प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का विजन-2047 केवल बढ़ती इकोनॉमी और डेवलपमेंट का रोडमैप नहीं, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता का घोषणापत्र भी है। उनका स्पष्ट संदेश है कि भारत तकनीक का उपभोक्ता भर नहीं रहेगा, बल्कि निर्माता और मानक तय करने वाला देश बनेगा। इसी विजन के साथ दुनिया का सबसे बड़ा एआई समिट भारत की धरती पर हो रहा है। कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष, नीति-निर्माता और टेक दिग्गज एक मंच पर जुटे हैं। यह सिर्फ एक सम्मेलन नहीं, बल्कि उस बदलते वैश्विक संतुलन का संकेत है जिसमें भारत अब दर्शक नहीं, निर्णायक भूमिका में है। नई दिल्ली में हो रहे सत्र स्पष्ट कर रहे हैं कि 21वीं सदी की डिजिटल दिशा अब भारत से तय होने जा रही है। पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने तकनीक को “इलीट क्लब” से निकालकर आम नागरिक के हाथ में दिया है। यही सोच एआई के लोकतंत्रीकरण की नींव है।
एआई का यूपीआई मॉडल: तकनीक का क्रांतिकारी प्रयोग
जिस तरह डिजिटल इंडिया, आधार और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर ने शासन को पारदर्शी और प्रभावी बनाया, उसी तरह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को जन-जन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। यूपीआई ने दुनिया को चौंका दिया था। जिस देश में नकदी का बोलबाला था, वहां डिजिटल भुगतान ने नया इतिहास रचा। आज कई विकसित देश भारत के यूपीआई मॉडल को अपनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। अब सरकार एआई का “यूपीआई जैसा वर्जन” लाने की दिशा में बढ़ रही है। एक ऐसा ओपन, स्केलेबल और सुरक्षित प्लेटफॉर्म जो स्टार्टअप्स, डेवलपर्स, किसानों, छात्रों और उद्योगों को समान अवसर दे। इसका अर्थ है कि एआई केवल बड़ी कंपनियों की संपत्ति न रहे, बल्कि गांव के किसान से लेकर छोटे व्यापारी तक इसका लाभ उठा सकें। कल्पना कीजिए कि कोई किसान अपनी फसल का रीयल-टाइम विश्लेषण करा सके। छात्र अपनी भाषा में एआई ट्यूटर से पढ़ सके। डॉक्टर दूरदराज के मरीजों का सटीक निदान कर सके। और यह सब एक भारतीय डिजिटल ढांचे पर आधारित हो। यही एआई का यूपीआई मॉडल है, जो तकनीक को समावेशी बनाएगा।
मानव-केंद्रित एआई से वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ता भारत
एआई समिट में 100 से अधिक सत्र, सैकड़ों स्टॉल और हजारों प्रतिभागियों की मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि भारत वैश्विक तकनीकी विमर्श का केंद्र बन चुका है। गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, ओपनएआई जैसे वैश्विक दिग्गजों के साथ भारतीय स्टार्टअप्स की भागीदारी दिखाती है कि यह साझेदारी का नया युग है। भारत के पास विशाल डेटा, युवा प्रतिभा और तेजी से बढ़ता डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर है। 5जी नेटवर्क, सेमीकंडक्टर मिशन और राष्ट्रीय एआई मिशन जैसे कदम देश को तकनीकी महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं। भारत का दृष्टिकोण केवल तकनीकी श्रेष्ठता तक सीमित नहीं है। यहां “मानव-केंद्रित एआई” पर जोर है। डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और नैतिक उपयोग को प्राथमिकता दी जा रही है। भारत यह संदेश दे रहा है कि एआई का विकास मानवता के हित में होना चाहिए, न कि केवल मुनाफे के लिए। यह संतुलित दृष्टिकोण भारत को पश्चिम और पूर्व के बीच एक सेतु की भूमिका में स्थापित कर सकता है।
एआई सेक्टर में महाशक्ति बनने की ओर निर्णायक कदम
