Home समाचार प्रधानमंत्री के नए दफ्तर ‘सेवा तीर्थ’ में पहली कैबिनेट बैठक, 2047 के...

प्रधानमंत्री के नए दफ्तर ‘सेवा तीर्थ’ में पहली कैबिनेट बैठक, 2047 के विकसित भारत का संकल्प

SHARE

भारत की विकास यात्रा में आज एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 फरवरी 2026 को अपने नए कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली औपचारिक बैठक की अध्यक्षता की। नई दिल्ली में साउथ ब्लॉक की जगह बना यह आधुनिक परिसर अब राष्ट्र संचालन का नया केंद्र बन चुका है। बैठक के दौरान सरकार ने साफ किया कि यह केवल एक भवन नहीं है, बल्कि गुलामी की मानसिकता को पीछे छोड़कर एक आधुनिक और स्वदेशी सोच वाले भारत के उदय का प्रतीक है। कैबिनेट ने इस मौके पर एक ‘सेवा संकल्प प्रस्ताव’ पारित किया, जो आगामी दशकों के लिए सरकार की कार्य-संस्कृति और प्राथमिकताओं को परिभाषित करता है।

कैबिनेट बैठक में सरकार ने पिछले एक दशक की उपलब्धियों को याद करते हुए भविष्य का रोडमैप साझा किया। इस दौरान जोर दिया गया कि ‘सेवा तीर्थ’ से चलने वाली शासन व्यवस्था का मुख्य आधार ‘नागरिक देवो भव’ की भावना होगी। सरकार ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि यहां लिया जाने वाला हर फैसला देश के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के जीवन को आसान बनाने के लक्ष्य से प्रेरित होगा। बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को सर्वोपरि रखते हुए, रिफॉर्म एक्सप्रेस की गति को और तेज करने और भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाने का दृढ़ संकल्प लिया गया।

इस ऐतिहासिक अवसर पर जारी आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया है कि “माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की अध्यक्षता में, नए प्रधानमंत्री कार्यालय ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्रीय मंत्रिमंडल की ऐतिहासिक प्रथम बैठक आयोजित हो रही है। यह बैठक एवं यह भवन नए भारत के नवनिर्माण की एक प्रत्यक्ष अभिव्यक्ति है। इस शुभारंभ के साथ ही हम उस भविष्य का स्वागत कर रहे हैं, जिसके निर्माण में सदियों का श्रम लगा है। आज़ादी के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय साउथ ब्लॉक में इतने दशकों तक सरकारों ने विरासत को संभाला और भविष्य के सपने देखे। हमने एक ऐसे भारत के सपने देखे, जिसकी सोच स्वदेशी हो, स्वरूप आधुनिक हो, और सामर्थ्य अनंत हो। आज ये सेवातीर्थ उसी संकल्पना का वह मूर्तिमान अवतार है जो लोकतन्त्र की जननी के रूप में भारत के गौरव को बढ़ाएगा।”

प्रस्ताव में आगे कहा गया है कि “‘सेवा तीर्थ’ उन अस्थायी बैरकों के स्थान पर बना है, जो ब्रिटिश काल के थे। उस स्थान पर राष्ट्र संचालन के सक्रिय संस्थान का निर्माण नए भारत के कायाकल्प का भी प्रतीक है। गुलामी के कालखंड से पहले भारत की पहचान एक ऐसे राष्ट्र के रूप में होती थी जो एक ओर अपनी भौतिक भव्यता के लिए भी जाना जाता था, और दूसरी ओर अपने मानवीय मूल्यों के लिए। सेवातीर्थ की संकल्पना इन दोनों ही आदर्शों से मिलकर बनी है। कर्तव्य, सेवा और समर्पण की त्रिवेणी से यह कार्यस्थल एक तीर्थ की भांति पवित्र हो, यह इसकी मूलभावना है।”

शासन की नई कार्य-संस्कृति को स्पष्ट करते हुए कहा गया है कि “‘सेवा तीर्थ’ में हो रही इस पहली बैठक के साथ केंद्रीय मंत्रिमंडल यह संकल्प दोहराता है कि यहां लिया गया हर निर्णय 140 करोड़ देशवासियों के प्रति सेवा-भाव से प्रेरित होगा और राष्ट्र-निर्माण के व्यापक लक्ष्य से जुड़ा होगा। हमारे लिए संवैधानिक मूल्य उस नैतिक प्रतिबद्धता की अभिव्यक्ति हैं, जो शासन को नागरिक की गरिमा, समानता और न्याय से जोड़ती है। ‘सेवा तीर्थ’ की कार्य-संस्कृति इसी आत्मा से संचालित होगी, जहां हर नीति संविधान की मूल भावना के अनुरूप होगी और हर निर्णय देशवासियों की आकांक्षाओं के प्रति उत्तरदायी होगा।”

मंत्रिमंडल ने जनता के प्रति अपनी जवाबदेही पर जोर देते हुए कहा है कि “केंद्रीय मंत्रिमंडल यह संकल्प दोहराता है कि इस परिसर में लिया गया प्रत्येक निर्णय ‘नागरिक देवो भव’ की भावना से प्रेरित होगा। यह स्थान सत्ता के प्रदर्शन का नहीं, वरन् प्रत्येक भारतवासी के सशक्तिकरण का केंद्र बनेगा। सेवा तीर्थ’ से संचालित शासन का हर प्रयास देश के अंतिम व्यक्ति के जीवन को सरल बनाने की भावना से जुड़ा रहेगा। हम ये दोहराते हैं कि, हम अपने विज़न के मुताबिक उस गवर्नेंस मॉडल को और मजबूती देंगे, जो पारदर्शी, उत्तरदायी और नागरिक की संवेदनाओं के प्रति सजग हो। ‘सेवा तीर्थ’ उस गवर्नेंस इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता का उत्तर है, जो जड़ता की जगह गतिशीलता को, उदासीनता की जगह निष्ठा को और संदेह की जगह समाधान को बढ़ावा देता है।”

