नए साल के आगाज के साथ भारत आज जिस मोड़ पर खड़ा है, वहां से विकसित भारत का संकल्प केवल अनुमान नहीं, बल्कि एक ऐसी दिशा बन चुका है, जिसका पूरा होना सुनिश्चित है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में बीते एक दशक में जिस प्रकार आर्थिक सुधार, संस्थागत मजबूती और राष्ट्रीय आत्मविश्वास का विस्तार हुआ है, उसने आने वाले वर्षों की तस्वीर काफी हद तक साफ कर दी है। वैश्विक रेटिंग एजेंसी अर्नेस्ट एंड यंग (Ernst & Young) सहित कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के आकलन बताते हैं कि मौजूदा विकास दर और नीतिगत स्थिरता के चलते वर्ष 2047 तक भारत की प्रति व्यक्ति आय मौजूदा लगभग ढाई लाख रुपये से बढ़कर 13–14 लाख रुपये तक पहुंच सकती है। यह आंकड़ा जहां आर्थिक उन्नति का परचम है, वहीं देशवासियों के जीवन स्तर में ऐतिहासिक परिवर्तन का संकेत भी है। एजेंसी की ताजा रिपोर्ट यह स्पष्ट संदेश देती है कि वर्ष 2047 तक भारत की अर्थव्यवस्था मौजूदा स्तर से लगभग 5.25 गुना तक बढ़ सकती है। भारत आज उस मजबूत स्थिति में खड़ा है जहां विकास केवल आकांक्षा नहीं, बल्कि ठोस तथ्यों और वैश्विक आकलनों में बदलता दिख रहा है।

विकसित भारत का विचार: नारा नहीं, दीर्घकालिक रोडमैप
प्रधानमंत्री मोदी का “विकसित भारत @2047” केवल भावनात्मक संकल्प नहीं, बल्कि एक विजनरी सोच में समाहित वो विकास-दृष्टि है, जिसमें आर्थिक मजबूती, सामाजिक न्याय, तकनीकी आत्मनिर्भरता और वैश्विक नेतृत्व—चारों पिलर समान रूप से शामिल हैं। बीते वर्षों में मोदी सरकार ने जिस प्रकार नीतिगत निरंतरता, तेज निर्णय और बड़े सुधारों को प्राथमिकता दी है, उसने भारत को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल कर दिया है। IMF और विश्व बैंक जैसे संस्थान भी भारत की विकास दर को वैश्विक औसत से कहीं अधिक मान रहे हैं। दुनिया के जाने-माने आर्थिक विश्लेषक भी कह रहे हैं कि यह बदलाव अचानक नहीं आया है, बल्कि प्रधानमंत्री मोदी के “विकसित भारत @2047” विजन के तहत बीते एक दशक में किए गए संरचनात्मक सुधारों, नीतिगत स्थिरता और दीर्घकालिक सोच का परिणाम है।

मैन्युफैक्चरिंग बनेगा विकास का सबसे बड़ा ग्रोथ इंजन
वैश्विक रेटिंग एजेंसी अर्नेस्ट एंड यंग की रिपोर्ट में भारत के आर्थिक भविष्य का सबसे मजबूत स्तंभ मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बताया गया है। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में जीडीपी में मैन्युफैक्चरिंग की हिस्सेदारी बढ़कर 55 से 60 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। यह भारत को एक उपभोग-प्रधान अर्थव्यवस्था से निकालकर वैश्विक उत्पादन केंद्र में बदलने का संकेत है। ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं ने उद्योगों को नया आत्मविश्वास दिया है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोबाइल, रक्षा उत्पादन, स्टील और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में तेज़ निवेश दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक सरकार का पूंजीगत समर्थन और निवेश अब जीडीपी के लगभग 14–15 प्रतिशत तक पहुँच रहा है, जो औद्योगिक विस्तार की मजबूत बुनियाद बन चुका है।

ईवी क्रांति और हरित भविष्य की ओर बढ़ता भारत
पीएम मोदी की दूरदर्शी नीतियों के चलते भारत का इलेक्ट्रिक व्हीकल इकोसिस्टम भी तेजी से आकार ले रहा है। रेटिंग एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार सरकार ने ईवी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए लगभग 14.5 अरब डॉलर का समर्थन दिया है। इससे बैटरी निर्माण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर, थ्री-व्हीलर और कार निर्माण में तेज निवेश हो रहा है। यह पहल ना केवल आयात पर निर्भरता घटा रही है, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा, कार्बन कटौती और आत्मनिर्भर तकनीक की दिशा में भारत को मजबूती से आगे बढ़ा रही है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी अब पर्यावरणीय विकल्प भर नहीं, बल्कि आर्थिक अवसर का बड़ा क्षेत्र बन चुकी है।

