प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश के सौर ऊर्जा अभियान में एक ऐतिहासिक पड़ाव पार करने पर खुशी जताई है। भारत ने ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ के तहत 30 लाख घरों को रूफटॉप सोलर से जोड़ने की बड़ी उपलब्धि हासिल कर ली है। पीएम मोदी ने इस सफलता को स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक सराहनीय यात्रा बताते हुए कहा कि यह कदम न केवल पर्यावरण बचा रहा है, बल्कि देश के आम नागरिकों को बिजली बिल से मुक्ति दिलाकर ‘आत्मनिर्भर’ भी बना रहा है।

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी के एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पोस्ट का उत्तर देते हुए, प्रधानमंत्री ने पोस्ट किया कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में एक सराहनीय उपलब्धि! उन सभी को बहुत-बहुत बधाई जिन्होंने इस योजना का लाभ उठाया है और रूफटॉप सोलर को अपनाया है, जिससे बचत, सतत जीवनशैली और आत्मनिर्भरता को बल मिला है। यह योजना ऊर्जा आत्मनिर्भर, पर्यावरण अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार भारत के निर्माण के हमारे प्रयासों का एक अभिन्न हिस्सा है।
A commendable milestone in India’s clean energy journey!
Compliments to all those who have benefitted from this scheme and embraced rooftop solar power thereby boosting savings, sustainability and self-reliance.
This scheme is a part of our efforts to build an energy-secure,… https://t.co/BLcCKAug4h
— Narendra Modi (@narendramodi) February 23, 2026
यह उपलब्धि पीएम सूर्य घर योजना के तहत हासिल हुई है। इसे 13 फरवरी 2024 को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद शुरू किया गया था। 75,021 करोड़ रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना का लक्ष्य एक करोड़ घरों तक रूफटॉप सोलर पहुंचाना है। इसके जरिए हर परिवार को हर महीने 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का प्रावधान है। फरवरी 2026 तक 30 लाख घरों में सोलर सिस्टम लग चुके हैं। अब तक 13,464.6 करोड़ रुपये से ज्यादा की सब्सिडी सीधे लाभार्थियों के खातों में जारी की जा चुकी है। सरकार का कहना है कि योजना तेजी से अपने एक करोड़ घरों के लक्ष्य की ओर बढ़ रही है।
30 Lakh households are now powered by the PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana. Hon’ble PM Shri @narendramodi Ji’s vision is bringing a clean energy revolution to every household. #30LakhsPMSuryaGhar pic.twitter.com/GFZNGuj16Z
— Sarbananda Sonowal (@sarbanandsonwal) February 23, 2026
भारत ने सिर्फ घरेलू मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सौर ऊर्जा का झंडा गाड़ दिया है। ‘इंटरनेशनल सोलर अलायंस’ (ISA) का मेजबान होने के नाते भारत आज 125 से ज्यादा देशों को सौर तकनीक और फंडिंग में मदद कर रहा है। अक्टूबर 2025 में नई दिल्ली में हुई 8वीं ISA असेंबली ने यह साफ कर दिया कि दुनिया अब सौर ऊर्जा की रणनीतियों के लिए भारत की ओर देख रही है।

IRENA की ताजा रिन्यूएबल एनर्जी स्टैटिस्टिक्स 2025 के मुताबिक, भारत सौर ऊर्जा क्षमता में दुनिया में तीसरे, पवन ऊर्जा में चौथे और कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में भी चौथे स्थान पर है। यह रैंकिंग बताती है कि भारत अब स्वच्छ ऊर्जा के वैश्विक मानचित्र पर मजबूती से उभरा है।

पिछले एक दशक में भारत की सौर क्षमता में जो उछाल आया है, वह किसी चमत्कार से कम नहीं है। साल 2014 में जहां हमारे पास सिर्फ 3 GW सौर क्षमता थी, वह अक्टूबर 2025 तक बढ़कर 129.92 GW हो गई है। यह 40 गुना से भी ज्यादा की बढ़ोतरी है। आज हमारी कुल बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत हिस्सा गैर-जीवाश्म स्रोतों जैसे सौर और पवन से आ रहा है, जो 2030 के लक्ष्य से कहीं पहले ही हासिल कर लिया गया है।

पीएम-कुसुम योजना ने देश के अन्नदाता को ‘ऊर्जादाता’ बना दिया है। बंजर जमीनों पर सोलर प्लांट लगाने और खेतों में 9 लाख से ज्यादा स्टैंडअलोन सोलर पंप लगाने से किसानों की सिंचाई की लागत लगभग शून्य हो गई है। सरकार ने अब इस योजना को मार्च 2026 तक बढ़ा दिया है और सब्सिडी को भी 30 प्रतिशत से बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है, ताकि पहाड़ी और दूर-दराज के इलाकों के किसानों को भी इसका पूरा फायदा मिल सके।

चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम करने के लिए सरकार ने 24,000 करोड़ रुपये की PLI स्कीम लागू की है। इसका मकसद भारत में ही उच्च दक्षता वाले सोलर पैनल बनाना है। इससे न केवल देश में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ सोलर पैनल अब पूरी दुनिया में निर्यात होने के लिए तैयार हैं।

ग्लासगो समिट में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा दिए गए ‘पंचामृत’ मंत्र पर भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। हमारा लक्ष्य 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल करना और कार्बन उत्सर्जन में 1 अरब टन की कमी लाना है। अंतिम लक्ष्य 2070 तक ‘नेट जीरो’ उत्सर्जन हासिल करना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक प्रदूषण मुक्त और हरा-भरा भारत मिल सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि रूफटॉप सोलर जैसे कार्यक्रम ऊर्जा लोकतंत्रीकरण की दिशा में बड़ा कदम हैं। इससे उपभोक्ता सिर्फ बिजली खरीदने वाले नहीं, बल्कि उत्पादक भी बन रहे हैं। 30 लाख घरों में सोलर पैनल लगना सिर्फ एक सरकारी योजना की सफलता नहीं, बल्कि भारत के हरित बदलाव की रफ्तार का संकेत है। अगर यही गति बरकरार रही, तो आने वाले वर्षों में भारत न सिर्फ ऊर्जा आत्मनिर्भर बनेगा, बल्कि दुनिया के लिए स्वच्छ ऊर्जा का मॉडल भी पेश करेगा।









