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ग्लोबल लीडर है भारत, धमकी देने की भूल न करे चीन

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चीन भारत को उसके चीर प्रतिद्वंद्वी अमेरिका के साथ प्रगाढ़ होते द्विपक्षीय रिश्ते को पचा नहीं पा रहा है। अब खीज निकालने के लिए उसने सिक्किम से लगी सीमा क्षेत्र में बेवजह विवाद खड़ा कर दिया है। इस विवाद के कारण चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा पर अस्थायी रूप से रोक लगा दी। सीमा पर सीनाजोरी करते हुए चीन ने भारत को 1962 के युद्ध को याद रखने की धमकी तक दे दी। हालांकि आंख तरेरने के चक्कर में चीन भूल गया कि आज का भारत 2017 का है, जिसका नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कर रहे हैं। 

1962 से बहुत अलग है देशः जेटली 
चीन की धमकी के एक दिन बाद रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने उसपर पलटवार किया। एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि 1962 के भारत से 2017 का भारत पूरी तरह से अलग है। जिस क्षेत्र को लेकर चीन विवाद कर रहा है, वह भूटान का क्षेत्र है जहां की सुरक्षा भारत और भूटान दोनों मिलकर करते हैं। चीन भूटान के क्षेत्र डोकला में सड़क बनाना चाहता है लेकिन भूटान ऐसा करने नहीं दे रहा है। यह क्षेत्र भारत को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ता है।

भारत की दोस्ती से दक्षिणी चीन सागर में अमेरिका को बढ़त  
रूस पहले से ही भारत का पारंपरिक साझेदार है। पीएम मोदी और अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की दोस्ती से चीन परेशान है। अमेरिका के साथ आने से एशियाई देशों के बीच भारत की स्थिति और मजबूत हो रही है। वहीं, भारत की दोस्ती के कारण अमेरिका दक्षिण एशिया में आसानी से अपना पैर जमा सकेगा। दक्षिणी चीन सागर में हस्तक्षेप बनाए रखने के लिए अमेरिका को भारत का साथ चाहिए। ट्रंप की दोस्ती पर चीनी मीडिया ने आलोचना करते हुए भारत को नसीहत दे दी है कि वह अमेरिका के लिए टूल की तरह इस्तेमाल न हो। चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स लिखता है कि “अमेरिका, चीन पर दबाव बनाना चाहता है और इसके लिए वह भारत का इस्तेमाल कर रहा है। यह अमेरिका की एक चाल है।”

वैश्विक मंच पर पाकिस्तान की फजीहत से चीन को परेशानी  
भारत आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को वैश्विक स्तर पर अलग-थलग करने पर जुटा है। इस पर हर बार चीन किए कराए पर पानी फेर देता है। संयुक्त राष्ट्र में दो बार हाफिज सईद को लेकर प्रस्ताव लाया गया। दोनों बार चीन के वीटो पॉवर ने रास्ते में अड़ंगा लगाया। भारत एक-एक करके लगभग सभी वैश्विक मंचों पर आतंकवादियों को संरक्षण देने के मामले में पाकिस्तान को नंगा कर रहा है। इससे चीन की भी फजीहत हो रही है, क्योंकि चीन पाकिस्तान को आतंकवादियों का संरक्षक मानता ही नहीं है। पीएम मोदी के दौरे से ठीक पहले अमेरिका ने पाकिस्तान में रह रहे हिजबुल मुजाहिद्दीन के मुखिया सैयद सलाहुद्दीन को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित कर दिया। खुद पाकिस्तानी सरकार ने हाईकोर्ट में हलफनामा देकर हाफिद सईद को आतंक को बढ़ावा देने का आरोपी माना है। 

आर्थिक और सामरिक शक्ति है भारत 
1962 के युद्ध के बाद चीन-भारत के रिश्ते कभी सामान्य नहीं रहे हैं लेकिन भारत-चीन के बीच कभी युद्ध के हालात नहीं बने। 1962 से 2017 आते-आते इन 55 सालों में सिर्फ कैलेंडर नहीं बदला है, बल्कि भारत आर्थिक और सामरिक रूप से मजबूत हुआ है। भारत की राजनीतिक दृष्टि में भी बदलाव आया है, भारत वैश्विक लीडर के रूप में उभरा है। इस बात से चीन को भी इनकार नहीं है। उसी का परिणाम है कि भारत को शंघाई सहयोग संगठन (SCO) में स्थायी सदस्य बनाने की पहल खुद चीन ने की।

अमेरिका और चीन के बीच तनाव
अमेरिका की उत्तर कोरिया से तनातनी है जबकि चीन उत्तर कोरिया का समर्थन करता है। अमेरिका ने चीन के बैंक ऑफ डांडोंग (Bank of Dandong) पर यह कहकर प्रतिबंध लगा दिया है कि यह बैंक उत्तर कोरिया के लिए मनी लॉन्ड्रिंग का काम करता है। वहीं, दक्षिणी चीन सागर को लेकर भी अमेरिका चीन के बीच तनाव है। पिछले दिनों चीन ने सैनिक अभ्यास किया। इसके बाद अमेरिका का एक एयरक्राफ्ट गश्त करने लगा है। सामरिक और आर्थिक दृष्टि से चीन के लिए दक्षिण चीन सागर बहुत महत्वपूर्ण है। इस रास्ते से होकर चीन का हर साल करीब 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का बिजनेस होता है। इसके अलावा यह क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से भी काफी संपन्न है। 

CPEC को POK से गुजरने पर भारत को एतराज
पाकिस्तान में चीन अपनी महत्वाकांक्षी योजना चाइना-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का निर्माण कर रहा है। चीन-पाकिस्‍तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) ग्वादर से काशगर तक है जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान और पाकिस्तान के विवादित क्षेत्र बलूचिस्तान होते हुए जाएगा। इसके जरिए करीब 3000 किमी के रोड नेटवर्क के साथ-साथ रेलवे और पाइपलाइन लिंक भी पश्चिमी चीन से दक्षिणी पाकिस्तान को जोड़ेगा। पाक अधिकृत कश्मीर भारत हिस्सा है। ये और बात है कि इस पर पाकिस्तान का कब्जा है लेकिन चीन इधर से यह कॉरिडोर भारत की अनुमति के बगैर कैसे ले जा सकता है। इस पर भारत को एतराज है।

जवानों में जोश भरने पहुंचे जनरल
भारत और चीन के बीच सिक्किम बॉर्डर पर तनातनी के बीच सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत 29 जून को यहां दौरा करने पहुंचे। यहां पहुंचकर उन्होंने सेना के जवानों की हौसला अफजाई की।

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