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पंजाब की भगवंत मान सरकार ने किसानों की उम्मीदों पर चलाया बुलडोजर, कर्ज नहीं चुकाने पर दो हजार किसानों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी, चौतरफा विरोध शुरू

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दिल्ली की तरह पंजाब में भी झूठे वादे कर आम आदमी पार्टी की सरकार तो आ गई, लेकिन अब उसे सरकार चलाना मुश्किल हो रहा है। राज्य की भगवंत मान सरकार जिस तरह लुभावने वादे के साथ शर्तें लागू कर रही हैं, उससे राज्य की जनता के अरमानों पर पानी फिरते नजर आ रहा है। वहीं सत्ता में आते ही किसानों की गिरफ्तारी भी शुरू कर दी है। मान सरकार की ये गाज उन किसानों पर गिर रही है जिन्होंने खेती विकास बैंकों का कर्जा नहीं लौटाया है।खुद को किसानों की हितौषी बताने वाले केजरीवाल के चहेते मुख्यमंत्री ने कर्ज से कराह रहे 2000 किसानों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर उनके उम्मीदों पर बुलडोजर चला दिया है। इससे पूरे पंजाब में बवाल मच गया है।

राज्य के कई इलाकों में सहकारी बैंकों ने डिफाल्टरों पर कार्रवाई भी शुरू कर दी है। और कई केसों में तो जमीन की नीलामी की प्रक्रिया भी चल रही है। खेती विकास बैंक फिरोजपुर ने बस्ती रामवाड़ा के 11 लाख के कर्जदार किसान बख्शीश सिंह को पकड़ा। हालांकि, बख्शीश सिंह ने पकड़ के बाद लिखित में कहा कि वो एक महीने में कर्जा लौटा देगा। उसके द्वारा दिए गए इस लिखित पत्र के बाद उसे गिरफ्तार नहीं किया गया। इसके अलावा खेती विकास बैंक जलालाबाद के किसान सोमनाथ को भी गिरफ्तार किया गया, जिसपर 12 लाख रुपये का कर्ज था। जब उसने 6.27 लाख रुपये अदा कर दिए तो छोड़ दिया गया।

मान सरकार के इस कदम से किसान संगठन भड़क गए हैं, जबकि विपक्षी दलों ने भी सरकार पर निशाना साधा है। संयुक्त समाज मोर्चा के नेता बलबीर सिंह राजेवाल ने डिफाल्टर किसानों की गिरफ्तारी का विरोध किया और कहा कि राज्य में कई स्थानों पर डिफाल्टर किसानों की गिरफ्तारी शुरू हो चुकी है। अगर सरकार ने किसानों की गिरफ्तारी न रोकी तो उनका संगठन चुप नहीं बैठेगा। भारतीय किसान यूनियन डकौंदा के प्रधान बूटा सिंह बुर्जगिल ने कहा कि देश के अनाज भंडार भरने वाले किसानों के साथ आज मुजरिमों जैसा सुलूक किया जा रहा है। इसे किसान बर्दाश्त नहीं करेंगे। 

गौरतलब है कि पंजाब की भगवंत मान सरकार ने उन किसानों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, जिन्होंने खेती के नाम पर कृषि विकास बैंकों से कर्ज तो लिया लेकिन उसे वापस नहीं किया। सरकार के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 71 हजार किसानों से बैंकों के 3200 करोड़ रुपये की वसूली की जानी है, जिसके लिए कदम उठाते हुए 60000 डिफाल्टर किसानों में से 2000 के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट तैयार कर कार्रवाई शुरू कर दी है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने सहकारी बैंकों को कर्ज वसूली के लिए सहकारी संस्थाओं से संबंधित धारा 67ए के तहत छूट दी है कि वह कर्ज की वसूली के लिए डिफाल्टर किसानों को गिरफ्तार करा सकते हैं।

 

 

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