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परीक्षा से पहले प्रधानमंत्री मोदी का छात्रों के साथ दिल से संवाद: डर नहीं, डिसिप्लिन और ड्रीम्स रखो

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परीक्षा पे चर्चा के 9वें एडिशन का दूसरा एपिसोड 9 फरवरी की सुबह 10 बजे प्रसारित हुआ और इस बार नजारा बिल्कुल अलग था। स्टूडियो की चारदीवारी से बाहर निकलकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सीधे देश के अलग-अलग शहरों में छात्रों के बीच पहुंचे।

कोयंबटूर से लेकर रायपुर, गुजरात के आदिवासी इलाकों और गुवाहाटी तक, पीएम मोदी ने छात्रों से आमने-सामने बैठकर न सिर्फ परीक्षा का तनाव समझा, बल्कि जिंदगी के बड़े सवालों पर भी खुलकर बात की। इ

स नए कॉन्सेप्ट ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ को और ज्यादा जीवंत बना दिया। बातचीत में कहीं हंसी थी, कहीं जिज्ञासा, कहीं भावुक पल तो कहीं भविष्य को लेकर बड़े सपने। पीएम मोदी ने साफ कहा कि यह कार्यक्रम सिखाने का नहीं, बल्कि सीखने का है।

तमिलनाडु के कोयंबटूर में छात्रों ने प्रधानमंत्री मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। ‘वणक्कम’ के साथ शुरू हुई बातचीत ने माहौल को बिल्कुल हल्का बना दिया। खाने-पीने से लेकर पढ़ाई तक, हर सवाल पर प्रधानमंत्री पूरी सहजता से जुड़े नजर आए।

छात्रों ने भी माना कि उन्होंने पीएम मोदी को जितना टीवी पर देखा था, असल में वह उससे कहीं ज्यादा सरल और जमीन से जुड़े लगे। यहां छात्रों ने स्टार्टअप, पैशन और पढ़ाई के बैलेंस जैसे मुद्दों पर सवाल पूछे। एक छात्रा ने पूछा कि स्टार्टअप के लिए किन विषयों की तैयारी जरूरी है।

पीएम मोदी ने जवाब में कहा कि उम्र कभी बाधा नहीं होती। जरूरी यह है कि आप अपनी रुचि पहचानें, टीमवर्क सीखें और छोटे स्तर से शुरुआत करें। उन्होंने सलाह दी कि स्कूल के स्तर पर भी प्रोजेक्ट बनाकर स्टार्टअप्स से सीखने की कोशिश की जा सकती है।

एक छात्रा के सवाल पर कि पढ़ाई और पैशन के बीच बैलेंस कैसे बनाएं, पीएम मोदी ने दिलचस्प उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि आर्ट और साइंस अलग नहीं हैं, बल्कि एक-दूसरे को मजबूत कर सकते हैं। पढ़ाई को रचनात्मक तरीके से अपनाने से न सिर्फ याददाश्त बेहतर होती है, बल्कि तनाव भी कम होता है।

उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि हफ्ते में कुछ समय अपने शौक के लिए जरूर निकालें। यही शौक आगे चलकर थकान उतारने और नई ऊर्जा देने का काम करता है। 2047 में विकसित भारत के सपने पर जब छात्रों ने सवाल किया, तो पीएम मोदी खासे उत्साहित दिखे।

उन्होंने कहा कि विकसित देश बनने का मतलब सिर्फ बड़ी योजनाएं नहीं, बल्कि विकसित नागरिक बनना है। सफाई, ट्रैफिक नियमों का पालन, खाना बर्बाद न करना और ‘वोकल फॉर लोकल’ जैसी छोटी आदतें ही बड़े बदलाव की नींव रखती हैं।

उन्होंने सिंगापुर का उदाहरण देते हुए कहा कि आदतें ही किसी देश की पहचान बनती हैं। हर नागरिक अगर अपनी जिम्मेदारी समझ ले, तो विकसित भारत का सपना जरूर पूरा होगा।

