुए कुछ दिनों पहले बताया था कि एचडीएफसी के शेयर में आई गिरावट इसी वजह से है। आपको बता दें कि एचडीएफसी का शेयर रिकॉर्ड स्तर से 40 प्रतिशत गिरकर अपने अप्रैल के निचले स्तर पर आ गया था, लेकिन अब कुछ रिकवरी आई है। 

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