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सोमनाथ में गूंजेगा ओंकार: आक्रमण के 1000 साल और जीर्णोद्धार के 75 वर्ष, स्वाभिमान पर्व में शामिल होंगे पीएम मोदी

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आस्था और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक भगवान सोमनाथ का मंदिर एक बार फिर इतिहास रचने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 10 और 11 जनवरी 2026 को गुजरात के सोमनाथ की दो दिवसीय यात्रा पर रहेंगे। वे यहां आयोजित हो रहे ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ में शामिल होंगे। यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि भारत की अजेय चेतना का प्रतीक है। ठीक 1000 साल पहले, यानी 1026 ईस्वी में विदेशी आक्रांता महमूद गजनी ने सोमनाथ मंदिर पर हमला कर उसे तहस-नहस किया था।

आज 1000 साल बाद, यह पर्व उन अनगिनत योद्धाओं को समर्पित है जिन्होंने मंदिर की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। यह महोत्सव हमें याद दिलाता है कि सोमनाथ को कितनी ही बार तोड़ा गया, लेकिन हर बार भारत का संकल्प उसे पहले से भव्य रूप में खड़ा करने में सफल रहा।

प्रधानमंत्री मोदी 10 जनवरी की रात लगभग 8 बजे सोमनाथ पहुंचेंगे। यहां वे ‘ओंकार मंत्र’ का जाप कर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देंगे। इस दौरान मंदिर परिसर में 72 घंटे का अखंड ‘ओम’ जाप किया जाएगा। इसमें देश भर से आए सैकड़ों संत और साधु-महात्मा शामिल होंगे। इसके बाद, प्रधानमंत्री मंदिर परिसर में होने वाले एक भव्य ड्रोन शो को देखेंगे, जो मंदिर के गौरवशाली इतिहास और उसके पुनरुद्धार की गाथा को आधुनिक तकनीक के जरिए पेश करेगा।

11 जनवरी की सुबह सोमनाथ की सड़कों पर शौर्य की झलक दिखाई देगी। सुबह 9:45 बजे पीएम मोदी ‘शौर्य यात्रा’ में हिस्सा लेंगे। यह उन गुमनाम नायकों को श्रद्धांजलि है जिन्होंने मंदिर के सम्मान के लिए युद्ध लड़े। इस औपचारिक शोभा यात्रा की खासियत इसमें शामिल होने वाले 108 घोड़े होंगे, जो वीरता और बलिदान का प्रतीक हैं। यह यात्रा उस जज्बे को सलाम करेगी जिसने सोमनाथ के प्राचीन वैभव को कभी मिटने नहीं दिया।

स्वतंत्रता के बाद लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयासों से सोमनाथ का पुनरुद्धार हुआ था। साल 1951 में देश के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की मौजूदगी में इस भव्य मंदिर को जनता के लिए खोला गया था। साल 2026 इस ऐतिहासिक पुनरुद्धार की 75वीं वर्षगांठ है। इसी दोहरे संयोग आक्रमण के 1000 साल और जीर्णोद्धार के 75 साल ने ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के महत्व को कई गुना बढ़ा दिया है।

11 जनवरी को सुबह 10:15 बजे प्रधानमंत्री मंदिर के गर्भगृह में विशेष पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद सुबह 11 बजे वे एक विशाल जनसभा को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि पीएम मोदी यहां से भारत की सांस्कृतिक विरासत को संजोने और भविष्य के विकसित भारत के लिए ‘विरासत भी, विकास भी’ का मंत्र दोहराएंगे। प्रधानमंत्री की इस यात्रा से न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक चेतना को एक नई ऊर्जा मिलेगी।

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