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गणतंत्र दिवस समारोहों के दौरान में दिल्ली में आतंकी हमले की साजिश नाकाम, दो आतंकी गिरफ्तार

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केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद से ही आतंकी गतिविधियों में भारी कमी आई है। प्रधानमंत्री मोदी की राजनीतिक इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि अब आतंकवादी अपनी साजिशों को अंजाम देने के पहले ही कानून की गिरफ्त में आ जाते हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली को दहलाने की एक ऐसी ही साजिश को नाकाम कर दिया गया है। दिल्ली पुलिस ने जम्मू-कश्मीर के वाकुरा और बाटापोरा निवासियों अब्दुल लतीफ गनी (29) ऊर्फ उमैर ऊर्फ दिलावर और हिलाल अहमद भट (26) को गिरफ्तार कर लिया

गणतंत्र दिवस समारोहों के दौरान हमले की थी योजना

गणतंत्र दिवस समारोहों के दौरान दिल्ली में आतंकवादी हमलों की साजिश रचने के आरोप में जैश-ए-मोहम्मद के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस के अधिकारियों ने यह जानकारी दी। स्पेशल सेल के डिप्टी कमीश्नर पीएस कुश्वाह ने बताया कि सैन्य खुफिया तंत्र से सूचना मिली थी कि लक्ष्मी नगर के एक मकान में कुछ संदिग्ध लोग आ-जा रहे हैं। इसी आधार पर 20-21 जनवरी की रात के दौरान दिलावर को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि पुलिस को पता चला था कि दिलावर किसी से मिलने के लिए राजघाट जाने वाला है। उसी के आधार पर सुरक्षा बलों की तैनाती कर संदिग्ध सामग्री के साथ उसे गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि दिलावर के पास से 32 बोर की पिस्तौल और 26 कारतूस मिले हैं। जेईएम कमांडरों के तीन स्टांप और अन्य चीजें भी मिली हैं। कुश्वाह ने बताया कि दिल्ली पुलिस को दिलावर की पहचान करने में कुछ महीने का वक्त लगा। इसके बाद स्पेशल सेल की टीम जम्मू-कश्मीर पहुंच गई और उसके इशारे पर दो आईईडी/ग्रेनेड बरामद किए और एक अन्य आतंकवादी हिलाल भट को गिरफ्तार भी किया गया। अधिकारी ने बताया कि आतंकवादी हमलों के लिए दिल्ली में कई जगहों की रेकी करने वाले भट को बांदीपोरा से गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि पूछताछ के दौरान दोनों आतंकियों ने खुलासा किया कि वे जैश के सदस्य हैं और दिलावर आतंकी संगठन का गांदेरबल जिला कमांडर है।

दिल्ली पुलिस की इस कामयाबी के साथ ही आतंकवाद के खात्मे को लेकर जम्मू-कश्मीर पुलिस को भी बड़ी कामयाबी मिली है।  

जम्मू-कश्मीर का बारामूला आतंक-मुक्त

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के सफाए में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की नीति को सबसे बड़ी सफलता मिली है। पाकिस्तान समर्थित आतंकवादियों के गढ़ कहे जाने वाले बारामूल्ला में अब एक भी आतंकी जिंदा नहीं बचा है। इस बात की घोषणा राज्य पुलिस के डीजीपी दिलबाग सिंह ने की है।

हिजबुल मुजाहिदीन के गढ़ के रूप में कुख्यात बारामूला में पिछले दो साल में ऑपरेशन ऑलआउट के तहत पचास से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया गया है। बारामूला, जम्मू-कश्मीर का वही जिला है, जहां उरी सेक्टर में 18 सितंबर, 2016 को सेना के कैंप पर आतंकवादियो ने तड़के अचानक हमला बोल दिया था। इस वारदात में 19 जवान शहीद हुए थे। इसी का बदलना के लिए सेना ने उसी साल 29 सितबर को सर्जिकल स्ट्राइक करके पाकिस्तान के कब्जे वाली कश्मीर के अंदर बने हुए आतंकियों के लॉन्चिंग पैड को तबाह कर किया था, जो भारत द्वारा की गई पहली सर्जिकल स्ट्राइक थी।

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