बीते वर्षों की सफलता का जिक्र करते हुए सरकार ने बताया है कि “इसी सोच के साथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में बीते वर्षों में लिए गए निर्णयों ने शासन के उद्देश्य को नई स्पष्टता दी है। करोड़ों नागरिकों के जीवन में आए बदलाव ने शासन के प्रति जनता के विश्वास को मजबूत किया है। बीते एक दशक में 25 करोड़ से अधिक नागरिकों को गरीबी से बाहर निकालकर देश ने असंभव समझे जाने वाले काम को संभव करके दिखाया है। ऐसे अनेक कीर्तिमानों के पीछे सरकार की दूरगामी सोच, व्यापक विज़न और अथक परिश्रम रहा है। आयुष्मान भारत के माध्यम से करोड़ों लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा से जोड़ने का गौरव देश ने हासिल किया है। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत करीब 80 करोड़ नागरिकों तक खाद्य सुरक्षा पहुंचाकर भुखमरी के अभिशाप का अंत किया गया है। स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत 12 करोड़ से अधिक शौचालयों के निर्माण से करोड़ों परिवारों और महिलाओं को गरिमापूर्ण जीवन मिला है। ये सभी आंकड़े शासन की उस दिशा का संकेत हैं जहां नीति का अंतिम उद्देश्य नागरिक का जीवन सरल बनाना रहा है।”

बुनियादी ढांचे और आर्थिक सुधारों पर प्रस्ताव में कहा गया है कि “इसी तरह 4 करोड़ से अधिक घरों के निर्माण से करोड़ों परिवारों को सिर पर छत और सुरक्षा मिली है। ग्रामीण क्षेत्रों में जल जीवन मिशन के माध्यम से 12 करोड़ से अधिक नए घरों तक पीने के पानी की पहुंच सुनिश्चित हुई है। केंद्रीय मंत्रिमंडल भारत की अर्थव्यवस्था में आए व्यापक परिवर्तनों को एक सतत सुधार-यात्रा के रूप में देखता है। ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के मंत्र के साथ GST, डीबीटी और डिजिटल इंडिया जैसे सुधारों ने शासन को अधिक पारदर्शी, अधिक सक्षम और अधिक नागरिक-केंद्रित बनाया है। टैक्स मामलों में फ़ेसलेस जांच की प्रक्रिया से ईमानदारी को बढ़ावा मिला है, और आम नागरिकों का भरोसा मजबूत हुआ है। इन्हीं प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत आज विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में अपना सशक्त स्थान बना चुका है।”

भविष्य के संकल्प को दोहराते हुए मंत्रिमंडल ने कहा है कि “मंत्रिमंडल यह दृढ़ संकल्प लेता है कि ‘सेवा तीर्थ’ की नई ऊर्जा और ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ की तीव्र गति से, हम निकट भविष्य में विश्व की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में भारत का स्थान सुनिश्चित करने का संकल्प पूरा करेंगे। आज केंद्रीय मंत्रिमंडल स्वयं को ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय संकल्प के प्रति पुनः समर्पित करता है। यह एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय यात्रा है, जिसमें आज लिए गए निर्णय आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का स्वरूप तय करेंगे। ‘सेवा तीर्थ’ में हो रही यह पहली बैठक हमें यह स्मरण कराती है कि विकास का लक्ष्य जितना बड़ा है, उसके प्रति हमारी जिम्मेदारी उतनी ही गहरी होनी चाहिए।”

अंत में, ‘सेवा तीर्थ’ की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए प्रस्ताव में कहा गया है कि “यह परिसर केवल एक आधुनिक कार्यस्थल नहीं है। यह शासन की नई कार्य-संस्कृति का भी प्रतीक है। यहाँ की आधुनिक तकनीक और दक्ष कार्यप्रणाली के माध्यम से सरकार की कार्यक्षमता नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगी। यहां से चलने वाली प्रत्येक फाइल, और यहां कार्य करने वाला प्रत्येक कर्मयोगी, इस भाव से प्रेरित होगा कि उसका कार्य देश के अंतिम व्यक्ति के जीवन को सरल बनाने से जुड़ा है। केंद्रीय मंत्रिमंडल यह संकल्प लेता है कि यह संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को प्रोत्साहित करेगा और सुधारों की उस निरंतर यात्रा को गति देगा, जिसे देश ने बीते वर्षों में अनुभव किया है। यह पहली बैठक इस विश्वास को और सुदृढ़ करती है कि सही नीति, नेक नीयत और सही नेतृत्व से विकसित भारत के निर्माण का पथ निरंतर प्रकाशित होता रहेगा। ‘सेवा तीर्थ’ से संचालित कार्य-संस्कृति भारत को एक समर्थ, सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में आगे बढ़ाने का आधार बनेगी। केंद्रीय मंत्रिमंडल, माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, ‘सेवा तीर्थ’ को संवेदनशील, उत्तरदायी और नागरिक-केंद्रित शासन का एक वैश्विक उदाहरण बनाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है। मंत्रिमंडल यह संकल्प लेता है कि 2047 तक भारत को एक समृद्ध, समर्थ और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने की यात्रा में यह परिसर राष्ट्रीय आकांक्षाओं का सशक्त केंद्र बनेगा।”

Leave a Reply