इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में दुनिया जिस तकनीकी क्रांति के मुहाने पर खड़ी है, उसका नाम है- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। यह केवल एक तकनीक नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, रक्षा और शासन व्यवस्था को पुनर्परिभाषित करने वाली शक्ति है। ऐसे निर्णायक समय में भारत ने यदि आत्मविश्वास के साथ वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, तो उसके पीछे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का दूरदर्शी विजन स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। प्रधानमंत्री मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में ऐसे कई अहम और निर्णायक कदम उठाए हैं, जो देश को तकनीकी महाशक्ति बनाने की दिशा में अग्रसर कर रहे हैं। मजबूत डिजिटल आधार, नीति स्पष्टता, स्किल डेवलपमेंट, स्टार्टअप समर्थन और अब वैश्विक साझेदारी भी, ये सभी मिलकर भारत की एआई की दुनिया में बुलंद पहचान बना रहे हैं। यह पीएम मोदी का विजन ही है कि भारत आज दुनिया के सबसे बड़े एआई एक्सपो का आयोजन कर रहा है। यह विजन केवल तकनीक आयात-निर्यात करने का नहीं, बल्कि भारत को एआई का निर्माता, नवोन्मेषक और निर्यातक बनाने का है। भारत के सर्वम एआई ने चैटजीपीटी और जैमिनी एआई को पछाड़कर हाल ही में अपनी श्रेष्ठता साबित की है।
डिजिटल इंडिया से एआई तक की भारत की मजबूत नींव
किसी भी तकनीकी क्रांति की सफलता मजबूत आधारभूत संरचना पर निर्भर है। मोदी सरकार ने 2014 के बाद “डिजिटल इंडिया” के माध्यम से जो डिजिटल इकोसिस्टम तैयार किया, उसी को चरितार्थ होता आज हम देख रहे हैं। जनधन, आधार, मोबाइल (JAM ट्रिनिटी), यूपीआई, भारतनेट, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे इनोवेशन ही आज एआई क्रांति की रीढ़ बन रहे हैं। करोड़ों लोगों का डिजिटलीकरण, डिजिटल भुगतान की व्यापकता और सरकारी सेवाओं का ऑनलाइन विस्तार ने डेटा और तकनीकी प्रयोगों के लिए अभूतपूर्व मंच तैयार किया। एआई को गति देने के लिए यह डिजिटल आधारशिला निर्णायक सिद्ध हो रही है। इसी मजबूत आधार के बलबूते भारत दुनिया का सबसे बड़ा चार दिवसीय एआई एक्सपो आयोजित कर रहा है। जिसमें दुनियाभर से एआई एक्सपर्ट, स्टार्टअप्स और रिसर्चर भाग ले रहे हैं।
पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने विज्ञान, टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजैंसी के सेक्टर में बड़े अहम कदम उठाए हैं। आइए, इन पर एक नजर डालते हैं…
1.राष्ट्रीय एआई मिशन और “रिस्पॉन्सिबल एआई” पर जोर
मोदी सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को केवल एक फैशनेबल शब्द नहीं माना, बल्कि इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित किया। राष्ट्रीय एआई मिशन और नीति ढांचे के माध्यम से शोध, स्टार्टअप, उद्योग और अकादमिक जगत को एक साझा मंच प्रदान किया गया। जब लीडर का विजन स्पष्ट होता है तो स्पष्ट मार्गदर्शन मिलता है। इन्हीं दिशानिर्देशों ने यह सुनिश्चित किया कि नवाचार हो, परंतु जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ। “रिस्पॉन्सिबल एआई” पर जोर देकर भारत ने दुनिया को यह संदेश दिया कि तकनीकी प्रगति मानव मूल्यों से समझौता किए बिना भी संभव है।
2. सेमीकंडक्टर और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश
एआई केवल सॉफ्टवेयर नहीं, बल्कि शक्तिशाली हार्डवेयर और सेमीकंडक्टर क्षमता पर भी निर्भर करता है। मोदी सरकार ने सेमीकंडक्टर निर्माण, डेटा सेंटर और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग में बड़े निवेश को प्रोत्साहित किया। आज से दस साल पहले भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण की सोच ही बहुत सीमित थी। लेकिन मोदी सरकार के आने के बाद उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं ने वैश्विक कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित किया। इससे भारत केवल उपभोक्ता बाजार नहीं, बल्कि तकनीकी उत्पादन का केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ा है। एआई के लिए आवश्यक कंप्यूटेशनल शक्ति का स्वदेशी निर्माण भारत की रणनीतिक मजबूती को और सुदृढ़ बना रहा है।![]()