दुनिया का सबसे बड़ा एआई समिट भारत में होना महज संयोग नहीं, बल्कि एक संकेत है। यह संकेत है उस आत्मविश्वास का, जो आज भारत की नीतियों और नेतृत्व में दिखता है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में न केवल भागीदारी कर रहा है, बल्कि दिशा भी तय कर रहा है। यदि एआई का भारतीय मॉडल सफल होता है, तो यह दुनिया की सोच बदल देगा। जैसे यूपीआई ने डिजिटल भुगतान के नियम बदले, वैसे ही एआई का ओपन और लोकतांत्रिक ढांचा वैश्विक मानक बन सकता है। विकासशील देशों के लिए यह आशा की किरण होगा कि तकनीकी क्रांति केवल अमीर देशों का विशेषाधिकार नहीं। एआई का “यूपीआई वर्जन” यदि साकार होता है, तो यह 21वीं सदी का सबसे बड़ा भारतीय नवाचार हो सकता है। एक ऐसा नवाचार जो तकनीक को लोकतांत्रिक बनाएगा और भारत को वैश्विक महाशक्ति बनने की राह पर और तेजी से आगे बढ़ाएगा।

वैसे तो एआई इंडिया इंपैक्ट समिट में कई वैश्विक दिग्गजों ने भारत को लेकर सकारात्मक टिप्पणियां की हैं। यहां कुछ दिग्गजों की राय पर एक नजर डालते हैं…
पीएम मोदी का दृष्टिकोण: मानवता के हित में है AI
Narendra Modi ने समिट में कहा कि एआई का उद्देश्य मानव क्षमताओं को प्रतिस्थापित करना नहीं, बल्कि उन्हें सशक्त बनाना होना चाहिए। उन्होंने “AI for All” और “AI for Good” की अवधारणा को दोहराते हुए स्पष्ट किया कि भारत तकनीक को समावेशी विकास, कृषि सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा में परिवर्तन के साधन के रूप में देखता है। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ एआई का संतुलन ही भविष्य की कुंजी है।
सुंदर पिचाई : जिम्मेदार एआई की दिशा में भारत की पहल
Sundar Pichai ने भारत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि एआई का विकास तभी सार्थक है जब वह सुरक्षित और जिम्मेदार हो। भारतीय मूल के सुंदर पिचाई ने उल्लेख किया कि भारत जैसे लोकतंत्र में एआई गवर्नेंस के लिए जो नीतिगत प्रयास हो रहे हैं, वे वैश्विक मानक तय कर सकते हैं। पिचाई ने भारत की युवा प्रतिभा और स्टार्टअप संस्कृति को एआई क्रांति का इंजन बताया।
एलन मस्क का संकेत: भारत में एआई संभावनाएं असीमित
Elon Musk ने भारत की जनसंख्या-आधारित डेटा क्षमता और तकनीकी कौशल को एआई विकास के लिए उपजाऊ भूमि बताया। उनके अनुसार, यदि नीति और नवाचार का संतुलन बना रहा, तो भारत आने वाले दशक में एआई महाशक्ति के रूप में उभर सकता है।
सत्य नडेला का संदेश: भारत एआई नवाचार का अग्रदूत
Satya Nadella ने समिट के संदर्भ में कहा कि भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सफलता यह दिखाती है कि तकनीक को व्यापक सामाजिक हित में कैसे उपयोग किया जा सकता है। नडेला के अनुसार भारत का एआई मॉडल नवाचार और समावेशन के संतुलन का उदाहरण है, और आने वाले वर्षों में वैश्विक एआई समाधान भारत से प्रेरणा लेंगे। उन्होंने भारतीय डेवलपर्स और स्टार्टअप्स की प्रतिभा को “विश्व स्तरीय और परिवर्तनकारी” बताया।
सम ऑल्टमैन बोले: भारत एआई अपनाने में सबसे आगे
Sam Altman ने कहा कि भारत एआई तकनीक को बड़े पैमाने पर अपनाने और उसे आम लोगों तक पहुंचाने में अग्रणी भूमिका निभा सकता है। उनके अनुसार, भारत की विशाल डेवलपर कम्युनिटी और स्टार्टअप इकोसिस्टम एआई को लोकतांत्रिक बनाने की क्षमता रखते हैं। ऑल्टमैन ने यह भी रेखांकित किया कि भारत में एआई के उपयोग के जो व्यावहारिक मॉडल विकसित हो रहे हैं, वे दुनिया के अन्य देशों के लिए प्रेरणा बन सकते हैं।
उर्सुला वॉन लेयेन: विश्वसनीय AI में भारत की भूमिका अहम
Ursula von der Leyen ने भारत की पहल की सराहना करते हुए कहा कि विश्वसनीय और पारदर्शी एआई के निर्माण में भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार बन सकता है। उन्होंने जोर दिया कि वैश्विक सहयोग और साझा मानकों के बिना एआई का सुरक्षित विकास संभव नहीं है, और भारत इस दिशा में सेतु का कार्य कर रहा है।
जेन्सेन हुआंग: भारत वैश्विक एआई इकोसिस्टम का स्तंभ
Jensen Huang ने भारत की तकनीकी क्षमता और डेटा विविधता की सराहना करते हुए कहा कि एआई अनुसंधान और हार्डवेयर नवाचार में भारत की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत में एआई आधारित समाधान न केवल स्थानीय बाजार, बल्कि वैश्विक उद्योगों को भी दिशा देंगे।