छात्रों के बीच एक अहम सवाल उठा सफलता के लिए मोटिवेशन जरूरी है या डिसिप्लिन? पीएम मोदी ने किसान का उदाहरण देते हुए समझाया कि सिर्फ प्रेरणा काफी नहीं होती। बिना अनुशासन के प्रेरणा भी बोझ बन जाती है। डिसिप्लिन जीवन की नींव है और मोटिवेशन उस पर सोने में सुहागा।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर छात्रों की चिंता पर पीएम मोदी ने साफ कहा कि हर दौर में नई तकनीक से डर लगा है। कंप्यूटर आया, तब भी डर था। उन्होंने छात्रों को समझाया कि टेक्नोलॉजी का गुलाम नहीं बनना है, बल्कि उसे अपने काम का साथी बनाना है। अगर AI से सही तरह से वैल्यू एडिशन किया जाए, तो भविष्य में मौके और बढ़ेंगे।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में माहौल और भी अनौपचारिक दिखा। यहां पीएम मोदी ने छात्रों के साथ स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लिया और उसी अंदाज में सवाल-जवाब का सिलसिला चला। यात्रा, परीक्षा से पहले मन की शांति और रिवीजन को लेकर छात्रों ने अपनी दुविधाएं साझा कीं। पीएम मोदी ने कहा कि परीक्षा से पहले यह भरोसा रखना जरूरी है कि जो पढ़ा है, वह व्यर्थ नहीं गया। दिमाग में कहीं न कहीं वह स्टोर जरूर है। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि दूसरों को पढ़ाना भी खुद की तैयारी मजबूत करने का सबसे असरदार तरीका है।

एक खिलाड़ी छात्रा के सवाल पर पीएम मोदी ने साफ कहा कि खेल और शिक्षा एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं। खेल जीवन में ऊर्जा और अनुशासन सिखाता है, जबकि शिक्षा सोच को मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि खेलना भी है ताकि खिलो, और पढ़ना भी है ताकि कोई ये न कहे कि बस मैदान तक ही सीमित हो।

रायपुर में पर्यावरण संरक्षण और लीडरशिप पर भी चर्चा हुई। पीएम मोदी ने छोटे-छोटे उदाहरणों से समझाया कि पानी बचाना, पेड़ लगाना और कचरा न फैलाना जैसे कदम बड़े बदलाव ला सकते हैं। लीडरशिप पर उन्होंने कहा कि नेता बनने का मतलब चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि पहल करना है।

गुजरात के आदिवासी क्षेत्रों में बातचीत और भी भावुक रही। छात्रों ने वारली, पिठोरा जैसी पारंपरिक कलाओं से पीएम मोदी को परिचित कराया। प्रधानमंत्री ने खुद उनके बनाए चित्रों की तारीफ की और कहा कि शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर ने आदिवासी इलाकों में बड़ा बदलाव लाया है। यहां तनाव प्रबंधन, करियर चुनाव और सपनों को लेकर गहरी चर्चा हुई। पीएम मोदी ने कहा कि सपनों के लिए जीना सीखो, लेकिन सपनों के मुताबिक मेहनत भी करो। सफलता शोर नहीं मचाती, मेहनत करने पर सफलता खुद शोर मचाती है।

नॉर्थ ईस्ट की राजधानी गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी के बीच नाव पर हुई चर्चा इस एपिसोड की खास झलक रही। गमोचा पहनाकर छात्रों ने पीएम मोदी का स्वागत किया। परीक्षा का डर, आत्मविश्वास, डाइट और माता-पिता की तुलना जैसे मुद्दों पर खुलकर बात हुई। पीएम मोदी ने कहा कि खुद से मुकाबला करना सबसे बड़ी प्रतियोगिता है। आत्मविश्वास का मतलब खुद पर भरोसा होना है। उन्होंने स्वामी विवेकानंद का उदाहरण देकर समझाया कि बड़े से बड़ा वक्ता भी कभी नर्वस होता है, लेकिन विश्वास ही उसे आगे बढ़ाता है।

पूरे एपिसोड में एक बात साफ दिखी परीक्षा पे चर्चा अब सिर्फ बोर्ड एग्जाम तक सीमित नहीं रही। यह जीवन, करियर, टेक्नोलॉजी, संस्कृति और जिम्मेदारी पर खुला संवाद बन चुकी है। अलग-अलग शहर, अलग-अलग पृष्ठभूमि के छात्र, लेकिन सवाल एक जैसे डर, सपने और भविष्य। अंत में पीएम मोदी ने छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हर चर्चा का मकसद सिर्फ सुनना और समझना है। शायद यही वजह है कि इस बार परीक्षा पे चर्चा सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि छात्रों के लिए एक यादगार अनुभव बन गई।

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