साल 2030 तक फाइनेंशियल सेक्टर 300 अरब डॉलर को होगा
EY रिपोर्ट के अनुसार भारत का फाइनेंशियल सेक्टर 2030 तक लगभग 300 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच सकता है। बैंकिंग, बीमा, म्यूचुअल फंड, फिनटेक और कैपिटल मार्केट में अभूतपूर्व विस्तार हो रहा है। सबसे अहम तथ्य यह है कि भारतीय बैंकों की सेहत पहले से कहीं बेहतर हुई है। रिपोर्ट बताती है कि देश में बैंकों का एनपीए अब 5 प्रतिशत से भी नीचे आ चुका है, जो वर्षों के सुधारों और अनुशासित नीतियों का परिणाम है। मजबूत बैंकिंग सिस्टम के कारण निवेश बढ़ा है, ऋण प्रवाह तेज हुआ है और आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिली है।

डिजिटल भुगतान में भारत की वैश्विक बादशाहत
पीएम मोदी के डिजिटल इंडिया अभियान ने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल ट्रांजैक्शन हब बना दिया है। रेटिंग एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार आज दुनिया के कुल डिजिटल भुगतान का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा भारत में होता है। यूपीआई ने लेन-देन को इतना आसान, सुरक्षित और सुलभ बना दिया है कि गांव से लेकर महानगर तक डिजिटल भुगतान जीवन का हिस्सा बन गया है। वर्ष 2022 में डिजिटल ट्रांजैक्शन का मूल्य करीब 157 अरब डॉलर था, जो आने वाले वर्षों में कई गुना बढ़ने वाला है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है, कर आधार मजबूत हुआ है और अर्थव्यवस्था का औपचारिकीकरण तेज़ हुआ है।

दुनिया की सबसे बड़ी युवा कार्यशक्ति बनेगी भारत की ताकत
भारत की सबसे बड़ी पूंजी उसकी जनसांख्यिकी है। रिपोर्ट के अनुसार 2030 तक देश की कामकाजी आबादी लगभग 100 करोड़ तक पहुंच सकती है, जो विश्व में सबसे बड़ी होगी। यही युवा शक्ति भारत को मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी, सर्विस और इनोवेशन का वैश्विक केंद्र बनाएगी। स्किल इंडिया, नई शिक्षा नीति, डिजिटल स्किलिंग और स्टार्टअप इंडिया जैसे कार्यक्रमों के जरिए इस जनसंख्या को कुशल मानव संसाधन में बदला जा रहा है। भारत अब केवल श्रम देने वाला देश नहीं, बल्कि कौशल और नवाचार का केंद्र बनता जा रहा है। 2047 की ओर बढ़ता भारत केवल युवा शक्ति ही नहीं बनेगा, बल्कि ऐसा राष्ट्र बनेगा जो समावेशी विकास, टिकाऊ प्रगति और वैश्विक नेतृत्व का नया मानक गढ़ेगा। यही प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत विजन की असली शक्ति और पहचान है।

इंफ्रास्ट्रक्चर क्रांति से बदलेगा भारत का चेहरा
बीते वर्षों में हाईवे, एक्सप्रेसवे, रेलवे, एयरपोर्ट और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क में ऐतिहासिक विस्तार हुआ है। पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत परियोजनाओं को एकीकृत दृष्टिकोण से लागू किया जा रहा है। इससे लागत घट रही है, समय बच रहा है और उत्पादकता बढ़ रही है। बेहतर कनेक्टिविटी से लॉजिस्टिक्स लागत कम हुई है, जिससे भारतीय उत्पाद वैश्विक बाज़ार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन रहे हैं। रिपोर्ट यह भी स्पष्ट करती है कि भारत का विकास मॉडल केवल तेज़ नहीं बल्कि संतुलित और टिकाऊ है। देश 2070 तक नेट-ज़ीरो उत्सर्जन के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन और स्वच्छ तकनीकों में भारी निवेश हो रहा है। पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक प्रगति को साथ लेकर चलने की यह नीति भारत को एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करती है।

विकसित राष्ट्र का स्वप्न नहीं, देश की सुनियोजित यात्रा
अर्नेस्ट एंड यंग की रिपोर्ट पर आर्थिक विशेषज्ञों की राय है कि यदि मौजूदा सुधारों की गति बनी रही, तो भारत 2047 तक न केवल उच्च-मध्यम आय वाला देश बनेगा, बल्कि आकार और प्रभाव दोनों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में उभरेगा। हालांकि, यह तीसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी इससे पहले ही बन जाएगा। प्रति व्यक्ति आय में पांच गुना से अधिक वृद्धि, मज़बूत मैन्युफैक्चरिंग आधार, डिजिटल प्रभुत्व, स्वस्थ बैंकिंग तंत्र और युवा शक्ति मिलकर इस लक्ष्य को साकार करेंगे। प्रधानमंत्री मोदी का “विकसित भारत @2047” अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि ठोस नीतियों, आंकड़ों और वैश्विक रिपोर्टों से प्रमाणित राष्ट्रीय दिशा बन चुका है। अर्नेस्ट एंड यंग जैसी संस्था की रिपोर्ट यह भरोसा देती है कि भारत सही रास्ते पर, सही गति से आगे बढ़ रहा है। आज भारत उम्मीदों का देश नहीं, बल्कि संभावनाओं का महादेश बन चुका है, जहां विकास जन-जन तक पहुंच रहा है, अवसर हर हाथ में हैं और आत्मविश्वास हर चेहरे पर झलकता है।