अजय बंगा ने कहा: एआई से विकासशील देशों को नई शक्ति
Ajay Banga ने कहा कि एआई विकासशील देशों के लिए आर्थिक प्रगति का नया इंजन बन सकता है। उनके अनुसार, भारत का डिजिटल समावेशन मॉडल यह दर्शाता है कि तकनीक को सही नीतियों के साथ जोड़ा जाए तो वह गरीबी उन्मूलन और वित्तीय समावेशन में निर्णायक भूमिका निभा सकती है।
अरविंद कृष्णा: एंटरप्राइज एआई में भारत की बढ़ती भूमिका
Arvind Krishna ने कहा कि भारत एंटरप्राइज एआई समाधानों का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि भारतीय कंपनियां और इंजीनियर जटिल समस्याओं के समाधान के लिए एआई का अभिनव उपयोग कर रहे हैं, जिससे वैश्विक उद्योगों को नई दिशा मिल रही है।
रघुराम राजन का विश्लेषण: एआई में अवसर और संतुलन
Raghuram Rajan ने एआई को आर्थिक परिवर्तन का शानदार अवसर बताया। रघुराम राजन के अनुसार भारत कौशल विकास और शिक्षा में निवेश बढ़ाएगा, तब एआई रोजगार सृजन और उत्पादकता वृद्धि का बड़ा माध्यम बन सकता है। उन्होंने इसे संतुलित नीति और सामाजिक सुरक्षा के साथ आगे बढ़ाने पर बल दिया।
एआई फॉर ऑल के पीएम मोदी के विजन से धुरी बना भारत
एआई इंडिया समिट ने यह स्थापित कर दिया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल तकनीकी क्रांति नहीं, बल्कि नैतिक और नीतिगत परिवर्तन का भी दौर है। ऐसे समय में जब दुनिया डेटा-औपनिवेशिकता, एल्गोरिदमिक पक्षपात और गोपनीयता संकट जैसे सवालों से जूझ रही है। पीएम मोदी के विजन पर चलते हुए भारत ने “लोकतांत्रिक एआई” की अवधारणा को वैश्विक विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया है। भारत ने अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर—आधार, यूपीआई और ओपन नेटवर्क के अनुभव को आधार बनाते हुए स्पष्ट किया कि अंत्योदय की नीति पर चलते हुए एआई का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। समिट में नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत ने इस बात पर सहमति जताई कि एआई को कुछ कॉरपोरेट हाथों में सीमित रखना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ होगा। भारत ने समावेशी, सुलभ और जिम्मेदार एआई के मॉडल को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया।

आइए, अब अब देखते हैं कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने विज्ञान, टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजैंसी के सेक्टर में बड़े अहम कदम उठाए हैं…
1.राष्ट्रीय एआई मिशन और “रिस्पॉन्सिबल एआई” पर जोर
मोदी सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को केवल एक फैशनेबल शब्द नहीं माना, बल्कि इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित किया। राष्ट्रीय एआई मिशन और नीति ढांचे के माध्यम से शोध, स्टार्टअप, उद्योग और अकादमिक जगत को एक साझा मंच प्रदान किया गया। जब लीडर का विजन स्पष्ट होता है तो स्पष्ट मार्गदर्शन मिलता है। इन्हीं दिशानिर्देशों ने यह सुनिश्चित किया कि नवाचार हो, परंतु जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ। “रिस्पॉन्सिबल एआई” पर जोर देकर भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया कि तकनीकी प्रगति मानव मूल्यों से समझौता किए बिना भी संभव है।
2. सेमीकंडक्टर और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश
एआई केवल सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि शक्तिशाली हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर क्षमता पर भी निर्भर करता है। मोदी सरकार ने सेमीकंडक्टर निर्माण, डेटा सेंटर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग में बड़े निवेश को प्रोत्साहित किया। आज से दस साल पहले भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण की सोच ही बहुत सीमित थी। लेकिन मोदी सरकार के आने के बाद उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं ने वैश्विक कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित किया। इससे भारत केवल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि तकनीकी उत्पादन का केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ा है। एआई के लिए आवश्यक कंप्यूटेशनल शक्ति का स्वदेशी निर्माण भारत की रणनीतिक मजबूती को और सुदृढ़ बना रहा है।![]()
