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सऊदी अरब में मिला 8000 साल पुराना मंदिर, इस्लामिक देशों से लेकर पूरी दुनिया में फैली थी हिन्दू सभ्यता

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ऐसी मान्यता है कि प्राचीन काल में एक समय ऐसा था जब संपूर्ण धरती पर हिंदू धर्म ही था। प्राचीन भारत की सीमा अफगानिस्तान के हिंदुकुश से लेकर अरुणाचल तक और कश्मीर से लेकर श्रीलंका तक था। यह भी कहा जाता है कि भारत की सीमा अरुणाचल से आगे इंडोनेशिया एवं मलेशिया तक फैली हुई थी। उस समय भारत पर 18 महाजनपदों के सम्राटों का राज था जिसके तहत जनपद और उपजनपद भी थे। ये हम सभी जानते हैं कि पृथ्वी सात द्वीपों में बंटी है। पुराणों में इन सात द्वीपों में जम्बूद्वीप को सर्वश्रेष्ठ कहा गया है और संपूर्ण जम्बूद्वीप पर हिंदू धर्म कायम था। अन्य धर्मों की बात की जाए तो ईसाई और मुस्लिम धर्म की शुरुआत पहली शताब्दी के समय से या उसके बाद मानी जाती है वहीं सनातन धर्म हजारों वर्षों से किसी न किसी रूप में पूरी दुनिया में फैला हुआ था। आज के इस्लामिक अरब जगत में पहली शताब्दी से पूर्व यजीदी धर्म प्रचलित था। यजीदियों की गणना के अनुसार अरब में यह परंपरा 6,763 वर्ष पुरानी है अर्थात ईसा के 4,748 वर्ष पूर्व यहूदियों, ईसाइयों और मुसलमानों से पहले से यह परंपरा चली आ रही है। यजीदी धर्म को हिन्दू धर्म की एक शाखा माना जाता है। इससे यह पता चलता है कि सनातन धर्म भिन्न रूपों में पूरी दुनिया में फैला था और इसके सबूत जब-तब सामने आते रहते हैं। अब सऊदी अरब में 8000 साल पुराना मंदिर मिला है। इससे पता चलता है कि हिन्दू सभ्यता हजारों वर्ष पहले आज के इस्लामिक देशों में फैली हुई थी। यही वजह है कि मक्का मस्जिद में शिव मंदिर होने की बात भी उठती रहती है।

सऊदी अरब में 8 हज़ार साल पुराना मंदिर मिला

इस्लामिक देश सऊदी अरब में 8000 साल पुराने मंदिर के अवशेष मिले हैं। सऊदी प्रेस एजेंसी की ख़बर के मुताबिक, सऊदी अरब की राजधानी रियाद के दक्षिण-पश्चिम स्थित अलफ़ा में 8000 साल पुराने मंदिर के अवशेष मिले हैं। इससे यह साबित होता है कि कभी अलफ़ा के लोग मंदिर में आकर पूजा और आराधना करते थे। सऊदी अरब में आर्कियोलॉजिकल सर्वे ने खुदाई के दौरान करीब 8 हजार साल पुराने शहर की खोज की है, जिसमें प्राचीन मंदिर मिला है।

मंदिर और वेदी के अवशेष मिले

पुरातत्वविदों ने ऐतिहासिक निष्कर्षों की खोज के लिए फोटोग्राफी, ड्रोन सर्वेक्षण, भूभौतिकीय सर्वेक्षण और लाइट डिटेक्शन तकनीक का इस्तेमाल किया था। लेकिन, यहां पर मंदिर मिलना सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात है। मंदिर के पास ही जांच के दौरान वेदी के अवशेष मिले हैं, जिसको लेकर पुरातत्वविदों का कहना है, कि ऐसा प्रतीत होता है, कि यहां पर रहने वाले लोग पूजा पाठ करने के अलावा धार्मिक अनुष्ठान भी किया करते थे और यहां जो मानव बस्ती मिला है, उनकी पूजा पाठ में काफी गहरी आस्था रही होगी। अरब न्यूज के मुताबिक, इस मंदिर का हालांकि ज्यादातर हिस्सा अब खत्म हो गया है, लेकिन मंदिर के पत्थरों के अवशेष अभी भी मौजूद हैं, वहीं, तुवाईक पहाड़ों के किनारे पर एक वेदी का हिस्सा पाया गया है। इस मंदिर का उपयोग अल-फ़ॉ शहर के निवासियों द्वारा पूजा स्थल के रूप में किया जाता था।

खोजे गए अवशेष नवपाषाण काल का

सऊदी अरब के नेतृत्व में कई देशों के पुरातत्वविदों की टीम ने साइट का व्यापक सर्वेक्षण किया। इसमें हाई क्वालिटी एरियल फोटोग्राफी, कंट्रोल पॉइंट के साथ ड्रोन फुटेज, रिमोट सेंसिंग, लेजर सेंसिंग और कई अन्य साधनों का इस्तेमाल किया गया। खोजे गए अवशेष नवपाषाण काल की मानव बस्तियों के बताए गए हैं। बस्तियों के अवशेषों की खोज व्यापक जमीनी सर्वेक्षण कार्य, पुरातात्विक जांच वितरण, लेजर स्कैनिंग और ग्राउंड-पेनेट्रेटिंग रडार के उपयोग से की गई थी। शहर में 2,807 मकबरे (कब्र) भी मिले हैं, जो अलग-अलग काल के हैं। इन्हें छह वर्गों में बांटा गया है। मैदान में मिले शिलालेखों में से एक में कहल नाम के देवता का उल्लेख है।

40 सालों से हॉट स्पॉट बना हुआ था यह स्थल

सऊदी अरब की पुरातत्वविदों की टीम ने नई तकनीक की मदद से धार्मिक केंद्र का पता लगाया है. साथ ही साथ अलफा साइट पर शोध के लिए कई और अवशेष मिले हैं. इन सभी साक्ष्यों को जमा कर रिसर्च के लिए भेज दिया गया है. ‘सऊदी गैजेट’ के मुताबिक अलफा का ये महत्वपूर्ण इलाका पुरातात्विक विभाग के लोगों के लिए बीते 40 सालों से हॉट स्पॉट बना हुआ है.

