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सवा सौ करोड़ देशवासी ही नरेन्द्र मोदी का परिवार

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एक ओर जब परिवार और भाई-भतीजावाद चरम पर है तो ऐसे समय में एक अपवाद के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भारतीय राजनीति के आकाश में ध्रुव तारा की तरह टिमटिमाते नजर आते हैं जो इस बीमारी से मुक्त हैं। श्री नरेन्द्र मोदी स्वतंत्र भारत के अकेले ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो देश के हर नागरिक को अपने परिवार का सदस्य मानते हैं, या यों कहें कि सवा सौ करोड़ देशवासी ही उनका परिवार है। 

चकाचौंध से दूर सादगी में जी रहा नरेंद्र मोदी का परिवार
भारतीय राजनीति में आमतौर पर जो परिवार सत्ता पर काबिज होता है वो खुद को राजा समझता है, लेकिन राजनीति के इस दूषित चेहरे को अगर किसी ने फिर से पवित्र करने की कोशिश की है तो वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनका परिवार है। दुनिया की चकाचौंध से दूर सादगी से जी रहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का परिवार उम्मीदों और आशाओं से भरे भारतीय लोकतंत्र के लिए रोशनी की तरह है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पिछले करीब 21 साल से सत्ता के शिखर पर हैं। 13 साल मुख्यमंत्री और साढ़े सात साल से देश के प्रधानमंत्री। फिर भी उनके परिवार पर सत्ता का असर कहीं दिखाई नहीं देता। आज भी उनका परिवार आम लोगों की तरह जीवन बसर कर रहा है।

आईए प्रधानमंत्री मोदी के परिवार पर डालते हैं एक नजर
नरेंद्र मोदी के चार भाई सोमभाई मोदी, अमृत मोदी, पंकज मोदी, प्रह्लाद मोदी और एक बहन वसंती बेन हैं। पीएम मोदी के सबसे बड़े भाई सोमभाई मोदी अपने पैतृक शहर वडनगर में वृद्धाश्रम चलाते हैं। श्री नरेन्द्र मोदी से ठीक बड़े अमृतभाई मोदी एक प्राइवेट कंपनी के फिटर पद से रिटायर हुए हैं। 2005 में जब नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री थे, उस समय ये रिटायर हुए और इनकी सैलरी तब भी महज 10 हजार रुपये थी। उनके साथ 48 वर्षीय बेटा संजय मोदी, अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रहते हैं। संजय छोटा-मोटा कारोबार चलाते हैं। श्री नरेंद्र मोदी से ठीक छोटे भाई प्रह्लादभाई मोदी सस्ते गल्ले की दुकान चलाते हैं। प्रधानमंत्री के सबसे छोटे भाई पंकजभाई मोदी हैं। पंकज भाई गुजरात सूचना विभाग में काम करते हैं और मां हीराबेन उन्हीं के साथ गांधीनगर में तीन कमरे के सामान्य से घर में रहती हैं। प्रधानमंत्री मोदी की मां से मिलने जाने के कारण छोटे भाई पंकज से मुलाकात हो जाती है।

संघर्षों और कठिनाइयों से भरा है रिश्तेदारों का जीवन
पीएम मोदी के बाकी चचेरे भाई, भतीजे या दूसरे रिश्तेदारों का जीवन भी संघर्षों और कठिनाइयों से भरा है। कुछ तो अपनी जिंदगी बेहद गरीबी में काट रहे हैं। नरेंद्र मोदी के चचेरे भाई अशोकभाई मोदी तो वडनगर के घीकांटा बाजार में एक ठेले पर पतंगें, पटाखे और कुछ खाने-पीने की छोटी-मोटी चीजें बेचते हैं। वे अब अपनी पत्नी के साथ एक व्यापारी के यहां काम करते हैं। यहीं अशोक भाई खाना बनाते हैं तो उनकी पत्नी बरतन मांजती हैं। कुल मिलाकर अशोकभाई मोदी 7-8 हजार कमा लेते हैं। उनके बड़े भाई भरतभाई एक पेट्रोल पंप पर छह हजार रुपए महीने में अटेंडेंट का काम करते हैं। तीसरे भाई चंद्रकांतभाई एक पशु गृह में हेल्पर का काम करते हैं। चौथे भाई अरविंदभाई कबाड़ी का काम करते हैं और इससे छह से सात हजार कमा लेते हैं। सबसे ज्यादा 10 हजार की कमाई भरतभाई मोदी की है। इनके सबसे बड़े भाई भोगीभाई किराने की दुकान चलाते हैं।