3. स्किल इंडिया और एआई टैलेंट पूल का विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी का असली ग्रोथ इंजन है कुशल मानव संसाधन। मोदी सरकार ने स्किल इंडिया, डिजिटल स्किलिंग और उच्च शिक्षा संस्थानों में उन्नत पाठ्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार करने पर जोर दिया। मोदी सरकार के एक दशक के कार्यकाल में जितने आईआईटी, आईआईएम और अन्य प्रमुख संस्थान बने हैं, उतने उच्च शिक्षण संस्थान इतने कम समय में कभी नहीं बने। इन्हीं आईआईटी, आईआईएम और अन्य प्रमुख संस्थानों में एआई और डेटा साइंस के विशेष कार्यक्रम शुरू हुए। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और सरकारी साझेदारियों के माध्यम से लाखों युवाओं को कोडिंग, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स की ट्रेनिंग दी जा रही है। इससे भारत विश्व का सबसे बड़ा एआई टैलेंट पूल बनने की ओर अग्रसर है।
4. स्टार्टअप इकोसिस्टम: दो लाख स्टार्ट और 118 यूनिकॉर्न
भारत आज दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक है। 2014 से पहले भारत में स्टार्टअप संस्कृति बेहद सीमित थी और यूनिकॉर्न सिर्फ 4 थे, जबकि आज DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2 लाख से ज्यादा और यूनिकॉर्न करीब 118 हो चुके हैं। यह बदलाव दिखाता है कि बीते एक दशक में भारत ने उद्यमिता को बड़े शहरों से निकालकर गांव-कस्बों तक पहुंचाया है और देश को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनाने की दिशा में निर्णायक छलांग लगाई है। मोदी सरकार की नीतियों स्टार्टअप इंडिया, आसान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, कर प्रोत्साहन और फंडिंग सपोर्ट ने एआई आधारित स्टार्टअप्स को पंख दिए हैं। हेल्थटेक, एग्रीटेक, फिनटेक और एडटेक क्षेत्रों में भारतीय स्टार्टअप्स एआई के माध्यम से वैश्विक समाधान विकसित कर रहे हैं। यह केवल रोजगार सृजन नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की भागीदारी को मजबूत करने वाला कदम है।
5. मोदी सरकार में जनसेवा के लिए एआई का उपयोग
मोदी सरकार की खासियत यह रही है कि उसने एआई को केवल उद्योग तक सीमित नहीं रखा, बल्कि शासन और जनसेवा में भी इसका उपयोग बढ़ाया है। आर्टिफिशियल इंटैलीजेंस के ऐसे कितने ही नवाचार हैं, जो मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान तेजी से बढ़े हैं। कृषि पूर्वानुमान, मौसम विश्लेषण, स्वास्थ्य जांच, कर प्रशासन और सुरक्षा निगरानी में एआई आधारित समाधान अपनाए जा रहे हैं। इससे नीतियों की सटीकता, पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है। आम नागरिक को तेज, सस्ती और प्रभावी सेवाएं मिल रही हैं। यह “टेक्नोलॉजी फॉर ऑल” के सिद्धांत का जीवंत उदाहरण है।

6. एआई को भारतीय भाषाओं में विकसित करने पर विशेष जोर
विविधता में एकता वाले भारत में भाषाई विविधता एक बड़ी चुनौती रही है। भारत की इसी भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने एआई को भारतीय भाषाओं में विकसित करने पर विशेष जोर दिया है। वॉइस असिस्टेंट, ट्रांसलेशन टूल्स और लोकल लैंग्वेज मॉडल्स के माध्यम से तकनीक को गांव-गांव तक पहुंचाने की पहल हुई है। इससे डिजिटल विभाजन कम हुआ और ग्रामीण भारत भी एआई क्रांति का हिस्सा बनने लगा है। भारतीय भाषाओं में एआई का विकास न केवल समावेशिता सुनिश्चित की है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की विशिष्ट पहचान भी स्थापित की है।
7. वैश्विक साझेदारी और भारत की रणनीतिक कूटनीति
