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ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनेगा देश का पहला सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण टनल, मोदी सरकार ने दी सैद्धांतिक मंजूरी

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देश की बागडोर संभालने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के आधारभूत ढांचे के विकास के लिए कई अहम फैसले किए। देश के आंतरिक भाग और सीमावर्ती इलाकों में कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए सड़कों के निर्माण में तेजी आयी। लेकिन चीन के साथ विवाद के बाद इस दिशा में और तेजी से काम करने की जरूरत महसूस हुई है। इसे देखते हुए मोदी सरकार ने ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे 14 किलोमीटर लंबा टनल बनाने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि यह नदी के नीचे बनने वाला देश का पहला सड़क परिवहन टनल होगा, जो पूर्वी चीन के ताइहू झील के नीचे बन रहे सड़क परिवहन टनल से अधिक लंबा है।

अत्याधुनिक तकनीक से बनने वाला टनल असम-अरुणाचल प्रदेश से सालभर कनेक्टिविटी मुहैया कराने के चलते सामरिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है। आने और जाने के लिए पृथक दो ट्यूब वाले इस टनल में सैन्य वाहन, रसद-हथियार पहुंचाने वाले वाहन 80 किलोमीटर की रफ्तार पर फर्राटा भर सकेंगे।

मोदी सरकार असम के गोहपुर (एनएच-54) से नुमालीगढ़ (एनएच-37) को जोड़ने के लिए ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे चार लेन सड़क परिवहन टनल बनाने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचएआईडीसीएल) ने अमेरिका की पेशवर कंपनी लुइस बर्जर कंपनी द्वारा तैयार प्री-फिजिबिलटी रिपोर्ट व डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) को 18 मार्च को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी गई है।

उपक्रम के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि एलाइनमेंट सहित तमाम प्रक्रिया पूरी कर ली गई है और दिसंबर में टनल निर्माण का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। तीन पैकेज में बनने वाला यह सड़क परिवहन टनल कुल 14.85 किलोमीटर लंबा होगा। 

अधिकारी के मुताबिक पूर्वी चीन के ताइहू झील के नीचे निर्माणाधीन सड़क परिवहन टनल की लंबाई 10.79 किलोमीटर है। ब्रह्मपुत्र नदी के नीचे बनने वाले टनल में आने और जाने के लिए पृथक दो ट्यूब (कैप्सूल) होंगे। बीच में यह दोनों ट्यूब आपस में जुड़ें होंगे। टनल के भीतर पानी नहीं घुसने के कई सुरक्षा चक्र होंगे।

टनल में ताजी हवा के लिए वेटिलेशन सिस्टम, फायर फाइटिंग, रेलिंग युक्त फुटपाथ, डे्रनेज सिस्टम, मार्ग प्रकाश, इमरजेंसी निकास आदि होंगे। टनल में पहली बार क्रैश बैरियर लगाए जाएंगे। जिससे 80-100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार दौड़ने वाले वाहनों के दुर्घटना होने पर वाहन पलटने के बजाए क्रैश बैरियर से टकरा कर सड़क पर आ जाएंगे।

 

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