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नेसेट में गूंजा नमस्ते और शालोम: पीएम मोदी ने इजराइली संसद में रचा इतिहास, कहा- 7 अक्टूबर का दर्द हमारा भी है

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 फरवरी को इजराइल की संसद ‘नेसेट’ के विशेष सत्र को संबोधित कर एक नया इतिहास रच दिया है। वह इजराइली संसद को संबोधित करने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री बन गए हैं। नेसेट पहुंचने पर उनका स्वागत भव्य तरीके से ‘नेसेट के अध्यक्ष’ अमीर ओहाना ने किया। इस मौके पर इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू और विपक्ष के नेता यायर लापिद भी मौजूद रहे। खास बात यह रही कि पूरी संसद को भारतीय तिरंगे के रंगों वाली रोशनी से सजाया गया था, जो दोनों देशों की अटूट दोस्ती का गवाह बना।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत ‘शालोम’ और ‘नमस्ते’ के साथ की। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह यहां सिर्फ भारत के प्रधानमंत्री के रूप में नहीं, बल्कि एक प्राचीन सभ्यता के प्रतिनिधि के तौर पर आए हैं। भाषण का सबसे भावुक हिस्सा वह था जब पीएम मोदी ने 7 अक्टूबर के हमास हमले का जिक्र किया। उन्होंने कहा, “मैं अपने साथ भारत की जनता की ओर से उन लोगों के लिए गहरी संवेदनाएं लाया हूं, जिन्‍होंने हमास के 7 अक्टूबर के बर्बर आतंकवादी हमले में जान गंवाई और उस प्रत्येक परिवार के लिए भी जिसकी दुनिया उजड़ गई। हम आपके दर्द को महसूस करते हैं। हम आपके दुख में शामिल हैं। भारत इस समय और आगे भी, इजराइल के साथ दृढ़ता और पूर्ण विश्वास के साथ खड़ा है। आतंकवाद को किसी भी परिस्थिति में न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता।”

उन्होंने भारत के 26/11 हमले को याद करते हुए कहा कि आतंक के खिलाफ भारत की नीति ‘जीरो टॉलरेंस’ की है। इन हमलों में मारे गए लोगों में इजराइली नागरिक भी शामिल थे। आपकी ही तरह, आतंकवाद के प्रति हमारी नीति भी बिना किसी दोहरे मानदंड के, निरंतर और आतंकवाद को कतई बर्दाश्‍त न करने की रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने एक बेहद दिलचस्प इत्तेफाक साझा किया। उन्होंने बताया कि उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ था और ठीक इसी दिन भारत ने इज़राइल को आधिकारिक तौर पर मान्यता दी थी। इतिहास की परतों को खोलते हुए उन्होंने बताया कि यहूदी धर्मग्रंथों में भारत का जिक्र ‘होदू’ के नाम से मिलता है। उन्होंने गर्व से कहा कि भारत वह देश है जहां यहूदी समुदाय बिना किसी भेदभाव या डर के सदियों से रह रहा है।

उन्होंने कहा कि 2017 में उनकी इजराइल यात्रा के बाद रिश्ते रणनीतिक साझेदारी तक पहुंचे। उन्होंने मुक्त व्यापार समझौते पर चल रही बातचीत का जिक्र किया और कहा कि दोनों देश व्यापार, निवेश और टेक्नोलॉजी में बड़ी छलांग लगा सकते हैं। भारत-पश्चिम एशिया-यूरोप आर्थिक गलियारा और I2U2 जैसे फ्रेमवर्क में साथ काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। रक्षा सहयोग को भी साझेदारी का अहम स्तंभ बताया गया।

पीएम मोदी ने इजराइल को ‘स्टार्ट-अप नेशन’ बताते हुए कहा कि भारत अब दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर है। उन्होंने खेती में इजराइल की तकनीक ‘प्रति बूंद, अधिक फसल’ की तारीफ की। दोनों देशों के बीच अब 43 ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ चल रहे हैं, जिसे पीएम ने 100 तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। साथ ही, उन्होंने सेमीकंडक्टर, AI और क्वांटम तकनीक में मिलकर काम करने पर जोर दिया।

भाषण के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों की संस्कृति में समानताएं गिनाईं। उन्होंने कहा कि जैसे इजराइल ‘हनुक्का’ मनाता है, भारत ‘दीवाली’ मनाता है। जैसे वहां ‘पुरिम’ का उत्साह होता है, वैसे ही भारत में ‘होली’ के रंग उड़ते हैं। उन्होंने इजराइल में काम कर रहे भारतीय देखभालकर्ताओं की भी सराहना की और उन्हें दोनों देशों के बीच का ‘लिविंग ब्रिज’ बताया।

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