सभी जानते हैं कि आर्टिफिशियल इंटैलीजेंसी एक वैश्विक विषय है और मोदी सरकार ने इसे कूटनीतिक प्राथमिकता दी है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने एआई के नैतिक उपयोग, डेटा सुरक्षा और वैश्विक सहयोग की वकालत की है। प्रमुख तकनीकी देशों के साथ साझेदारी, संयुक्त अनुसंधान और निवेश समझौते भारत को एआई की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थान दिला रहे हैं। यह रणनीति भारत को केवल सहभागी नहीं, बल्कि नीति-निर्माता राष्ट्र के रूप में स्थापित कर रही है।
8. इकोनॉमिक पावर बनने से रोजगार सृजन की नई संभावनाएं
एआई के क्षेत्र में निर्णायक कदमों का सीधा और सकारात्मक प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उत्पादकता में वृद्धि, नए उद्योगों का उदय और उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर देश को 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर अग्रसर कर रहे हैं। पीएम मोदी की पहली सरकार बनने से पहले भारत वैश्विक इकोनॉमी के मामले में 11 नंबर पर था। अब हम दुनिया की चौथे नंबर की इकोनॉमी बन चुके हैं और पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल में ही भारत विश्व की सबसे बड़ी तीसरी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। एआई आधारित ऑटोमेशन जहां पारंपरिक कार्यप्रणालियों को बदल रहा है, वहीं नए प्रकार के रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी पैदा कर रहा है। मोदी सरकार की नीति इस परिवर्तन को अवसर में बदलने पर केंद्रित है।
9. एआई आधारित समाधान राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती
एआई में आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता भी है। रक्षा, साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण अवसंरचना में एआई आधारित समाधान राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती देते हैं। स्वदेशी तकनीकी क्षमता भारत को बाहरी निर्भरता से मुक्त कर आत्मविश्वास से भरती है। “आत्मनिर्भर भारत” का विचार एआई के क्षेत्र में ठोस आकार लेता दिखाई दे रहा है। तकनीकी प्रगति के साथ नैतिक चुनौतियां भी आती हैं—डेटा गोपनीयता, एल्गोरिदमिक पक्षपात और रोजगार पर प्रभाव जैसे प्रश्न महत्वपूर्ण हैं। मोदी सरकार ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए नवाचार और नियमन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। डेटा सुरक्षा कानून और जिम्मेदार एआई के सिद्धांत इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे नागरिकों का विश्वास बना रहता है और तकनीकी विकास सतत रूप से आगे बढ़ता है।
10. आत्मनिर्भर राष्ट्र से अब एआई महाशक्ति बनने की ओर भारत
पीएम मोदी ने 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य रखा है। इस संकल्प की सिद्धि के लिए वे हर सेक्टर में आत्मनिर्भर भारत बना रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटैलीजेंसी के क्षेत्र में भी हाल ही में हुए पांच नए इनोवेशन ने भारत की पहचान दुनियाभर में कायम की है। एआई में हमारे 5 बड़े निर्णायक कदम ये हैं…
A. सर्वम एआई: यह सीधे भारतीय संदर्भ में सोचने और जवाब देने की क्षमता है। सर्वम ने बुलबुल नामक ऑडियो वर्जन पेश किया। इसे हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं, स्थानीय उच्चारण के अनुरूप ट्रेनिंग दी गई।
B. परम-2: यह सुपरकंप्यूटर है। सरकार, नीति-निर्माण और संवेदनशील डेटा उपयोग को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
C. ज्ञानी: यह बड़े पैमाने पर स्थानीय कंटेंट और भारतीय ज्ञान परंपरा को डिजिटल रूप में सुलभ बनाता है। यह एआई को नीति, शिक्षा, जनसेवा का औजार बन रहा है।
D. सॉकेट: यह एआई कोडिंग और लॉजिक आधारित कार्यों को भारतीय भाषाओं और स्थानीय जरूरतों से जोड़ने का काम करेगा।
E. गान: यह भारतीय भाषाओं, लहजों और आवाजों में सटीक स्पीच और ऑडियो आउटपुट देने में सक्षम है। यानी भारतीय एआई केवल टेक्स्ट तक सीमित नहीं है।