मंदिर के साथ सिंचाई की तकनीक भी मिली

इस मंदिर के मिलने से पता चलता है कि यहां के लोग पूजा-पाठ में विश्वास करते थे. इस मंदिर के अलावा पुरातत्व टीम को कई और महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं, जिससे पता चलता है कि उस समय के लोग सींचाई के लिए कैसे तकनीक का प्रयोग करते थे, रोजमर्रा की ज़िंदगी के लिए क्या कार्य करते थे. फिलहाल इन सभी मामलों की रिसर्च हो रही है. अब आने वाला समय बताया कि यहां की सच्चाई क्या है?

खुदाई स्थल पर मिले 2807 मकबरे

खुदाई के दौरान पुरातत्वविदों को इस साइट पर 2,807 बिखरे हुए मकबरे मिले हैं, जिन्हें छह समूहों में वर्गीकृत किया गया है, जो दफनाने की अलग-अलग समय अवधि को बताते हैं। वहीं, यहां पर एक धार्मिक शिलालेख भी मिला है, जिनमें से एक प्राचीन देवता को संबोधित किया गया है। इस देवता का नाम पत्थर पर ‘खल’ लिखा हुआ है। ये खोजें प्राचीन शहर अल-फ़ॉ की धार्मिक प्रथाओं को गहराई से देखने और समझने की सुविधा प्रदान करती हैं। इसके साथ ही, केंद्रित सर्वेक्षण कार्य और रिमोट सेंसिंग छवियों ने कई कृषि क्षेत्रों का भी खुलासा किया, जो पुरातत्वविदों का मानना ​​है कि, प्राचीन शहर के निवासियों के लिए फसलों और खाद्य सुरक्षा के विकास में योगदान दिया होगा।

भवन की नींव भी मिली

पुरातत्वविदों को यहां पर चार स्मारकीय भवनों की नींव भी मिली है। इन खोजों ने सिंचाई प्रणाली की पहचान की है। इंसानों की जो बस्ती मिली है, वहां पर सैकड़ों भूमिगत जलाशय मिले हैं, यानि वहां पर पानी को जमा करके रखा जाता था और दैनिक कार्य के अलावा खेती के कार्यों में भी उनका इस्तेमाल किया जाता था। तुवाईक पर्वत के किनारे पर जो चट्टानों पर कई तस्वीरें भी बनाई हुई मिली हैं, जो उस वक्त की स्थिति और लड़ाईयों के साथ साथ दैनिक गतिविधियों के बारे में जानकारी दे रहे हैं। वादी अल-दावासेर और नजरान शहरों को जोड़ने वाली आधुनिक सड़क पर वाडी अल-दावासर के दक्षिण में 100 किमी की दूरी पर ये खोज की गई है। अल-फ़ॉ साइट की खुदाई और फील्डवर्क सऊदी पुरातत्वविद् डॉ अब्दुलरहमान अल-अंसारी के नेतृत्व में किंग सऊद विश्वविद्यालय के प्रयासों से शुरू हुआ था, जो पिछले 40 वर्षों से जारी है।

आवासीय क्षेत्र और बाजार भी मिला

इस जगह पर खुदाई के दौरान आवासीय क्षेत्र, बाजार, मंदिर और मकबरे मिले हैं, जिन्हें प्रकाशित किए गए सात अलग अलग खंडों में बनाया गया था। आयोग सऊदी इतिहास को बढ़ावा देने और संरक्षित करने की उम्मीद में किंगडम में सांस्कृतिक विरासत स्थलों की खोज और सुरक्षा के अपने प्रयासों को जारी रख रहा है।

इस्लाम का उदय 5वीं 6ठी शताब्दी में

इस्लाम का उदय सातवीं सदी में अरब प्रायद्वीप में हुआ। इसके अन्तिम नबी हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का जन्म 570 ईस्वी में मक्का में हुआ था। लगभग 613 ईस्वी के आसपास हजरत मुहम्मद साहब ने लोगों को अपने ज्ञान का उपदेशा देना आरंभ किया था। इसी घटना को इस्लाम का आरंभ के रूप में जाना जाता है।

दुनिया भर में फैला था हिंदू धर्म

अमेरिका, रूस, ताजिकिस्तान, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज्बेकिस्तान, किर्गिस्तान, तुर्की, सीरिया, इराक, स्पेन, इंडोनेशिया, चीन आदि जगहों पर हिंदू धर्म के साक्ष्य मिले हैं। विद्वानों के अनुसार, अरब की यजीदी, सबाइन, सबा, कुरैश आदि कई जातियां प्राचीन समय में हिंदू धर्म को ही मानती थीं। मैक्सिको में एक खुदाई के दौरान गणेश और लक्ष्मी जी प्राचीन मूर्ति मिली थी। यहां तक कि मैक्सिको नाम भी संस्कृत के मक्षिका से बना है। इसी तरह स्पेन में हजारों वर्ष पुराना एक मंदिर है जिसमें विष्णु जी की प्रतिमा है। कुछ वर्ष पहले ही रूस के वोल्गा प्रांत के एक गांव में खुदाई में 7-10वीं शताब्दी की विष्णु की मूर्ति मिली थी।

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