3. स्किल इंडिया और एआई टैलेंट पूल का विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी का असली ग्रोथ इंजन है कुशल मानव संसाधन। मोदी सरकार ने स्किल इंडिया, डिजिटल स्किलिंग और उच्च शिक्षा संस्थानों में उन्नत पाठ्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार करने पर जोर दिया। मोदी सरकार के एक दशक के कार्यकाल में जितने आईआईटी, आईआईएम और अन्य प्रमुख संस्थान बने हैं, उतने उच्च शिक्षण संस्थान इतने कम समय में कभी नहीं बने। इन्हीं आईआईटी, आईआईएम और अन्य प्रमुख संस्थानों में एआई और डेटा साइंस के विशेष कार्यक्रम शुरू हुए। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और सरकारी साझेदारियों के माध्यम से लाखों युवाओं को कोडिंग, मशीन लर्निंग और डेटा एनालिटिक्स की ट्रेनिंग दी जा रही है। इससे भारत विश्व का सबसे बड़ा एआई टैलेंट पूल बनने की ओर अग्रसर है।
4. स्टार्टअप इकोसिस्टम: दो लाख स्टार्ट और 118 यूनिकॉर्न
भारत आज दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक है। 2014 से पहले भारत में स्टार्टअप संस्कृति बेहद सीमित थी और यूनिकॉर्न सिर्फ 4 थे, जबकि आज DPIIT से मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स की संख्या 2 लाख से ज्यादा और यूनिकॉर्न करीब 118 हो चुके हैं। यह बदलाव दिखाता है कि बीते एक दशक में भारत ने उद्यमिता को बड़े शहरों से निकालकर गांव-कस्बों तक पहुंचाया है और देश को जॉब सीकर से जॉब क्रिएटर बनाने की दिशा में निर्णायक छलांग लगाई है। मोदी सरकार की नीतियों स्टार्टअप इंडिया, आसान रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, कर प्रोत्साहन और फंडिंग सपोर्ट ने एआई आधारित स्टार्टअप्स को पंख दिए हैं। हेल्थटेक, एग्रीटेक, फिनटेक और एडटेक क्षेत्रों में भारतीय स्टार्टअप्स एआई के माध्यम से वैश्विक समाधान विकसित कर रहे हैं। यह केवल रोजगार सृजन नहीं, बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की भागीदारी को मजबूत करने वाला कदम है।
5. मोदी सरकार में जनसेवा के लिए एआई का उपयोग
मोदी सरकार की खासियत यह रही है कि उसने एआई को केवल उद्योग तक सीमित नहीं रखा, बल्कि शासन और जनसेवा में भी इसका उपयोग बढ़ाया है। आर्टिफिशियल इंटैलीजेंस के ऐसे कितने ही नवाचार हैं, जो मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान तेजी से बढ़े हैं। कृषि पूर्वानुमान, मौसम विश्लेषण, स्वास्थ्य जांच, कर प्रशासन और सुरक्षा निगरानी में एआई आधारित समाधान अपनाए जा रहे हैं। इससे नीतियों की सटीकता, पारदर्शिता और दक्षता बढ़ी है। आम नागरिक को तेज, सस्ती और प्रभावी सेवाएं मिल रही हैं। यह “टेक्नोलॉजी फॉर ऑल” के सिद्धांत का जीवंत उदाहरण है।

6. एआई को भारतीय भाषाओं में विकसित करने पर विशेष जोर
विविधता में एकता वाले भारत में भाषाई विविधता एक बड़ी चुनौती रही है। भारत की इसी भाषाई विविधता को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने एआई को भारतीय भाषाओं में विकसित करने पर विशेष जोर दिया है। वॉइस असिस्टेंट, ट्रांसलेशन टूल्स और लोकल लैंग्वेज मॉडल्स के माध्यम से तकनीक को गांव-गांव तक पहुंचाने की पहल हुई है। इससे डिजिटल विभाजन कम हुआ और ग्रामीण भारत भी एआई क्रांति का हिस्सा बनने लगा है। भारतीय भाषाओं में एआई का विकास न केवल समावेशिता सुनिश्चित की है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की विशिष्ट पहचान भी स्थापित की है।
7. वैश्विक साझेदारी और भारत की रणनीतिक कूटनीति
