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पिछले 11 साल में देश की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह, भारत ने पहचाना अपना सामर्थ्य: प्रधानमंत्री मोदी

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 फरवरी को राइजिंग भारत शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले 11 वर्षों में भारत की चेतना में नई ऊर्जा का प्रवाह हुआ है। उन्होंने कहा कि देश अब अपने खोए हुए सामर्थ्य को पहचान चुका है और उसी आत्मविश्वास के साथ विकसित भारत 2047 की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत भारतीय दर्शन के उल्लेख से की। उन्होंने कहा कि तत् त्वम असि का अर्थ है—जिस शक्ति की तलाश हम बाहर करते हैं, वह हमारे भीतर ही मौजूद है। उनके मुताबिक, भारत ने अब हीन भावना को पीछे छोड़कर आत्मविश्वास को अपनाया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि लंबे समय तक देश मानसिक गुलामी से जूझता रहा। विदेशी सोच और नीतियों ने हमें यह मानने पर मजबूर किया कि हम सिर्फ फॉलोअर हैं। लेकिन 2014 के बाद तस्वीर बदली और भारत ने खुद को वैश्विक मंच पर नए आत्मविश्वास के साथ पेश किया। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के विकसित देश भारत से ट्रेड डील करने के लिए उत्सुक हैं। यह नए भारत की आर्थिक ताकत और भरोसे का संकेत है। अगर देश पहले जैसी नीतिगत पंगुता में फंसा रहता, तो यह संभव नहीं था।

डिजिटल क्रांति का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने जनधन, आधार और मोबाइल की त्रिशक्ति को परिवर्तन का आधार बताया। उन्होंने कहा कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए 24 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों के खातों में पहुंचाई गई है। डिजिटल पेमेंट में भारत आज दुनिया में अग्रणी है।

ऊर्जा और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि करोड़ों परिवारों तक बिजली पहुंची है और भारत सोलर पावर क्षमता में तेजी से आगे बढ़ा है। मेट्रो नेटवर्क के विस्तार और वंदे भारत जैसी ट्रेनों को उन्होंने नए भारत की रफ्तार बताया। नई तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में भी उन्होंने देश की प्रगति का जिक्र किया। हाल ही में आयोजित एआई समिट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 100 से अधिक देशों ने इसमें भाग लिया और भारत अब वैश्विक टेक्नोलॉजी विमर्श का हिस्सा ही नहीं, बल्कि दिशा देने वाला देश बन रहा है।

भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर तीखा हमला भी बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की हर उपलब्धि पर कांग्रेस ने विरोध की राजनीति की। संसद भवन, सर्जिकल स्ट्राइक, आर्टिकल 370, सीएए, महिला आरक्षण, यूपीआई और कोविड वैक्सीन- हर मुद्दे पर विरोध को उन्होंने अंध-विरोध बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष का काम सिर्फ विरोध करना नहीं, बल्कि वैकल्पिक विजन देना होता है। उन्होंने दावा किया कि पिछले चार दशकों में कांग्रेस का जनाधार लगातार घटा है और युवा मतदाता अब नई सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं।

विकसित भारत 2047 के लक्ष्य पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण तात्कालिक सोच से नहीं होता। उन्होंने बताया कि हर साल पेट्रोलियम, उर्वरक और समुद्री माल ढुलाई पर लाखों करोड़ रुपये विदेशों में खर्च होते हैं। अगर पहले आत्मनिर्भरता पर ध्यान दिया गया होता, तो यह धन देश के विकास में लगता। उन्होंने कहा कि अब सरकार शिपिंग, पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, घरेलू उर्वरक उत्पादन, एथेनॉल ब्लेंडिंग, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर तेजी से काम कर रही है। सेमीकंडक्टर, रक्षा उत्पादन, ड्रोन टेक्नोलॉजी और क्रिटिकल मिनरल्स में निवेश को उन्होंने भविष्य की आर्थिक सुरक्षा की नींव बताया।

कृषि क्षेत्र में उपलब्धियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पीएम किसान सम्मान निधि के तहत 4 लाख करोड़ रुपये किसानों के खातों में भेजे गए हैं। एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद और फसल बीमा योजना के जरिए किसानों को सुरक्षा कवच दिया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ राज्य सरकारें राजनीतिक कारणों से केंद्र की योजनाओं को लागू नहीं कर रहीं। आयुष्मान भारत और पीएम आवास योजना का उदाहरण देते हुए उन्होंने इसे नीयत की कमी करार दिया।

अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री मोदी ने ‘यही समय है, सही समय है’ का मंत्र दोहराया। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी का यह दौर भारत के लिए निर्णायक है। हर व्यक्ति, हर संस्था को उत्कृष्टता को लक्ष्य बनाना होगा। उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि वे अपने सामर्थ्य को पहचानें और उसे प्रदर्शन में बदलें।

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