परिवारवाद ने राजनीति को किया सबसे ज्यादा बदनाम
भारतीय राजनीति को अगर किसी ने सबसे ज्यादा बदनाम किया है तो वो परिवारवाद है। ये परिवारवाद चाहे-अनचाहे देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू से शुरू हुआ, जो राहुल गांधी-प्रियंका गांधी तक आकर नासूर बन चुका है। नेहरू-गांधी परिवार से शुरू हुई इस बीमारी ने यादव परिवार (मुलायम+लालू), पवार परिवार, अब्दुल्ला परिवार और सिंधिया परिवार से लेकर देश के हर राज्य की राजनीति को दूषित किया है। कई बार तो पता ही नहीं चलता कि देश में लोकतंत्र है या राजतंत्र। नेहरू-गांधी परिवार की स्थिति भारतीय लोकतंत्र का मजाक उड़ाने के लिए काफी है। आजादी के बाद से ही देश की सत्ता और कांग्रेस पार्टी पर इस परिवार का कब्जा रहा है। इस परिवार ने 48 साल तक देश पर राज किया, 38 साल सीधे-सीधे और 10 साल तक मनमोहन सरकार की डुगडुगी अपने पास रखी। जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी देश के प्रधानमंत्री के पद पर काबिज रहे। जबकि यूपीए सरकार के समय भी सत्ता की कमान सीधे-सीधे राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी के पास रहीं। हर चुनाव में शिकस्त मिलने के बाद भी उनके पुत्र राहुल गांधी की तरक्की हुई और वो इस समय कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। इसके अलावा राजीव गांधी के भाई संजय गांधी हों या राहुल गांधी की बहन प्रियंका गांधी और उनके पति रॉबर्ट वाड्रा, कांग्रेस पार्टी के भीतर इनके कद का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है। अगर वाड्रा पर आरोप भी लगते हैं तो पूरी कांग्रेस पार्टी विधवा विलाप करने लग जाती हैं।

जेपी आंदोलन से उपजे लालू यादव भी फंसे हैं मकड़जाल में
यही हाल बिहार की राजनीति में लालू यादव परिवार का है। जेपी आंदोलन से राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले लालू यादव ने परिवारवाद के जरिये बिहार की पूरी राजनीति को बदनाम कर दिया। बिहार के मुख्यमंत्री पद पर रहते इनपर चारा घोटाले का आरोप लगा तो इन्होंने अपनी पत्नी राबड़ी देवी को ही सीएम की कुर्सी पर बिठा दिया। पुत्र तेजस्वी यादव, तेज प्रताप यादव से लेकर बड़ी बेटी मीसा भारती सभी राजनीति में मलाई खा रहे हैं।

महाराष्ट्र में चलता है पवार परिवार का सिक्का
महाराष्ट्र में पवार परिवार का पावर भी जगजाहिर है। नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के संस्थापक और अध्यक्ष शरद पवार तीन बार महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री और केंद्र में मंत्री रह चुके हैं। इनपर भ्रष्टाचार, अपराधियों को बचाने, स्टाम्प पेपर घोटाले, जमीन आवंटन विवाद जैसे दर्जनों आरोप लगे, लेकिन इनका परिवार राजनीति में सीढ़ियां ही चढ़ता रहा। बेटी सुप्रिया सुले सांसद हैं। भतीजा अजित पवार महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री रह चुके हैं। इन पर सिंचाई घोटाले के भी आरोप लग चुके हैं।

अमर सिंह बोले, हैरान करने वाली है एक प्रधानमंत्री के परिजनों की यह सादगी

समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता स्वर्गीय अमर सिंह एक बार जब गुजरात गए थे तो उन्हें पता चला कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बड़े भाई बीमार हैं, तो उनसे मिलने और हालचाल जानने का फैसला किया। लेकिन अमर सिंह यह देखकर भौचक्के रह गए कि प्रधानमंत्री मोदी के बड़े भाई एक सरकारी अस्पताल के जनरल वार्ड में अपना इलाज करा रहे हैं। अमर सिंह ने बिना किसी का नाम लिए कटाक्ष करते हुए कहा था कि वह पहले जिस पार्टी में थे, उस पार्टी के नेताओं की बात तो छोड़ें, अगर एक विशेष जाति का व्यक्ति बीमार हो जाए तो पूरा अस्पताल खाली करा लेते थे। श्री मोदी के परिवार की सादगी की तारीफ करते हुए अमर सिंह ने कहा था कि प्रधानमंत्री की भाभी की कबाड़ी की दुकान है और उनके एक भाई लोअर डिवीजन क्लर्क हैं। उनकी मां एक छोटे-से कमरे में रहती हैं। एक प्रधानमंत्री के परिजनों की यह सादगी, हैरान करने वाली है।

 

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