प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 3 फरवरी को बजट वेबिनार सीरीज के दूसरे सत्र ‘सस्टेनिंग एंड स्ट्रेंथनिंग इकोनॉमिक ग्रोथ’ को संबोधित करते हुए देश की आर्थिक प्रगति का एक नया रोडमैप पेश किया। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ किया कि भारत की दिशा और संकल्प अब पूरी तरह स्पष्ट हैं। उन्होंने उद्योग जगत को चार बड़े लक्ष्यों पर काम करने का आह्वान किया- Build more, Produce more, Connect more और Export more।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आज जब दुनिया की सप्लाई चेन बदल रही है, तब भारत पूरी दुनिया के लिए उम्मीद की किरण बना हुआ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल बजट बना देने से बदलाव नहीं आता, बल्कि असली बदलाव तब दिखता है जब इंडस्ट्री, राज्य सरकारें और वित्तीय संस्थान मिलकर उसे जमीन पर उतारते हैं।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में ‘क्वालिटी’ पर सबसे ज्यादा जोर दिया। उन्होंने उद्यमियों को दो टूक कहा कि रिसर्च में कंजूसी करने का जमाना अब चला गया है। अगर हमें ग्लोबल मार्केट में टिकना है, तो हमारे प्रोडक्ट्स की क्वालिटी अंतरराष्ट्रीय मानकों से भी बेहतर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारा एक ही मंत्र होना चाहिए- क्वालिटी, क्वालिटी और क्वालिटी।
छोटे उद्योगों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने MSME क्लासिफिकेशन में जो सुधार किए हैं, उससे अब छोटे व्यापारियों का डर खत्म हो गया है। अब उन्हें यह चिंता नहीं है कि कारोबार बढ़ाने पर सरकारी फायदे बंद हो जाएंगे। उन्होंने MSMEs से अपील की कि वे अपनी प्रोडक्टिविटी बढ़ाएं और डिजिटल प्रोसेस को अपनाकर वैश्विक प्रतिस्पर्धा में उतरें।

बजट में रिकॉर्ड कैपिटल एक्सपेंडिचर का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि रेलवे, हाईवे, पोर्ट और सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर देश के ‘ग्रोथ कनेक्टर’ बनेंगे। उन्होंने कहा कि बेहतर लॉजिस्टिक्स से व्यापार की लागत कम होगी और भारतीय सामान दुनिया भर में सस्ता और सुलभ हो पाएगा।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने कई देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट किए हैं, जिससे व्यापार के बड़े द्वार खुल गए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि हमें दूसरे देशों के लोगों की पसंद और उनकी जरूरतों पर रिसर्च करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर कोई बड़ा जहाज बना रहा है और उसे एक छोटे पुर्जे की जरूरत है, तो हमें उसकी जरूरत के हिसाब से ‘यूजर फ्रेंडली’ प्रोडक्ट देना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की भविष्य की ग्रोथ इस पर निर्भर करेगी कि हम अपने शहरों को कैसे मैनेज करते हैं। उन्होंने टियर-2 और टियर-3 शहरों को ‘ग्रोथ एंकर्स’ बनाने पर जोर दिया, ताकि निवेश और टैलेंट केवल बड़े महानगरों तक सीमित न रहे। उन्होंने उद्योगों को आगाह किया कि अब दुनिया केवल दाम नहीं देखती, बल्कि यह भी देखती है कि सामान बनाने में पर्यावरण का कितना ध्यान रखा गया है। उन्होंने ‘कार्बन कैप्चर’ और ‘क्लीन टेक्नोलॉजी’ में निवेश करने की सलाह दी, ताकि आने वाले समय में भारतीय कंपनियां नए बाजारों तक आसानी से पहुंच सकें।
संबोधन के अंत में पीएम मोदी ने कहा कि यह वेबिनार सिर्फ चर्चा का मंच नहीं है, बल्कि यह ‘कलेक्टिव ओनरशिप’ यानी सामूहिक जिम्मेदारी का प्रतीक है। उन्होंने एक्सपर्ट्स और स्टेकहोल्डर्स से अपील की कि वे बजट के फ्रेमवर्क का लाभ उठाएं और देश की प्रगति में मील का पत्थर साबित होने वाले सुझाव दें।









