प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 01 फरवरी को ‘हिंद दी चादर’ श्री गुरु तेग बहादुर साहिब जी के 350वें शहादत समागम को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। महाराष्ट्रा के नवी मुंबई में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में गुरु साहिब को नमन करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ऐसे पावन अवसर का हिस्सा बनना उनके लिए बड़े सौभाग्य की बात है। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत का इतिहास सिर्फ घटनाओं का मेल नहीं, बल्कि वीरता और सद्भाव की अटूट मिसाल है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सिख समुदाय के प्रति अपनी सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि आज देश को सामाजिक एकता की सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने कहा कि गुरु साहिबों की परंपरा ही हमें सत्य और संस्कृति पर अडिग रहने की ताकत देती है। उन्होंने याद दिलाया कि गुरु गोविंद सिंह जी की परंपराओं ने समाज को एक सूत्र में पिरोने का काम किया। संगत का यह विशाल जमावड़ा इस बात का भरोसा दिलाता है कि गुरुओं और संतों का आशीर्वाद देश के साथ है। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि इस यात्रा ने गुरु तेग बहादुर जी के गौरवशाली इतिहास को महाराष्ट्र के कोने-कोने तक पहुंचा दिया है।

सिख समुदाय के लिए किए गए कामों का हिसाब देते हुए प्रधानमंत्री ने करतारपुर साहिब कॉरिडोर, वीर बाल दिवस और साहिबजादों के सम्मान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने न केवल गुरुद्वारों को FCRA के तहत राहत दी, बल्कि स्कूली सिलेबस में भी सिख इतिहास को उचित जगह दिलाई। पीएम मोदी ने साफ कहा कि 1984 के पीड़ितों को न्याय दिलाना और दोषियों को सजा दिलवाना उनकी सरकार की प्राथमिकता रही है।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने अफगानिस्तान से गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों को पूरे सम्मान के साथ भारत वापस लाया और वहां फंसे सिख भाइयों के लिए नागरिकता के रास्ते आसान किए। पीएम मोदी ने भावुक होते हुए कहा कि सिख समुदाय की आस्था का सम्मान करना और उनकी तरक्की के लिए काम करना सरकार के लिए केवल जिम्मेदारी नहीं, बल्कि सेवा का एक विशेषाधिकार है।

अपने संबोधन के आखिर में प्रधानमंत्री ने कहा कि साहस और सत्य के साथ खड़े रहने की भावना आज भी उतनी ही प्रासंगिक है जितनी अतीत में थी। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “जब नई पीढ़ी इन मूल्यों से जुड़ती है, तो परंपरा केवल एक स्मृति बनकर न रहकर भविष्य का मार्ग बन जाती है।”









