प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार महिला और बाल कल्याण, महिला सशक्तीकरण और महिला सुरक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। और भारत में जब भी बेटियों के भविष्य की बात होती है, तो शिक्षा, सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता सबसे अहम मुद्दे बनकर सामने आते हैं। इन्हीं जरूरतों को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने एक ऐसी योजना शुरू की, जिसने करोड़ों परिवारों की सोच और तैयारी दोनों को बदल दिया। इस योजना का नाम है सुकन्या समृद्धि योजना। 22 जनवरी 2015 को ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान के तहत शुरू हुई यह योजना आज सिर्फ एक बचत स्कीम नहीं, बल्कि बेटियों के सशक्तिकरण का एक मजबूत आधार बन चुकी है। साल 2026 में इसके 11 साल पूरे होने जा रहे हैं और यह सफर अपने आप में एक बड़ी कहानी कहता है।
सुकन्या समृद्धि योजना को खास तौर पर बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के मकसद से डिजाइन किया गया था। सरकार चाहती थी कि माता-पिता जन्म के साथ ही अपनी बेटी की पढ़ाई और आगे की जरूरतों के लिए आर्थिक तैयारी शुरू कर दें। इसी सोच ने इस योजना को जमीन से जोड़ दिया। आज हालत यह है कि दिसंबर 2025 तक देशभर में 4.53 करोड़ से ज्यादा सुकन्या खाते खोले जा चुके हैं। इन खातों में कुल जमा राशि 3.33 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक हो चुकी है। यह आंकड़े बताते हैं कि लोगों ने इस योजना पर भरोसा किया है।
11 years of Sukanya Samriddhi Yojana — With 3.76 Cr+ live accounts, securing a brighter future for daughters across India.
Watch how India Post’s vast and trusted network is taking this scheme to every corner of the country.#IndiaPost #11YearsofSSY #SukanyaSamriddhiYojana… pic.twitter.com/8GPkaEJ6J2— India Post (@IndiaPostOffice) January 22, 2026
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत इसकी सुरक्षा और भरोसेमंद रिटर्न है। यह भारत सरकार द्वारा अधिसूचित एक लघु बचत योजना है, जिसमें जमा राशि पर सरकार तय ब्याज दर देती है। फिलहाल सुकन्या समृद्धि योजना में 8.2 प्रतिशथ सालाना ब्याज मिल रहा है, जो बेटियों के लिए बनी बचत योजनाओं में सबसे ज्यादा माना जाता है। कम जोखिम और गारंटीशुदा रिटर्न की वजह से यह योजना मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों के लिए खास तौर पर फायदेमंद साबित हो रही है। माता-पिता निश्चिंत रहते हैं कि उनकी जमा पूंजी सुरक्षित है और समय के साथ बढ़ भी रही है।
सुकन्या समृद्धि योजना के पीछे की सोच सिर्फ पैसे जमा करने तक सीमित नहीं है। इसका मकसद बेटियों की शिक्षा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक बराबरी को बढ़ावा देना है। जब परिवार बेटी के नाम पर बचत करता है, तो उसका महत्व अपने आप बढ़ जाता है। इस योजना ने समाज में एक सकारात्मक संदेश भी दिया है कि बेटी बोझ नहीं, बल्कि भविष्य की ताकत है। यही वजह है कि इसे वित्तीय सुरक्षा और सामाजिक बदलाव के बीच एक सेतु माना जाता है।
Sukanya Samriddhi Yojana (SSY)
➡️ SSY shines as a powerful symbol of hope and empowerment for millions of young girls across India
➡️ Launched on 22 January 2015 under the #BetiBachaoBetiPadhao campaign, the scheme was envisioned as more than just a savings initiative
➡️ The… pic.twitter.com/Xw20IgzUeI
— PIB India (@PIB_India) January 21, 2026
सुकन्या समृद्धि खाता माता-पिता या कानूनी अभिभावक अपनी भारतीय बालिका के लिए खोल सकते हैं। यह खाता किसी भी डाकघर या सरकारी बैंक के अलावा कुछ चुनिंदा निजी बैंकों में भी खोला जा सकता है, जिनमें एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और आईडीबीआई बैंक शामिल हैं। खाता बालिका के जन्म से लेकर 10 साल की उम्र तक कभी भी खोला जा सकता है। एक बालिका के नाम पर सिर्फ एक ही सुकन्या खाता खोला जा सकता है। आम तौर पर एक परिवार अधिकतम दो बेटियों के लिए खाते खोल सकता है। हालांकि, जुड़वां या तीन जुड़वां बेटियों के मामले में नियम थोड़े लचीले हैं। ऐसे मामलों में जन्म प्रमाण पत्र और शपथ पत्र जमा करने पर दो से ज्यादा खाते खोलने की अनुमति दी जाती है।
यह खाता पूरी तरह ट्रांसफरेबल है। यानी अगर परिवार किसी और शहर या राज्य में शिफ्ट होता है, तो खाता भी आसानी से वहां ट्रांसफर कराया जा सकता है। इससे लंबी अवधि की बचत में कोई रुकावट नहीं आती। जब तक बालिका 18 साल की नहीं हो जाती, तब तक इस खाते को माता-पिता या अभिभावक ही संचालित करते हैं। इससे वे नियमित जमा और योजना की निगरानी कर पाते हैं। 18 साल की उम्र पूरी होने के बाद बेटी खुद जरूरी दस्तावेज देकर खाते का नियंत्रण संभाल सकती है।

