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भारत हमेशा से शांति-स्थिरता का पक्षधर, सभी विवादों का समाधान डायलॉग और डिप्लोमेसी से हो- पीएम मोदी

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वैश्विक उथल-पुथल और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच भारत ने एक बार फिर दुनिया को शांति का रास्ता दिखाया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ हुई साझा प्रेस वक्तव्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ किया कि भारत हमेशा से ही शांति और स्थिरता का पक्षधर रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी विवादों का समाधान डायलॉग और डिप्लोमेसी (संवाद और कूटनीति) के माध्यम से होना चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा कि जब भारत और कनाडा जैसे दो बड़े लोकतंत्र एक साथ खड़े होते हैं, तो शांति की आवाज और भी सशक्त हो जाती है।

प्रधानमंत्री मोदी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध और तनाव की स्थिति बनी हुई है। पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि भारत सभी पक्षों से अपील करता है कि विवादों को सुलझाने के लिए कूटनीतिक रास्तों का इस्तेमाल किया जाए। प्रधानमंत्री ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों की सलामती सुनिश्चित करने के लिए हम सभी संबंधित देशों के साथ निरंतर संपर्क में हैं और मिलकर काम करते रहेंगे।

कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी का भारत में स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इस यात्रा को एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन बताया। उन्होंने कार्नी की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके पास दो देशों की सेंट्रल बैंकिंग लीडरशिप का अनूठा अनुभव है। दोनों नेताओं ने अपने संबंधों को अब नेक्स्ट लेवल पार्टनरशिप में बदलने का संकल्प लिया। पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री कार्नी के नेतृत्व में दोनों देशों के बीच आपसी विश्वास और सकारात्मकता की एक नई ऊर्जा आई है।

दोनों नेताओं के बीच हुई चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र ‘इकनॉमी’ रहा। भारत और कनाडा ने तय किया है कि साल 2030 तक आपसी व्यापार को 50 बिलियन डॉलर तक पहुंचाया जाएगा। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ‘कंप्रिहेंसिव इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट’ (CEPA) को जल्द से जल्द अंतिम रूप देने पर सहमति बनी है। प्रधानमंत्री मोदी ने कनाडा के पेंशन फंड्स द्वारा भारत में किए गए 100 बिलियन डॉलर के निवेश की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह निवेश इस बात का सबूत है कि दुनिया को भारत की ग्रोथ स्टोरी पर पूरा भरोसा है। जल्द ही दोनों देशों के बिजनेस लीडर्स के साथ मिलकर आर्थिक साझेदारी का भविष्य का रोडमैप तैयार किया जाएगा।

सुरक्षा के मोर्चे पर एक बड़ा फैसला लेते हुए दोनों देशों ने ‘India-Canada Defence Dialogue’ की स्थापना करने का निर्णय लिया है। यह कदम दोनों देशों के बीच बढ़ते गहरे विश्वास और परिपक्वता का प्रतीक माना जा रहा है। अब दोनों देश मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस और मिलिट्री एक्सचेंज को लेकर और अधिक सक्रियता से काम करेंगे। आतंकवाद और कट्टरपंथ के मुद्दे पर भी भारत और कनाडा के सुर एक जैसे रहे। प्रधानमंत्री मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि आतंकवाद और उग्रवाद न केवल दोनों देशों के लिए, बल्कि पूरी मानवता के लिए खतरा हैं। इसके खिलाफ साझा सहयोग वैश्विक शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

पर्यावरण और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर दोनों देशों ने ‘नेक्स्ट जनरेशन पार्टनरशिप’ का एलान किया है। सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में यूरेनियम सप्लाई की एक लैंडमार्क डील हुई है, जो भारत की ऊर्जा जरूरतों के लिए गेम-चेंजर साबित होगी। इसके अलावा, स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स पर भी मिलकर काम करने की योजना है। कनाडा ने भारत की पहल ‘इंटरनेशनल सोलर अलायंस’ और ‘ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस’ से जुड़ने का फैसला किया है। रिन्यूएबल एनर्जी और एनर्जी स्टोरेज की दिशा में ठोस कदम उठाने के लिए इसी साल ‘India-Canada Renewable Energy and Storage Summit’ का आयोजन किया जाएगा।

टेक्नोलॉजी के मामले में दोनों देश अब नेचुरल पार्टनर्स बन चुके हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत और कनाडा की इनोवेशन पार्टनरशिप के जरिए स्थानीय आइडियाज को ग्लोबल सॉल्यूशंस में बदला जाएगा। पिछले महीने हुई ‘AI इंपैक्ट समिट’ में कनाडा के सहयोग को याद करते हुए उन्होंने एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर्स में निवेश बढ़ाने की बात कही।

क्रिटिकल मिनरल्स को लेकर हुआ नया समझौता दोनों देशों की सप्लाई चेन को मजबूती देगा। साथ ही, स्पेस सेक्टर में दोनों देशों के स्टार्टअप्स और इंडस्ट्रीज को जोड़ने पर भी सहमति बनी है, जिससे अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नए द्वार खुलेंगे। भारत और कनाडा के बीच ‘People-to-People’ रिश्ते हमेशा से मजबूत रहे हैं। अब शिक्षा के क्षेत्र में इसे और विस्तार दिया जा रहा है। कनाडा की यूनिवर्सिटीज अब भारत में अपने कैंपस खोल सकेंगी। साथ ही, हेल्थकेयर, एग्रीकल्चर और इनोवेशन के क्षेत्र में कई यूनिवर्सिटीज के बीच नए समझौतों की घोषणा की गई है।

सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए भी एक विशेष पहल की गई है। दोनों देशों की स्वदेशी और जनजातीय समुदायों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने के लिए एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके अलावा, भारत में ‘India-Canada Pulse Protein Centre of Excellence’ की स्थापना की जाएगी।

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