सभी जानते हैं कि आर्टिफिशियल इंटैलीजेंसी एक वैश्विक विषय है और मोदी सरकार ने इसे कूटनीतिक प्राथमिकता दी है। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत ने एआई के नैतिक उपयोग, डेटा सुरक्षा और वैश्विक सहयोग की वकालत की है। प्रमुख तकनीकी देशों के साथ साझेदारी, संयुक्त अनुसंधान और निवेश समझौते भारत को एआई की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत स्थान दिला रहे हैं। यह रणनीति भारत को केवल सहभागी नहीं, बल्कि नीति-निर्माता राष्ट्र के रूप में स्थापित कर रही है।
8. इकोनॉमिक पावर बनने से रोजगार सृजन की नई संभावनाएं
एआई के क्षेत्र में निर्णायक कदमों का सीधा और सकारात्मक प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। उत्पादकता में वृद्धि, नए उद्योगों का उदय और उच्च कौशल आधारित रोजगार के अवसर देश को 5 ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर अग्रसर कर रहे हैं। पीएम मोदी की पहली सरकार बनने से पहले भारत वैश्विक इकोनॉमी के मामले में 11 नंबर पर था। अब हम दुनिया की चौथे नंबर की इकोनॉमी बन चुके हैं और पीएम मोदी के तीसरे कार्यकाल में ही भारत विश्व की सबसे बड़ी तीसरी अर्थव्यवस्था बन जाएगा। एआई आधारित ऑटोमेशन जहां पारंपरिक कार्यप्रणालियों को बदल रहा है, वहीं नए प्रकार के रोजगार और उद्यमिता के अवसर भी पैदा कर रहा है। मोदी सरकार की नीति इस परिवर्तन को अवसर में बदलने पर केंद्रित है।
9. एआई आधारित समाधान राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती
एआई में आत्मनिर्भरता केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक आवश्यकता भी है। रक्षा, साइबर सुरक्षा और महत्वपूर्ण अवसंरचना में एआई आधारित समाधान राष्ट्रीय सुरक्षा को नई मजबूती देते हैं। स्वदेशी तकनीकी क्षमता भारत को बाहरी निर्भरता से मुक्त कर आत्मविश्वास से भरती है। “आत्मनिर्भर भारत” का विचार एआई के क्षेत्र में ठोस आकार लेता दिखाई दे रहा है। तकनीकी प्रगति के साथ नैतिक चुनौतियां भी आती हैं—डेटा गोपनीयता, एल्गोरिदमिक पक्षपात और रोजगार पर प्रभाव जैसे प्रश्न महत्वपूर्ण हैं। मोदी सरकार ने संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए नवाचार और नियमन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश की है। डेटा सुरक्षा कानून और जिम्मेदार एआई के सिद्धांत इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। इससे नागरिकों का विश्वास बना रहता है और तकनीकी विकास सतत रूप से आगे बढ़ता है।
10. आत्मनिर्भर राष्ट्र से अब एआई महाशक्ति बनने की ओर भारत
पीएम मोदी ने 2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य रखा है। इस संकल्प की सिद्धि के लिए वे हर सेक्टर में आत्मनिर्भर भारत बना रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटैलीजेंसी के क्षेत्र में भी हाल ही में हुए पांच नए इनोवेशन ने भारत की पहचान दुनियाभर में कायम की है। एआई में हमारे 5 बड़े निर्णायक कदम ये हैं…
A. सर्वम एआई: यह सीधे भारतीय संदर्भ में सोचने और जवाब देने की क्षमता है। सर्वम ने बुलबुल नामक ऑडियो वर्जन पेश किया। इसे हिंदी व अन्य भारतीय भाषाओं, स्थानीय उच्चारण के अनुरूप ट्रेनिंग दी गई।
B. परम-2: यह सुपरकंप्यूटर है। सरकार, नीति-निर्माण और संवेदनशील डेटा उपयोग को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है।
C. ज्ञानी: यह बड़े पैमाने पर स्थानीय कंटेंट और भारतीय ज्ञान परंपरा को डिजिटल रूप में सुलभ बनाता है। यह एआई को नीति, शिक्षा, जनसेवा का औजार बन रहा है।
D. सॉकेट: यह एआई कोडिंग और लॉजिक आधारित कार्यों को भारतीय भाषाओं और स्थानीय जरूरतों से जोड़ने का काम करेगा।
E. गान: यह भारतीय भाषाओं, लहजों और आवाजों में सटीक स्पीच और ऑडियो आउटपुट देने में सक्षम है। यानी भारतीय एआई केवल टेक्स्ट तक सीमित नहीं है।