खाता खोलने की प्रक्रिया भी काफी आसान रखी गई है। इसके लिए सुकन्या समृद्धि खाता खोलने का फॉर्म, बालिका का जन्म प्रमाण पत्र, आधार नंबर और पैन या फॉर्म 60 की जरूरत होती है। जहां तक जमा राशि की बात है, तो इस योजना में न्यूनतम 250 रुपये से शुरुआत की जा सकती है। बाद में 50 रुपये के गुणकों में कभी भी पैसा जमा किया जा सकता है। एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 250 रुपये जमा करना जरूरी है। इस खाते में एक साल में अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक ही जमा किए जा सकते हैं। इससे ज्यादा राशि पर ब्याज नहीं मिलेगा और अतिरिक्त रकम वापस कर दी जाती है। खाता खुलने की तारीख से 15 साल तक पैसा जमा किया जा सकता है। ब्याज की गणना हर महीने होती है और वित्तीय वर्ष के अंत में इसे खाते में जोड़ दिया जाता है। अगर खाता बीच में किसी दूसरे बैंक या डाकघर में ट्रांसफर भी हो जाए, तब भी ब्याज में कोई नुकसान नहीं होता।
सुकन्या समृद्धि योजना में आंशिक निकासी की सुविधा भी दी गई है। खाताधारक 18 साल की उम्र पूरी होने पर या 10वीं कक्षा पास करने के बाद शिक्षा के लिए खाते से पैसा निकाल सकती है। पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में उपलब्ध बैलेंस का 50 फीसदी तक निकालने की अनुमति होती है। इसके लिए शैक्षणिक संस्थान का एडमिशन लेटर या फीस स्लिप जैसे दस्तावेज जमा करने होते हैं। यह निकासी एकमुश्त या किश्तों में की जा सकती है, लेकिन साल में सिर्फ एक बार और अधिकतम पांच साल तक ही। निकाली गई राशि वास्तविक शैक्षणिक खर्च से ज्यादा नहीं हो सकती।

सुकन्या समृद्धि खाता 21 साल पूरे होने पर परिपक्व होता है। यानी यह योजना बेटी के साथ-साथ बढ़ती है और उसके बड़े सपनों को पूरा करने में मदद करती है। कुछ खास परिस्थितियों में खाता समय से पहले बंद करने की अनुमति भी दी जाती है। अगर खाताधारक का विवाह परिपक्वता से पहले हो रहा हो, तो खाता विवाह से एक माह पहले या तीन माह बाद तक बंद कराया जा सकता है। इसके लिए गैर-न्यायिक स्टांप पेपर पर घोषणा पत्र, उम्र का प्रमाण और अन्य जरूरी दस्तावेज जमा करने होते हैं। मंजूरी मिलने पर पूरी राशि ब्याज सहित निकाली जा सकती है।
खाताधारक की मृत्यु की स्थिति में भी खाता तुरंत बंद किया जा सकता है। मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करने पर शेष राशि ब्याज सहित अभिभावक को दे दी जाती है। हालांकि, खाता खोलने के पहले पांच सालों के भीतर सामान्य परिस्थितियों में इसे बंद करने की अनुमति नहीं होती। यह नियम लंबी अवधि की बचत को प्रोत्साहित करने के लिए रखा गया है।

सुकन्या समृद्धि योजना को स्मार्ट विकल्प इसलिए माना जाता है क्योंकि इसमें उच्च ब्याज दर, सरकारी गारंटी और कर लाभ तीनों मिलते हैं। आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत इसमें किए गए निवेश पर टैक्स छूट भी मिलती है। इसके अलावा, अगर खाता परिपक्वता के बाद भी बंद नहीं किया जाता, तो जमा राशि पर डाकघर बचत खाते की दर से ब्याज मिलता रहता है। यानी पैसा बेकार नहीं जाता। कुल मिलाकर, सुकन्या समृद्धि योजना ने बेटियों के भविष्य को लेकर सोच बदलने का काम किया है। यह योजना सिर्फ पैसे जोड़ने का जरिया नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और समान अवसर देने की पहल है।
जैसे-जैसे खातों की संख्या और जमा राशि बढ़ रही है, वैसे-वैसे यह साफ होता जा रहा है कि लोग इस योजना को अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य से जोड़कर देख रहे हैं। लैंगिक समानता और समावेश की दिशा में बढ़ते भारत में सुकन्या समृद्धि योजना एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरी है। यह सुनिश्चित कर रही है कि हर बेटी को आगे बढ़ने, पढ़ने और अपने सपनों को पूरा करने का पूरा हक और संसाधन मिल सके।










